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Green recovery

जहां एक ओर इस बात की उम्मीद थी कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में ग्रीन रिकवरी होगी, वहीं REN21 की रिन्यूएबल्स 2022 ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट (जीएसआर 2022) की मानें तो पता चलता है कि पृथ्वी ने यह मौका खो दिया है। यह रिपोर्ट एक स्पष्ट चेतावनी देती है कि वैश्विक स्तर पर क्लीन

ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी स्तरों तक पहुँचने से बचने और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को एक अगले दस सालों में आधे से भी कम करना होगा। लेकिन मौजूदा रफ़्तार से तो हमें कार्बन मुक्त होने में 150 से अधिक साल लग जायेंगे।

एक नई रिपोर्ट बताती है कि पर्यावरण को केंद्र में रखते हुए महामारी के बाद आर्थिक रिकवरी से मिलेंगे अधिक रोज़गार, लम्बी अवधि में विकास को मिलेगा बढ़ावा, और बचाये जा सकेंगे तमाम जीवन। बच्चों के इन्वेस्टमेंट फण्ड फाउंडेशन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इकोनॉमिक रिकवरी प्रोजेक्ट, और विविड इकोनॉमिक्स की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक पर्यावरण को

कोविड महामारी की शुरुआत हुए एक वर्ष से अधिक हो चुका है और आज अगर तमाम देशों की ग्रीन रिकवरी की प्रतिबद्धताओं के सापेक्ष उनके द्वारा किये गये खर्च का आंकलन करें तो हम पाते हैं कि वो खर्च किये वादों से काफ़ी कम है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और ऑक्सफोर्ड युनिवेर्सिटी की आर्थिक

भारत अगर कोविड की आर्थिक मार से निबटने और उबरने के प्रयासों में पर्यावरण अनुकूल कदम लेगा तो उसकी जीडीपी स्थायी रूप से बढ़ सकती है।   जी हाँ, केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन संस्थानों ने साझा प्रयास से एक रिपोर्ट जारी कर न सिर्फ़ यह कहा है कि पर्यावरण अनुकूल आर्थिक सुधार कदम एक