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Green Energy

राहुल सिंह की रिपोर्ट खनन क्षेत्र के विस्थापितों व कोयला श्रमिकों के बीच सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता अरुण कुमार महतो यह स्वीकार करते हैं कि कोयला व्यापक विस्थापन और प्रदूषण का कारण है, लेकिन उनकी चिंता इससे कहीं अधिक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके अच्छे-बुरे असर को लेकर है। झारखंड के देवघर जिले के चितरा कोयला

कोयला आधारित ताप विद्युत गृहों का फ्लाई ऐश वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय चिंता की बड़ी वजह है, लेकिन भारत जैसे देश में जहां अच्छी गुणवत्ता का कोयला उपलब्ध नहीं है, वहां यह परेशानी का बड़ा सबब है। झारखंड जैसा राज्य जहां भारत का सबसे बड़ा कोयला भंडार है और प्रमुख रूप ओपन कास्ट माइनिंग ही होती है, वहां कोयला आधारित विद्युत तैयार करने से पर्यावरणीय व स्वास्थ्यगत खतरे और बढ जाते हैं।

देश में कार्बन न्युट्रेलिटी का भविष्य कितना उज्ज्वल है इसका अंदाज़ा इसी से लग जाता है जब पता चलता है कि देश कुछ राज्यों ने इस दिशा में बेहद सकारात्मक कदम उठाये हैं।

झारखंड इलेक्ट्रिक व्हीकल के 2030 तक 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के लक्ष्य को हासिल करने से काफी पिछड़ चुका है। जब देश के कई राज्यों ने जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में 2023 व 2030 के लिए लक्ष्य निर्धारित कर उस दिशा में बढने की शुरुआत कर दी थी तो झारखंड फिलहाल इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के प्रारूप पर ही चर्चा कर रहा है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने पिछले ही महीने नई दिल्ली में आयोजित इनवेस्टर्स मीट में इलेक्ट्रिक व्हीकल की पॉलिसी की चर्चा की। हालांकि इस प्रस्ताव के प्रारूप को अबतक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

इंपैक्ट इन्वेस्टर्स काउंसिल (आईआईसी), क्लाइमेट कलेक्टिव और अरेट एडवाइजर्स के एक ताजा अध्ययन के मुताबिक भारत में पिछले 5 वर्षों के दौरान जलवायु से जुड़े 120 टेक स्टार्टअप्स ने 1.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा धनराशि एकत्र की है। भारत में जलवायु परिवर्तन संकट की गंभीरता को देखते हुए, कम कार्बन वाली टेक्नोलॉजी पर आधारित इन

एनर्जी ट्रांज़िशन या ऊर्जा रूपांतरण का अर्थ सिर्फ बिजली व्‍यवस्‍था के स्‍वरूप में आमूल-चूल बदलावों से नहीं है, बल्कि यह एक बहुत व्‍यापक संदर्भ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा रूपांतरण के लिये ऐसे बहुत से जटिल सवालों के जवाब ढूंढने होंगे, जो सीधे तौर पर हमारी सामाजिक और आर्थिक व्‍यवस्‍था से जुड़े हैं।

भारत में पहले से ही अनुमति प्राप्‍त और हाल में ही इजाजत पाये नये कोयला बिजली संयंत्र अब देश की बिजली सम्‍बन्‍धी जरूरतों के लिहाज से फालतू बन गये हैं। साथ ही, ये पॉवर प्‍लांट वर्ष 2030 तक 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्‍पादन के बहु-प्रशंसित लक्ष्‍य की प्राप्ति की सम्‍भावनाओं को खतरे में डाल सकते हैं।

भारत के लो-कार्बन ट्रांजिशन के बड़े पैमाने को अग्रिम पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी। इस तरह समर्पित फंडिंग का उपयोग नई ग्रीन ऊर्जा, उद्योग और शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण और कार्बन-गहन परियोजनाओं में लॉक-इन से बचने के लिए किया जा सकता है। इन नई फंडिंग पहलों को उत्सर्जन को कम करने और आजीविका का समर्थन करने की बड़ी क्षमता रखने वाले लेकिन वित्त तक पहुंचने की कम क्षमता रखने वाले विकेन्द्रीकृत ग्रामीण ऊर्जा और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) में निवेश को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।

वित्त मंत्री ने 11वीं यूके.भारत आर्थिक और वित्तीय वार्ता का किया नेतृत्व नयी दिल्ली : ब्रिटेन ने भारत की हरित और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में 1.2 अरब डॉलर निवेश करने का ऐलान किया है। 11वीं भारत-यूनाइटेड किंगडम आर्थिक और वित्तीय (ईएफडी) वार्ता के दौरान यूके के चांसलर ऋषि सनक ने गुरुवार को अपने समकक्ष वित्त

साल 2021 की पहली छमाही में बढ़ती वैश्विक बिजली की मांग ने स्वच्छ बिजली में वृद्धि को पीछे छोड़ दिया, जिसकी वजह से उत्सर्जन-गहन कोयला शक्ति में वृद्धि हुई है और नतीजतन, वैश्विक बिजली क्षेत्र का कार्बन उत्सर्जन, महामारी से पहले के स्तर से बढ़ गया, यह कहना है एनर्जी थिंक टैंक एम्बर द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट का।