Breaking News

Green Energy

आईईए के वर्ल्‍ड एनर्जी आउटलुक (World Energy Outlook) के ताजा संस्‍करण के मुताबिक युक्रेन पर रूस की सैन्‍य कार्रवाई के कारण उत्‍पन्‍न हुआ वैश्विक ऊर्जा संकट गहरे और लम्‍बे वक्‍त तक बरकरार रहने वाले बदलावों की वजह बन रहा है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा प्रणाली में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित रूपांतरण को तेज करने की

जहां एक ओर इस बात की उम्मीद थी कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में ग्रीन रिकवरी होगी, वहीं REN21 की रिन्यूएबल्स 2022 ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट (जीएसआर 2022) की मानें तो पता चलता है कि पृथ्वी ने यह मौका खो दिया है। यह रिपोर्ट एक स्पष्ट चेतावनी देती है कि वैश्विक स्तर पर क्लीन

इस साल के अंत तक भारत ने अपने लिए 100 गीगावाट की सौर क्षमता एसटीहपीत करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन जेएमके रिसर्च और इंस्टीट्यूट फॉर एनेर्जी इक्नोमिक्स एंड फ़ाइनेंष्यल एनालिसिस (IEEFA) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने इस लक्ष्य से काफ़ी पीछे रह जाएगा। दरअसल, लक्ष्य हासिल न कर पाने की मुख्य

आज जारी हुई एक रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया के कुल बिजली उत्पादन में विंड और सोलर एनेर्जी अब कम से कम 10 फीसद की हिस्सेदार है। दरअसल यह दोनों ऊर्जा स्त्रोत पिछले कुछ समय से तेज़ी से विकसित हो रहे हैं और 10 फीसद की हिस्सेदारी का यह आंकड़ा पिछले साल हासिल

अब ज़ीरो एमिशन जहाज़ों से आपके ऑर्डर का आना तय   अगले बीस सालों में अब ऐसा होने की पूरी सम्भावना है कि आप द्वारा अमेज़न से मंगाया गया कोई ऐसा सामान जिसे समुद्र मार्ग से आना हो, वो एक ज़ीरो एमिशन जहाज़ से आये। दरअसल अमेज़न और IKEA जैसी तमाम वैश्विक रिटेल और ईकॉमर्स

बात अगर पेरिस समझौते के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस या 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे सीमित करने की हो, तब कायदे से तो दुनिया को अपना जीवाश्म ईंधन उत्पादन को बंद करना पड़ेगा। लेकिन हो ये रहा है कि सरकारें पेरिस समझौते की तापमान सीमा से तालमेल बैठाने की जगह स्वीकार्य स्तरों

राहुल सिंह की रिपोर्ट खनन क्षेत्र के विस्थापितों व कोयला श्रमिकों के बीच सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता अरुण कुमार महतो यह स्वीकार करते हैं कि कोयला व्यापक विस्थापन और प्रदूषण का कारण है, लेकिन उनकी चिंता इससे कहीं अधिक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके अच्छे-बुरे असर को लेकर है। झारखंड के देवघर जिले के चितरा कोयला

कोयला आधारित ताप विद्युत गृहों का फ्लाई ऐश वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय चिंता की बड़ी वजह है, लेकिन भारत जैसे देश में जहां अच्छी गुणवत्ता का कोयला उपलब्ध नहीं है, वहां यह परेशानी का बड़ा सबब है। झारखंड जैसा राज्य जहां भारत का सबसे बड़ा कोयला भंडार है और प्रमुख रूप ओपन कास्ट माइनिंग ही होती है, वहां कोयला आधारित विद्युत तैयार करने से पर्यावरणीय व स्वास्थ्यगत खतरे और बढ जाते हैं।

देश में कार्बन न्युट्रेलिटी का भविष्य कितना उज्ज्वल है इसका अंदाज़ा इसी से लग जाता है जब पता चलता है कि देश कुछ राज्यों ने इस दिशा में बेहद सकारात्मक कदम उठाये हैं।

झारखंड इलेक्ट्रिक व्हीकल के 2030 तक 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के लक्ष्य को हासिल करने से काफी पिछड़ चुका है। जब देश के कई राज्यों ने जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में 2023 व 2030 के लिए लक्ष्य निर्धारित कर उस दिशा में बढने की शुरुआत कर दी थी तो झारखंड फिलहाल इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के प्रारूप पर ही चर्चा कर रहा है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने पिछले ही महीने नई दिल्ली में आयोजित इनवेस्टर्स मीट में इलेक्ट्रिक व्हीकल की पॉलिसी की चर्चा की। हालांकि इस प्रस्ताव के प्रारूप को अबतक सार्वजनिक नहीं किया गया है।