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Global Warming

रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक विकासों को भी नोट किया गया है, जैसे कि 2020 में स्थापित क्षमताओं के नए रिकॉर्ड के साथ G20 सदस्यों के बीच सौर और पवन ऊर्जा की वृद्धि। ऊर्जा आपूर्ति में रिन्यूएबल ऊर्जा की हिस्सेदारी 2020 में 10% से बढ़कर 2021 में 12% होने का अनुमान है।

क्लाइमेट सेंट्रल नाम के एक गैर-लाभकारी समाचार संगठन ने कुछ हैरान करने वाली फ़ोटोज़ का एक सेट जारी किया है जो दिखाता है कि अगर जलवायु परिवर्तन संकट से निपटा नहीं गया तो दुनिया भर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित स्थलों का क्या होगा।

संयुक्त राष्ट्र की जलवायु मामलों की संस्था UNFCCC की ताज़ा रिपोर्ट निराश करने वाली है। इस रिपोर्ट की मानें तो जहाँ जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने में प्रभावी होने के लिए NDCs या देशों के जलवायु लक्ष्यों को वैश्विक उत्सर्जन में पर्याप्त कटौती करनी चाहिए, वहीँ नवीनतम उपलब्ध NDCs के साथ बढ़ने में तो वैश्विक

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में किगाली संशोधन हाइड्रोफ्लोरोकार्बन एचएफसी की खपत और उत्पादन को धीरे-धीरे कम करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इस प्रोटोकॉल में अकेले सदी के अंत तक वातावरण के 0.5 डिग्री गर्म होने से बचने की क्षमता है।

वैश्विक साझा हितों की मौजूदा स्थिति को लेकर व्यापक स्तर पर चिंता जताए जाने के बावजूद सिर्फ एक तिहाई यानी कि 34% लोग ही यह मानते हैं कि बच्चों को स्कूल में पर्यावरण सहित ग्लोबल कॉमंस के संरक्षण के बारे में शिक्षा दिया जाना महत्वपूर्ण है।

दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के अवसरों पर बातचीत के लिए इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) और क्लाइमेट ट्रेंड्स ने एक वेबिनार का आयोजन किया। इसमें विशेषज्ञों ने दक्षिण एशिया में विकराल रूप लेती वायु प्रदूषण की समस्‍या और उसके स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी पहलू की भयावहता को सामने रखा बल्कि उन कारणों को भी जाहिर किया जिनके चलते ये हालात पैदा हुए।

अब समय है स्वीकारने का कि जलवायु परिवर्तन हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी पर दिखा रहा है असर, ग्लोबल वार्मिंग भारत में मानसून की बारिश को उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ा रहा है भारत के पश्चिमी तटीय राज्यों महाराष्ट्र और गोवा के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में चरम मौसम की घटनाओं का

Lहाल ही में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) से कम से कम 74 लोगों की मौत हो गई। इनमें से 42 मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं, जिसमें प्रयागराज 16 मौतों के साथ चार्ट में सबसे ऊपर था। जयपुर के पास आमेर किले में बिजली गिरने से 11 पर्यटकों की जान चली गई। वहीँ मध्य प्रदेश ने कम से

विशेषज्ञों ने चेताया, आर्कटिक को खोना हमें बड़ा महंगा पड़ेगा आज यानी 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय जलवायु शिखर सम्मेलन के 75.वें समिट से पहले यूके क्लाइमेट चैंपियन नाइजिल टॉपिंग के साथ आर्कटिक वैज्ञानिकों के एक समूह ने आर्कटिक बर्फ के पिघलने से होने वाले नुकसान का मतलब समझाया। कैसे यह

पानी के चश्मे हिमालय क्षेत्र के ऊपरी तथा बीच के इलाकों में रहने वाले लोगों की जीवन रेखा हैं। लेकिन पर्यावरणीय स्थितियों और एक दूसरे से जुड़ी प्रणालियों की समझ और प्रबंधन में कमी के कारण यह जल स्रोत अपनी गिरावट की ओर बढ़ रहे हैं। यह कहना है इंडियन स्‍कूल ऑफ बिजनेस के भारती