Breaking News

Environment

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के ज्‍यादातर देश वायु गुणवत्‍ता सम्‍बन्‍धी पुराने मानकों का ही पालन करने में नाकाम रहे हैं। ऐसे में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा वायु गुणवत्‍ता के सम्‍बन्‍ध में जारी नये मानकों का पालन बहुत कड़ी चुनौती है। भारत जैसे देश को अगर इन मानकों पर खरा उतरना है तो उसे बहुक्षेत्रीय रवैया अपनाते हुए अधिक सुगठित, सुव्‍यवस्थित और समयबद्ध कदम उठाने होंगे। साथ ही मौजूदा नीतियों में जरूरी बदलाव करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्‍वयन पर भी ध्‍यान देना होगा।

लिविंग इन हार्मनी विद नेचर के 2050 के लक्ष्य लेकर बढ़ेगा कल से चीन में वर्चुअल रूप से शुरू होने वाला यह जैव विविधता महा सम्मलेन मानव इतिहास में किसी भी वक़्त की तुलना में हम आज सबसे तेज़ी से जैव विविधता खो रहे हैं। इस घटनाक्रम पर लगाम कसने के लिए वैश्विक स्तर पर

इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) द्वारा जारी शोध-आधारित साक्ष्य में हालिया उछाल और डब्ल्यूएचओ द्वारा वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों के नवीनतम संशोधन ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ हवा की आवश्यकता पर पुन: जोर दिया है। भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों की सूची में शीर्ष स्‍थान पर है, और (वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक –

कोयला आधारित ताप विद्युत गृहों का फ्लाई ऐश वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय चिंता की बड़ी वजह है, लेकिन भारत जैसे देश में जहां अच्छी गुणवत्ता का कोयला उपलब्ध नहीं है, वहां यह परेशानी का बड़ा सबब है। झारखंड जैसा राज्य जहां भारत का सबसे बड़ा कोयला भंडार है और प्रमुख रूप ओपन कास्ट माइनिंग ही होती है, वहां कोयला आधारित विद्युत तैयार करने से पर्यावरणीय व स्वास्थ्यगत खतरे और बढ जाते हैं।

इस साल की शुरुआत में, अपनी जलवायु कार्य योजना को मज़बूत करने के लिए जलवायु समूह के अंडर2 गठबंधन में शामिल होने के बाद अब महाराष्ट्र के पर्यावरण और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे ने एक कार्यक्रम में घोषणा की है कि महाराष्ट्र के 43 शहर और शहरी समूह अपने कार्बन पदचिह्न को कम करने के

दामोदर नदी हाल ही में दो कारणों से चर्चा में थी- प्रदूषण और पश्चिम बंगाल में बाढ़। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में आई बाढ़ के लिए बिजली कंपनी दामोदर वैली कॉरपोरेशन को जिम्मेदार ठहराया।

वर्तमान वायु प्रदूषण के स्वीकार्य स्तरों को नये दिशा-निर्देशों में प्रस्तावित स्तरों तक कम किया जाए तो दुनिया में PM₂.₅ से संबंधित लगभग 80% मौतों को टाला जा सकता है। साल 2005 के बाद पहली बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपने वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों में संशोधन कर नये दिशानिर्देश जारी किये हैं। यह वायु

झारखंड इलेक्ट्रिक व्हीकल के 2030 तक 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के लक्ष्य को हासिल करने से काफी पिछड़ चुका है। जब देश के कई राज्यों ने जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में 2023 व 2030 के लिए लक्ष्य निर्धारित कर उस दिशा में बढने की शुरुआत कर दी थी तो झारखंड फिलहाल इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के प्रारूप पर ही चर्चा कर रहा है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने पिछले ही महीने नई दिल्ली में आयोजित इनवेस्टर्स मीट में इलेक्ट्रिक व्हीकल की पॉलिसी की चर्चा की। हालांकि इस प्रस्ताव के प्रारूप को अबतक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र की जलवायु मामलों की संस्था UNFCCC की ताज़ा रिपोर्ट निराश करने वाली है। इस रिपोर्ट की मानें तो जहाँ जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने में प्रभावी होने के लिए NDCs या देशों के जलवायु लक्ष्यों को वैश्विक उत्सर्जन में पर्याप्त कटौती करनी चाहिए, वहीँ नवीनतम उपलब्ध NDCs के साथ बढ़ने में तो वैश्विक

आज, ग्लासगो क्लाइमेट समिट से बमुश्किल 50 दिन पहले संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली (यूएनजीए) का 76वां सत्र शुरू हुआ है। इस बैठक से तमाम उम्मीदें हैं खास तौर से इसलिए क्योंकि इसमें होने वाली चर्चाएँ और निर्णय वैश्विक जलवायु नीतियों की दशा और दिशा बदल सकते हैं। ग्लासगो क्लाइमेट समिट एक बहुपक्षीय बैठक है जो