Breaking News

Environement

रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक विकासों को भी नोट किया गया है, जैसे कि 2020 में स्थापित क्षमताओं के नए रिकॉर्ड के साथ G20 सदस्यों के बीच सौर और पवन ऊर्जा की वृद्धि। ऊर्जा आपूर्ति में रिन्यूएबल ऊर्जा की हिस्सेदारी 2020 में 10% से बढ़कर 2021 में 12% होने का अनुमान है।

क्लाइमेट सेंट्रल नाम के एक गैर-लाभकारी समाचार संगठन ने कुछ हैरान करने वाली फ़ोटोज़ का एक सेट जारी किया है जो दिखाता है कि अगर जलवायु परिवर्तन संकट से निपटा नहीं गया तो दुनिया भर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित स्थलों का क्या होगा।

कोविड से उबरने के लिए WHO ने किये जलवायु कार्रवाई के दस आह्वान, बड़ी स्वास्थ्य आपदा को टालने के लिए वैश्विक स्वास्थ्य कार्यबल ने किया वैश्विक कार्रवाई का आग्रह

एक नई रिपोर्ट बताती है कि पर्यावरण को केंद्र में रखते हुए महामारी के बाद आर्थिक रिकवरी से मिलेंगे अधिक रोज़गार, लम्बी अवधि में विकास को मिलेगा बढ़ावा, और बचाये जा सकेंगे तमाम जीवन। बच्चों के इन्वेस्टमेंट फण्ड फाउंडेशन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इकोनॉमिक रिकवरी प्रोजेक्ट, और विविड इकोनॉमिक्स की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक पर्यावरण को

झारखंड के देवघर जिला में स्थित चितरा कोयला खदान एक बहुत ही पुरानी कोयला खदान है। 1974 में इसका अधिग्रहण सरकार ने कर लिया था। यहां पर होने वाले कोयला खनन से यूं तो कई गांव प्रभावित हुए हैं, लेकिन सबसे अधिक प्रभाव खून गांव पर पड़ा है। पढिए यह ग्राउंड रिपोर्ट कि खून गांव की क्या स्थिति है, वहां के लोग क्या चाहते हैं और उनके मुद्दे क्या हैं...

देश में कार्बन न्युट्रेलिटी का भविष्य कितना उज्ज्वल है इसका अंदाज़ा इसी से लग जाता है जब पता चलता है कि देश कुछ राज्यों ने इस दिशा में बेहद सकारात्मक कदम उठाये हैं।

तेल और गैस कंपनियां अगले पांच वर्षों में, आर्कटिक क्षेत्र में अपने उत्पादन में 20 प्रतिशत की वृद्धि करने की तैयारी में हैं। और यह तब है जब इन कम्पनियों में से अधिकांश उस प्रान्त में फॉसिल फाइनेंसिंग को सीमित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी भी दी है कि आर्कटिक में तापमान वृद्धि और क्षेत्रों की तुलना में दोगुनी रफ़्तार से हो रही है और वहां की जलवायु ब्रेकडाउन की स्थिति पर पहुँच रही है।

एक नए अध्ययन, जिसमें जलवायु, हवा की गुणवत्ता और कृषि के बीच अंतर संबंधों तथा जन स्वास्थ्य पर उन सभी के संयुक्त प्रभाव को खंगालने के लिए शोध किया गया है, से पता चलता है कि वायु गुणवत्ता का प्रभाव हमारी कृषि पर भी पड़ता है और इसी क्रम में हमारे स्वास्थ्य पर भी इसका

विश्व बैंक की जारी हुई ग्राउंड्स वेल रिपोर्ट में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन दुनिया भर में लोगों के विस्थापन का एक बड़ा कारण बनता जा रहा। इस बात की गम्भीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2050 तक दुनिया के छह विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले 21 करोड़ 60 लाख लोगों को अपने-अपने देश छोड़ने को मजबूर कर सकता है जलवायु परिवर्तन।

देश की राजधानी दिल्ली में दो दिन लगातार बारिश से सारी व्यवस्था चरमरा गई। पूर्व वन अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ और नदियों पर काम कर रहे मनोज मिश्रा जो यमुना जिये अभियान के संस्थापक भी हैं – कहते हैं कि इस हाल के लिए खराब नगर निर्माण और अवैज्ञानिक तरीके से बिछाया गया सड़कों का जाल