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इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की हाल में आयी रिपोर्ट में भारत में तेज आर्थिक विकास के मद्देनजर आवश्यक ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले की मांग बढने का आकलन पेश किया गया है। नीति आयोग के एनर्जी ड्राफ्ट में भी कोयले की जरूरत का उल्लेख किया गया है। वहीं, चौथे चरण की नीलामी के ऐलान के दौरान कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि अगले 30 से 40 साल तक भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए कोयला बहुत महत्वपूर्ण बना रहेगा...

गिरिडीह का एक बड़ा तबका पिछले दो महीने से इस बात को लेकर आशंकित है कि कहीं उनके यहां संचालित एक मात्र कोयला खदान इस साल के अंत में बंद न हो जाए। इसको लेकर अखबारों में लगातार खबरें छपती रही हैं। लोगों की भावनाओं के मद्देनजर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उसका संचालन जारी रखने को लेकर केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक प्रयासरत हैं। पढिए जमीनी हालात का जायजा लेती गिरिडीह से यह ग्राउंड रिपोर्ट...

पीएम कुसुम योजना किसानों को सोलर पंपसेट से सिंचाई सुविधा प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके माध्यम से किसानों की आय तो बढानी ही है, साथ ही उन्हें बिजली उत्पादक भी बनाने का लक्ष्य है। इस योजना की झारखंड में जमीनी स्थिति क्या है और किसान क्या कहते हैं, पढें इस पर केंद्रित यह विशेष रिपोर्ट...

इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (आईईईएफए) और एनर्जी थिंक टैंक एम्बर की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश को पटरी पर लाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। ऐसा करना ना सिर्फ उसके अपने लक्ष्यों को हासिल करने बल्कि वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट तथा 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन के भारत के लक्ष्य की रफ्तार में कमी नहीं आने देने के लिए भी जरूरी है।

झारखंड में विभिन्न कारणों से बंद होती कोयला खदानों के कारण उस पर निर्भर वैसे समुदायों - जो असंगठित क्षेत्र से आते हैं - के सामने नयी आर्थिक चुनौतियां आनी शुरू हो चुकी हैं। वे पहले से विस्थापन व प्रदूषण की समस्याओं से ग्रस्त हैं। रामगढ़ जिले के कुजू क्षेत्र की जमीनी हालात का जायजा लेती यह रिपोर्ट पढें...

भूरबन्धा, असम राज्य के मोरीगांव ज़िले का एक ऐसा गांव है जहां वर्ष 2017 तक बिजली नहीं पहुच पाई थी। गाँव में पढ़ाई करने वाले छात्र अक्सर किरोसिन तेल से जलने वाले लालटेन या लैंप की मदद से पढ़ाई करते थे। ब्रह्मपुत्र नदी से 20 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में बाढ़ के दिनों में तो ग्रामीणों की तकलीफ कई गुना बढ़ जाती थी। दूर-दराज़ का इलाका होने के कारण यहां बिजली के तार के आने की संभावना भी नहीं के बराबर थी। 

एनर्जी ट्रांजिशन पर नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया की आयी नयी रिपोर्ट में इसे सामाजिक-आर्थिक परिप्रेक्ष्य में देखने-समझने की कोशिश की गयी है। यह कोयला उत्पादक जिलों के अलावा गैर कोयला उत्पादक जिलों के लिए भी उतना ही अहम है जो रोजगार व राजस्व के लिए कोयला पर आश्रित हैं। इस रिपोर्ट में झारखंड में तीन जिलों को 'ट्रांजिशन के दौर' में अति संवेदनशील जिले में शामिल किया गया है, जिसमें रांची भी शामिल है। पढें...

कोयला खनन कई तरह से लोगों की जिंदगी प्रभावित करता है। प्रदूषण, विस्थापन के अलावा इसका एक स्याह पक्ष पहचान का संकट भी है, जिससे मूल निवासी जो सदियों से उस इलाके में रह रहे होते हैं वे जूझते हैं। झारखंड के सबसे बड़े कोयला भंडार क्षेत्र उत्तरी कर्णपुरा कोलफील्ड्स के गांवों की पढिए यह ग्राउंड रिपोर्ट :

यूनाइटेड किंगडम के नेतृत्व में दुनिया के कुछ दो दर्जन देशों और अन्य संस्थानों ने ग्लोबल कोल टू क्लीन पावर ट्रांजिशन स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर कर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई कोयला बिजली उत्पादन में सभी निवेशों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है।

ब्रिटेन के ग्लासगो में सीओपी26 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के नेट जीरो लक्ष्य की चरणबद्ध योजना प्रस्तुत की। इसके साथ कोयला खदानों को बंद करने के लिए भारत विश्व बैंक से जस्ट ट्रांजिशन प्लान के लिए 7500 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता चाहता है। विश्व बैंक संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रमों के तहत ऐसी योजनाओं का वित्त पोषण करता है और इसको लेकर आशान्वित होना चाहिए कि विश्व बैंक भारत के जस्ट ट्रांजिशन प्लान के लिए निकट भविष्य में वित्त पोषण करेगा।