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कोयला खनन आदिवासियों और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े तबके के लोगों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। झारखंड के हजारीबाग जिले में कोयला खनन के आदिवासियों के जीवन पर पड़ने वाले असर पर केंद्रित यह रिपोर्ट पढें...

एक ओर जहां खनन के कारण जलस्तर नीचे जाने से शुरुआती गर्मी में ही जलस्रोत का पानी सूखने लगता है, वहीं दूसरी ओर खदान का दूषित पानी नदी में प्रवाहित किए जाने से वह भी हानिकारक हो जाता है...

झारखंड के हजारों साइकिल कोयला मजदूरों की कहानी दशकों से पीड़ादायक है। अब जब जस्ट ट्रांजिशन पर तेज चर्चा हो रही है तो इन कोयला श्रमिकों के भविष्य को लेकर भी सवाल है और उस पर सोचना जरूरी है। ये कोयला श्रमिक दूसरे रोजगार विकल्पों के अभाव में इस ओर रुख करते हैं...

आइफॉरेस्ट की हाल में कोरबा जिले के संदर्भ में जस्ट ट्रांजिशन अध्ययन रिपोर्ट आयी है। आइफॉरेस्ट ने इससे पहले रामगढ जिले को लेकर ऐसा अध्ययन रिपोर्ट पेश किया था। इन अध्ययन रिपोर्ट को कोयला अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक रूप से निर्भर धनबाद जिले के संदर्भ में देखना-समझना जरूरी है...

प्लानिंग ए जस्ट ट्रांजिशन फॉर इंडियाज बिगेस्ट कोल एंड पावर डिस्ट्रिक्ट रिपोर्ट से यह पता चलता है कि तेजी से बढ़ रहे लागत प्रतिस्पर्धी अक्षय ऊर्जा एवं घटते कोयला भंडार और लाभहीन कोयला खदानों को देखते हुए जस्ट ट्रांजिशन प्लानिंग की शुरुआत अविलंब शुरू करनी चाहिए।

झारखंड में कोल इंडिया की सहायक कंपनियों द्वारा अधिग्रहित बड़ी जमीन है। इनमें ऐसी भी जमीन है जिसे दशकों से खनन के लिए अधिग्रहित कर रखा गया है लेकिन वहां माइनिंग आरंभ नहीं हो सका है। वहीं, राज्य में दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां नौकरी एवं बेहतर पुनर्वास के लिए रैयत संघर्षरत हैं।

72 साल के सेवानिवृत्त शिक्षक चिंतामणि साह जैविक खेती करते हैं, आश्रम चलाते हैं और गांधीवादी तरीके से जीवन यापन करने पर यकीन करते हैं। उनकी आवश्यकताएं न्यूनतम हैं और प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण पर उनका जोर अधिक। चिंतामणि झारखंड के गोड्डा शहर से करीब आठ-दस किमी की दूरी पर स्थित मोतिया गांव में अपनी उस पुस्तैनी जमीन पर कृषि, सोलर इनर्जी एवं सतत विकास को लेकर इस उम्र में भी अनूठे प्रयोग कर रहे है, जिसके ठीक सामने अदानी पॉवर का 1600 मेगावाटर का विशाल अल्ट्रा थर्मल पॉवर प्लांट बन रहा है। यह थर्मल पॉवर प्लांट उर्जा क्षेत्र के अध्याताओं के लिए वर्तमान में प्रमुख विषयों में एक है।

इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी द्वारा दो चरणों मे किए गए अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट में सामने आए कई अहम तथ्य बिजली की बिलिंग उपभोग को प्रभावित करने वाला अहम कारक, सौभाग्य के तहत कनेक्शन में भी गिरावट रांची : इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी – आइएसइपी की ग्रामीण झारखंड के बिजली उपभोग रिपोर्ट में

राहुल सिंह की रिपोर्ट 18 साल की सिलवंती हेंब्रम ने अपने बचपन में तब विस्थापन देखा, जब उसका गांव कठालडील उजड़ गया और करीब छह-सात की उम्र में न्यू कठालडीह के नाम से बसे एक गांव में वह अपने माता-पिता व दो भाइयों के साथ रहने आ गयी। उसके नए गांव को बस न्यू शब्द

कोल इंडिया के क्लीन एनर्जी प्रोग्राम के तहत सीएमपीडीआइ कोल बेड मिथेन के उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं पर कर रहा है काम राहुल सिंह रांची : एनर्जी ट्रांजिशन की जरूरतों के मद्देनजर सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम कोल इंडिया कोल बेड मिथेन गैस के उपयोग की योजना को आगे बढाने की तैयारी में है। अगर सबकुछ