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72 साल के सेवानिवृत्त शिक्षक चिंतामणि साह जैविक खेती करते हैं, आश्रम चलाते हैं और गांधीवादी तरीके से जीवन यापन करने पर यकीन करते हैं। उनकी आवश्यकताएं न्यूनतम हैं और प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण पर उनका जोर अधिक। चिंतामणि झारखंड के गोड्डा शहर से करीब आठ-दस किमी की दूरी पर स्थित मोतिया गांव में अपनी उस पुस्तैनी जमीन पर कृषि, सोलर इनर्जी एवं सतत विकास को लेकर इस उम्र में भी अनूठे प्रयोग कर रहे है, जिसके ठीक सामने अदानी पॉवर का 1600 मेगावाटर का विशाल अल्ट्रा थर्मल पॉवर प्लांट बन रहा है। यह थर्मल पॉवर प्लांट उर्जा क्षेत्र के अध्याताओं के लिए वर्तमान में प्रमुख विषयों में एक है।

इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी द्वारा दो चरणों मे किए गए अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट में सामने आए कई अहम तथ्य बिजली की बिलिंग उपभोग को प्रभावित करने वाला अहम कारक, सौभाग्य के तहत कनेक्शन में भी गिरावट रांची : इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी – आइएसइपी की ग्रामीण झारखंड के बिजली उपभोग रिपोर्ट में

राहुल सिंह की रिपोर्ट 18 साल की सिलवंती हेंब्रम ने अपने बचपन में तब विस्थापन देखा, जब उसका गांव कठालडील उजड़ गया और करीब छह-सात की उम्र में न्यू कठालडीह के नाम से बसे एक गांव में वह अपने माता-पिता व दो भाइयों के साथ रहने आ गयी। उसके नए गांव को बस न्यू शब्द

कोल इंडिया के क्लीन एनर्जी प्रोग्राम के तहत सीएमपीडीआइ कोल बेड मिथेन के उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं पर कर रहा है काम राहुल सिंह रांची : एनर्जी ट्रांजिशन की जरूरतों के मद्देनजर सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम कोल इंडिया कोल बेड मिथेन गैस के उपयोग की योजना को आगे बढाने की तैयारी में है। अगर सबकुछ

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की हाल में आयी रिपोर्ट में भारत में तेज आर्थिक विकास के मद्देनजर आवश्यक ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले की मांग बढने का आकलन पेश किया गया है। नीति आयोग के एनर्जी ड्राफ्ट में भी कोयले की जरूरत का उल्लेख किया गया है। वहीं, चौथे चरण की नीलामी के ऐलान के दौरान कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि अगले 30 से 40 साल तक भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए कोयला बहुत महत्वपूर्ण बना रहेगा...

गिरिडीह का एक बड़ा तबका पिछले दो महीने से इस बात को लेकर आशंकित है कि कहीं उनके यहां संचालित एक मात्र कोयला खदान इस साल के अंत में बंद न हो जाए। इसको लेकर अखबारों में लगातार खबरें छपती रही हैं। लोगों की भावनाओं के मद्देनजर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उसका संचालन जारी रखने को लेकर केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक प्रयासरत हैं। पढिए जमीनी हालात का जायजा लेती गिरिडीह से यह ग्राउंड रिपोर्ट...

पीएम कुसुम योजना किसानों को सोलर पंपसेट से सिंचाई सुविधा प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके माध्यम से किसानों की आय तो बढानी ही है, साथ ही उन्हें बिजली उत्पादक भी बनाने का लक्ष्य है। इस योजना की झारखंड में जमीनी स्थिति क्या है और किसान क्या कहते हैं, पढें इस पर केंद्रित यह विशेष रिपोर्ट...

इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (आईईईएफए) और एनर्जी थिंक टैंक एम्बर की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश को पटरी पर लाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। ऐसा करना ना सिर्फ उसके अपने लक्ष्यों को हासिल करने बल्कि वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट तथा 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन के भारत के लक्ष्य की रफ्तार में कमी नहीं आने देने के लिए भी जरूरी है।

झारखंड में विभिन्न कारणों से बंद होती कोयला खदानों के कारण उस पर निर्भर वैसे समुदायों - जो असंगठित क्षेत्र से आते हैं - के सामने नयी आर्थिक चुनौतियां आनी शुरू हो चुकी हैं। वे पहले से विस्थापन व प्रदूषण की समस्याओं से ग्रस्त हैं। रामगढ़ जिले के कुजू क्षेत्र की जमीनी हालात का जायजा लेती यह रिपोर्ट पढें...

भूरबन्धा, असम राज्य के मोरीगांव ज़िले का एक ऐसा गांव है जहां वर्ष 2017 तक बिजली नहीं पहुच पाई थी। गाँव में पढ़ाई करने वाले छात्र अक्सर किरोसिन तेल से जलने वाले लालटेन या लैंप की मदद से पढ़ाई करते थे। ब्रह्मपुत्र नदी से 20 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में बाढ़ के दिनों में तो ग्रामीणों की तकलीफ कई गुना बढ़ जाती थी। दूर-दराज़ का इलाका होने के कारण यहां बिजली के तार के आने की संभावना भी नहीं के बराबर थी।