Breaking News

energy transition

सौर ऊर्जा के प्रासंगिकता और उपलब्धता को बल देते हुए हस्क पावर सिस्टम्स ने EDFI ElectriFI के साथ ग्रामीण भारत में फैले 80 नए समुदायों में सोलर माइक्रोग्रिड लगाने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हस्क पावर सिस्टम्स ने घोषणा की है कि उसने यूरोपियन यूनियन से वित्त

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने साल 2050 तक नेट ज़ीरो एमिशन का स्तर हासिल करने का लक्ष्य तय करते हुए $ 5 बिलियन (लगभग 39,760 करोड़ रुपये) से अधिक के निवेश की योजना बनाई है। इस क्रम में दक्षिण कोरियाई कंपनी ने कहा है कि वह इस दशक के अंत तक स्मार्टफोन, टेलीविजन और उपभोक्ता डिवीजनों में

भारत के केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले तीन सबसे बड़े उद्यम या पीएसयू – कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), एनटीपीसी, और भारतीय रेलवे- मिल कर स्वच्छ ऊर्जा बाजार का एक बड़ा हासिल कर सकते हैं और साथ ही देश को अपने जलवायु लक्ष्यों तक पहुंचने में भी मदद कर सकते हैं। इस बात की जानकारी मिलती

रांची : अक्सर जब जीवाष्म ऊर्जा से स्वच्छ ऊर्जा की ओर ट्रांजिशन की चर्चा होती है, तो कामगारों के कौशल को लेकर चिंता प्रकट की जाती है। यह कहा जाता है कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक कौशल वाले कामगारों की जरूरत है और इसके लिए उन्हें प्रशिक्षत करने की जरूरत है। भारत और

नयी दिल्ली : भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने थर्मल पॉवर प्लांट के उत्सर्जन मानदंडों में नया संशोधन किया है। इस संशोधन के बाद पर्यावरणविद सुनीता नारायण की अगुवाई वाली संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट ने इसकी कड़ी आलोचना की है। उत्सर्जन मानदंडों में यह संशोधन 2015 में जारी अधिसूचना में किया

सस्टेनेबल मोबिलिटी नेटवर्क और सीएमएसआर कंसल्टेंट्स के एक ताजा सर्वे से जाहिर हुआ है कि उपभोक्ता वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ई-कॉमर्स तथा डिलीवरी कंपनियों द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाते हुए देखना चाहते हैं। यह सर्वे मुंबई, पुणे, दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु तथा चेन्नई जैसे छह बड़े शहरों में 9048

केंद्र और राज्य सरकारें सही दिशा में काम करें तो वर्ष 2026 तक वायु ऊर्जा देश की कुल स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में कर सकती है 23.7 गीगावॉट वृद्धि में मदद   भारत में एनर्जी ट्रांजिशन को बल देने में पवन ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है

राहुल सिंह की रिपोर्ट हजारीबाग जिले में पड़ने वाला बड़कागांव प्रखंड मुख्यालय एक छोटी-सी जगह है, जो राजधानी रांची से करीब 80 किलोमीटर और अपने जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर है। झारखंड जैसे बेहद पुराने कोयला उत्पादक राज्य में बड़कागांव एक उभरता हुआ नया कोयला खनन क्षेत्र है, जहां पिछले डेढ-दो दशक में एक

गेटिंग एशिया टू नेट जीरो से संबंधित हाई लेवल पॉलिसी कमिशन का कहना है कि भारत जलवायु से संबंधित अपनी संकल्पबद्धताओं को पूरा करके और उन्हें बढ़ाकर वित्त संबंधी जोखिमों को खत्म कर सकता है और स्वच्छ ऊर्जा में रूपांतरण को बहुत बेहतर बना सकता है।     एक ताजा अध्ययन के मुताबिक प्रदूषणकारी तत्वों के उत्सर्जन को शून्य करने से भारत की अर्थव्यवस्था को नई ताकत

इस गांव के अधिकतर लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार और आजीविका के लिए कोयला खनन परियोजनाओं पर आश्रित हैं। यह स्थिति उन्हें असहज करती है और वे एक दायरे से बाहर मुखर नहीं हो पाते हैं। अधिकतर लोग नपे-तुले अंदाज में बात करते हैं। अगर आजीविका के अन्य विकल्प होते तो शायद ऐसा इस हद तक नहीं होता।