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भारत के पास दिसंबर 2022 तक 175 GW क्षमता के स्वच्छ ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य है। फिलहाल अप्रेल का महीना ख़त्म हो रहा है और मार्च 2022 तक कुल 110 GW रिन्युब्ल एनेर्जी क्षमता स्थापित हुई है, जो कि 175 GW लक्ष्य का 63% है। ग्लोबल थिंक टैंक एम्बर की एक नई रिपोर्ट

रांची : देश का 17 प्रतिशत कोयला उत्पादन करने वाला झारखंड अभूतपूर्व बिजली संकट से जूझ रहा है। इस बिजली संकट ने इस प्रचंड गर्मी और हिट वेव के दौर में आम लोगों के साथ कारोबारी जगत को भी परेशान कर दिया है। बिजली का सीधा संबंध औद्योगिकत उत्पादकता से है और अगर इसकी आपूर्ति

एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया भर में कोयला आधारित ऊर्जा के लिए उदासीनता बढ़ रही है। स्थापित किए जा रहे कोयला पावर प्लांट्स में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। यह तथ्य ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर की वार्षिक 'बूम एंड बस्ट' रिपोर्ट में सामने आए हैं। इस वार्षिक रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर चल रहे कोयला बिजली प्लांट्स के बेड़े में वार्षिक वृद्धि या कमी को देखा जाता है।

जलवायु परिवर्तन के मौजूदा और भविष्‍य में उत्‍पन्‍न होने वाले डरावने नतीजों को रोकने के लिए फौरन सार्थक कदम उठाने में भारत के खासकर हिंदी हृदयस्‍थल कहे जाने वाले क्षेत्र में स्थित राज्‍यों की प्रगति काफी असमानता भरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अक्षय ऊर्जा में रूपांतरण के मामले में खासकर उत्‍तर भारत के

रांची : एक नयी स्टडी के अनुसार भारत की कोल कैपिटल कहा जाने वाला धनबाद के लोग वायु प्रदूषण की वजह से अपने जीवन का 7.3 साल गंवा देते हैं। लीगल इनिटिऐटिव फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट, लाइफ के द्वारा तैयार नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत तैयार रिपोर्ट के अनुसार, इस रिपोर्ट में केंद्रीय प्रदूषण

खदानों के बंद होने की स्थिति में सोलर सेक्टर रोजगार का एक अच्छा विकल्प रांची : फिक्की (Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry) और सीड फंड की हाल में भारत के प्रमख कोयला उत्पादक राज्यों में जस्ट ट्रांजिशन प्रक्रिया को आगे बढाने को लेकर एक अध्ययन रिपोर्ट आयी है। इस अध्ययन रिपोर्ट में

विश्व पवन ऊर्जा काउंसिल का एक वक्तव्य बताता है कि कोविड19 के बाद के हालात में ग्रीन रिकरवी और एक सतत आर्थिक सुधार के लिए पवन ऊर्जा एक आवश्यक ऊर्जा स्रोत है। पवन ऊर्जा ऊर्जा संक्रमण या एनर्जी ट्रांजिशन का हृदय है और समाज एवं उसके लोगों के लिए यह ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर यह

पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप, भारत 2070 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्बन एमिशन की तीव्रता को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर लगातार काम कर रहा है।

राहुल सिंह झारखंड के लाखों कोयला खनन प्रभावित गांवों के निवासियों की तरह रामगढ़ जिले की केदला बस्ती के 57 वर्षीय मंगर महतो भी एक खनन प्रभावित शख्स हैं। उनकी 20 एकड़ जमीन में 14 एकड़ जमीन कोयला खनन में चली गयी। मार्च के आखिरी सप्ताह की एक दोपहरी में वे अपने खेत में खड़े

कोयला खनन आदिवासियों और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े तबके के लोगों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। झारखंड के हजारीबाग जिले में कोयला खनन के आदिवासियों के जीवन पर पड़ने वाले असर पर केंद्रित यह रिपोर्ट पढें...