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energy transition

भारत में कोयला खदानों की कम समय तक कार्यशीलता के कारण डिकमिशनिंग का बढ जाता है खर्च   तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए 2040 तक कोयला का वैश्विक उपयोग बंद करना व कोयला बिजली संयंत्रों की संचालन अवधि को कम करना जरूरी रांची : अगले सप्ताह शर्म अल-शेख में

रांची : झारखंड सरकार ने अक्टूबर 2022 में राज्य के लिए पहली बार इलेक्ट्रिक वेहकिल पॉलिसी घोषित की है। इससे पहले इसी साल राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा नीति की घोषणा की थी, जो पांच साल बाद दूसरी घोषणा है। राज्य सरकार ने सात अक्टूबर 2022 इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी और

ज्यादातर कोयला खनन क्षेत्र में कोयला के बाद रोजगार के वैकल्पिक प्रबंध नहीं हो सके हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका के संकट का सामना करना पड़ता है और यह स्थिति लोगों को पलायन के लिए मजबूर करती है। धनबाद जिले के महुदा इलाके में सभी कोलयरी और वाशरियां अभी बंद हैं।

पुराने पॉवर प्लांट को बंद करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता पर्यावरण, श्रमिक हित और आश्रित समुदाय की आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं नयी दिल्ली : इनर्जी सेक्टर में काम करने वाली संस्था आइफॉरेस्ट ने एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें थर्मल पॉवर प्लांट के बंद होने के

एक अध्ययन में पाया गया है कि अगर पवन, सौर और जल विद्युत उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं होती तो जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन चार प्रतिशत बढ़ जाता। दरअसल एनर्जी थिंक टैंक एम्बर द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया है कि 2022 की पहली छमाही में अकेले रिन्यूबल एनर्जी ने वैश्विक बिजली की

रिन्यूएबल एनर्जी नामक पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित एक लेख से इस बात की प्रबल संभावना जाहिर हुई है कि दिल्ली वर्ष 2050 तक जीवाश्म ईंधन से छुटकारा पाकर 100% अक्षय ऊर्जा पर निर्भरता का लक्ष्य हासिल कर सकती है। अपनी तरह के इस पहले शोध में दिल्ली जैसे उत्तर भारतीय महानगर में 100%

डीएमएफ की राशि के व्यय के लिए ऊर्जा क्षेत्र को अन्य प्राथमिकता वाला नहीं प्राथमिकता वाले क्षेत्र में लाना जरूरी  रांची : पिछले सप्ताह आइफॉरेस्ट की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि झारखंड जैसे खनिज उत्पादक राज्य में डीएमएफ के पैसे का उपयोग एनर्जी गैप को भरने में करना एक अच्छा विकल्प हो

रांची : भारत में गरीबी-अमीरी की बढती खाई की तरह स्वच्छ ऊर्जा की खाई भी लगातार बढ रही है। दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के अच्छे प्रदर्शन और पूर्वी राज्यों के सैद्धांतिक घोषणाओं तक सीमित रहने भर से यह अंतर और तेजी से बढ रहा है। वर्ष 2022 में भारत ने 175 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन

एक नए वैज्ञानिक अध्ययन से पता चलता है कि अगर भारत बिजली क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से अपनी कोयले पर निर्भरता कम करता है तो न सिर्फ साल 2040 की शुरुआत से ही वह बिजली की गिरती कीमतों का फायदा उठा सकता है बल्कि साल 2050 तक बिजली की कीमतों को मौजूदा दरों के मुक़ाबले

भारत में जारी एनर्जी ट्रांजिशन प्रक्रिया में उन कंपनियों की अहम भूमिका है जो जीवाष्म ऊर्जा आधारित कारोबार में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से संलग्न है। यह उन कंपनियों के अस्तित्व व स्वयं की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। भारत में 83 प्रतिशत कोयला उत्पादित करने वाली कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की भी