Breaking News

COP26

संयुक्त राष्ट्र की आज जारी एमिशन्स गैप रिपोर्ट की मानें तो वर्ष 2021 में ब्रिटेन के ग्‍लासगो में हुए सीओपी26 में सभी देशों द्वारा अपने नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्‍यूशंस (एनडीसी) को और मजबूत करने का संकल्‍प व्‍यक्‍त किये जाने और राष्‍ट्रों द्वारा कुछ अपडेटेड जानकारी दिये जाने के बावजूद प्रगति के मोर्चे पर बुरी तरह नाकामी

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ऊर्जा संरक्षण संशोधन विधेयक 2022 को आठ अगस्त 2022 को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक को लेकर कांग्रेस ने असहमतियां प्रकट की थी। वहीं, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने इस विधेयक को भविष्य का विधेयक बताया है और कहा है कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे में हर देश को यह समझ में आ गया है कि उन्हें ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कदम उठाना होगा। केंद्र सरकार का तर्क है कि यह विधेयक कार्बन उत्सर्जन को कम करने व ऊर्जा के अधिक कुशल उपयोग को बढावा देने के लिए लाया गया है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की हाल में आयी रिपोर्ट में भारत में तेज आर्थिक विकास के मद्देनजर आवश्यक ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले की मांग बढने का आकलन पेश किया गया है। नीति आयोग के एनर्जी ड्राफ्ट में भी कोयले की जरूरत का उल्लेख किया गया है। वहीं, चौथे चरण की नीलामी के ऐलान के दौरान कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि अगले 30 से 40 साल तक भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए कोयला बहुत महत्वपूर्ण बना रहेगा...

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को वाहन निर्माता कंपनियों को अगे छह महीने के अंदर फ्लेक्स फ्यूल और फ्लेक्स फ्यूल स्ट्रांग हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण करने को कहा है। उन्होंने कंपनियों को छह माह के अंदर बीएस - 6 मानक वाले वाहन बनाने को कहा है।

ग्‍लासगो में हाल में संपन्न सीओपी26 में निर्धारित लक्ष्‍य और व्‍यक्‍त संकल्‍पबद्धताओं की पूर्ति की कसौटी पर भारत अलग तरह की चुनौतियों को सामना कर रहा है। कोयले के चलन को चरणबद्ध ढंग से खत्‍म करने की राह में खड़ी बाजार की शक्तियां, दुरूह वित्‍तीय स्थितियां और कई अन्‍य कारणों से भारत के लिए सूरतेहाल अलग नजर आ रही है।

जहाँ एक ओर COP26 को कोयले की काली हकीक़त को दुनिया के सामने लाने के लिए याद रखा जायेगा, वहीँ दूसरी ओर इसे भारत की एक कूटनीतिक जीत के रूप में भी लिया जायेगा।

इस ग्लासगो समझौते ने की पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए सड़क के अंत की शुरुआत दुनिया के चौथे सबसे बड़ा ऑटो बाज़ार भारत ने रवांडा, केन्या के साथ संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) में, अपने बाजारों में शून्य उत्सर्जन वाहनों (ZEV) के ट्रांजिशन में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्धता दिखाते हुए एक समझौते

पूरी मानवता के अस्तित्‍व के लिए खतरा बन रही ग्‍लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के अधिक प्रभावी उपाय तलाशने के मकसद से ब्रिटेन के ग्‍लासगो में आयोजित COP26 शिखर वार्ता में विभिन्‍न विषयों पर चर्चा हुई। इस संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्धता, जवाबदेही और क्रियान्‍वयन को लेकर स्‍पष्‍टता की कमी के कारण इन मुद्दों से काफी भ्रम की विकट स्थिति पैदा हुई है।

एक बेहद तेज़ घटनाक्रम में यूके की सीओपी प्रेसीडेंसी ने ग्लासगो क्लाइमेट समिट के लिए फैसलों का एक नया मसौदा जारी किया है। इस मसौदे की भाषा सशक्त है और इशारा करती है कि अंततः फैसलों की शक्ल कैसी हो सकती है।

ग्लासगो में पैसे को लेकर ग़ज़ब खेल चल रहा है। विकसित देश क्लाइमेट फाइनेंस का अपना एक दशक पुराना वादा पूरा करना तो दूर अब विकाशील देशों से दान करवाने की जुगत में लगे हैं।