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Coal Transition

इस गांव के अधिकतर लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार और आजीविका के लिए कोयला खनन परियोजनाओं पर आश्रित हैं। यह स्थिति उन्हें असहज करती है और वे एक दायरे से बाहर मुखर नहीं हो पाते हैं। अधिकतर लोग नपे-तुले अंदाज में बात करते हैं। अगर आजीविका के अन्य विकल्प होते तो शायद ऐसा इस हद तक नहीं होता।

कार्बन उत्सर्जन कम करने की चुनौतियों के बीच दुनिया भर में कोयले का उत्पादन और उसका उपयोग नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। चीन की अर्थव्यवस्था में तेजी आने से कोयला उपयोग नए शिखर पर पहुंच गया। वहीं, भारत में भी जारी वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसका उपयोग बढ़ा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ में भी प्राकृतिक गैस की महंगी कीमतों की वजह से कोयले पर निर्भरता बढ गयी है।

राहुल सिंह कोरबा के बारे में सुना था, पढा था। आंकड़ों को भी देखा था। पर, इस सप्ताह के शुरुआत में पहली बार उस शहर को देखने का मौका मिला। धूल, धुआं और काली धुंध से ढके एक शहर को देखना मेरे लिए एक अजीब अनुभव था। जबकि मुझे बेहद प्रदूषित शहर धनबाद का बहुत

फुसरो (बोकारो) : धनबाद का झरिया कोयला खदान भूमिगत आग व भू धंसान को लेकर दुनिया भर में चर्चित है, लेकिन आग का खतरा धनबाद से सटे बोकारो जिले की कुछ कोयला खदानों में भी बढ रहा है। हालांकि दोनो जगहों की खदानों के आग में अंतर है। बोकारो के फुसरो कोयलांचल क्षेत्र के कल्याणी

लाइफ संस्था की यह रिपोर्ट कोरोना संकट खत्म होने के बाद कोयला के दोहन में तेजी का भी संकेत देती है और आने वाले सालों में वन भूमि के कोयला खनन के लिए डायवर्सन और बढ सकता है

झरिया : बबन कुमार झरिया के डिगवाडीह में स्टेडियम के पास बीसीसीएल के एक पुराने क्वार्टर में रहते हैं। उनके घर में परित्यक्त कोयला खदानों के पानी की आपूर्ति की जाती है, जो नहाने-धोने के काम में आता है। वे अपने घर से रोज रात में एक किमी दूर साइकिल से पानी लाने जाते हैं।

रांची : कोयला मंत्रालय ने बुधवार (आठ जून 2022) को नए आंकड़े पेश करते हुए बताया है कि मई 2022 में पिछले साल की इस अवधि की तुलना में देश में कोयला उत्पादन और बिजली उत्पादन दोनों बढा है। कोयला मंत्रालय ने यह दावा ऐसे हालात के बीच किया है, जब प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य

जहां एक ओर खाद्य सुरक्षा दुनिया के लगभग सभी देशों की प्राथमिकता है, वहीं पड़ोसी देश बांग्लादेश से इस संदर्भ में एक हैरान करने वाली खबर आ रही है। दरअसल हाल ही में बांग्लादेश ने जीवाश्म ईंधन की बढ़ती लागत के कारण गरीबों के लिए खाद्य सब्सिडी को कम करने का फैसला लिया। इसी क्रम

राहुल सिंह जब हम झारखंड की राजधानी रांची से खूबसूरत पतरातू घाटी को पार करते हुए उससे नीचे उतरते हैं तो पॉवर प्लांट की चिमनियां किसी औद्योगिक कस्बे में होने का अहसास कराती हैं। यहां पतरातू थर्मल पॉवर स्टेशन है और उसकी एक दूसरी इकाई में भारत के सबसे बड़े थर्मल पॉवर प्लांट में एक

राहुल सिंह खनन, ऊर्जा व औद्योगिक इकइायों से घिरा बलकुदरा रांची-भुरकुंडा रोड पर स्थित भारत के लाखों अन्य गांवों की तरह एक सामान्य गांव नहीं है। यह गांव रांची से तकरीबन 50 किमी और रामगढ से 22 किमी की दूरी पर है। यह संसाधनों और संभावनाओं से भरा-पूरा भूभाग रहा है और इसलिए इसका दोहन