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Coal power

रांची : कोयला मंत्रालय ने बुधवार (आठ जून 2022) को नए आंकड़े पेश करते हुए बताया है कि मई 2022 में पिछले साल की इस अवधि की तुलना में देश में कोयला उत्पादन और बिजली उत्पादन दोनों बढा है। कोयला मंत्रालय ने यह दावा ऐसे हालात के बीच किया है, जब प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य

एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया भर में कोयला आधारित ऊर्जा के लिए उदासीनता बढ़ रही है। स्थापित किए जा रहे कोयला पावर प्लांट्स में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। यह तथ्य ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर की वार्षिक 'बूम एंड बस्ट' रिपोर्ट में सामने आए हैं। इस वार्षिक रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर चल रहे कोयला बिजली प्लांट्स के बेड़े में वार्षिक वृद्धि या कमी को देखा जाता है।

72 साल के सेवानिवृत्त शिक्षक चिंतामणि साह जैविक खेती करते हैं, आश्रम चलाते हैं और गांधीवादी तरीके से जीवन यापन करने पर यकीन करते हैं। उनकी आवश्यकताएं न्यूनतम हैं और प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण पर उनका जोर अधिक। चिंतामणि झारखंड के गोड्डा शहर से करीब आठ-दस किमी की दूरी पर स्थित मोतिया गांव में अपनी उस पुस्तैनी जमीन पर कृषि, सोलर इनर्जी एवं सतत विकास को लेकर इस उम्र में भी अनूठे प्रयोग कर रहे है, जिसके ठीक सामने अदानी पॉवर का 1600 मेगावाटर का विशाल अल्ट्रा थर्मल पॉवर प्लांट बन रहा है। यह थर्मल पॉवर प्लांट उर्जा क्षेत्र के अध्याताओं के लिए वर्तमान में प्रमुख विषयों में एक है।

जी-20 देशों में काम कर रही कंपनियों ने सरकारों से वैश्विक तापमान में वृद्धि को डेढ़ डिग्री सेल्सियस के अंदर रखने के लक्ष्य की प्राप्ति पर सार्वजनिक धन खर्च करने का आग्रह किया है। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों समेत सैकड़ों कारोबारी नेतृत्वकर्ताओं ने जी20 और सीओपी26 की बेहद महत्वपूर्ण बैठकों में अपने-अपने राष्ट्रीय जलवायु

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के सभी जिलों के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। आज गढ़वा जिले के भागोडीह में ग्रिड सब स्टेशन का उद्घाटन हो रहा है।

जहाँ पूरी दुनिया में पिछले साल लगे लॉकडाउन और मंदी के चलते बिजली की मांग घट गयी थी, वहीं, चीन में न सिर्फ बिजली की मांग बढ़ी, बल्कि कोयले से बनी बिजली के उत्पादन में भी चीन में बढ़त दर्ज की गयी। और, फ़िलहाल चीन अब दुनिया के कुल कोयला आधारित बिजली उत्पादन के आधे

भारत में कोयला आधारित बिजली उत्पादन में लगातार दूसरे साल गिरावट दर्ज की गयी है। साल 2018 से शुरू इस गिरावट की बड़ी वजह रही है सौर ऊर्जा का बढ़ता उत्पादन और परम्परागत बिजली की घटती मांग। ताज़ा आंकड़ा है साल 2020 का जब कोयला बिजली उत्पादन में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी।