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Climate Trends

मिस्र के शर्म-अल-शेख में आगामी नवंबर में आयोजित होने जा रहे संयुक्‍त राष्‍ट्र जलवायु परिवर्तन सम्‍मेलन (सीओपी27) से पहले विशेषज्ञों ने क्लाइमेट जस्टिस पर खास जोर देते हुए कहा है कि अगर इस पहलू पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो सीओपी जैसे तमाम मंच बेमानी माने जाएंगे।  सीओपी27 से पहले जलवायु परिवर्तन के कारण

रांची : एनर्जी सेक्टर व पर्यावरण पर शोघ आधारित काम करने वाली संस्था क्लाइमेट ट्रेंड और जेएमके रिसर्च एंड एनालिसिस के भारत में वाहनों की इ-मोबिलिटी पर संयुक्त अध्ययन व शोध पर आधारित एक रिपोर्ट 28 जुलाई 2022 को जारी की गयी है। इस रिपोर्ट में 2030 तक 40 प्रतिशत ई-व्हीकल लक्ष्य हासिल करने को

चार्जिंग ढांचे को तेजी से विस्‍तार देना, वित्‍तीय समाधान पेश करना, अधिदेश (मैन्‍डेट) पेश करना और संबंधित राष्‍ट्रीय महत्‍वाकांक्षा के अनुरूप सरकारी नीतियां बनाना ई-मोबिलिटी में तेजी लाने के लिए बेहद महत्‍वपूर्ण

नई दिल्ली, 24 जून : भारत की अर्थव्यवस्था पर मानसून का निर्णायक प्रभाव पड़ता है। भारत की कृषि अर्थव्यवस्था अब भी काफी हद तक मॉनसून की गतिविधियों पर निर्भर करती है। भारत का 40% से ज्यादा बुआई क्षेत्र सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर निर्भर है। इस साल भारत में मानसून की आमद समय

वायु प्रदूषण खासकर दक्षिण एशियाई देशों के लिए बहुत विकट समस्‍या बन गया है। इस विपत्ति की सबसे ज्‍यादा तपिश दक्षिण एशियाई देशों भारत, पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और नेपाल को सहन करनी पड़ रही है। वायु प्रदूषण संपूर्ण दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी समस्या है और इस क्षेत्र में स्थित कोई भी देश इससे

नयी दिल्ली : भारत इस वक्‍त ग्‍लोबल वार्मिंग की जबरदश्त मार सहने को मजबूर है। भीषण गर्मी के कारण तापमान बढ़ने से बिजली की खपत में वृद्धि के फलस्‍वरूप देश के विभिन्‍न राज्‍यों में बिजली संकट भी उत्‍पन्‍न हो गया है। इसे कोयले की कमी से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना

जलवायु परिवर्तन के मौजूदा और भविष्‍य में उत्‍पन्‍न होने वाले डरावने नतीजों को रोकने के लिए फौरन सार्थक कदम उठाने में भारत के खासकर हिंदी हृदयस्‍थल कहे जाने वाले क्षेत्र में स्थित राज्‍यों की प्रगति काफी असमानता भरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अक्षय ऊर्जा में रूपांतरण के मामले में खासकर उत्‍तर भारत के

जब हम जलवायु परिवर्तन और उसकी वजह से होने वाले जोखिम की बात करते हैं तो यह बात सामने आती है कि फाइनेंस को अधिक महत्‍वपूर्ण पहलू के तौर पर सामने रखा जाए। जलवायु परिवर्तन की विकराल होती समस्‍या से निपटने के लिए अनुकूलन कार्य में जलवायु वित्‍त या क्‍लाइमेट फाइनेंसिंग की भूमिका निर्विवाद रूप

जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की ताजा रिपोर्ट भविष्‍य की एक भयावह तस्‍वीर पेश करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कार्बन उत्‍सर्जन मौजूदा रफ्तार से बढ़ता रहा तो वर्ष 2100 तक लगभग पूरे भारत में वेट बल्‍ब टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस के जानलेवा स्‍तर तक पहुंच जाएगा। विशेषज्ञों का मानना

पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के गंभीर परिणामों का सामना कर रही है, मगर भारत में यह मसला अब भी चुनावी मुद्दा नहीं बनता। आबादी के लिहाज से भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इसी महीने से विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि ज्‍यादातर राजनीतिक दलों ने अभी अपना चुनाव घोषणापत्र जारी नहीं किया है लेकिन इस बार भी जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण का मुद्दा राजनीतिक विमर्श से गायब है।