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                <title>Health News - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>आलिन शेरिन अब्राहम: 10 महीने की सबसे छोटी अंगदाता, 4 बच्चों को जीवनदान देकर राजकीय सम्मान के साथ विदा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>नई दिल्ली: </strong>केरल की सबसे छोटी अंग दाता 10 महीने की आलिन शेरिन अब्राहम को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पथानामथिट्टा जिले के नेदुंगदप्पल्ली सेंट थॉमस सीएसआई चर्च में उनका अंतिम संस्कार हुआ, जहां हजारों लोग उमड़ पड़े।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">5 फरवरी को कोट्टायम के पास सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुईं आलिन को ब्रेन डेड घोषित करने के बाद उनके माता-पिता अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन ने साहसी फैसला लिया। उन्होंने बच्ची के लीवर, दोनों किडनी, कॉर्निया और हार्ट वॉल्व को दान कर दिया, जिससे चार बच्चों को नया जीवन मिला। इस फैसले ने पूरे</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/alin-sherin-abraham-the-youngest-organ-donor-of-10-months/article-18208"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/1200-675-26048499-thumbnail-16x9-kerala.jpg" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>नई दिल्ली: </strong>केरल की सबसे छोटी अंग दाता 10 महीने की आलिन शेरिन अब्राहम को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पथानामथिट्टा जिले के नेदुंगदप्पल्ली सेंट थॉमस सीएसआई चर्च में उनका अंतिम संस्कार हुआ, जहां हजारों लोग उमड़ पड़े।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">5 फरवरी को कोट्टायम के पास सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुईं आलिन को ब्रेन डेड घोषित करने के बाद उनके माता-पिता अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन ने साहसी फैसला लिया। उन्होंने बच्ची के लीवर, दोनों किडनी, कॉर्निया और हार्ट वॉल्व को दान कर दिया, जिससे चार बच्चों को नया जीवन मिला। इस फैसले ने पूरे परिवार को तोड़ दिया, लेकिन दूसरों के लिए उम्मीद की किरण बन गया।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">अंतिम संस्कार से पहले सुबह वालुमन्निल हाउस में बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। चमेली के फूलों से सजा ताबूत देखकर हर आंख नम हो गई। माता-पिता भावुक नजर आए, जबकि समाज के हर वर्ग के लोग शोकसभा में शामिल हुए।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">राज्यमंत्री वीणा जॉर्ज, वीएन वासवान, सांसद सुरेश गोपी समेत कई नेता घर पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। दोपहर करीब 3 बजे शव को चर्च ले जाया गया, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा। आलिन के दादा रेजी सैमुअल ने भावुक संदेश पढ़ा, जिसमें कहा कि 20 महीने की जिंदगी में आलिन ने अपना कर्तव्य निभा दिया। उन्होंने बताया कि बेटे के अंग दान के फैसले पर सहमत हुए, क्योंकि इससे चार बच्चे जीवित हैं।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">आलिन की एक किडनी श्रेया नाम की बच्ची को ट्रांसप्लांट हुई। श्रेया के दादा चंद्रन भी शोकसभा में पहुंचे और आलिन को 'देवदूत' कहकर याद किया। उन्होंने कहा कि सर्जरी के बाद उनकी पोती स्वस्थ हो रही है और आलिन के परिवार के दर्द को महसूस करते हुए वे उनके साथ खड़े हैं।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">यह घटना केरल में अंग दान की महत्ता को फिर से रेखांकित करती है। आलिन जैसी मासूम ने अपनी छोटी सी जिंदगी से बड़ा संदेश दिया कि दान से दुख आशा में बदल सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 17:44:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
                    </dc:creator>
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                <title>एम्स देवघर पर सख्त रुख, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का स्पष्ट संदेश</title>
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                        <![CDATA[देवघर एम्स से बिना इलाज मरीज को रिम्स रेफर करने पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कड़ा रुख अपनाया और दोषियों पर कार्रवाई के संकेत दिए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/deoghar/strict-stance-on-aiims-deoghar-clear-message-from-health-minister/article-17593"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-12/ffeb6f13e2eae710ddc221a9649a598f_2010488353_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>देवघर : </strong> झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से एक जरूरतमंद मरीज को बिना इलाज रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रेफर किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।<br /><br />स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि एम्स देवघर की संवेदनशील और जनसेवा से जुड़ी छवि को किसी भी हाल में खराब नहीं होने दिया जाएगा और मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।<br /><br />शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बीती देर रात देवघर जिले के बसनली गांव से एक महिला का भावुक फोन स्वास्थ्य मंत्री को प्राप्त हुआ। महिला ने रोते हुए अपने पति की गंभीर स्थिति की जानकारी दी और तत्काल मदद की गुहार लगाई। सूचना मिलते ही डॉ. अंसारी ने अपना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर बिना देरी किए गांव के लिए रवाना हो गए।<br /><br />गांव पहुंचकर स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं मरीज की जांच की, उसकी चिकित्सीय स्थिति की जानकारी ली और हालात की गंभीरता को समझा। जांच में यह सामने आया कि मरीज एक गरीब और आदिवासी परिवार से है, जिसे पहले इलाज के लिए एम्स देवघर रेफर किया गया था, लेकिन वहां से बिना किसी उपचार के रिम्स भेज दिया गया। मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि एम्स में उन्हें समुचित इलाज नहीं मिला।<br /><br />इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स प्रबंधन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गरीब और आदिवासी मरीज बड़ी उम्मीद के साथ एम्स जाते हैं। यदि वहां से भी उन्हें बिना इलाज रेफर कर दिया जाएगा, तो एम्स की उपयोगिता और उद्देश्य पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार गरीब मरीजों को रेफर करना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है। यदि किसी प्रकार की चिकित्सा सुविधा या संसाधनों की कमी है, तो उसे स्पष्ट रूप से सामने रखा जाना चाहिए।<br /><br />डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि आवश्यकता पड़ी तो वे स्वयं एम्स देवघर जाकर प्रबंधन से बातचीत करेंगे और जवाबदेही तय करेंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था कर मरीज को रांची रेफर कराया। इसके साथ ही मरीज के परिजनों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई, ताकि इलाज के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। रांची में मरीज के बेहतर इलाज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई है।<br /><br />ग्रामीणों की ओर से आभार जताए जाने पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पीड़ितों की सहायता के लिए गांव आना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका कर्तव्य है। उन्होंने दोहराया कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और गरीब व जरूरतमंदों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>देवघर</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 16:32:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anshika Ambasta]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ranchi News: पारस एचईसी हॉस्पिटल में फोर्थ स्टेज ब्रेस्ट कैंसर से ग्रसित महिला का हुआ सफल इलाज</title>
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                        <![CDATA[रांची के पारस हॉस्पिटल एचईसी में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित बुजुर्ग महिला का सफल इलाज किया गया। डॉ. गुंजेश कुमार सिंह और उनकी टीम ने स्टेज-4 कैंसर से जूझ रही महिला का इलाज किया, जिससे उसे काफी राहत मिली। इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया गया। पारस हॉस्पिटल में सर्जिकल, मेडिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के माध्यम से सभी प्रकार के कैंसर का इलाज उपलब्ध है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ranchi-news-paras-hec-hospital-successfully-treated-a-woman-with/article-16359"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-09/resized-image---2025-09-20t164757.532.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची:</strong> पारस हॉस्पिटल एचईसी में कैंसर से पीड़ित बुजुर्ग महिला का सफल इलाज किया गया है। महिला ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी से जुझ रही थी। पारस हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ गुंजेश कुमार सिंह और उनकी टीम ने इनका इलाज किया। टीम में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ अभिनव, रेडिशन ऑन्कोलॉजी डॉ निशांत भारद्वाज समेत अन्य लोग शामिल थे। ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला के सभी आर्गन में कैंसर पाये गये थे। ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला के लीवर, गर्दन, फेफड़े, गला, मुंह और दोनों स्तनों में कैंसर फैल चुका था। जांच में यह रोग चौथे चरण (स्टेज-4) में पाया गया। सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। डॉक्टरों ने इसका इलाज प्रारंभ किया। इलाज के बाद महिला को काफी राहत मिली है। फिलहाल इनका  इलाज जारी है। इनका  इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">डॉ गुंजेश कुमार सिंह ने कहा कि मरीज किसी भी उम्र को हो, एडवांस स्टेज वाले कैंसर भी पूरी तरह से ठीक हो सकता है। ब्रेस्ट कैंसर आज-कल कॉमन बीमारी हो गयी है। पारस हॉस्पिटल में सभी तरह के कैंसर मरीजों का इलाज हो रहा है। एडंवास डिजिज वाले कैंसर का भी इलाज किया जा रहा है। बुजुर्ग मरीज भी कैंसर का इलाज करा सकते है।</p>
<p style="text-align:justify;">पारस हॉस्पिटल एचईसी के फैसिलिटी निदेशक डॉ नीतेश कुमार ने कहा कि पारस हॉस्पिटल में एक ही छत के नीचे कैंसर से जुड़ी सभी बीमारियों का इलाज हो रहा है। यहां पैट स्कैन, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के माध्यम से गंभीर से गंभीर कैंसर का इलाज किया जा रहा है। कैंसर के इलाज के लिए हॉस्पिटल में अलग से कैंसर सेंटर खोला गया है। कैंसर के इलाज के लिए मरीजों को बाहर जाने की जरूरत नहीं है। वे अब पारस हॉस्पिटल एचइसी में इलाज करवा सकते हैं।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Sep 2025 16:48:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SJAS सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल द्वारा बोकारो में नि:शुल्क मेडिकल कैम्प आयोजित</title>
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                        <![CDATA[अस्पताल की ओर से ज़रूरतमंद लोगों को आवश्यक दवाइयाँ और ORS भी मुफ़्त में वितरित की गईं. अस्पताल के तरफ़ से कुल 4 नर्स, 2 आईसीयू टेक्निशियन, और 15 अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे. ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/bokaro/free-medical-camp-organized-by-sjas-super-specialty-hospital-in/article-13541"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-12/whatsapp-image-2024-12-22-at-18.11.29_0c39abc2-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बोकारो:</strong> SJAS सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल द्वारा बोकारो सेक्टर-4 में नि:शुल्क मेडिकल कैम्प का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 250+ लोगों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. इस कैम्प में लोगों का “ईसीजी, सुगर, बीपी, SPO2, आरबीएस, हाइट और वेट मापा गया.” इसके साथ ही अस्पताल की ओर से ज़रूरतमंद लोगों को आवश्यक दवाइयाँ और ORS भी मुफ़्त में वितरित की गईं. अस्पताल के तरफ़ से कुल 4 नर्स, 2 आईसीयू टेक्निशियन, और 15 अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे. </p>
<p style="text-align:justify;">बोकारो SAIL द्वारा 'हैप्पी स्ट्रीट' का एक माह का मेला आयोजित किया गया है, जिसमे हर रविवार को SJAS सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल द्वारा नि: शुल्क मेडिकल कैम्प आयोजित किया जाएगा. इस अवसर पर अस्पताल के निदेशक उपस्थित थे, लोगों को अस्पताल की सेवाओं के बारे में जानकारी दी और उन्हें आश्वस्त किया कि SJAS अस्पताल झारखंड का सबसे प्रगतिशील अस्पताल है, जहां न्यूनतम वर्ग के लोग भी उपचार का लाभ आसानी से उठा सकते हैं. अस्पताल में 24*7 सभी आपातकालीन सेवाओं के 40 डॉक्टर पूर्णकालिक उपलब्ध है.  </p>
<p style="text-align:justify;">SJAS सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में cashless/Incurance facilities भी अब शुरू कर दी गई है. अन्य सभी जानकारी के लिए 8405000610 पर संपर्क करे.  </p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>बोकारो</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/bokaro/free-medical-camp-organized-by-sjas-super-specialty-hospital-in/article-13541</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Dec 2024 20:00:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
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            <item>
                <title>बाबूलाल मरांडी ने आदिम जनजाति के लोगों की असमय हो रही मौत को लेकर सीएम हेमंत सोरेन को लिखा पत्र </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[झारखण्ड में समय पर ईलाज न हो पाने के कारण आए दिन प्रदेशवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। झारखण्ड का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लूट-खसोट में लिप्त है और पैसे लेकर डॉक्टरों को मनचाहा पोस्टिंग देकर स्वास्थ्य सेवाएँ को प्रभावित कर रही है]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/politics/babulal-marandi-wrote-a-letter-to-cm-hemant-soren-regarding/article-11237"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/fotojet-(23)-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>रांची:</strong> पूर्व मुख्यमंत्री व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हाल ही में साहिबगंज सदर अस्पातल में डॉक्टरों के नहीं रहने पर आदिम जनजाति की 6 वर्षीय मासूम की मौत और जामताड़ा में 22 दिनों में आदिम जनजाति समाज के 10 लोगों की अचानक मौत होने की घटनाओं को लेकर पत्र लिखा है। अपने पत्र में बाबूलाल मरांडी ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा है कि सरकार को इन घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए और दोषी व लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।पत्र इस प्रकार है:   </div>
<div> </div>
<div>माननीय मुख्यमंत्री जी,</div>
<div>विषय - झारखण्ड में ईलाज के अभाव में आए दिन विलुप्त हो रहे आदिम जनजाति  समाज के लोगों की हो रही मृत्यु के संदर्भ में।</div>
<div> </div>
<div>आपको अवगत कराना चाहता हूँ कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएँ का हाल दिन-ब-दिन बदतर होता जा रहा है। आए दिन आदिवासी ख़ासकर विलुप्त हो रहे आदिम जनजाति समाज के भाई-बहनों की मृत्यु ईलाज के अभाव में हो रही है लेकिन प्रशासन जिम्मेदारी लेने के बजाय एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहा है।</div>
<div>हालिया घटना साहिबगंज सदर अस्पताल की है जहाँ सिमरिया गांव निवासी आदिम जनजाति पहाड़िया मथियम मालतो की छह साल की बेटी गोमदी पहाड़िन जो डेंगू से पीड़ित थी, ईलाज के अभाव में अपनी जान गंवा दी। पिता डॉक्टरों की तलाश में इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक भागते रहे, परन्तु कहीं भी डॉक्टर नहीं मिले, जिसके कारण पिता की गोद में ही बच्ची ने अपना दम तोड दिया। यह सिर्फ एक घटना नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>ऐसी ही दूसरी घटना दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखण्ड के कुंडा पहाड़ी गांव में हुई जहाँ विलुप्तप्राय पहाड़िया जनजाति की 19 वर्षीय गर्भवती महिला प्रिंसिका महारानी की समय पर एंबुलेंस और ईलाज न मिल पाने के कारण जान चली गई। तीसरी घटना जामताड़ा जिले के करमाटांड प्रखण्ड के नेंगराटांड गांव की है जहाँ अज्ञात बीमारी से पिछले 22 दिनों के अंदर आदिम जनजाति (पहाड़िया) परिवार के 8 सदस्यों की मौत हो गई है। अभी भी 10 से अधिक लोग अलग अलग बीमारी से ग्रसित हैं।</div>
<div> </div>
<div>झारखण्ड में समय पर ईलाज न हो पाने के कारण आए दिन प्रदेशवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। झारखण्ड का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लूट-खसोट में लिप्त है और पैसे लेकर डॉक्टरों को मनचाहा पोस्टिंग देकर स्वास्थ्य सेवाएँ को प्रभावित कर रही है। दूर-दराज के स्वास्थ्य केन्द्रों पर डॉक्टरों का पदस्थापन नहीं रहने के कारण मरीज ईलाज नहीं करा पा रहे हैं। अतः आपसे अनुरोध है कि उपर्युक्त घटनाओं का संज्ञान लेते हुए एक उच्च स्तरीय जाँच कमेटी का गठन कर मौत के रहस्यों को सार्वजनिक करें तथा संलिप्त व्यक्ति/संस्था/ डॉक्टरों/अस्पतालों पर कड़ी करवाई करें साथ ही साथ झारखण्ड के सभी लोगों के लिए ईलाज के पुख्ता इंतजाम कराने हेतु समुचित कार्रवाई करेंगे।</div>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>दुमका</category>
                                            <category>जामताड़ा</category>
                                            <category>साहिबगंज</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Sep 2024 19:42:42 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Jharkhand]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>कोडरमा के बालिका आवासीय विद्यालय में आत्महत्या रोकथाम के विषय पर कार्यशाला का आयोजन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>कोडरमा: </strong>राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के निमित झारखण्ड बालिका आवासीय विद्यालय, डोमचांच में छात्राओं के बीच आत्महत्या रोकथाम के विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के डाॅ. आशीष राज ने कहा कि आत्महत्याओं का एक बड़ा हिस्सा मानसिक बीमारियों जैसे अवसाद, मादक द्रव्यों के सेवन और मनोविकृति के कारण होता है साथ ही महिलाओं में अवसाद और आत्महत्या से होने वाली मौत के बीच संबंध अधिक देखा गया है।</p>
<p>वहीं राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सिद्धान्त ओहदार ने आत्महत्या रोकथाम के विभिन्न तरीकों के बारे में</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/workshop-on-suicide-prevention-organized-in-girls-residential-school-of/article-11232"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/whatsapp-image-2024-09-11-at-18.35.02_11239f8c-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोडरमा: </strong>राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के निमित झारखण्ड बालिका आवासीय विद्यालय, डोमचांच में छात्राओं के बीच आत्महत्या रोकथाम के विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के डाॅ. आशीष राज ने कहा कि आत्महत्याओं का एक बड़ा हिस्सा मानसिक बीमारियों जैसे अवसाद, मादक द्रव्यों के सेवन और मनोविकृति के कारण होता है साथ ही महिलाओं में अवसाद और आत्महत्या से होने वाली मौत के बीच संबंध अधिक देखा गया है।</p>
<p>वहीं राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सिद्धान्त ओहदार ने आत्महत्या रोकथाम के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकरी साझा करते हुए बताया कि सभी को समस्याओं पर खुल कर बात करनी चाहिए, पढ़ाई के दौरान का सम्पूर्ण समय प्रत्येक कार्य के लिए निर्धारित कर, सामाजिक अलगाव और विघटन को कम कर, मानसिक विकारों का ईलाज सर्व सुलभ कर, कीटनाशकों की बिक्री को विनियमित कर, मनोवैज्ञानिक प्रेरक सत्र के साथ ही ध्यान और योग को बढ़ावा देकर आत्महत्या को नियंत्रित किया जा सकता है. इस मौके पर विद्यालय की शिक्षिकायें उपस्थित थीं।</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कोडरमा</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Sep 2024 18:39:54 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Kumar Ramesham]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>रांची सदर अस्पताल: असाध्य रोग कैंसर का इलाज करने वाला बना झारखंड का पहला सदर अस्पताल </title>
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                        <![CDATA[15 दिन पहले सदर अस्पताल हुआ सूचीबद्ध, मुँह के कैंसर के चौथे स्टेज के एक गंभीर मरीज का ट्रीटमेंट हुआ शुरू,4.5 लाख की इम्यूनोथेरेपी दवा फ्री में दी गई ]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/ranchi-sadar-hospital-becomes-the-first-sadar-hospital-of-jharkhand/article-11227"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/sadar-ranchi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>डेस्क :</strong> रांची सदर अस्पताल में अब गंभीर बोम्ली उपचारानी अस्य रोग योजना के तहत कैंसर रोगियों का इलाज होगा। यह राज्य का पहला जिला अस्पताल है, जिसे योजना के तहत सूचीबद्ध किया गया। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि 15 दिन पूर्व सदर अभ्पताल को सरकार ने सूचीबद्ध किया है। अब माहां केंवर के इलाज के लिए सरकार की ओर से मरीजों को 10 लाख तक की आर्थिक मदद की जाएगी। इससे गरीब रोगियों को महगे खर्च से राहत मिलेगी। जिक्की मार्षिक आप 72 हजार से कम होगी, वे इस योजना का लाभ लेने के लिए सीधे सिविल सर्जन कार्यालय में आलेदन कर सकते हैं। आवेदन के कद<br />प्रमाण पत्रों की जांच होगी। सब ठीक रहा हो अविलंब राशि का भुगतान अस्पताल को होगा। सिविल सर्जन ने बताया कि अस्पताल सूचीबद्ध होते ही मुंह के कैंसर से पीड़ित एक रोगी को स्वीकृत राशि का भुगतान किया जा चुका है।</p>
<p>मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत सदर अस्पताल में चौथे स्टेज के मुंह के कैंसर से पीड़ित रोगी का इलाज चल रहा है। उसकी स्थिति गंभीर है। कैंसर विशेषज्ञ डॉ. गुंजेश कुमार सिंह की देख- रेख में इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचा था। इस स्थिति के रोगियों को इम्यूनोथेरेपी के साथ कीमोथेरेपी का कॉम्बिनेशन चलाया जाता है। इस मरीज को 2 वॉइल इम्यूनोथेरेपी की दवा उपलब्ध कराई गई है। जिसकी कीमत करीब 4.5 लाख रुपए है। लेकिन योजना के तहत रोगी को यह दवा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई है।</p>
<h3><strong>कैंसर विभाग में हमेशा 35 से 40 मरीज भर्ती रहते हैं</strong></h3>
<p>सदर अस्पताल में कैंसर विभाग करीब आठ माह पहले शुरू किया गया है। 14 बेड से शुरू हुए विभाग में मरीज की संख्या बढ़ने पर 19 बेड किया गया। इसके बाद संख्या बढ़ाकर 26 की गई। अब 43 बेड पर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। सिविल सर्जन ने बताया कि हमेशा 90% बेड भरे रहते हैं। अस्पताल में ओटी का सारा सेटअप किया जा चुका है। सर्जरी के जरूरी उपकरण इंस्टॉल किए जा चुके हैं। 5वें तल्ले में आईसीयू है। जिसमें वेंटिलेटर, एचएफएनसी समेत अन्य उपकरण लगाए जा चुके हैं।</p>
<h3><strong>हर तरह के कैंसर के इलाज की सुविधा</strong></h3>
<p>सिविल सर्जन ने बताया कि सदर अस्पताल में वर्तमान में एक मेडिकल ऑन्कोलोजिस्ट डॉ. गुंजेश कुमार सिंह के अलावा दो कैंसर सर्जन डॉ. सुरेश एम. और डॉ. अजय विद्यार्थी और ब्लड कैंसर के लिए डॉ. अभिषेक रंजन हैं। सदर अस्पताल में सिर्फ डॉ. दिन गुंजेश अगस्त 2024 तक 543 कीमोथेरेपी पूरी कर चुके हैं। यहां हर तरह के ब्लड कैंसर, ग्लैंड कैंसर, नेक कैंसर समेत अन्य के उपचार की सुविधा है।</p>
<h3><strong>रिम्स के  बाद अब कैंसर ट्रीटमेंट सदर अस्पताल में भी </strong></h3>
<p>कैसर ट्रीटमेंट के मामले में जिला अस्पताल अब रिम्स को टक्कर दे रहा है। रिम्स में मरीज को पहुंचने के बाद गंभीर मरीज को इमरजेंसी में भर्ती होने के बाद घंटों इंतजार करना पड़ता है। चूंकि, रिम्स में कैंसर विशेषज्ञ की इमरजेंसी ड्यूटी नहीं लगाई जाती। इसलिए कई घंटे के बाद मरीज को कैंसर विभाग में शिफ्ट किया जाता है। वहीं, सदर अस्पताल में सुविधाएं मिलने से हर दिन कैंसर रोगी पहुंच रहे हैं। यहां ओपीडी में रिम्स के ऑन्कोलॉजी विभाग से ज्यादा मरीज आ रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Sep 2024 17:53:30 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Nivedita Jha]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>जगन्नाथपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जिप सदस्य मानसिंह तिरिया के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अविलंब चिकित्सा पदाधिकारी बहाल कराया जाए अन्यथा सभी गांव के हजारों धरना प्रदर्शन कर सरकार को अवगत कराएंगे या जगन्नाथपुर मुख्य सड़क जाम करेंगे। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/protest-demonstration-under-the-leadership-of-zip-member-mansingh-tiriya/article-11223"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/whatsapp-image-2024-09-11-at-14.33.53_fd81ec21-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>चक्रधरपुर:</strong> आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के नेता सह जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया के नेतृत्व में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगन्नाथपुर में डॉक्टर के अभाव में मरीजों की मौत होने एवं डॉक्टर बाहल करने की मांग को लेकर सिविल सर्जन के विरोध में पदयात्रा निकाली गई तथा सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मानसिंह तिरिया नें कहा कि अचानक प्रभारी का प्रतिनियुक्ति रद्द करने से पहले डॉक्टर की व्यवस्था करना चाहिए थी। ऐसा नहीं करने से डॉक्टर के अभाव में बीते चार दिनों में दो की मौत हो गई,जिसमें तीन माह का नवजात भी शामिल है। सोमवार को जब उसे सांस लेने से संबंधित समस्या के कारण अस्पताल लाया गया तो उसे देखने वाला कोई नहीं था.जब आज मैं आया अस्पताल तो तीन दिन बाद उसे रेफर किया गया। सीएस की लापरवाही के कारण यह घटना हुई है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री के अलावा डीसी, एसडीओ और सीएस के नाम दंत चिकित्सक को मांग पत्र सौंपा गया।</p>
<p>ज्ञात हो की जगन्नाथपुर मलहा टोली से पैदल चलकर स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बैठकर सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया गया. वहीं असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सक पदाधिकारी, चाईबासा पश्चिमी सिंहभूम के द्वारा बिना चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराये दिनांक 6/9/2024 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगन्नाथपुर के चिकित्सा प्रभारी का प्रतिनियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टिकोण से तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया। और आज तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगन्नाथपुर में स्थाई चिकित्सक नहीं होने से दिनांक 7/09/2024 को मृतक का नाम-दामु सिकु  उम्र-45, पिता -बुधराम सिंकु, गांव -जैरपी, प्रखंड हट गाम्हरिया   के रहने वाले एवं दिनांक11/09/ 2024 को   जामुना गोप पति पुण चन्द गोप, गांव-छोटा माहुलडिया, टोला- डिपासाई, प्रखंड जगन्नाथपुर, जिला-पश्चिम सिंहभूम झारखंड के स्थाई निवासी है जामुना गोप के शिशु बच्चे जन्म होने के घंटे बाद इलाज के अभाव में नहीं रहे,</p>
<img src="https://samridhjharkhand.com/media/2024-09/whatsapp-image-2024-09-11-at-14.33.53_c6308175-(1).jpg" alt="WhatsApp Image 2024-09-11 at 14.33.53_c6308175 (1)" width="1200" height="720"></img>
डॉक्टर की बहाली को लेकर ज्ञापन सौंपते जिप सदस्य

<p>सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर के अभाव में आए दिन हो रहे मरीजों की मृत्यु होने को लेकर मुख्यमंत्री से मांग है कि</p>
<p>वर्तमान हालात को देखते हुए स्थाई चिकित्सा पदाधिकारी  का अभिलंब बहाल कराया जाए।<br />प्रसूति महिला विशेषज्ञ (गायनो) का बहाल कराया जाए। <br />चाईल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर की बहाली हो। <br />अस्पताल में अल्ट्रासाउंड एवं एक्सरे मशीन की व्यवस्था कराई जाए<br />इस अनुमंडल क्षेत्र को टाटा कंपनी द्वारा सामान्य एवं गंभीर बीमारियों का इलाज का सेवा दे।</p>
<p>इन मांगों पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेते हुए मरीज का इलाज बेहतर हो सके और इस स्वास्थ्य केंद्र में सैकड़ो मरीज जगन्नाथपुर, नोवामुन्डी ,हाटगम्हरिया के अलावे टोंटो से भी मरीज आते हैं और इलाज नहीं होने से  बैरंग लौट जाते हैं सुदूरवर्ती जंगल अंदर के लोग किसी तरह इलाज करने आते हैं। ऐसे में जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अविलंब चिकित्सा पदाधिकारी बहाल कराया जाए अन्यथा सभी गांव के हजारों धरना प्रदर्शन कर सरकार को अवगत कराएंगे या जगन्नाथपुर मुख्य सड़क जाम करेंगे। इस मौके पर नरसिंह पुरती, कैरा तिरिया, मेघनाथ लागुरी, लगो लागुरी, गंगाधर सिंकु, दिनेश सिंकु आदि मौजूद थे।</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>चाईबासा</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Sep 2024 15:11:43 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[संतोष वर्मा]]>
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                <title>आत्महत्या के वृद्धि मामले में झारखंड देश में सातवें स्थान पर, प्रति लाख छह लोग अपनी जिंदगी से हो रहे निराश</title>
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                        <![CDATA[संस्थान के टेलीमेडिसिन सेंटर में भी 45 कॉल आये थे, यहां लोग 9471136697 पर फोन कर 24 घंटे ऑन कॉल की सुविधा ले सकते है. 14499 तथा 18003454060 पर कार्य अवधि के दौरान फ़ोन कर मनोवैज्ञानिक सलाह ली जा सकती है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/in-jharkhand-about-6-people-per-1-lakh-population-are/article-11202"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/sucide-prevention-day.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>डेस्क: </strong>आप जैसे हैं वैसे ही सर्वश्रेष्ठ हैं, किसी की नकल ना करें. आप अपनी चिंता करें. लोग क्या कहेंगे, इसकी फिक्र ना करें. मनुष्य जीवन अनमोल है, इसे व्यर्थ ना गवायें. वर्तमान ही सबकुछ है. जिंदगी अभी और यही है. इसी क्षण में है. सुख-दुख कुछ भी नहीं ठहरता, यह भी बीत जायेगा. -ओशो</p>
<p>विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस एक जागरूकता दिवस है जो हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य 2003 से दुनिया भर में विभिन्न गतिविधियों के साथ आत्महत्याओं को रोकने के लिए विश्वव्यापी प्रतिबद्धता और कार्रवाई प्रदान करना है।झारखंड में आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं चिंता की बात है. राजधानी (रांची) देश के उन पांच शहरों में शामिल हैं, वर्ष 2022 में 2021 की तुलना में आत्महत्या के मामले (प्रतिशत में) बढ़े हैं. रांची से ऊपर वाराणसी, प्रयागराज, ग्वालियर और आगरा है. इसका जिक्र नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजे आंकड़े में है. राजधानी में वर्ष 2021 में 104 लोगों ने आत्महत्या की थी, वहीं 2022 में यह आंकड़ा 187 तक पहुंच गया. यह वृद्धि करीब 79 फीसदी है. वहीं झारखंड में 2022 में 2181 लोगों ने आत्महत्या को, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 1825 था. जबकि बिहार में इस अवधि में सिर्फ 720 लोगों ने जिंदगी से हार मान ली. आत्महत्या के वृद्धि मामले (प्रतिशत में) में झारखंड पूरे देश में सातवें स्थान पर है. वर्ष 2021 की तुलना में 2022 में करीब 19.5 फीसदी की वृद्धि हुई है, झारखंड में प्रति एक लाख आबादी पर 5.6 लोग आत्महत्या कर रहे हैं. हालांकि यह राष्ट्रीय औसत (12.4 फीसदी) नीचे है. </p>
<h3><strong>आकड़ों के अनुसार झारखंड में ये आंकड़े चिंताजनक हैं -  </strong></h3>
<p>&gt; आत्महत्या के वृद्धि मामले में (प्रतिशत) झारखंड देश में सातवें स्थान पर<br />&gt; 2021 की तुलना में 2022 में आत्महत्या की दर राजधानी में 79 फीसदी बढ़ी<br />&gt; राज्य में एक साल में  824  छात्रों ने  की आत्महत्या<br />&gt;1080 अविवाहित तथा 973 विवाहित लोगों ने किया सुसाइड झारखंड में<br />&gt; बेरोजगारी के कारण राज्य में 188 लोगों ने दी जान<br />&gt; ड्रग और अल्कोहल  मामले में 87 लोगों ने आत्महत्या की<br />&gt; संपत्ति विवाद में  राज्य में 43 लोगों ने सुसाइड किया<br />&gt;  लव अफेयर्स मामले में 678 लोगों ने की आत्महत्या, इसमें 436 पुरुष और 242 महिलाएं<br />&gt; एक्सट्रा मैरिटल अफेयर्स मामले में 131 ने अपनी जान दी<br />&gt; परीक्षा में फेल होने पर 174 विद्यार्थियों ने की आत्महत्या<br />&gt; बीमारी के कारण 201 लोगों ने किया सुसाइड <br />&gt; पारिवारिक विवाद के कारण 265 ने जान दी <br />&gt; रांची में लव अफेयर के कारण आत्महत्या 48 मामले <br />&gt; झारखंड में  वर्ष 2021 की तुलना में  करीब 19. 5 फीसदी की विद्धि हुई है। </p>
<h3><strong>प्रति लाख में 6 लोगों की खुदकुशी की स्थिति चिंताजनक</strong></h3>
<p> झारखंड में आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं चिंता की बात है. राजधानी (रांची) देश के उन पांच शहरों में शामिल हैं, वर्ष 2022 में 2021 की तुलना में आत्महत्या के मामले (प्रतिशत में) बढ़े हैं. रांची से ऊपर वाराणसी, प्रयागराज, ग्वालियर और आगरा है. इसका जिक्र नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजे आंकड़े में है. राजधानी में वर्ष 2021 में 104 लोगों ने आत्महत्या की थी, वहीं 2022 में यह आंकड़ा 187 तक पहुंच गया. यह वृद्धि करीब 79 फीसदी है. वहीं झारखंड में 2022 में 2181 लोगों ने आत्महत्या को, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 1825 था. जबकि बिहार में इस अवधि में सिर्फ 720 लोगों ने जिंदगी से हार मान ली. आत्महत्या के वृद्धि मामले (प्रतिशत में) में झारखंड पूरे देश में सातवें स्थान पर है. वर्ष 2021 की तुलना में 2022 में करीब 19.5 फीसदी की वृद्धि हुई है, झारखंड में प्रति एक लाख आबादी पर 5.6 लोग आत्महत्या कर रहे हैं. हालांकि यह राष्ट्रीय औसत (12.4 फीसदी) नीचे है.</p>
<h3><strong>पढ़ाई की उम्र में ही युवा जीवन से हो रहे निराश</strong></h3>
<p>वर्ष 2022 में झारखंड में 824 विद्यार्थियों ने आत्महत्या कर ली. प्रेम. प्रसंग में 678 लोगों ने अपनी जान दे दी, जिसमें 432 पुरुष और 242 महिलाएं शामिल हैं. राजधानी रांची में लव अफेयर्स से संबंधित आत्महत्या के 48 मामले दर्ज किये गये थे, जिसमें 36 पुरुष और 12 महिलाएं थीं. वहीं बेरोजगारी के कारण झारखंड के 188 लोगों ने अपनी जान दे दी. इसमें रांची में 13 मामले दर्ज किये गये थे. वहीं, नशे की लत के कारण झारखंड में 87 लोगों ने आत्महत्या की. इसमें 70 पुरुष और 17 महिलाएं हैं. वहीं परीक्षा में असफलता के कारण रांची में 31 विद्यार्थियों ने आत्महत्या कर ली थी. राजधानी में एक्सट्रा मैरिटल अफेयर्स के कारण भी 25 लोगों ने अपनी जान दे दी. वहीं शादी संबंधी विवाद के कारण पूरे राज्य में 356 और राजधानी में 51 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी. आत्महत्या करनेवालों में 1080 अविवाहित थे.</p>
<h3><strong>रिनपास में औसतन रोजाना 8 लोगो ने फोन पर ली मदद</strong></h3>
<p>रिनपास के मोबाइल क्लिनिक हेल्पलाइन में पिछले एक वर्ष में 2814 कॉल आये. इसमें कई लोगों ने आत्महत्या की प्रवृत्ति बतायी, जिन्हें सलाह दी गयी. संस्थान के टेलीमेडिसिन सेंटर में भी 45 कॉल आये थे, यहां लोग 9471136697 पर फोन कर 24 घंटे ऑन कॉल की सुविधा ले सकते है. 14499 तथा 18003454060 पर कार्य अवधि के दौरान फ़ोन कर मनोवैज्ञानिक सलाह ली जा सकती है.</p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 17:11:51 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Nivedita Jha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में एमपॉक्स? विदेश से लौटे व्यक्ति के रूप में पहला संदिग्ध मामला सामने आया</title>
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                        <![CDATA[Monkeypox virus: भारत में संदिग्ध मंकीपॉक्स संक्रमित शख्स की पहचान की गई है. फिलहाल उसे एक अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया है. वहीं, मंकीपॉक्स वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड 6 से 13 दिन तक होता है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/first-suspected-case-of-mpox-in-india-as-a-person/article-11167"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/mpox-22.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>डेस्क: </strong> केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि हाल ही में विदेश से यात्रा करके आए एक युवा पुरुष मरीज को एमपॉक्स (मंकीपॉक्स) संक्रमण का संदिग्ध मामला माना गया है। मरीज को आइसोलेशन के लिए स्पेशीफाइड अस्पताल में अलग रखा गया है. फिलहाल, उसकी हालत स्थिर है. एमपॉक्स की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए रोगी के सैंपल का टेस्ट किया जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा, "इस मामले का विकास एनसीडीसी द्वारा किए गए पहले के जोखिम आकलन के अनुरूप है और इसमें किसी भी तरह की अनावश्यक चिंता का कोई कारण नहीं है।"</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/HealthForAll?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#HealthForAll</a><br /><br />A suspected Mpox case is currently under investigation.<br /><br />The patient is put under isolation. <br /><br />No cause for alarm.<a href="https://t.co/C7OnWCZS5e">https://t.co/C7OnWCZS5e</a></p>
— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) <a href="https://twitter.com/MoHFW_INDIA/status/1832727185766965649?ref_src=twsrc%5Etfw">September 8, 2024</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<h3><strong>मंकीपॉक्‍स से निपटने के लिए किए जा रहे उपाय</strong></h3>
<p>देश इस तरह के अलग-थलग यात्रा से संबंधित मामले से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी संभावित जोखिम को प्रबंधित करने और कम करने के लिए कड़े उपाय किए गए हैं. जिसके लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्‍यों को जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं. साथ ही राज्‍यों को कोरोना वायरस की चुनौती के बीच अलर्ट रहने के लिए कहा गया है.</p>
<h3><strong>जानिए कैसे फैलता है मंकीपॉक्‍स?</strong></h3>
<p>पिछले दिनों हुई स्वास्थ्य मंत्रालय की बैठक में यह बात सामने आई थी कि मंकीपॉक्स का सामान्यतः 2-4 सप्ताह का संक्रमण होता है और रोगी आमतौर पर सहायता संबंधी प्रबंधन से ठीक हो जाते हैं. संक्रमित व्यक्ति के साथ लंबे समय तक निकट संपर्क से और आमतौर पर यौन संपर्क, शरीर, घाव के तरल पदार्थ के साथ सीधे संपर्क या संक्रमित व्यक्ति के दूषित कपड़े, चादर का इस्तेमाल करने से होता है. </p>
<h3><strong>116 देशों से 99 हजार से ज्यादा मंकीपॉक्स के केस- WHO</strong></h3>
<p>बता दें कि, डब्ल्यूएचओ ने इससे पहले साल जुलाई 2022 में मंकीपॉक्स को पीएचईआईसी घोषित किया था. जिसके बाद में मई 2023 में इसे रद्द कर दिया था. 2022 से वैश्विक स्तर पर डब्ल्यूएचओ ने 116 देशों से मंकीपॉक्स के कारण 99,176 मामले और 208 लोगों की मौत होने की बात कही थी.</p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/health/first-suspected-case-of-mpox-in-india-as-a-person/article-11167</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Sep 2024 17:00:25 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Nivedita Jha]]>
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            <item>
                <title>RIMS: 34 करोड़ के सालाना खर्च पर 1447 आउटसोर्स कर्मचारी की बहाली की तैयारी </title>
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                        <![CDATA[आउटसोर्स एजेंसियों के चयन के लिए रिम्स प्रबंधन को और से टेंडर निकला गया है। अभी रिम्स में दो आउटसोर्स एजेंसियों मैनपावर सप्लाई कर रही हैं। नई एजेंसी के माध्यम से 1455 पदों पर कर्मचारियों की सेवा ली जाएगी। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/preparation-for-reinstatement-of-1447-outsourced-employees-at-an-annual/article-11165"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/rims2-07091.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची :</strong> राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में अब मार्शल  तैनात होंगे। इसे लेकर प्रबंधन ने तैयारी शुरू कर दी है। पूरे अस्पताल के लिए 14 मार्शल को रखा जाना है, जो सुरक्षा संबंधित विकट स्थिति को नियंत्रित करने की भूमिका में होंगे। इसके अलावा कुल 14 तरह के मैनपावर  बढ़ाया जाएगा, जिसके लिए करीब 34 करोड़ रुपये का सलाना बजट है। ये सभी आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम  से रखे जाएंगे। आउटसोर्स एजेंसियों के चयन के लिए रिम्स प्रबंधन को और से टेंडर निकला गया है। अभी रिम्स में दो आउटसोर्स एजेंसियों मैनपावर सप्लाई कर रही हैं। नई एजेंसी के माध्यम से 1455 पदों पर कर्मचारियों की सेवा ली जाएगी। </p>
<h3><strong>ऑडियोलाजिस्ट की सेवा</strong></h3>
<p>दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार रिम्स में ऑडियोलाजिस्ट की सेवा भी एजेंसी के माध्यम से ली जाए‌गी। जिसके लिए मासिक मानदेय 35400 रुपये रखा गया है। अभी तक ऑडियोलाजिस्ट के नहीं रहने वजह से मूक-बधिरों को प्रभावित हो रही थी। इसके अलावा हाल में ही जब नीट परीक्षा में ऐसे विशेष बच्चों की जांच नहीं होने के वजह से सभी को देवघर एम्स में जांच कराने की सलाह दी गई थी। जिसके बाद रिम्स प्रबंधन ने जल्द ही ऑडियोलाजिस्ट रखने की बात कही थी। फिलहाल एक ऑडियोलाजिस्ट की नियुक्ति होनी है। साथ ही 14 ग्लोफ कार्ट डाइवर की भी सेवा ली जानी है, जिसके लिए वेतनमान 20 हजार रुपये रखा गया है।</p>
<p>दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से रिम्स में होने वाली भर्तियों में सबसे अधिक मल्टी टास्क की बहाली होगी। लगभग 600 मल्टी टॉस्क स्टाफ की सेवा आउटसोर्स से ली जाएगी। जबकि सेमी स्किल्ड स्टाफ के लिए 200 पद रखे गए हैं। लिफ्ट ऑपरेटर के 110 पद, कंप्यूटर ऑपरेटर के 200 पद ,मेडिकल फील्ड टेक्निशियन के 100 पदों पर और हॉस्पिटल मैनेजर के चार कर्मियों की बहाली होगी। </p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Sep 2024 16:25:43 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Nivedita Jha]]>
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                <title>राष्ट्रीय पोषण माह विशेष: 74 फीसदी भारतीय नहीं उठा सकते स्वस्थ आहार का खर्च, 39% लोगों में पोषक तत्वों की कमी</title>
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                        <![CDATA[पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को बढ़ावा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जाना जाता है। एक स्वस्थ और पौष्टिक आहार का मतलब सिर्फ़ कुछ खाद्य पदार्थों को सीमित करना नहीं है, बल्कि सही मात्रा में पोषक तत्वों से भरपूर कई विकल्पों को अपनाना है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/national-nutrition-month-special-74-percent-indians-cannot-afford-a/article-11139"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/national-nutrition-month-24.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची : </strong>प्रत्येक साल 1 से 30 सितंबर तक मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पोषण माह पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को बढ़ावा देने के जाना जाता है। खाद्य सुरक्षा 2023 रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 74% भारतीय आबादी स्वस्थ आहार का खर्च नहीं उठा सकती है तो वहीं 39% लोग पोषक तत्वों की कमी से पीड़ित हैं। ऐसे में इस वर्ष मनाए जा रहे राष्ट्रीय पोषण माह का उद्देश्य लोगों को संतुलित आहार के महत्व के बारे में शिक्षित करना और समुदायों में स्वस्थ खाने की आदतों को प्रोत्साहित करना है। इस वर्ष की थीम भी ‘सभी के लिए पौष्टिक आहार’ है, जो सतत विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों का समर्थन करती है। यह ऐसे आहार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है जो जीवन के सभी चरणों में लोगों की पोषण संबंधी ज़रूरतों को पूरा करता है।</p>
<p>पोषण माह की शुरुआत मार्च 1973 में हुई थी, जब अमेरिकन डायटेटिक एसोसिएशन ने पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक अभियान शुरू किया था। इस पहल ने बाद में भारत सहित दुनिया भर के देशों में ऐसे आयोजनों को प्रेरित किया, जहां इसे 1982 में केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कुपोषण से लड़ना था, विशेष रूप से कमजोर आबादी के बीच और संतुलित आहार प्रथाओं को बढ़ावा देना था।</p>
<p>राष्ट्रीय पोषण माह सूचित आहार विकल्पों को अपनाकर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की याद दिलाता है। एक स्वस्थ और पौष्टिक आहार का मतलब सिर्फ़ कुछ खाद्य पदार्थों को सीमित करना नहीं है, बल्कि सही मात्रा में पोषक तत्वों से भरपूर कई विकल्पों को अपनाना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करके, हम एक संतुलित आहार सुनिश्चित कर सकते हैं जो समग्र स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती का समर्थन करता है।</p>
<h3><strong>पोषण का क्या महत्व है?</strong></h3>
<p>अगर हम इसे सरल भाषा में समझें तो यह स्वास्थ्य को बनाए रखने, बीमारियों को रोकने और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करता है।<br />•    पोषण से शरीर का विकास होता है और वह ठीक से काम करता है।<br /> <br />•    पोषण से शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है और प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत होती है।<br /> <br />•    पोषण से बीमारियों का खतरा कम होता है और पुरानी बीमारियों से बचाव होता है।<br /> <br />•    पोषण से स्वस्थ गर्भावस्था होती है और विकासशील बच्चे को ज़रूरी पोषक तत्व मिलते हैं।<br /> <br />•    पोषण से मोटापे जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।<br /> <br />•    पोषण से दिल और दिमाग स्वस्थ रहते हैं। <br /> <br />•    पोषण से पेट की समस्याओं से बचा जा सकता है।</p>
<p>राष्ट्रीय पोषण माह 2024 एक अनुस्मारक है कि अच्छा पोषण महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से भारत जैसे देश में, जहां कुपोषण एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। खाद्य सुरक्षा 2023 रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 74% भारतीय आबादी स्वस्थ आहार का खर्च नहीं उठा सकती है, और 39% लोग पोषक तत्वों की कमी से पीड़ित हैं। इससे पोषण शिक्षा और स्वस्थ भोजन विकल्पों को बढ़ावा देने वाली पहल की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है। पोषण पर सरकार द्वारा अब तक की गई पहलों में से एक मार्च 2018 में शुरू किया गया पोषण अभियान है, जिसका उद्देश्य बच्चों और महिलाओं में बौनापन, दुर्बलता और एनीमिया को कम करना है. इसके अतिरिक्त, सितंबर में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पोषण माह, पोषण जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य जांच और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों का आयोजन करके इस प्रयास को पूरा करता है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>रांची</category>
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                <pubDate>Sat, 07 Sep 2024 13:48:38 +0530</pubDate>
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