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                <title>Dr. Renu Bose (Acting Vice-Chancellor) - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Dr. Renu Bose (Acting Vice-Chancellor) RSS Feed</description>
                
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                <title>Hazaribagh News: विनोबा भावे विवि में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई, ड्यूटी से गायब 17 कर्मचारियों को शो-कॉज</title>
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                        <![CDATA[विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग की कुलसचिव डॉ. प्रणिता ने औचक निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाए गए 17 गैर-शिक्षण कर्मचारियों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया है। साथ ही, उन्होंने प्रभारी कुलपति डॉ. रेणु बोस को कुलपति कक्ष में बैठने से रोकने की घटना को अमर्यादित बताते हुए एक अनुबंधित कर्मी पर गोपनीयता भंग करने का आरोप लगाया है। डॉ. प्रणिता ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/vbu-hazaribagh-show-cause-notice-to-17-employees/article-20180"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/6fccdad5-de2f-42e0-8b55-6264ab561df4_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हजारीबाग:</strong> विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग प्रशासन में 17 शिक्षककेत्तर कर्मचारियों को कारण बताओ (Show cause) नोटिस जारी किया है। इसमें से ज्यादातर लोग औचक निरीक्षण के दौरान अपने-अपने दफ्तर में बिना छुट्टी लिए अनुपस्थित पाए गए थे। इस संबंध में जानकारी देते हुए रविवार को कुलसचिव डॉ प्रणिता ने बताया कि कुछ कर्मचारी समय पर नहीं आते हैं और बिना सूचना के अनुपस्थित रहते हैं। इसकी मौखिक शिकायत लगातार मिल रही थी। मौखिक शिकायत पर कार्यवाही करने से पूर्व मैंने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जो लोग बिना लिखित सूचना के अनुपस्थित पाए गए उनसे स्पष्टीकरण पूछा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यह गलत परिपाटी है और इससे विश्वविद्यालय के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। साथ ही ऐसे लोगों के कारण समय पर आकर निष्ठा के साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों का भी मनोबल टूटता है। विश्वविद्यालय का कोई भी कार्य प्रभावित होता है तो उसका सीधा नुकसान हमारे विद्यार्थियों को होता है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों से पूछा गया है कि उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों ना किया जाए। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए तीन दोनों का समय दिया गया है। उनका उत्तर संतोषजनक नहीं होने से इस मसले पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति को अवगत कराया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही उन्होंने बताया कि पिछले दिनों प्रभारी कुलपति डॉ रेणु बोस को कुलपति कक्ष में नहीं बैठने देने की घटना से वह काफी आहत है। मैंने जितना कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा को जाना है वह विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विशेष कर सभी महिलाओं के प्रति बहुत सम्मान भाव रखते हैं। उन्होंने इस तरह का आदेश दिया है यह मुझे विश्वास करने में कठिनाई हो रही है। बताया कि इस अमर्यादित आचरण के लिए दोषी कर्मचारी दरअसल विश्वविद्यालय सेवा में है ही नहीं। अनुबंध पर प्रबंधन विभाग में उनकी नियुक्ति हुई है। विश्वविद्यालय की सारी गोपनीयता और कुलपति कार्यालय में अपनी पदस्थापना का दुरुपयोग का इन पर गंभीर आरोप है। उनके आचरण से विश्वविद्यालय की काफी बदनामी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ रेणु बोस समाज विज्ञान के संकायाध्यक्ष हैं और उनका कार्यालय प्रशासनिक भवन से काफी दूर में स्थित रविंद्रनाथ टैगोर कला भवन में अवस्थित है। कुलपति के रूप में दायित्वों का निर्वहन करने में कुलपति सचिवालय के सहयोग की आवश्यकता होती है। संकायाध्यक्ष ऑफिस में मात्र एक ही कर्मचारी है और वह कुलपति सचिवालय के कार्य पद्धति से अनभिज्ञ हैं। दिनभर जो लोग कुलपति से मिलने आ रहे हैं उन सबको रविंद्र नाथ टैगोर भवन नहीं भेजा जा सकता है। इसके अलावा जितनी भी संचिकाएं कुलपति के पास भेजी जाती है उन सबको प्रशासनिक भवन से कला भवन भेजना किसी भी दृष्टिकोण से व्यावहारिक नहीं है। </p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि विश्वविद्यालय की स्थापना काल से अब तक जो भी शिक्षक कुलपति के प्रभाव में रहे वह कुलपति कक्ष से तथा कुलपति सचिवालय के सहयोग से कार्यों का निष्पादन करते रहे हैं। कुलसचिव ने बताया कि जब कुलपति का कार्यालय को नहीं खोला गया तब उन्होंने डॉ रेणु बोस को कुलसचिव कार्यालय से कार्यों का निष्पादन करने का आग्रह किया जो उन्होंने स्वीकार किया।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्ञात हो कि डॉ रेनू बोस एवं डॉ प्रणिता दोनों ही कड़क प्रशासक माने जाते हैं और नियम परीनियम के तहत काम करने के लिए जाने जाते हैं। किसी प्रकार के दबाव में आकर गलत काम करने वालों में इनकी गिनती नहीं होती है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>हजारीबाग</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 21:29:26 +0530</pubDate>
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