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                <title>Sahebganj News: महाविद्यालय में बाहा और सरहुल की धूम: नंदन भवन में दिखी आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक</title>
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                        <![CDATA[साहिबगंज महाविद्यालय के नंदन भवन में आदिवासी छात्रावास की ओर से बाहा पर्व, सरहुल और संताली साहित्य दिवस का शानदार आयोजन किया गया। डॉ. रणजीत कुमार सिंह की मुख्य आतिथ्य में हुए इस कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य, गीत और कविता पाठ के जरिए आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया गया। वक्ताओं ने संताली साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए इसके वैश्विक प्रसार और ओलचिकी लिपि के माध्यम से भाषा को मजबूत करने पर बल दिया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/sahibganj/sahibganj-college-baha-sarhul-celebration/article-20152"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/a1c43c98-dc08-4edc-95ec-d29785359f23_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>साहिबगंज: </strong>महाविद्यालय परिसर के नंदन भवन में आदिवासी छात्रावास द्वारा आयोजित बाहा पर्व, सरहुल एवं संताली साहित्य दिवस का भव्य एवं सांस्कृतिक उल्लास से भरपूर आयोजन किया गया। इस अवसर पर आदिवासी संस्कृति, परंपरा एवं साहित्य की समृद्ध विरासत की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया। </p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान एवं प्रकृति पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात विभिन्न कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक संथाली लोकनृत्य, गीत एवं वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और आदिवासी जीवनशैली की झलक प्रस्तुत की। बिट्टू टुड्डू ने जंगल व पहाड़ के रखवाली पर कविता पाठ किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मॉडल कॉलेज राजमहल के प्राचार्य सह प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक डॉ. रणजीत कुमार सिंह रहे। उन्होंने अपने संबोधन में बाहा पर्व एवं सरहुल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये पर्व प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि “संताली साहित्य समाज का दर्पण है”, इसीलिए इसके संरक्षण, संवर्धन एवं नई पीढ़ी तक इसके प्रभावी प्रसार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर वक्ताओं ने संताली साहित्य दिवस की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में संताली भाषा एवं साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संताली साहित्य का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है, जिससे इसकी व्यापक पहुँच सुनिश्चित हो रही है। साथ ही भारत सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा गया कि अलचिकी लिपि के माध्यम से संताली भाषा को नई पहचान और मजबूती मिल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में शिक्षक अतिथि के रूप में कमल किशोर जेराई भी उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, शोधकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जिनकी सहभागिता ने आयोजन को और भी सफल एवं प्रभावशाली बनाया। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और उनमें अपनी परंपराओं के प्रति गर्व की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा कार्यक्रम का समापन हर्षोल्लास एवं सामूहिक उत्साह के साथ हुआ। मौके पर सचिव संदीप मुर्मू, अध्यक्ष श्रीलाल मुर्मू, मोहन हेम्ब्रम, विनोद मुर्मू, अनूप टुडू, बिट्टू टुड्डू, मुंशी मरांडी, तिलक हेम्ब्रम, अजय टुड्डू, मशी टुड्डू, जोसफ हेम्ब्रम, रेणु हेम्ब्रम, सरील हेम्ब्रम, बालिका छात्रा हॉस्टल के नायकी सोनी मुर्मू, बाले बेटी हेम्ब्रम, सिलू हेम्ब्रम, छात्र नायक श्रीलाल मुर्मू, छात्र सचिव संदीप मुर्मू, पुर्व छात्र नायक विनोद मुर्मू सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>साहिबगंज</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 18:41:47 +0530</pubDate>
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