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                <title>अमेरिका - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>अमेरिका RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> ईरान-रूस-चीन का होर्मुज में जोरदार नौसेना अभ्यास: ट्रंप को कड़ा संदेश, तनाव चरम पर!</title>
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                        <![CDATA[रूस, चीन और ईरान की नौसेनाएं होर्मुज जलडमरूमध्य में 'मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026' ड्रिल]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/iran-russia-chinas-vigorous-naval-exercise-in-hormuz-strong-message-to-trump/article-18205"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/gemini_generated_image_reigsbreigsbreig.jpg" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>नेशनल डेस्क: </strong>ईरान, रूस और चीन की नौसेनाओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में 'मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026' नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। यह अभ्यास अमेरिका को सीधा संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है, खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति के बीच। रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी निकोलाई पेत्रशेव ने बताया कि उनके देश के युद्धपोत ईरान की ओर रवाना हो चुके हैं, जबकि चीन और ईरान भी अपने जहाजों के साथ इसमें शामिल हो रहे हैं।<span class="inline-flex">​</span><span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">यह त्रिपक्षीय ड्रिल समुद्री सुरक्षा मजबूत करने, डकैती रोकने, आतंकवाद से निपटने और संयुक्त बचाव अभियानों पर केंद्रित है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के 20 फीसदी तेल का रास्ता है, को सुरक्षित रखना इसका मुख्य मकसद बताया जा रहा है। ईरान ने 2019 में इसकी शुरुआत की थी और हर साल रूस-चीन के साथ दोहरा रहा है; यह आठवां संस्करण है।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">अमेरिका ने ईरान के आसपास यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक युद्धपोत तैनात कर रखे हैं, जिसके जवाब में ईरान सहयोगियों के साथ ताकत दिखा रहा है। ब्रिक्स सदस्य इन तीनों देशों ने जनवरी में दक्षिण अफ्रीका के तट पर भी 'विल फॉर पीस 2026' अभ्यास किया था, हालांकि भारत शामिल नहीं हुआ। अब होर्मुज में तालमेल, टैक्टिकल तैयारी और तेज प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण होगा।<span class="inline-flex">​</span><span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">ट्रंप प्रशासन की ईरान पर सख्ती के बीच यह अभ्यास क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला लगता है। ईरानी मीडिया के अनुसार, इसमें लाइव-फायर, सर्च एंड रेस्क्यू और एंटी-पाइरेसी सिमुलेशन शामिल हैं। वैश्विक व्यापार मार्गों की रक्षा का दावा है, लेकिन पश्चिमी देश इसे अमेरिका-विरोधी गठबंधन मान रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 17:09:33 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा फैसला: दक्षिण अफ्रीका को G-20 से बाहर किया, सरकारी भुगतान भी बंद</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन: </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को बड़ी घोषणा की । उन्होंने कहा कि अमेरिका अगले साल मियामी में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका को शामिल होने की इजाजत नहीं देगा। राष्ट्रपति ने साथ ही दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली सब्सिडी और सभी सरकारी भुगतान रोकने का भी आदेश दिया।</p>
<p><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2025-11/59d42c504c10b1f71478f52bf06c86da_2011950360.jpg" alt="59d42c504c10b1f71478f52bf06c86da_2011950360" width="1166" height="681" /><br /><br />ट्रंप इस समय श्वेत किसानों के कथित उत्पीड़न को लेकर दक्षिण अफ्रीका पर हमलावर हैं। ट्रंप ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में हुए जी20 शिखर सम्मेलन का भी बहिष्कार किया था। अब उन्होंने अगले वर्ष के जी-20 शिखर सम्मेलन से दक्षिण अफ्रीका को बाहर</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/trumps-big-decision-took-south-africa-out-of-g-20-government/article-17221"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-11/gemini_generated_image_g6zxv3g6zxv3g6zx.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन: </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को बड़ी घोषणा की । उन्होंने कहा कि अमेरिका अगले साल मियामी में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका को शामिल होने की इजाजत नहीं देगा। राष्ट्रपति ने साथ ही दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली सब्सिडी और सभी सरकारी भुगतान रोकने का भी आदेश दिया।</p>
<p><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2025-11/59d42c504c10b1f71478f52bf06c86da_2011950360.jpg" alt="59d42c504c10b1f71478f52bf06c86da_2011950360" width="1166" height="681"></img><br /><br />ट्रंप इस समय श्वेत किसानों के कथित उत्पीड़न को लेकर दक्षिण अफ्रीका पर हमलावर हैं। ट्रंप ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में हुए जी20 शिखर सम्मेलन का भी बहिष्कार किया था। अब उन्होंने अगले वर्ष के जी-20 शिखर सम्मेलन से दक्षिण अफ्रीका को बाहर करने का एलान कर दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि दक्षिण अफ्रीका को 2026 के जी-20 सम्मेलन का निमंत्रण नहीं मिलेगा।<br /><br />उन्होंने कहा कि हाल ही में सम्पन्न दक्षिण अफ्रीका के जी-20 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी सरकार के प्रतिनिधि के साथ किए गए खराब व्यवहार के कारण दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली सब्सिडी रोकी जा रही है। सनद रहे उनके श्वेत किसानों के साथ हिंसा के आरोपों को दक्षिण अफ्रीका निराधार बताकर खारिज कर चुका है।<br /><br />राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने सप्ताहांत में शिखर सम्मेलन समाप्त होने पर अपनी जी-20 मेजबानी की जिम्मेदारी अमेरिकी दूतावास के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को सौंपने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने लिखा, "इसलिए, मेरे निर्देश पर दक्षिण अफ्रीका को 2026 जी-20 का निमंत्रण नहीं मिलेगा, जिसका आयोजन अगले वर्ष फ्लोरिडा के मियामी शहर में किया जाएगा।"<br /><br />उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने दुनिया को दिखा दिया है कि वह किसी भी संगठन की सदस्यता के लायक नहीं है और हम उन्हें दिए जाने वाले सभी भुगतान और सब्सिडी तुरंत प्रभाव से बंद करने जा रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 18:58:09 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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            <item>
                <title>टेस्ला मॉडल वाई इलेक्ट्रॉनिक डोर हैंडल फेल: बच्चों की सुरक्षा खतरे में, अमेरिका में NHTSA की जांच शुरू </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>नेशनल डेस्क: </strong>टेस्ला के मॉडल वाई को लेकर एक गंभीर सुरक्षा चिंता सामने आई है। अमेरिका में कई यूज़र्स ने शिकायत की है कि कार के इलेक्ट्रॉनिक डोर हैंडल्स अचानक काम करना बंद कर देते हैं। यह समस्या तब और खतरनाक हो गई जब बच्चों के अंदर फंसे होने के बावजूद माता-पिता दरवाजा नहीं खोल सके। आखिरकार, कुछ मामलों में माता-पिता को कार का शीशा तोड़कर बच्चों को बाहर निकालना पड़ा। यह सब एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक गाड़ी के साथ हुआ, जिसकी कीमत भारतीय बाजार में करीब ₹39.5 लाख है।</p>
<hr class="bg-offsetPlus h-px border-0" />
<h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>कैसे सामने आई यह दिक्कत</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">इन मामलों की जाँच में पाया</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/tesla-model-y-electronic-door-handle-failed-childrens-safety-of/article-16290"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-09/gemini_generated_image_i3t25ci3t25ci3t2.jpg" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>नेशनल डेस्क: </strong>टेस्ला के मॉडल वाई को लेकर एक गंभीर सुरक्षा चिंता सामने आई है। अमेरिका में कई यूज़र्स ने शिकायत की है कि कार के इलेक्ट्रॉनिक डोर हैंडल्स अचानक काम करना बंद कर देते हैं। यह समस्या तब और खतरनाक हो गई जब बच्चों के अंदर फंसे होने के बावजूद माता-पिता दरवाजा नहीं खोल सके। आखिरकार, कुछ मामलों में माता-पिता को कार का शीशा तोड़कर बच्चों को बाहर निकालना पड़ा। यह सब एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक गाड़ी के साथ हुआ, जिसकी कीमत भारतीय बाजार में करीब ₹39.5 लाख है।</p>
<hr class="bg-offsetPlus h-px border-0" />
<h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>कैसे सामने आई यह दिक्कत</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">इन मामलों की जाँच में पाया गया कि इलेक्ट्रॉनिक डोर हैंडल्स तब फेल होते हैं जब कार के इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती। कई कार मालिकों ने इस समस्या के बाद अपनी लो-वोल्टेज बैटरी बदलवाई, लेकिन किसी को भी पहले से इस संबंध में कोई चेतावनी नहीं मिली थी। बच्चों के लिए स्थिति और भी खतरनाक हो गई क्योंकि कार के मैन्युअल डोर ओपनर का इस्तेमाल बच्चे छोटी उम्र की वजह से नहीं कर सके।</p>
<hr class="bg-offsetPlus h-px border-0" />
<h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>क्या कहती है NHTSA और अब आगे क्या</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA), अमेरिका ने इस गंभीर समस्या को देखते हुए लगभग 1.74 लाख टेस्ला मॉडल वाई कारों की जांच शुरू कर दी है। रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह जांच 2021 मॉडल के लिए शुरू की गई है। अधिकारियों को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि दरवाजे के इलेक्ट्रॉनिक हैंडल अचानक काम नहीं करते, जिससे आपातस्थिति में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। अगर जांच में यह साबित होता है कि सेफ्टी पर खतरा है, तो टेस्ला के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है और कंपनी को इन कारों को रिकॉल करने के लिए कहा जा सकता है।</p>
<hr class="bg-offsetPlus h-px border-0" />
<h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>कंपनी की प्रतिक्रिया</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">फिलहाल, इस पूरे मामले में टेस्ला ने कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर टेस्ला जल्द समाधान नहीं खोजती, तो उसकी ब्रांड वैल्यू और कस्टमर ट्रस्ट पर असर पड़ सकता है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के भविष्य के लिए यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि क्या बढ़िया टेक्नोलॉजी के बावजूद बेसिक सेफ्टी फीचर्स में लापरवाही की जा सकती है।</p>
<hr />
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">टेस्ला के लिए ये घटनाएं एक बड़ा झटका हैं, क्योंकि उसकी पहचान इनोवेशन और शानदार सुरक्षा फीचर्स के लिए थी। आगामी समय में अमेरिका के नियामक एजेंसी के फैसले और टेस्ला के जवाब पर सभी की नजरें होंगी। ऐसी घटनाओं के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों में आपातकाल सुरक्षा पर दोबारा मंथन शुरू हो गया है।</p>]]>
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                                                            <category>तकनीक</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Sep 2025 19:48:36 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>बेल का मतलब जेल से अस्थायी छुट्टी- रिहाई नहीं</title>
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                        <![CDATA[<p style="font-weight:400;">दिल्ली में साल 2020 के फरवरी महीने में हुए भयानक सांप्रदायिक दंगों को उकसाने के दोषियों देवांगना कालिता, नताश नरवाल और आसिफ इकबाल तनहा को दिल्ली हार्ई कोर्ट से बेल मिल गई। इसके बाद इन तीनों को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया है। इन सबको सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था।</p>
<p style="font-weight:400;">उन दंगों में लगभग 53 लोगों की जानें गईं थीं और हजारों करोडो की संपत्ति स्वाहा हो गई थी। ये दंगे जानबूझ कर उस वक्त करवाये गये थे जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/delhi/bail-means-temporary-leave-from-jail-not-release/article-8475"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-06/prison-jail-prisoner.jpg" alt=""></a><br /><p style="font-weight:400;">दिल्ली में साल 2020 के फरवरी महीने में हुए भयानक सांप्रदायिक दंगों को उकसाने के दोषियों देवांगना कालिता, नताश नरवाल और आसिफ इकबाल तनहा को दिल्ली हार्ई कोर्ट से बेल मिल गई। इसके बाद इन तीनों को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया है। इन सबको सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था।</p>
<p style="font-weight:400;">उन दंगों में लगभग 53 लोगों की जानें गईं थीं और हजारों करोडो की संपत्ति स्वाहा हो गई थी। ये दंगे जानबूझ कर उस वक्त करवाये गये थे जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के सरकारी दौरे पर थे। दंगों के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा तो जैसे नेपथ्य में चली गई थी। राष्ट्रद्रोही षडयंत्रकारियों का मकसद भी ट्रम्प की यात्रा की हवा निकालनी ही रहा होगा।</p>
<p style="font-weight:400;">इन तीनों को बेल मिली तो सोशल मीडिया पर कुछ लोग सारे मामले को इस तरह से प्रस्तुत कर रहे हैं कि ये सब बरी कर दिए गए हैं। ये तीनों भी जेल से बाहर निकलते हुए खुद भी नारेबाजी कर रहे हैं। इनके साथियों ने अपने हाथों में जो बैनर लिए हुए हैं, उनमें उमर खालिद तथा शरजील इमाम को रिहा करने की मांग की गई है। ये दोनों अभी भी जेल में हैं।</p>
<p style="font-weight:400;">पहले तो ये जान लेते हैं कि किसी अभियुक्त को बेल मिलने का मतलब यह तो नहीं होता कि उसे कोर्ट ने दोषमुक्त घोषित कर दिया। जमानत तो मेडिकल, उम्र और अनेकों मानवीय आधारों पर दोषियों का हक है। उसी हक क तहत  इन सबकों जमानत मिली है। नताशा नरवाल को कुछ समय पहले भी अपने पिता की मृत्यु के समय जमानत पर जेल से छोड़ा गया था। अब ये भी देश जान ले कि ये किन आरोपों  के तहत जेल में हैं। देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा को लेकर दिल्ली पुलिस की चार्जशीट कहती है कि 2020 में हुए दंगों के पीछे इनकी भी सक्रिय भूमिका थी।</p>
<p style="font-weight:400;">अगर बात देवांगना कलिता की करें तो  वह कहने को तो जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिर्टी ( जेएनयू) से एम फिल कर रही हैं।  लेकिन, उस पर आरोप है कि उसने  दंगों के दूसरे ‘साजिशकर्ताओं’ के साथ मिलकर मुस्लिम बहुल इलाकों में रहने वाले लोगों को गलत ढंग से भ्रम फैलाकर भड़काया, खासतौर पर महिलाओं को और उनमें ‘उत्पीड़न’ की भावना भरी, जिसके चलते हिंसा और दंगा भड़के।</p>
<p style="font-weight:400;">अब बात करें नताशा नरवाल की। हरियाणा की रहने वाली नताशा भी जेएनयू से पढ़ाई कर रही हैं। उसने बीए और एमए की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पूरी की। अंत में बात करते हैं आसिफ इकबाल तन्हा की। वह जामिया मिलिया इस्लानमिया यूनिवर्सिटी से बीए (ऑनर्स) फारसी की पढ़ाई कर रहा है। उस पर हिंसा भड़काने में अहम भूमिका के आरोप हैं। निचली अदालत  ने कहा था कि आरोप सत्य प्रतीत होते हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, तन्हा  स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन का सदस्य है। पुलिस ने उसे उमर खालिद, मीरान हैदर, सफूरा जरगर का करीबी साथी बताया है।</p>
<p style="font-weight:400;">अत: साफ है कि  तीनों पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। इसके बावजूद हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के विरोध के बाद भी इन्हें किसी न किसी आधार पर जमानत पर रिहा कर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाने का वैसे तो कोई मतलब  नहीं है। पर दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील भी दायर की है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि हाईकोर्ट ने मामले का इस तरह से निपटारा किया जैसे कि छात्रों द्वारा विरोध का एक हल्का सा मामला हो।</p>
<p style="font-weight:400;">अगर पुलिस के दावों को मानें  तो अभियुक्तों को जमानत देते वक्त हाईकोर्ट ने सबूतों और बयानों पर पूरी तरह से ध्यान ही नहीं दिया, जबकि स्पष्ट  रूप से तीनों आरोपियों द्वारा अन्य सह-साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर दंगों के आयोजन की एक भयावह साजिश रची गई थी। देखिए इस केस में फैसला आने में तो अभी वक्त लगेगा। अभी तो केस हाई कोर्ट में ही है।</p>
<p style="font-weight:400;">फिलहाल हैरानी कि वजह यह है कि सामान्य जमानत को “बाइज्जत रिहाई ” की तरह से पेश किया जाना। दूसरी चिंता की बात यह है कि जो देवांगना कालिता, नताश नरवाल और आसिफ इकबाल तनहा के हितैषी जेल  के बाहर इनका स्वागत करने के लिए आए थे, वे उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग में नारेबाजी भी कर रहे थे। इसका क्या मतलब है? क्या नारेबाजी करने से या पोस्टर हाथ में ले लेने से गंभीर आरोपों के कारण जेल में बंद अभियुक्तों को रिहा किया जा सकता है?</p>
<p style="font-weight:400;">उमर खालिद पर दिल्ली दंगों में रही उनकी खतरनाक भूमिका के चलते केस चल रहा है। उमर खालिद बेहद शातिर  इंसान है। वह पहले भी जेएनयू कैंपस में हिंदू देवी देवताओं की आपत्तिजनक तस्वीरें लगाकर नफरतें भी फैलाता रहता था। खालिद उस कार्यक्रम में भी शामिल था जब आतंकी अफजल की फांसी पर जेएनयू कैंपस में मातम मनाया गया था। खालिद कई मौकों पर कश्मीर की आजादी की बेबुनियाद मांग को भी उठाता रहा था।</p>
<p style="font-weight:400;">आरोप है कि जेएनयू में 26 जनवरी, 2015 को ‘इंटरनेशनल फूड फेस्टिवल’ के बहाने कश्मीर को अलग देश दिखाकर उसका स्टॉल लगाया गया। अब आप समझ सकते हैं  कि वह कितना शातिर किस्म का इंसान है।उमर खालिद की दिल्ली दंगों को भड़काने में निर्णायक भूंमिका थी।  उमर खालिद पर आरोप है कि वह 24 फरवरी 2020 को मुसलमानों को स़ड़कों पर गैरकानूनी तरीके से जाम लगाने का आहवान कर रहा था, जिस दिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली में थे। उसे शरजील इमाम जैसे जेएनयू में ही रह रहा  एक अन्य देश विरोधी छात्र का भी साथ मिल रहा था।</p>
<p style="font-weight:400;">उस शरजील इमाम को भी रिहा करने की मांग हो रही है, जो गांधीजी को फासिस्ट कहता है। वह एक वीडियो  में कह रहा-  ” 20वीं सदी का सबसे बड़ा फासिस्ट लीडर गांधी ख़ुद है। कांग्रेस को हिंदू पार्टी किसने बनाया?”  शाहीन बाग धरने का हिस्सा था शरजील इमाम। वह गर्व से ख़ुद को शाहीन बाग़ में चले  विरोध प्रदर्शन का आयोजक भी बताता  था। शरजील इमाम कहता था “अगर हमें असम के लोगों की मदद करनी है, तो उसे भारत से काट देना होगा।</p>
<p style="font-weight:400;">” इमाम खुल्लम खुल्ला झूठ बयाँ कर रहा था, ” असम में जो मुसलमानों का हाल है, आपको पता है। सीएए ( नागरिकता संशोधन कानून) लागू हो गया वहां। डिटेंशन कैंप में लोग डाले जा रहे हैं। वहां क़त्ल-ए-आम चल रहा है। छह-आठ महीने में पता चला सारे बंगालियों को मार दिया, हिंदू हो या मुसलमान।” वह साफ झूठ बोल कर मुसलमानों को  भड़का रहा था।</p>
<p style="font-weight:400;">अपने साथियों को जमानत मिलने पर गदगद बहुत से लोग घोर देश विरोधी तत्वों की जेल से रिहाई के लिए बेताब है। फिलहाल तो वे बस इतना ही जान लें कि बेल का मतलब बरी होना नहीं होता।बेल तो जेल से अस्थायी रूप से बहार आना भर ही है I</p>
<p style="font-weight:400;"><strong>(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तभकार और पूर्व सांसद हैं)</strong></p>
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                                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jun 2021 17:25:56 +0530</pubDate>
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                <title>ओपिनियन: कैसे भारतीय विद्यार्थी पढ़ने के लिए विदेश न जाएं</title>
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                        <![CDATA[<p style="font-weight:400;">कभी इस बात पर गौर किया है कि भारत से हरेक साल लाखों विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, कनाडा आदि देशों में क्यों चले जाते हैं? यह सवाल इसलिए भी समीचिन हो गया है, क्योंकि अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे विदेशी विद्यार्थियों को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन की ओर से एक और बड़ा झटका लगा है। इन विद्यार्थियों में भारतीयों का आंकड़ा बहुत बड़ा है।</p>
<p style="font-weight:400;">अमेरिका ने इन विद्यार्थियों से कहा है कि उनके कॉलेज या विश्वविद्यालय अगर पूरी तरह ऑनलाइन पढ़ाई पर आ गए हैं, तो वे या तो किसी और संस्थान में या किसी</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/bihar/opinion-how-indian-students-do-not-go-abroad-to-study/article-6968"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-07/shri-r-k-sinha-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="font-weight:400;">कभी इस बात पर गौर किया है कि भारत से हरेक साल लाखों विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, कनाडा आदि देशों में क्यों चले जाते हैं? यह सवाल इसलिए भी समीचिन हो गया है, क्योंकि अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे विदेशी विद्यार्थियों को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन की ओर से एक और बड़ा झटका लगा है। इन विद्यार्थियों में भारतीयों का आंकड़ा बहुत बड़ा है।</p>
<p style="font-weight:400;">अमेरिका ने इन विद्यार्थियों से कहा है कि उनके कॉलेज या विश्वविद्यालय अगर पूरी तरह ऑनलाइन पढ़ाई पर आ गए हैं, तो वे या तो किसी और संस्थान में या किसी ऐसे कोर्स में दाखिला ले लें जहां कक्षा में प्रत्यक्ष उपस्थिति के जरिए पढ़ाई हो रही हो, या फिर अमेरिका छोड़कर अपने देश वापस चले जाएं, क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उनका वीजा तो मंजूर नहीं ही किया जाएगा।</p>
<p style="font-weight:400;">दरअसल, कोरोना के कारण अमेरिका में भी ज्यादातर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाएं ही ली जा रही हैं। अमेरिका के इन विदेशी विद्यार्थियों में लाखों भारतीय विद्यार्थी भी है। ट्रंप प्रशासन का फैसला अभी अपने आप में अंतिम तो नहीं है, पर इसके चलते लाखों भारतीयों की नींद तो उड़ ही गई हैं। मसला यह है कि हमारे देश के अन्दर शिक्षा का स्तर आखिर क्यों इतना स्तरीय नहीं हो पा रहा है कि हर साल लाखों बच्चे अच्छी शिक्षा के लिए देश से बाहर चल जाते हैं?</p>
<p style="font-weight:400;">क्यों हम अपने शिक्षण संस्थानों में अच्छी फैक्ल्टी और दूसरी सुविधाएं नहीं बढ़ा पा रहे ? भारत में उपलब्ध आकड़ों के अनुसार से साल 2018-19 के दौरान ही 6.20 लाख विद्यार्थी पढ़ने के लिए देश से बाहर गए। ये आंकड़े मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ही प्रकाशित किये हैं। हालांकि साल 2017-18 में आठ लाख से कुछ ही कम यानी 7.86 लाख विद्य़ार्थी देश से बाहर पढ़ने के लिए गए थे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://samridhjharkhand.com/samridh-special/public-singer-manisha-bowed-down-on-the-death-anniversary-of-beggar-thakur">भिखारी ठाकुर की 49वीं पुण्यतिथि पर लोक गायिका मनीषा ने किया नमन (Video)</a></strong></p>
<p style="font-weight:400;">ये अधिकतर स्नातक की डिग्री लेने के लिए ही अन्य देशों का रुख करते हैं। स्नातकोत्तर की डिग्री लेने के लिए बाहर जाने वाले अपेक्षाकृत कम ही होते हैं। पर मूल बात यह है कि हर साल इन लाखों विद्यार्थियों के अन्य देशों में जाने के कारण देश की अमूल्य विदेशी मुद्रा चली जाती है। इन लाखों विद्यार्थियों के लिए देश को अरबों रुपया अन्य देशों को देना पड़ता है विदेशी मुद्रा में। आठ लाख विद्यार्थी पर्तिवर्ष पचास- साठ हजार डालर भी ले जाते होंगें तो अनुमान लगा लीजिये कि देश के कितने हजार करोड़ रूपये विदेश जा रहे हैं।</p>
<p style="font-weight:400;">जरा सोचिए कि हमारे विद्यार्थी कनाडा आयरलैंड, मलेशिया, यूक्रेन और चीन तक में भी चले जा रहे हैं। देखिए अगर कोई विद्यार्थी वास्तव में किसी खास शोध आदि के लिए अमेरिका की एमआईटी या कोलोरोडो जैसे विश्वविद्यालयों में दाखिला लेता है तो कोई बुराई भी नहीं है। आखिर अमेरिका के कुछ विश्व विद्यालय अपनी श्रेष्ठ फैक्ल्टी और दूसरी सुविधाओं के चलते सच में बहुत बेहतर हैं। ये ही बात ब्रिटेन के आक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसे विश्वविद्यालयों के संबंध में भी कही जा सकती हैं। इनमें बहुत से अध्यापक नोबेल पुरस्कार विजेता तक हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://samridhjharkhand.com/news/learn-guard-lakhan-who-helped-to-catch-vikas-dubey">जानिए! गार्ड लखन को जिसने विकास दुबे को पकड़ने में मदद की (Video)</a></strong></p>
<p style="font-weight:400;">इसलिए इनमें दाखिला लेने में तो कोई बुराई भी नहीं हैं। लेकिन अगर हमारे बच्चे होटल मैनेजमेंट या एमबीए या सामान्य स्नातक डिग्री जैसे कोर्सज के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूक्रेन आदि देशों के लिए रवाना हो तो बात गले से नहीं उतरती। सच पूछा जाए जाए तो इसका कोई ठोस कारण भी समझ नहीं आता। फिर यह भी एक तथ्य है कि विदेशों में पढ़ाई के लिए जाने वाले बच्चों को अनेक अवसरों पर घोर कष्ट भी होता है।</p>
<p style="font-weight:400;">उन्हें कई बार विदेशी विश्वविद्यालय सब्जबाग दिखा कर अपने पास बुला लेते हैं। जब हमारे बच्चे विदेशों में जाते हैं, तो उन्हें कड़वी हकीकत दिखाई देती है। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इन बच्चों के अभिभावकों ने भी एजुकेशन लोन के नाम पर बहुत मोटा लोन ले लिया होता है।</p>
<p style="font-weight:400;">हालांकि हम किसी को देश से बाहर जाने से हम बच्चों को तो तब रोकें जब हमारे यहां की शिक्षा स्तरीय हो। वह तो नहीं है। अगर आईआईटी, दिल्ली, मुंबई, मद्रास, कलकत्ता, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे कुछ विश्वविद्लायों को छोड़ दिया जाए तो देश के अधिकतर विश्वविद्लायों का हाल बेहाल है। कहीं पर्याप्त टीचर नहीं हैं, तो कहीं पर राजनीति ने सब कुछ बंटाधार करके रखा हुआ है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-try-india-will-become-self-sufficient">ओपिनियन: कोशिश करो, तभी बनेगा भारत आत्मनिर्भर</a></strong></p>
<p style="font-weight:400;">अब बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड की भी बात कर लेते हैं। इधर के हजारों नौजवान हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस, हिन्दू, मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम, श्रीराम कॉलेज आफ कॉमर्स, रामजस हंसराज वगैरह कॉलेजों में पढने के लिए आते हैं। बिहारी छात्र बीते दशकों से दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला ले रहे हैं। पर यहां दाखिला लेने की चाहत रखने वाले कुछ ही विद्यार्थियों को सफलता मिलती है।</p>
<p style="font-weight:400;">ये अपने राज्य या शहरों के कॉलेजों में पढ़ना ही नहीं चाहते, क्योंकि वहां पर तो सब कुछ राम भरोसे ही चल रहा है। दिल्ली में हर साल आने वाले दस फीसद छात्रों को भी कॉलेज के भीतर छात्रावास भी नहीं मिल पाता। ये अधिकतर राजधानी के विभिन्न इलाकों में कठोर जिंदगी जीते हैं। एक कमरे में आठ दस बच्चे रहते हैं। जाहिर है कि अगर इनके अपने शहरों में स्तरीय कॉलेज खुल जाएं तो इन्हें दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु या देश से बाहर न जाना पड़े। क्या कोई इस तरफ भी सोच रहा है? ऐसा लगता तो नहीं।</p>
<p style="font-weight:400;">बुरा मत मानिए, अगर जितना पैसा हम अपने बच्चों के लिए विदेशों में पढने के लिए खर्च करते हैं, अगर उसका आधा हिस्सा भी अपने यहां शिक्षा के स्तर को सुधारने में निवेश कर देते तो हमारे बच्चों को बाहर जाना ही नहीं पड़ता। अब एक उदाहरण आपसे सामने रखना चाहता हूं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय प्रत्येक वर्ष देश के कॉलेजों की रैंकिंग जारी करता है। उसमें देश के सबसे उम्दा कॉलेजों को क्रम दिया जाता है।</p>
<p style="font-weight:400;">देखनें में यह आ रहा है कि लगभग हर साल लेकर देकर कुछ ही कॉलेज इस सूची में जगह बनाते हैं। साल 2020 की कॉलेज कैटेगरी में दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों का जलवा रहा है। टॉप 10 में से 5 दिल्ली विश्वविद्यालय  के और टॉप 20 में 12 कॉलेज रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय का मिरांडा हाउस पहले और हिंदू कॉलेज तीसरे नंबर पर है। चौथे स्थान पर सेंट स्टीफन कॉलेज है। इस सूची में मद्रास विश्वविद्यालय का प्रेजिडेंसी कॉलेज, लायोला कॉलेज, कोलकाता विश्वविद्यालय का सेंटजेवियर्स कॉलेज भी है।</p>
<p style="font-weight:400;">मानव संसाधन विकास मंत्रालय विभिन्न मानकों के आधार पर ही सरकारी कॉलेजो को रैंकिंग देता है। यकीन मानिए कि ये रैकिंग कमोबेश हर साल यही रहती है। एकाध कॉलेज अंदर बाहर होता रहता है। अब बताइये कि देश के बाकी हजारों कॉलेजों मे क्या हो रहा है? हमें उनमें सुधार तो लाना ही होगा ताकि वे भी शिक्षण स्तर में हिन्दू कॉलेज या मिरांडा हाउस की तरह ही बनें। यह संभव भी है। बस ठोस और  सकारात्मक योजनाबद्ध और समयबद्ध कोशिश करने की जरूरत है।</p>
<p style="font-weight:400;"><strong><em>(लेखक</em><em> </em><em>वरिष्ठ</em> <em>स्तभकार</em><em> </em><em>और</em><em> </em><em>पूर्व</em><em> </em><em>सांसद</em><em> </em><em>हैं</em><em> </em><em>)</em> </strong></p>
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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2020 20:29:18 +0530</pubDate>
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