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                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>होर्मुज जलडमरूमध्य RSS Feed</description>
                
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                <title>Opinion: होर्मुज की लहरों में डूबता सुपर पावर का गुमान और हार को जीत बताता ट्रंप का प्रलाप</title>
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                        <![CDATA[फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। इस विश्लेषण में बताया गया है कि कैसे युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि रणनीति और धैर्य से जीता जाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/iran-vs--usa-persian-gulf-crisis-hormuz-geopolitics-analysis/article-19774"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/download_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>इतिहास की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि युद्ध के मैदान में जब बंदूकें खामोश होने लगती हैं, तब झूठ के नगाड़े सबसे जोर से बजते हैं। आज फारस की खाड़ी के तपते पानी में जो कुछ घट रहा है, वह किसी हॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं है, लेकिन इस पटकथा का अंत वैसा नहीं है जैसा वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस में बैठकर लिखा गया था। युद्ध में कौन जीत रहा है और कौन हार रहा है, इसे आंकने का पैमाना कभी भी मिसाइलों की संख्या या मलबे का ढेर नहीं होता। इसका सबसे सटीक पैमाना यह है कि शांति की भीख सबसे पहले किसने मांगी। आज जब हम अप्रैल 2026 की दहलीज पर खड़े हैं, तो दुनिया देख रही है कि जिस ईरान को प्रतिबंधों की बेड़ियों में जकड़कर घुटनों पर लाने का दावा किया गया था, वह आज तनकर खड़ा है और दुनिया का स्वयंभू थानेदार अब एग्जिट गेट की तलाश में हाथ-पांव मार रहा है।</p>
<p>इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे मुड़कर साल 2025 के उस ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को देखना होगा, जिसने उपमहाद्वीप के सैन्य इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया। भारत ने जब अपनी सीमा पार कर आतंकवाद के फनों को कुचला, तो वह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक संदेश था। वह संदेश यह था कि शक्ति प्रदर्शन चीखने-चिल्लाने से नहीं, बल्कि सटीक प्रहार से होता है। पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम जब ताश के पत्तों की तरह ढह रहा था और भारतीय विमान आकाश में अपनी मर्जी से चित्रकारी कर रहे थे, तब रावलपिंडी के जनरलों ने पहली बार शांति का राग अलापा था। वह हार की तड़प थी जिसे जीत के पदकों के पीछे छिपाने की नाकाम कोशिश की गई। आसिम मुनीर का खुद को ‘फील्ड मार्शल’ घोषित कर देना वैसा ही था जैसे कोई डूबता हुआ आदमी खुद को समंदर का राजा कह दे। लेकिन गड्ढे झूठ नहीं बोलते। सैटेलाइट की तस्वीरों ने वह सच दुनिया के सामने रख दिया था जिसे पाकिस्तान की पीआर मशीनरी दबाना चाहती थी।</p>
<p>आज मिडिल ईस्ट के रणक्षेत्र में डोनाल्ड ट्रंप वही गलती दोहरा रहे हैं जो कभी पाकिस्तानी जनरलों ने की थी। 28 फरवरी को जब ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर हमला हुआ, तो अमेरिका को लगा कि तेहरान ताश की गड्डी की तरह बिखर जाएगा। लेकिन वे भूल गए कि जिस देश ने 40 साल से प्रतिबंधों की आग में खुद को तपाया हो, उसके लिए मिसाइलों की गड़गड़ाहट किसी उत्सव से कम नहीं होती। ईरान ने पलटवार किया और ऐसा किया कि पूरे मध्य पूर्व में फैले अमेरिकी अड्डों की सुरक्षा की कलई खुल गई। आज होर्मुज स्ट्रेट बंद है। दुनिया की रगों में दौड़ने वाला तेल अब ईरान की मर्जी का मोहताज है। वह देश जो कल तक दूसरे देशों को सुरक्षा की गारंटी बेचता था, आज अपने ही सैनिकों की जान बचाने के लिए उन रास्तों को ढूंढ रहा है जो तेहरान तक जाते हों।</p>
<p>ट्रंप का आज का अंदाज बिल्कुल मई 2025 के पाकिस्तान जैसा है। कैमरों के सामने आकर वे अपनी जीत के कसीदे पढ़ रहे हैं, ट्रुथ सोशल पर कैप्स लॉक में अपनी ताकत का बखान कर रहे हैं, लेकिन जमीन की हकीकत उनके दावों का मजाक उड़ा रही है। जब आप हार रहे होते हैं, तो आपकी भाषा में अहंकार और हताशा का एक अजीब मिश्रण घुल जाता है। अमेरिका आज पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 सूत्रीय प्रेम पत्र भेज रहा है, लेकिन तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी सेल्समैन से बात नहीं करेगा। ईरान की शर्तें साफ हैं होर्मुज पर उसका नियंत्रण होगा, अमेरिकी फौजें इलाका खाली करेंगी और नुकसान की भरपाई वॉशिंगटन को करनी होगी। ये शर्तें किसी हारे हुए राष्ट्र की नहीं, बल्कि उस खिलाड़ी की हैं जिसने सामने वाले की पूरी बिसात उलट दी है।</p>
<p>मिडिल ईस्ट में अमेरिका की विफलता केवल सैन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक और नैतिक भी है। जिस रडार और एयर डिफेंस के भरोसे अमेरिका अपनी धौंस जमाता था, वे आज मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। अरब देश, जो कभी अमेरिका की छत्रछाया में खुद को सुरक्षित महसूस करते थे, अब नए समीकरणों की तलाश में हैं। सऊदी अरब का यूक्रेन के साथ डिफेंस डील करना इस बात का सीधा प्रमाण है कि अब दुनिया को ट्रंप के कार्ड्स की असलियत समझ आ गई है। जब घर का मुखिया ही चोरों से अपनी रक्षा न कर पाए, तो परिवार के बाकी सदस्य नए रक्षक ढूंढने लगते हैं। आज वही स्थिति अमेरिका की है।</p>
<p>सबसे दिलचस्प भूमिका पाकिस्तान की है, जो अपनी फटीहाली को कूटनीतिक अवसर में बदलने की कोशिश कर रहा है। वह देश जिसने खुद अपनी नाक कटवाई थी, आज अमेरिका और ईरान के बीच बिचौलिए की भूमिका में डॉलर बटोरने के सपने देख रहा है। लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस खेल का हिस्सा नहीं बनेगा। ईरान जानता है कि वक्त उसके साथ है। वह चुप है, शांत है और अपने लक्ष्यों के प्रति अडिग है। उसकी यह खामोशी वॉशिंगटन की बेचैनी को और बढ़ा रही है। जब आपके पास खोने के लिए कुछ न बचा हो, तो आप सबसे खतरनाक योद्धा बन जाते हैं। ईरान आज उसी स्थिति में है।</p>
<p>कार्ल मार्क्स ने सच ही कहा था कि इतिहास खुद को दोहराता है, पहले एक त्रासदी के रूप में और फिर एक मजाक के रूप में। ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान के लिए त्रासदी थी, और आज फारस की खाड़ी में अमेरिका जो कर रहा है, वह एक वैश्विक मजाक बनकर रह गया है। ट्रंप अब एक सुरक्षित रास्ता ढूंढ रहे हैं जिससे वे अपनी साख बचा सकें, लेकिन ईरान उन्हें वह मौका देने के मूड में नहीं है। वह होर्मुज का पूरा टोल वसूलने के बाद ही चैन से बैठेगा। यह युद्ध मिसाइलों से नहीं, बल्कि सब्र और हौसले से जीता जा रहा है। और फिलहाल, जीत का सेहरा तेहरान के सिर बंधता दिख रहा है, जबकि वॉशिंगटन की चमकती वर्दी पर धूल और हार की कालिख साफ देखी जा सकती है। गड्ढे आज भी वहीं हैं, चाहे वो रावलपिंडी के एयरफील्ड पर हों या ट्रंप की विदेश नीति के सीने पर। सच तो यही है कि सुपरपावर का गुमान अब फारस की खाड़ी की लहरों में दफन हो चुका है।</p>
<p><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2026-04/953a903e-0ab5-45ee-a8fd-2f2c5a7bb940.jpg" alt="Openion: होर्मुज की लहरों में डूबता सुपर पावर का गुमान और हार को जीत बताता ट्रंप का प्रलाप" width="152" height="152"></img></p>
<p><strong>अजय कुमार,                                </strong><br /><strong>वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ ( उ. प्र.)</strong><br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 16:18:00 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
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                <title>ईरान-यूएस तनाव से भारत में हीलियम संकट की आशंका, MRI सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित</title>
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                        <![CDATA[ईरान-अमेरिका तनाव के कारण कतर से हीलियम सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है, जिससे भारत में MRI सेवाओं पर असर पड़ सकता है। हीलियम की कीमतें बढ़ने से जांच महंगी हो सकती है। हालांकि, आधुनिक मशीनें कुछ राहत दे रही हैं, लेकिन लंबा संकट स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/delhi/iran-us-tension-fears-helium-crisis-in-india-mri-services-may/article-19305"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/capture_samridh_1200x720-(2).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने अब भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। तेल और एलपीजी की कीमतों में अस्थिरता के बाद अब एमआरआई मशीनों के संचालन के लिए आवश्यक हीलियम गैस की सप्लाई चेन बाधित होने की खबरें सामने आ रही हैं। दरअसल, ईरान द्वारा कतर के रास लफान संयंत्र पर किए गए हमले के बाद वहां से हीलियम का उत्पादन और निर्यात प्रभावित हुआ है।</p>
<h3><strong>कतर सप्लाई पर असर, भारत में हीलियम संकट की आशंका</strong></h3>
<p>भारत अपनी हीलियम जरूरतों का लगभग 100 प्रतिशत आयात कतर से करता है। ऐसे में इस गैस की कमी भारतीय अस्पतालों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। कतर के रास लफान संयंत्र पर असर पड़ने से सप्लाई चेन कमजोर होने लगी है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ सकता है।</p>
<h3><strong>MRI सेवाओं पर खतरा, पुरानी मशीनें हो सकती हैं बंद</strong></h3>
<p>हीलियम एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जिसका तरल रूप एमआरआई मशीनों में लगे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए कूलेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका बॉइलिंग पॉइंट शून्य से 269 डिग्री सेल्सियस नीचे होता है।</p>
<p>यदि इसकी आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो पुरानी तकनीक वाली एमआरआई मशीनें बंद हो सकती हैं, जिन्हें नियमित गैस रिफिलिंग की आवश्यकता होती है।</p>
<h3><strong>नई तकनीक से राहत, लेकिन महंगी हो सकती है जांच</strong></h3>
<p>राहत की बात यह है कि आधुनिक एमआरआई मशीनें अब हीलियम-फ्री या कम गैस खपत वाली तकनीक पर आधारित हैं। हालांकि, कुछ निजी स्कैन केंद्रों ने बताया है कि हीलियम के दाम दोगुने हो चुके हैं, जिससे भविष्य में एमआरआई जांच महंगी हो सकती है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के 60 प्रतिशत से अधिक एमआरआई सिस्टम कम गैस खपत वाली तकनीक पर आधारित हैं, लेकिन यदि संकट लंबा चला तो कीमतें 15,000 रुपये तक बढ़ सकती हैं।</p>
<h3><strong>होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी नजरें</strong></h3>
<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का समुद्री मार्ग जल्द नहीं खुला और तनाव लंबा खिंचा, तो सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सरकार और स्वास्थ्य क्षेत्र की नजरें मध्य पूर्व के हालात पर टिकी हुई हैं।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:00:39 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट संकट का असर: प्रीमियम पेट्रोल 2.35 रुपये तक महंगा</title>
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                        <![CDATA[मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के फ्यूल मार्केट पर दिखने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने प्रीमियम-ग्रेड पेट्रोल की कीमतों में 2.09 से 2.35 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है, जबकि आम पेट्रोल और डीज़ल के दाम स्थिर रखे गए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/delhi/impact-of-middle-east-crisis-makes-premium-petrol-expensive-by/article-19070"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/download_samridh_1200x720-(9)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के फ्यूल मार्केट पर साफ दिखने लगा है। सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने शुक्रवार को प्रीमियम-ग्रेड पावर पेट्रोल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर से अधिक की बढ़ोतरी कर दी, जबकि आम पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।</p>
<p>बढ़ी हुई कीमतें हाई-परफॉर्मेंस फ्यूल वेरिएंट पर लागू हुई हैं। इसमें बीपीसीएल का स्पीड, एचपीसीएल का पावर और आईओसीएल का XP95 शामिल हैं। इनकी कीमतों में 2.09 रुपये से लेकर 2.35 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<h4><strong>आम पेट्रोल-डीजल में राहत</strong></h4>
<p>ANI के अनुसार, रेगुलर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।</p>
<p>यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। खासकर ईरान में चल रहे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती रुकावटों ने तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया की लगभग 20% ऊर्जा सप्लाई का अहम मार्ग है।</p>
<h4><strong>मिडिल ईस्ट संकट और भारत पर असर</strong></h4>
<p>ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते हमलों और शिपिंग को मिल रही धमकियों के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं और कुछ समय के लिए 120 डॉलर के करीब भी पहुंचीं। इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।</p>
<p>भारत पर इसका प्रभाव इसलिए अधिक है क्योंकि देश अपनी लगभग 85-90% कच्चे तेल की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है। इसमें से करीब 40-50% सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आती है।</p>
<p>इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम और कुल आयात बिल को बढ़ा देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, क्रूड ऑयल की कीमतों में 10 डॉलर की बढ़ोतरी भी भारत के लिए महंगी साबित हो सकती है और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है।</p>
<p>इसका असर अब दिखने लगा है। रुपये पर दबाव, विदेशी निवेशकों की निकासी और फ्यूल व एलपीजी की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंता सामने आ रही है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 16:17:16 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title> ईरान-रूस-चीन का होर्मुज में जोरदार नौसेना अभ्यास: ट्रंप को कड़ा संदेश, तनाव चरम पर!</title>
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                        <![CDATA[रूस, चीन और ईरान की नौसेनाएं होर्मुज जलडमरूमध्य में 'मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026' ड्रिल]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/iran-russia-chinas-vigorous-naval-exercise-in-hormuz-strong-message-to-trump/article-18205"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/gemini_generated_image_reigsbreigsbreig.jpg" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>नेशनल डेस्क: </strong>ईरान, रूस और चीन की नौसेनाओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में 'मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026' नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। यह अभ्यास अमेरिका को सीधा संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है, खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति के बीच। रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी निकोलाई पेत्रशेव ने बताया कि उनके देश के युद्धपोत ईरान की ओर रवाना हो चुके हैं, जबकि चीन और ईरान भी अपने जहाजों के साथ इसमें शामिल हो रहे हैं।<span class="inline-flex">​</span><span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">यह त्रिपक्षीय ड्रिल समुद्री सुरक्षा मजबूत करने, डकैती रोकने, आतंकवाद से निपटने और संयुक्त बचाव अभियानों पर केंद्रित है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के 20 फीसदी तेल का रास्ता है, को सुरक्षित रखना इसका मुख्य मकसद बताया जा रहा है। ईरान ने 2019 में इसकी शुरुआत की थी और हर साल रूस-चीन के साथ दोहरा रहा है; यह आठवां संस्करण है।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">अमेरिका ने ईरान के आसपास यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक युद्धपोत तैनात कर रखे हैं, जिसके जवाब में ईरान सहयोगियों के साथ ताकत दिखा रहा है। ब्रिक्स सदस्य इन तीनों देशों ने जनवरी में दक्षिण अफ्रीका के तट पर भी 'विल फॉर पीस 2026' अभ्यास किया था, हालांकि भारत शामिल नहीं हुआ। अब होर्मुज में तालमेल, टैक्टिकल तैयारी और तेज प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण होगा।<span class="inline-flex">​</span><span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">ट्रंप प्रशासन की ईरान पर सख्ती के बीच यह अभ्यास क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला लगता है। ईरानी मीडिया के अनुसार, इसमें लाइव-फायर, सर्च एंड रेस्क्यू और एंटी-पाइरेसी सिमुलेशन शामिल हैं। वैश्विक व्यापार मार्गों की रक्षा का दावा है, लेकिन पश्चिमी देश इसे अमेरिका-विरोधी गठबंधन मान रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 17:09:33 +0530</pubDate>
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