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                <title>बलीडीह - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>सरिया नगर पंचायत: नई कॉलोनियों तक सीमित विकास, पुराने गांवों में उपेक्षा</title>
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                        <![CDATA[सरिया नगर पंचायत में विकास नई कॉलोनियों तक सीमित, जबकि बलीडीह और श्री रामडीह गांवों में नालियां और सड़कें अभी भी अधूरी हैं। केंद्रीय मंत्री द्वारा 16 विकास योजनाओं का शिलान्यास किया गया, लेकिन पुराने गांवों की उपेक्षा रही।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/giridih/sariya-nagar-panchayat-development-limited-to-new-colonies-neglect-in/article-18049"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/capture_samridh_1200x720-(12).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>गिरिडीह : </strong>झारखंड के गिरिडीह जिले में बसा सरिया प्रखंड का बड़की सरिया नगर पंचायत क्षेत्र एक तरफ विकास की चकाचौंध दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ गांवों की आंखों में आंसू और दिल में निराशा छिपी है।</p>
<p>जहां एक ओर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी ने हाल ही में नगर पंचायत में 16 महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का भव्य शिलान्यास किया, वहां बलीडीह और श्री रामडीह जैसे पुराने बसे गांवों को एक भी योजना का हिस्सा नहीं मिला। यह सवाल उठता है कि क्या विकास की किरणें सिर्फ चुनिंदा इलाकों तक पहुंच रही हैं, या फिर पुराने गांवों को अब भी अंधेरे में रखा जा रहा है?</p>
<p>बलीडीह और श्री रामडीह गांव सरिया नगर पंचायत के अंतर्गत आते हैं, लेकिन इन गांवों के निवासियों का कहना है कि विकास की हर सौगात नए बसे कॉलोनियों और मुख्य बाजार क्षेत्रों में ही सिमट जाती है। सड़कें हों, नाली-नालियां हों, या कोई अन्य बुनियादी सुविधा—सब कुछ नई बस्तियों को प्राथमिकता मिलती है।</p>
<p>पुराने गांवों में रहने वाले लोग सालों से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कब उनकी गलियां पक्की होंगी, कब नालियां साफ-सुथरी बनेंगी, और कब उनकी रोजमर्रा की मुश्किलें कम होंगी। लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है।</p>
<p>बीते दिनों जब पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल था—केंद्रीय मंत्री के हाथों 16 योजनाओं का शिलान्यास हो रहा था, उस वक्त भी इन गांवों के लोग सिर्फ दूर से तमाशा देखते रहे। कोई PCC रोड, कोई ड्रेनेज सिस्टम, कोई स्ट्रीट लाइट या पार्क—कुछ भी इन गांवों के नाम नहीं आया।</p>
<p>स्थानीय लोग पूछते हैं—क्या हमारी आबादी कम है? क्या हम वोटर नहीं हैं? या फिर हमारी आवाज इतनी कमजोर है कि सरिया नगर पंचायत के अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती?</p>
<p>सबसे बड़ी समस्या है झंडा चौक से बलीडीह स्थित रेलवे लाइन तक की मुख्य नाली का। यह नाली आज भी कच्ची है। बरसात के दिनों में पानी की तेज धार गलियों में बहती है, घरों में घुस जाती है, गंदगी फैलाती है और बीमारियां पैदा करती है। बच्चे स्कूल जाते वक्त कीचड़ में फंस जाते हैं, बुजुर्गों के लिए चलना मुश्किल हो जाता है। लोग कहते हैं, "बरसात आते ही हमारा गांव तालाब बन जाता है। पानी घरों के आंगन में खड़ा हो जाता है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।"</p>
<p>यह नाली अगर पक्की हो जाए तो कम से कम बरसात की मार से राहत मिल सकती है, लेकिन यह काम सालों से लंबित पड़ा है।</p>
<p>बलीडीह और श्री रामडीह के ग्रामीणों की मांग साफ है—विकास सबका हक है, न कि सिर्फ नई कॉलोनियों का। वे चाहते हैं कि नगर पंचायत के अधिकारी इन गांवों की तरफ भी ध्यान दें। "हम भी सरिया नगर पंचायत का हिस्सा हैं। हम भी टैक्स देते हैं, हम भी वोट डालते हैं। फिर विकास क्यों सिर्फ एक तरफ?"—यह सवाल हर घर से उठ रहा है।</p>
<p>यह उपेक्षा सिर्फ सुविधाओं की कमी नहीं, बल्कि एक भावनात्मक घाव भी है। लोग महसूस करते हैं कि उनके गांव को भुला दिया गया है। अगर विकास की योजनाएं वाकई जनता के लिए हैं, तो उन्हें हर कोने तक पहुंचना चाहिए।</p>
<p>बलीडीह और श्री रामडीह के लोग अब इंतजार नहीं करना चाहते। वे अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं—ताकि अगली बार जब कोई शिलान्यास हो, तो उनकी गलियों में भी खुशी की लहर दौड़े, न कि सिर्फ दूर से देखने को मजबूर हों।</p>
<p>क्या सरिया नगर पंचायत के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस पुकार को सुनेंगे? क्या बलीडीह और श्री रामडीह को भी विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल इन गांवों में उम्मीद की एक छोटी-सी किरण बाकी है—शायद अब आवाजें गूंजेंगी, तो बदलाव आएगा।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>गिरिडीह</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 16:47:43 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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