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                <title>BJP Congress trade debate - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>भारत–अमेरिका ट्रेड डील: ‘आत्मनिर्भर भारत’ नहीं, आर्थिक आत्मसमर्पण है : विजय शंकर नायक</title>
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                        <![CDATA[भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस नेता विजय शंकर नायक ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह समझौता किसानों, MSME उद्योगों और रोजगार के लिए नुकसानदायक हो सकता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/india-us-trade-deal-is-not-self-reliant-india-but-economic-surrender/article-17985"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/77ca887d-caa4-4f0c-b7f2-458dfcb780e2_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>भारत–अमेरिका ट्रेड डील को भाजपा सरकार एक “ऐतिहासिक उपलब्धि” के रूप में प्रचारित कर रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि यह समझौता भारत के किसानों, छोटे उद्योगों, श्रमिकों और घरेलू बाजार के लिए एक आर्थिक खतरे की घंटी है। यह डील आत्मनिर्भर भारत का विस्तार नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विदेशी कॉर्पोरेट के सामने झुकाने की नीति प्रतीत होती है।</p>
<p>सवाल यह नहीं है कि अमेरिका को कितना फायदा होगा — सवाल यह है कि भारत को कितना नुकसान झेलना पड़ेगा।</p>
<p><strong>किसानों के लिए खतरा: अमेरिकी कृषि आयात का हमला</strong> — अमेरिका अपने किसानों को भारत की तुलना में 5–10 गुना अधिक सब्सिडी देता है। जहाँ अमेरिकी किसानों को प्रति वर्ष ₹3–5 लाख तक सरकारी सहायता मिलती है, वहीं भारतीय किसान को औसतन ₹14,000–₹18,000 प्रति वर्ष सहायता मिलती है।</p>
<p><strong>डेटा क्या कहता है?</strong><br />2025 में अमेरिका से भारत में कृषि आयात में 34% से अधिक वृद्धि, भारत के कृषि निर्यात में 13.6% की गिरावट। यदि सोयाबीन, डेयरी, मक्का, एथेनॉल और प्रोसेस्ड फूड पर आयात खुला, भारतीय किसान मूल्य प्रतिस्पर्धा में तबाह हो जाएगा। यह किसानों की आय, MSP और ग्रामीण रोज़गार पर सीधा हमला है।</p>
<p><strong>MSME और घरेलू उद्योग: रोज़गार पर सीधा वार</strong><br />भारत की लगभग 30% GDP और 11 करोड़ से अधिक नौकरियाँ MSME सेक्टर पर निर्भर हैं। लेकिन — अमेरिकी टैरिफ दबाव से वस्त्र निर्यात में 20–30% गिरावट, चमड़ा, खिलौना, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में छोटे उद्योग बंद होने के कगार पर। यदि अमेरिकी उत्पाद सस्ते टैरिफ पर आए — लाखों MSME इकाइयाँ बंद होंगी, करोड़ों नौकरियाँ जाएँगी।</p>
<p>भाजपा सरकार कॉर्पोरेट मित्र व्यापार कर रही है — लेकिन छोटे उद्योगों और श्रमिकों के लिए कोई सुरक्षा नीति नहीं है।</p>
<p><strong>व्यापार असंतुलन: अमेरिका को लाभ, भारत को घाटा</strong><br />2024–25 में — अमेरिका का भारत को कृषि निर्यात ≈ $2 अरब, भारत का अमेरिका को कृषि निर्यात ≈ $5.5 अरब। लेकिन नई डील के बाद — अमेरिकी कंपनियों को अधिक टैरिफ राहत और बाज़ार पहुँच, भारतीय उत्पादों पर गैर-टैरिफ बाधाएँ बनी रहेंगी।</p>
<p>इसका अर्थ है — लाभ अमेरिका का, बाज़ार भारत का, नुकसान भारतीय उत्पादक का।</p>
<p><strong>खाद्य सुरक्षा, GM फसल और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खतरा</strong><br />इस ट्रेड डील के तहत — GM फसलें, केमिकल-इंटेंसिव कृषि उत्पाद, बड़े पैमाने पर प्रोसेस्ड फूड भारत के बाज़ार में आ सकते हैं।</p>
<p><strong>जोखिम:</strong><br />पारंपरिक खेती का विनाश, स्वास्थ्य संकट, जैव विविधता और पर्यावरण को नुकसान। यह केवल व्यापार नहीं — भारत की खाद्य संप्रभुता पर हमला है।</p>
<p><strong>रोजगार संकट: व्यापार युद्ध का सीधा असर</strong><br />वैश्विक शोध बताता है कि ट्रेड लिबरलाइजेशन और टैरिफ वॉर से विकासशील देशों में नौकरियाँ सबसे पहले खत्म होती हैं।</p>
<p>भारत पहले ही झेल रहा है — 45 वर्षों में सबसे अधिक बेरोज़गारी, युवाओं में रिकॉर्ड-स्तरीय जॉब क्राइसिस है, और अब भाजपा सरकार एक ऐसी डील कर रही है — जो रोज़गार संकट को और गहरा करेगी।</p>
<p><strong>पारदर्शिता का अभाव: भाजपा देश से सच क्यों छुपा रही है?</strong><br />ट्रेड डील का पूरा मसौदा सार्वजनिक नहीं, संसद में व्यापक चर्चा नहीं, किसानों, MSME और ट्रेड यूनियनों से कोई परामर्श नहीं। यह लोकतंत्र नहीं — यह कॉर्पोरेट दबाव में बनाई गई नीति है।</p>
<p>यदि यह डील भारत के हित में है — तो सरकार डर क्यों रही है इसे सार्वजनिक करने से?</p>
<p><strong>भाजपा की नीति बनाम कांग्रेस की सोच</strong></p>
<p><strong>भाजपा का मॉडल:</strong><br />विदेशी कॉर्पोरेट को प्राथमिकता, घरेलू उद्योगों की उपेक्षा, किसानों की अनदेखी, प्रचार आधारित राष्ट्रवाद।</p>
<p><strong>कांग्रेस का दृष्टिकोण:</strong><br />किसान-केंद्रित व्यापार नीति, MSME और घरेलू उद्योग की सुरक्षा, संतुलित वैश्विक व्यापार, रोजगार और सामाजिक न्याय पर प्राथमिकता।</p>
<p>कांग्रेस मानती है कि — व्यापार राष्ट्रीय हित के लिए होना चाहिए, विदेशी दबाव के लिए नहीं।</p>
<p>यह डील ‘विकसित भारत’ नहीं — आर्थिक उपनिवेशवाद है।</p>
<p>यदि — किसान घाटे में जाए, छोटे उद्योग बंद हों, रोज़गार घटे, विदेशी कंपनियाँ भारतीय बाज़ार पर कब्ज़ा करें — तो यह विकास नहीं, यह 21वीं सदी का आर्थिक उपनिवेशवाद होगा।</p>
<p><strong>अंतिम निष्कर्ष: भाजपा जवाब दे — देश चुप नहीं बैठेगा</strong></p>
<p>भारत–अमेरिका ट्रेड डील राष्ट्रीय गर्व का नहीं, राष्ट्रीय चिंता का विषय है।</p>
<p>देश को जानने का अधिकार है —<br />क्या किसान सुरक्षित हैं?<br />क्या MSME सुरक्षित हैं?<br />क्या रोज़गार सुरक्षित हैं?<br />और क्या यह समझौता भारत को मजबूत करेगा या निर्भर?</p>
<p>यदि भाजपा सरकार जवाब नहीं देगी — तो इतिहास इस डील को किसानों, युवाओं और घरेलू उद्योग के साथ सबसे बड़ा आर्थिक धोखा मानेगा।</p>
<p>कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाती रहेगी — क्योंकि भारत बिकने के लिए नहीं, बनाने के लिए है।</p>
<p><strong><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2026-02/92ef12b5-44dc-4c7f-9800-26f54d07d656.jpg" alt="92ef12b5-44dc-4c7f-9800-26f54d07d656" width="121" height="182"></img></strong></p>
<p><strong>लेखक: विजय शंकर नायक</strong><br /><strong>वरिष्ठ कांग्रेस नेता</strong></p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:07:41 +0530</pubDate>
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