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                <title>newborn treatment - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>पारस एचइसी हॉस्पिटल ने 21 दिन की नवजात की बचाई जान, दुर्लभ बीमारी का सफल इलाज</title>
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                        <![CDATA[पारस एचइसी हॉस्पिटल, रांची में डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी से जूझ रही 21 दिन की नवजात बच्ची का सफल उपचार कर उसकी जान बचाई। बच्ची को तेज पीलिया, सांस लेने में कठिनाई और शॉक की स्थिति में भर्ती कराया गया था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/paras-hec-hospital-saved-the-life-of-a-21-day-old-newborn/article-17930"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/9eafad38-df37-4fd4-9f4d-493087aa2e84_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची :</strong> पारस एचइसी हॉस्पिटल ने एक बार फिर जटिल नवजात चिकित्सा में अपनी विशेषज्ञता का परिचय देते हुए 21 दिन की एक नवजात बच्ची की जान बचाई है। बच्ची को गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उसे तेज पीलिया, सांस लेने में कठिनाई और शॉक की स्थिति का सामना करना पड़ रहा था।</p>
<p>प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर बच्ची को गंभीर निमोनिया या सेप्सिस से ग्रसित माना जा रहा था और परिजनों को अत्यंत खराब परिणामों के लिए मानसिक रूप से तैयार किया गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पारस एचइसी हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक्स विभाग के विशेषज्ञ डॉ निशांत पाठक और उनकी टीम ने बच्ची को हाई फ़्रीक्वेंसी ऑसिलेटरी वेंटिलेशन और इनोट्रोप सपोर्ट पर रखा।  जांच के बाद पता चला कि बच्ची में किसी भी प्रकार के संक्रमण के प्रमाण नहीं थे। प्रो-कैल्सिटोनिन रिपोर्ट नेगेटिव रही तथा ब्लड और यूरिन कल्चर भी स्टेराइल पाए गए। इसके बाद डॉक्टरों ने पीलिया के वास्तविक कारण की खोज की, जिसमें बच्ची में जी6पीडी डेफिशिएंसी की पुष्टि हुई, जो लड़कियों में अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है।</p>
<p>इसके साथ ही इकोकार्डियोग्राफी में लगभग 10 मिमी का बड़ा एओर्टोपल्मोनरी विंडो नामक जन्मजात हृदय दोष भी सामने आया, जो लगभग एक लाख जीवित जन्मों में केवल एक में पाया जाता है।</p>
<p>समुचित और समयबद्ध इलाज के परिणामस्वरूप बच्ची की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। उसे एचएफओवी से हटाकर कन्वेंशनल वेंटिलेशन पर लाया गया। इनोट्रोप सपोर्ट बंद किया गया और बच्ची को फुल फीड पर रखा गया। पूरी तरह स्थिर होने के बाद उसे आगे की हृदय सर्जरी के लिए रेफर कर दिया गया।</p>
<p>डॉ निशांत पाठक ने कहा कि एओर्टोपल्मोनरी विंडो एक दुर्लभ हृदय दोष है, जिसमें हृदय से शरीर को रक्त ले जाने वाली मुख्य धमनी (महाधमनी) और हृदय से फेफड़ों को रक्त ले जाने वाली धमनी (फुफ्फुसीय धमनी) को जोड़ने वाला एक छेद होता है। यह स्थिति जन्मजात होती है, यानी यह जन्म के समय मौजूद होती है। यह केस इस बात का सशक्त उदाहरण है कि हर सेप्सिस जैसा दिखने वाला मामला संक्रमण का ही हो, यह आवश्यक नहीं। सही समय पर की गई विस्तृत जांच ही कई बार जीवन रक्षक सिद्ध होती है।  डॉ पाठक ने कहा कि बच्ची के परिजन बुरे परिणाम की आशंका से घिरे थे, अब बच्ची की जान बचने और उपचार मिलने पर अस्पताल एवं चिकित्सकीय टीम के प्रति गहरा आभार व्यक्त कर रहे हैं।</p>
<p>हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नीतेश कुमार ने कहा कि पारस एचईसी हॉस्पिटल में अत्याधुनिक नवजात आईसीयू, उन्नत जांच सुविधाएं और अनुभवी चिकित्सकीय टीम उपलब्ध है, जिससे जटिल से जटिल मामलों का समय पर और सटीक इलाज संभव हो पाता है।</p>]]>
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                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 18:04:58 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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