<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://samridhjharkhand.com/india-energy-security/tag-65555" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Samridh Jharkhand RSS Feed Generator</generator>
                <title>भारत ऊर्जा सुरक्षा - Samridh Jharkhand</title>
                <link>https://samridhjharkhand.com/tag/65555/rss</link>
                <description>भारत ऊर्जा सुरक्षा RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम एशिया युद्ध: क्या भारत के लिए संकट या ऐतिहासिक अवसर?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पश्चिम एशिया में अमेरिका–इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था और भू-राजनीतिक संतुलन को झकझोर रहा है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भर है, इस संकट से सीधे प्रभावित हो सकता है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/is-west-asia-war-a-crisis-or-a-historic-opportunity/article-18466"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/260f74da-c5b1-4fd7-bc68-2887e8a52170_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>लेखक: विजय शंकर नायक, वरिष्ठ नेता</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया सदियों से साम्राज्यों की टकराहट, ऊर्जा की राजनीति और वैचारिक संघर्षों की धधकती भट्टी रहा है। 1979 की इस्लामी क्रांति ने रूहोल्लाह ख़ुमैनी के नेतृत्व में ईरान को एक वैचारिक दुर्ग में रूपांतरित कर दिया। उस क्रांति की प्रतिध्वनि आज भी क्षेत्रीय समीकरणों में गूंजती है।</p>
<p>28 फरवरी 2026 को जब यूनाइटेड स्टेट्स और इज़राइल ने संयुक्त सैन्य अभियान आरम्भ किया—इज़राइल ने इसे “ऑपरेशन रोअरिंग लायन” और अमेरिका ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया—तो यह स्पष्ट हो गया कि इतिहास ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई सहित अनेक शीर्ष अधिकारी मारे गए। ईरान की जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्र—दुबई, अबू धाबी और दोहा—को युद्ध की सीधी जद में ला दिया।</p>
<p>यह अब सीमित संघर्ष नहीं रहा; यह वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था, समुद्री व्यापार और भू-राजनीतिक संतुलन को हिलाने वाला भूकंप बन चुका है। और इस भूकंप की कंपन भारत तक स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही हैं।</p>
<h3><strong>ऊर्जा सुरक्षा: अस्तित्व का प्रश्न</strong></h3>
<p>भारत अपनी 85 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल की आवश्यकता आयात करता है। खाड़ी क्षेत्र—इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत—पर हमारी निर्भरता 50 प्रतिशत से अधिक है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जिससे विश्व का लगभग पाँचवाँ हिस्सा तेल गुजरता है, अब प्रभावी रूप से अवरुद्ध है। जहाज़ों की आवाजाही ठप है, बीमा प्रीमियम दोगुना हो चुका है और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार पहुँच गया है।</p>
<p>दीर्घकालिक युद्ध की स्थिति में 120–150 डॉलर प्रति बैरल की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। इसका सीधा परिणाम पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी और सीएनजी की कीमतों में तीव्र वृद्धि के रूप में सामने आएगा। परिवहन लागत 20–30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, खाद्य महंगाई में उछाल आएगा, चालू खाता घाटा 2–3 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और रुपया ऐतिहासिक दबाव में आ सकता है। यह केवल आर्थिक झटका नहीं, बल्कि विकास दर और सामाजिक स्थिरता पर संयुक्त प्रहार है। स्टैगफ्लेशन का खतरा वास्तविक है।</p>
<h3>चाबहार: एक स्वप्न पर छाया संकट</h3>
<p>भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह में 500 मिलियन डॉलर से अधिक निवेश किया था, ताकि पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाई जा सके। आज वह परियोजना लगभग ठहराव की स्थिति में है। बंदरगाह संचालन बाधित है, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा प्रभावित है और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए चीन को अवसर मिल सकता है। यह केवल एक बंदरगाह का प्रश्न नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक भू-रणनीतिक स्वायत्तता की परीक्षा है।</p>
<h3><strong>कूटनीति: रस्सी पर संतुलन</strong></h3>
<p>भारत की त्रिकोणीय स्थिति अत्यंत जटिल है—अमेरिका रणनीतिक साझेदार है; इज़राइल रक्षा तकनीक और खुफिया सहयोग का स्तंभ है; और ईरान ऊर्जा तथा भू-राजनीतिक पहुंच का सेतु है। एकतरफा रुख किसी एक धुरी के साथ संबंधों को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र में मतदान से लेकर प्रतिबंधों के अनुपालन तक, हर निर्णय भविष्य की दिशा तय करेगा। भारत को ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को केवल सिद्धांत नहीं, व्यवहार में सिद्ध करना होगा।</p>
<h3><strong>प्रवासी भारतीय: 90 लाख जीवन दांव पर</strong></h3>
<p>खाड़ी क्षेत्र में 90 लाख से अधिक भारतीय कार्यरत हैं, जो सालाना 50 अरब डॉलर से अधिक रेमिटेंस भेजते हैं। यदि युद्ध तीव्र होता है, तो व्यापक निकासी अभियान की आवश्यकता पड़ सकती है। रेमिटेंस में 20–30 प्रतिशत गिरावट संभव है और लौटते श्रमिकों से घरेलू रोजगार संकट गहरा सकता है। 1990 के कुवैत संकट जैसी ऐतिहासिक एयरलिफ्ट की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।</p>
<h3><strong>समुद्री व्यापार और बाजार अस्थिरता</strong></h3>
<p>भारत का 55 प्रतिशत से अधिक समुद्री व्यापार पश्चिम एशिया से होकर गुजरता है। शिपिंग बीमा महंगा हो सकता है, माल भाड़ा दोगुना हो सकता है और उर्वरक व गैस आपूर्ति बाधित हो सकती है। इसका प्रभाव कृषि और उद्योग दोनों पर पड़ेगा। वैश्विक बाजारों में गिरावट, सोना रिकॉर्ड स्तर पर और विदेशी निवेशकों की निकासी जैसी स्थितियाँ भारत की वित्तीय प्रणाली को झकझोर सकती हैं।</p>
<h3><strong>सुरक्षा और साइबर आयाम</strong></h3>
<p>आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते। साइबर हमले, दुष्प्रचार अभियान और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के प्रयास भारत की आंतरिक स्थिरता के लिए चुनौती बन सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा अब ऊर्जा, डिजिटल, सामाजिक और सामरिक—सभी आयामों में विस्तृत हो चुकी है।</p>
<h3><strong>संकट से अवसर तक: भारत का ऐतिहासिक क्षण</strong></h3>
<p>इतिहास सिखाता है कि महान राष्ट्र संकटों की भट्टी में तपकर ही उभरते हैं। यह समय भारत के लिए केवल बचाव का नहीं, बल्कि रूपांतरण का है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय मिशन बनाया जाए, सामरिक तेल भंडार को तीन सप्ताह से बढ़ाकर 90 दिन तक किया जाए, नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया जाए, रक्षा स्वदेशीकरण में निर्णायक छलांग लगाई जाए और संतुलित, सक्रिय व स्वाभिमानी कूटनीति अपनाई जाए।</p>
<h3><strong>निष्कर्ष: धुआँ भारत तक पहुँच चुका है</strong></h3>
<p>यह युद्ध दूर जल रहा है, पर उसका धुआँ भारत की अर्थव्यवस्था, समाज और भविष्य को घेर रहा है। यह क्षण भय का नहीं, निर्णय का है। यह समय प्रतिक्रियात्मक राजनीति का नहीं, रणनीतिक दूरदर्शिता का है। यदि भारत इस संकट को आत्मनिर्भरता, ऊर्जा विविधीकरण, सामरिक संतुलन और सामाजिक एकता के अवसर में बदल दे, तो यही संघर्ष उसे एक अधिक सशक्त, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर कर सकता है।</p>
<p>इतिहास प्रतीक्षा नहीं करता। निर्णायक कदम आज उठाने होंगे, वरना कल बहुत देर हो जाएगी।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/article/is-west-asia-war-a-crisis-or-a-historic-opportunity/article-18466</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/article/is-west-asia-war-a-crisis-or-a-historic-opportunity/article-18466</guid>
                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 15:16:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2026-03/260f74da-c5b1-4fd7-bc68-2887e8a52170_samridh_1200x720.jpeg"                         length="47245"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का जोर, वेनेजुएला समेत नए विकल्पों पर विचार</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारत सरकार ने कहा है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत वैश्विक बाजार की स्थितियों के अनुसार तेल आपूर्ति के नए विकल्पों का मूल्यांकन करेगा। वेनेजुएला समेत अन्य देशों से तेल आयात की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/delhi/6984740901a4d/article-17857"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/9de6677a-5794-4f53-99d6-bafe6f5e5007_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> भारत ने कहा है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वह वेनेजुएला समेत किसी भी नए आपूर्ति विकल्प के वाणिज्यिक लाभों का मूल्यांकन करने के लिए तैयार है। भारत ने दोहराया कि वह ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने का पक्षधर है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को यहां साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में एक बार फिर ऊर्जा जरूरतों और लाभकारी मूल्यों को निर्णय का आधार बताया। उन्होंने दोहराया कि भारत आपूर्ति में विविधता लाने का पक्षधर है।</p>
<p>भारत की इस टिप्पणी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है। उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में व्यापार समझौता सम्पन्न हुआ है। समझौते के बाद अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लग रहा अतिरिक्त टैरिफ हटा लिया है। वहीं, ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस से तेल खरीद नहीं करेगा और वेनेजुएला को प्राथमिकता देगा।</p>
<p>जायसवाल ने भारत-अमेरिका समझौते से जुड़े कई प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रवक्ता ने राष्ट्रपति ट्रंप के दावे पर कहा, “ऊर्जा आपूर्ति के संबंध में सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से बयान दिया है। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत की रणनीति रही है कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बाजार स्थितियों और बदलते वैश्विक घटनाक्रम के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई जाए। भारत के सभी कदम इसी बात को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं और भविष्य में भी उठाए जाएंगे।”</p>
<p>ट्रंप के वेनेजुएला से तेल खरीद संबंधी दावों पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला ऊर्जा क्षेत्र, व्यापार और निवेश के मामले में लंबे समय से भारत का सहयोगी रहा है। वेनेजुएला वर्ष 2019-20 तक भारत के लिए तेल का एक प्रमुख स्रोत रहा है। बाद में प्रतिबंधों के चलते भारत ने तेल खरीद रोक दी थी। वहीं, भारतीय तेल कंपनियों का वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनियों के साथ पहले से सहयोग रहा है। ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत वेनेजुएला सहित किसी भी नए कच्चे तेल आपूर्तिकर्ता से जुड़े विकल्पों के वाणिज्यिक फायदों का मूल्यांकन करने के लिए तैयार है।</p>
<p>इसके अलावा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े प्रश्नों के उत्तर में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वाणिज्य मंत्रालय और वाणिज्य मंत्री के बयानों का संदर्भ लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय और मंत्री इस संबंध में पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/delhi/6984740901a4d/article-17857</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/delhi/6984740901a4d/article-17857</guid>
                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 16:29:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2026-02/9de6677a-5794-4f53-99d6-bafe6f5e5007_samridh_1200x720.jpeg"                         length="51765"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        