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                <title>CSR initiative - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>बोकारो इस्पात संयंत्र ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाया बड़ा कदम</title>
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                        <![CDATA[बोकारो इस्पात संयंत्र के नगर प्रशासन-बागवानी विभाग द्वारा जवाहरलाल नेहरू जैविक उद्यान में ‘पुष्पिता–2026’ पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। वहीं सीएसआर विभाग ने सर्व स्वास्थ्य केंद्र के संचालन हेतु पिरामल स्वास्थ्य के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/bokaro/bokaro-steel-plant-took-a-big-step-towards-strengthening-health/article-18324"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/7c9cb919-d690-46fc-b917-65331ba28549_samridh_1200x720-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p>बोकारो : बोकारो इस्पात संयंत्र के नगर प्रशासन–बागवानी विभाग द्वारा 21 से 22 फरवरी को जवाहरलाल नेहरू जैविक उद्यान में एक पुष्प प्रदर्शनी (‘पुष्पिता–2026’) का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्घाटन 21 फरवरी को पूर्वाह्न बीएसएल की अधिशासी निदेशक (एचआर) राजश्री बनर्जी द्वारा किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर अधिशासी निदेशक (सामग्री प्रबंधन) सी.आर. मिश्रा, अधिशासी निदेशक (परियोजनाएं) अनीष सेनगुप्ता, अधिशासी निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ. बी.बी. करुणामय, मुख्य महाप्रबंधक (सर्विसेज) अरविन्द कुमार, मुख्य महाप्रबंधक (नगर प्रशासन) कुंदन कुमार, महाप्रबंधक (हॉर्टिकल्चर) लम्बोदर उपाध्याय सहित अन्य वरीय अधिकारी, बीएसएल कर्मी तथा प्रदर्शनी में भाग ले रहे प्रतिभागी उपस्थित थे।</p>
<p>इस प्रदर्शनी में चार श्रेणियों में पुष्पों को प्रदर्शित किया गया है, जिनमें नगर बोकारो के आमजन, विभिन्न स्कूल, विभिन्न नर्सरी तथा माली शामिल हैं। प्रदर्शनी में मौसमी फूल, सजावटी पौधे, पुष्प सज्जा तथा नए लैंडस्केपिंग कॉन्सेप्ट प्रदर्शित किए गए हैं। प्रदर्शनी में कुल लगभग 200 पुष्प-गमले प्रतिभागियों द्वारा प्रदर्शित किए गए हैं।</p>
<p>प्रदर्शनी के उपरान्त एक निर्णायक मंडल द्वारा तीन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों का चयन किया जाएगा और उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों को बसंत मेला 2026 में नगर प्रशासन बागवानी विभाग द्वारा प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का समापन एवं पुरस्कार वितरण 22 फरवरी को सायं पाँच बजे किया जाएगा।</p>
<p>बोकारो इस्पात संयंत्र के निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) विभाग ने सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पिरामल स्वास्थ्य मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीएसएमआरआई) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है।</p>
<p>यह समझौता सेक्टर-9 स्थित ‘सर्व स्वास्थ्य केंद्र’ के संचालन के लिए किया गया है, जो स्थानीय परिधीय क्षेत्रों और वंचित वर्ग के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए समर्पित एक व्यापक स्वास्थ्य केंद्र होगा।</p>
<p>इस अवसर पर अधिशासी निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ. बी.बी. करुणामय की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। बोकारो इस्पात संयंत्र की ओर से अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शुभम कुमार अग्रवाल तथा पिरामल स्वास्थ्य की ओर से कार्यक्रम निदेशक नीरजा बैंकर ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।</p>
<p>इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ. अनिन्दा मंडल, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी प्रभारी (चिकित्सा प्रशासन) डॉ. दीपक कुमार, डॉ. निप्पोन कुमार शर्मा (चिकित्सा प्रशासन), उप महाप्रबंधक (चिकित्सा प्रशासन) कैरोल शर्मा, महाप्रबंधक (सीएसआर) पी.पी. चक्रवर्ती, वरीय प्रबंधक (सीएसआर) एन. के. त्रिपाठी, सहायक प्रबंधक (सीएसआर) प्रवीण कुमार तथा पिरामल स्वास्थ्य के वरीय प्रबंधक शैलेंद्र सहाय भी उपस्थित थे।</p>
<p>इस पहल के अंतर्गत सर्व स्वास्थ्य केंद्र में सामान्य स्वास्थ्य जाँच के साथ-साथ पूर्ण रूप से पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जैसी आधुनिक क्लिनिकल सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँगी। उल्लेखनीय है कि यह समझौता बीएसएल-सीएसआर और पिरामल स्वास्थ्य के बीच पिछले 10 वर्षों से चले आ रहे अटूट विश्वास और सहयोग की नींव पर आधारित है।</p>
<p>विगत एक दशक से दोनों संस्थान साझा रूप से ‘इस्पात संजीवनी’ मोबाइल मेडिकल वैन का संचालन कर रहे हैं, जो बोकारो शहर के आसपास के 46 परिधीय स्थानों पर स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचा रही है। यह नई पहल उनके सफल और दीर्घकालिक सहयोग का स्वाभाविक तथा महत्वपूर्ण विस्तार है।</p>
<p>‘सर्व स्वास्थ्य केंद्र’ का संचालन सेक्टर-9 और आसपास के परिधीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में बोकारो इस्पात संयंत्र की एक सशक्त पहल है। वंचित वर्ग के लोगों को उनके घर के समीप ही बेहतर नैदानिक एवं चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान कर बीएसएल न केवल अपने निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) का निर्वहन कर रहा है, बल्कि एक स्वस्थ और सक्षम समाज के निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>बोकारो</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Feb 2026 17:59:36 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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                <title>आईआईटी बॉम्बे की ‘जीवोदया’ परियोजना ने रचा नैतिक रेशम उत्पादन में नया इतिहास</title>
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                        <![CDATA[कोल इंडिया के सीएसआर सहयोग से आईआईटी बॉम्बे की ‘जीवोदया’ पायलट परियोजना ने तीन वर्षों के अनुसंधान के बाद ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें रेशम के कीड़ों की हत्या किए बिना नैतिक और पर्यावरण अनुकूल रेशम का उत्पादन संभव हुआ है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/iit-bombays-jivodaya-project-creates-new-history-in-ethical-silk/article-17751"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/0b356c4f-f14c-4680-a34c-b31e6027ac87_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची : </strong>कोल इंडिया के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) फंड के सहयोग से संचालित आईआईटी बॉम्बे की अनूठी पायलट परियोजना ‘जीवोदया’ ने तीन वर्षों के निरंतर अनुसंधान एवं विकास के पश्चात नैतिक रेशम उत्पादन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस परियोजना के अंतर्गत आईआईटी बॉम्बे के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रौद्योगिकी विकल्प केंद्र (सी-तारा) ने रेशम उत्पादन की एक ऐसी नवीन तकनीक सफलतापूर्वक विकसित की है, जिसमें रेशम के कीड़ों की हत्या की आवश्यकता नहीं होती। पारंपरिक विधियों से अलग, इस तकनीक में रेशम के कीड़े रेशमी धागा उत्पन्न करने के बाद पतंगे (moth) में परिवर्तित होकर अपना प्राकृतिक जीवन चक्र पूर्ण कर पाते हैं। इसीलिए, मानवीय और नैतिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते इस रेशम को ‘जीवोदया सिल्क’ नाम दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">परंपरागत रूप से, शहतूत की पत्तियों पर पलने वाले रेशम के कीड़े अपने चारों ओर कोकून (cocoon) बनाते हैं। रेशम निकालने के लिए इन कोकूनों को उबाल दिया जाता है, जिससे लाखों रेशम कीड़ों की मृत्यु हो जाती है। ‘जीवोदया’ परियोजना ने इस लंबे समय से चली आ रही प्रथा को चुनौती देते हुए करुणा आधारित वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को पुनर्परिभाषित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अथक प्रयोगों के बाद, ‘सी-तारा’ ने एक दुर्लभ वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है, जिसके तहत रेशम के कीड़ों को कोकून बनाए बिना समतल सतह पर रेशमी धागा बुनने के लिए प्रशिक्षित किया गया। इसके परिणामस्वरूप, अब रेशम के कीड़ों को कोकून बनाने की आवश्यकता नहीं रहती और वे अंततः पतंगे के रूप में मुक्त होकर उड़ान भर पाते हैं। यह उपलब्धि प्राचीन भारतीय दर्शन की उस भावना को साकार करती है -<br />“मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्” — कोई भी दुःखी न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">कोल इंडिया ने इस असाधारण प्रयोग को अवधारणा से सफलता तक पहुँचाने में निरंतर सीएसआर सहयोग के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नैतिक और पर्यावरणीय महत्व के साथ-साथ, यह तकनीक रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए आय का एक नया और सतत स्रोत भी प्रदान करती है, जिससे ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">‘जीवोदया’ पायलट परियोजना की सफलता के साथ, यह पहल व्यापक स्तर पर अपनाए जाने तथा सतत और नैतिक रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएँ रखती है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 15:48:26 +0530</pubDate>
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