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                <title>Kulesh Bhandari - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>दुमका के जंगलों में मिला दुर्लभ फ्लाइंग फॉक्स समूह, युवा शोधकर्ता की बड़ी उपलब्धि</title>
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                        <![CDATA[दुमका के युवा शोधकर्ता कुलेश भंडारी ने संताल परगना के जंगलों में एक दुर्लभ फ्लाइंग फॉक्स कॉलोनी का दस्तावेज़ीकरण किया है, जो जंगलों की पारिस्थितिक मजबूती और संरक्षण की संभावना को दर्शाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dumka/rare-flying-fox-group-found-in-dumka-forests-big-achievement/article-17655"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-01/8c5aba32-6d03-43de-a00f-2d0959dbdf9f-(1)_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>दुमका : </strong>संताल परगना के पहाड़ी जंगल एक बार फिर अपनी प्राकृतिक समृद्धि से चौंका रहे हैं। दुमका के युवा शोधकर्ता कुलेश भंडारी ने यहाँ एक दुर्लभ और बड़ी फ्लाइंग फॉक्स (बड़े चमगादड़) कॉलोनी का दस्तावेज़ीकरण किया है। यह दृश्य क्षेत्र के लिए लगभग अभूतपूर्व माना जा रहा है।कुलेश द्वारा ली गई तस्वीरों में दर्जनों फ्लाइंग फॉक्स एक साथ शाम के समय ऊँचे पेड़ों से उड़ान भरते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य इस क्षेत्र में बहुत कम देखने को मिलता है और बताता है कि यहाँ के जंगल अभी भी प्राकृतिक रूप से जीवंत हैं।</p>
<h4><strong>कुलेश भंडारी ने बताया,</strong></h4>
<p>“संताल परगना में इस तरह की सक्रिय और बड़ी कॉलोनी का रिकॉर्ड शायद पहली बार सामने आ रहा है। यह हमारे जंगलों की पारिस्थितिक मजबूती का प्रमाण है। यह खोज केवल एक फोटो-रिकॉर्ड नहीं है—बल्कि आगे चलकर एक वैज्ञानिक रिपोर्ट और शोध-पत्र (research paper) के रूप में भी विकसित की जा रही है। कुलेश अपने चल रहे फील्ड प्रोजेक्ट्स के तहत इस कॉलोनी के व्यवहार, रोस्ट पैटर्न और पर्यावरणीय महत्व पर विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं।</p>
<p>महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह शोध कार्य The Pollination Project (USA) के सहयोग से किया जा रहा है, जिन्होंने भंडारी के समुदाय-आधारित पर्यावरणीय कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन और फंडिंग प्रदान की है। यह उपलब्धि झारखंड के युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि फ्लाइंग फॉक्स जंगलों के परागण, बीज फैलाव और प्राकृतिक पुनर्जनन में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए इस तरह की कॉलोनी का मिलना संरक्षण के लिहाज से एक महत्वपूर्ण संकेत है।</p>
<p>कुलेश भंडारी पिछले कई वर्षों से दुमका–गोड्डा क्षेत्र में जैव-विविधता, वन्यजीव व्यवहार और जनजातीय भू-दृश्य पर लगातार फील्ड रिसर्च कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि संताल परगना की प्राकृतिक विरासत को नई पहचान देती है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>दुमका</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 11:37:39 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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                <title>कुलेश भंडारी के नेतृत्व में पाहाड़िया गांवों में मजबूत हो रहा वाइल्ड फूड फॉरेस्ट अभियान</title>
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                        <![CDATA[दुमका के पाहाड़िया गांवों में वाइल्ड फूड फॉरेस्ट अभियान पारंपरिक वन-ज्ञान और सामुदायिक संरक्षण को नई दिशा दे रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dumka/wild-food-forest-campaign-is-getting-stronger-in-pahadia-villages/article-17468"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-12/famous-tribal-foods-of-jharkhand-_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>दुमका : </strong>जिले की घाटी पंचायत (बरमसिया) के पाहाड़िया बहुल गांवों में इन दिनों वाइल्ड फूड फॉरेस्ट्स इन ट्राइबल झारखंड अभियान के तहत एक सशक्त और ज़मीनी पहल लगातार आकार ले रही है। इस पहल का नेतृत्व कुलेश भंडारी कर रहे हैं, जो लंबे समय से संथाल परगना क्षेत्र में समुदाय आधारित संरक्षण और पारंपरिक वन-ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए सक्रिय हैं।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान गांव के बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ खुले मैदान में संवाद किया गया। बच्चों ने कविता पाठ किया, पारंपरिक खेल खेले और जंगल से मिलने वाले खाद्य पौधों, साग-सब्ज़ियों और कंद-मूल पर चर्चा हुई। किसी मंच या औपचारिक भाषण के बजाय लोगों के साथ बैठकर उनकी बात सुनना इस पहल की खास पहचान रही।</p>
<p>कुलेश भंडारी ने कहा कि पाहाड़िया समुदाय केवल जंगल का उपयोग करने वाला समाज नहीं, बल्कि उसका मूल संरक्षक रहा है। जब बच्चों को शुरू से ही जंगल, मिट्टी और अपने पारंपरिक ज्ञान से जोड़ा जाता है, तब संरक्षण अपने आप मजबूत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाइल्ड फूड फॉरेस्ट कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि गांव-गांव लगातार आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया है।</p>
<p>इस अभियान के ज़मीनी क्रियान्वयन में आलोक कुमार मांझी ने सह-समन्वयक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर गतिविधियों का संचालन किया और स्थानीय ज्ञान को सामने लाने में सहयोग किया। गांव की महिलाओं और बुजुर्गों ने बताया कि पहले जंगल से मिलने वाला भोजन गांव की रोजमर्रा की ज़रूरतों का हिस्सा था, जो समय के साथ कम होता गया। ऐसे में यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है।</p>
<p>यह अभियान द पोलिनेशन प्रोजेक्ट फाउंडेशन (अमेरिका) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। वाइल्ड फूड फॉरेस्ट पहल अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं रही, बल्कि घाटी पंचायत से निकलकर आसपास के कई गांवों में लगातार विस्तार ले रही है और धीरे-धीरे एक व्यापक जन-आधारित आंदोलन का रूप ले रही है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                                            <category>झारखण्ड</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 16:13:26 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anshika Ambasta]]>
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