<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://samridhjharkhand.com/ghulam-nabi-azad/tag-5906" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Samridh Jharkhand RSS Feed Generator</generator>
                <title>Ghulam Nabi Azad - Samridh Jharkhand</title>
                <link>https://samridhjharkhand.com/tag/5906/rss</link>
                <description>Ghulam Nabi Azad RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Opinion : भारतीय लोकतंत्र में मुस्लिम नेतृत्व: नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में योगदान की गहन समीक्षा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[यह लेख भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेताओं की विविध भूमिका और प्रभाव को उजागर करता है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समकालीन राजनीति तक, ये नेता नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में महत्वपूर्ण योगदान देते आए हैं।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-an-in-depth-review-of-the-contribution-of-muslim-leadership/article-17905"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/3ccb2867-6d79-40a1-9ac1-40ce0a9a0be1_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>भारतीय लोकतंत्र की मूल शक्ति उसकी विविधता, विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, विचारधाराओं और समूहों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की संरचना में निहित है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए नेता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आकार देते हैं।</p>
<p>इस व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में मुस्लिम समुदाय का योगदान केवल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि नीति-निर्माण, संगठनात्मक राजनीति, विदेश नीति, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय संतुलन जैसे क्षेत्रों में भी उसकी निरंतर और प्रभावशाली भूमिका रही है।</p>
<p>स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समकालीन राजनीति तक, मुस्लिम नेताओं ने अलग-अलग वैचारिक धाराओं और राजनीतिक दलों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। बेशक इन नेताओं की राजनीतिक यात्राएँ एक-दूसरे से भिन्न रही हैं, जहां कुछ ने प्रशासनिक और संवैधानिक भूमिकाओं में योगदान दिया, वहीं कुछ ने संगठनात्मक रणनीति के माध्यम से शक्ति अर्जित की, जबकि कुछ ने स्पष्ट और मुखर राजनीतिक विमर्श के जरिए अपना जनाधार बनाया।</p>
<p>यह विविधता भारतीय राजनीति की जटिलता और समावेशिता दोनों को रेखांकित करती है। इस लेख के माध्यम से मैं ऐसे ही कुछ मुस्लिम नेताओं के राजनीतिक योगदान और प्रभाव का जिक्र करने जा रहा हूँ, जिन्होंने अलग-अलग कालखंडों, दलों और भूमिकाओं में राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया।</p>
<p>सलमान खुर्शीद उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पहचान अकादमिक पृष्ठभूमि और संसदीय शालीनता से जुड़ी रही है। कानून, विदेश और अल्पसंख्यक मामलों जैसे मंत्रालयों में उनकी भूमिका नीतिगत निरंतरता और संस्थागत संतुलन का उदाहरण रही। विदेश मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भारत की वैश्विक छवि के प्रबंधन के संदर्भ में उल्लेखनीय रहा।</p>
<p>वे उस राजनीतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ वैचारिक स्पष्टता और संवाद की संस्कृति को प्राथमिकता दी जाती है। सैयद शाहनवाज़ हुसैन भारतीय जनता पार्टी में उन शुरुआती मुस्लिम नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>अपेक्षाकृत कम उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करने वाले शाहनवाज़ हुसैन ने केंद्र सरकार में नागरिक उड्डयन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे मंत्रालयों में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका राजनीतिक सफर संगठनात्मक निष्ठा, पार्टी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और संवाद आधारित राजनीति का उदाहरण रहा है।</p>
<p>बिहार की राजनीति में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही, जहाँ उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय और व्यापक सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। वे उस दौर के प्रतिनिधि रहे हैं जब भाजपा मुस्लिम नेतृत्व को अपनी मुख्यधारा की राजनीति में स्थान देने की कोशिश कर रही थी।</p>
<p> मुख्तार अब्बास नक़वी भारतीय जनता पार्टी में मुस्लिम नेतृत्व का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। संसदीय कार्य, अल्पसंख्यक मामलों और कौशल विकास जैसे मंत्रालयों में उनके कार्यकाल के दौरान कई नीतिगत फैसले लिए गए, जिन पर व्यापक बहस भी हुई। वे उस राजनीतिक धारा का प्रतिनिधित्व करते हैं जो वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक अनुशासन को प्राथमिकता देती है।</p>
<p>असदुद्दीन ओवैसी समकालीन राजनीति में सबसे मुखर मुस्लिम नेताओं में गिने जाते हैं। संसद में उनके हस्तक्षेप संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं। उनकी राजनीतिक शैली स्पष्ट, तर्कप्रधान और कई बार टकरावपूर्ण रही है। ओवैसी ने क्षेत्रीय आधार से राष्ट्रीय विमर्श तक अपनी उपस्थिति को विस्तार दिया है, जो बदलती चुनावी राजनीति की एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति को दर्शाता है।</p>
<p>तारिक अनवर कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने संगठनात्मक राजनीति और संसदीय कार्य दोनों में लंबा अनुभव अर्जित किया है। उनका राजनीतिक योगदान मुख्यतः पार्टी संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर संपर्क बनाए रखने से जुड़ा रहा है। वे एक सफल सांसद होने के साथ-साथ निरंतरता और संगठनात्मक स्थायित्व के प्रतिनिधि माने जाते हैं।</p>
<p>फ़ारूक़ अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाले नेता रहे हैं। उनका राजनीतिक जीवन क्षेत्रीय आकांक्षाओं, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने का प्रयास रहा है। कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उनकी भूमिका भारतीय राजनीति के जटिल आयामों को समझने में मदद करती है।</p>
<p>मोहसिना किदवई का योगदान मुख्यतः संसदीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है। अल्पसंख्यक अधिकारों और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर उनकी सक्रियता उन्हें कांग्रेस के भीतर एक सम्मानित स्थान दिलाती है। वे उस पीढ़ी की नेता हैं जिन्होंने अपेक्षाकृत शांत लेकिन निरंतर राजनीतिक भूमिका निभाई है।</p>
<p> अहमद पटेल भारतीय राजनीति के उन रणनीतिकारों में थे जिनकी भूमिका सार्वजनिक मंच से अधिक संगठन के भीतर प्रभावशाली रही। चुनावी रणनीति, गठबंधन प्रबंधन और संकट काल में निर्णय लेने की उनकी क्षमता ने कांग्रेस को कई बार राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद की।</p>
<p>उनका योगदान इस बात का उदाहरण है कि सत्ता और प्रभाव हमेशा सार्वजनिक पदों से ही नहीं आते। ग़ुलाम नबी आज़ाद का राजनीतिक अनुभव प्रशासनिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर रहा है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने उन्हें एक अनुभवी प्रशासक की पहचान दी।</p>
<p>वे संवाद और सहमति आधारित राजनीति के समर्थक माने जाते हैं, जिन्हे पक्ष-विपक्ष, दोनों से ही बराबर सम्मान मिलता है। नजमा हेपतुल्ला भाजपा की उन महिला नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने संसदीय संस्थाओं और मंत्रालयों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। अल्पसंख्यक मामलों और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर उनका कार्य भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व के विस्तार को दर्शाता है।</p>
<p>उन्होंने मणिपुर राज्य के राज्यपाल की भूमिका भी निभाई है। इन नेताओं का राजनीतिक सफर यह स्पष्ट करता है कि भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व किसी एक विचारधारा या रणनीति तक सीमित नहीं है। यह नेतृत्व कहीं संस्थागत और शांत, कहीं मुखर और वैचारिक, तो कहीं रणनीतिक और संगठनात्मक रूप में विविध रहा है।</p>
<p>इनकी भूमिका यह समझने में सहायक है कि लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व केवल पहचान का प्रश्न नहीं, बल्कि नीति, संवाद और राष्ट्रीय हित के साथ संतुलन साधने की प्रक्रिया है। भारतीय राजनीति की इस बहुमूल्य संरचना को मजबूत बनाए रखने में ऐसे नेताओं की उपस्थिति और योगदान आगे भी महत्वपूर्ण बना रहेगा क्योंकि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती विविध आवाज़ों के सहअस्तित्व से ही सुनिश्चित होती है।</p>
<p><strong>डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-an-in-depth-review-of-the-contribution-of-muslim-leadership/article-17905</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-an-in-depth-review-of-the-contribution-of-muslim-leadership/article-17905</guid>
                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 13:00:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2026-02/3ccb2867-6d79-40a1-9ac1-40ce0a9a0be1_samridh_1200x720.jpeg"                         length="51411"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुलाम नबी आजाद ने तोड़ी चुप्पी, बोले 34 साल से सीडब्ल्यूसी मेंबर हूं, विरोध करने वाले बाहर जाएंगे</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने खुद को पार्टी के अंदर हाशिये पर ढकेले जाने की कोशिशों और हमलों पर गुरुवार को चुप्पी तोड़ी. गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad)  कहा कि वे 34 सालों से कांग्रेस कार्यसमिति (Congress Working Committee)  के सदस्य हैं. जिनको कुछ भी नहीं मालूम है और अप्वाइंटमेंट वाला कार्ड मिल गया है, वहीं विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वे सब बाहर जाएंगे.</p>
<p>गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जिसकी भी कांग्रेस के आंतरिक कामकाज में वास्तविक रुचि है, वह</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/politics/ghulam-nabi-azad-broke-silence-says-entire-congress-working-committee-should-be-elected/article-7269"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-08/gulam-nabi-azad.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने खुद को पार्टी के अंदर हाशिये पर ढकेले जाने की कोशिशों और हमलों पर गुरुवार को चुप्पी तोड़ी. गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad)  कहा कि वे 34 सालों से कांग्रेस कार्यसमिति (Congress Working Committee)  के सदस्य हैं. जिनको कुछ भी नहीं मालूम है और अप्वाइंटमेंट वाला कार्ड मिल गया है, वहीं विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वे सब बाहर जाएंगे.</p>
<p>गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जिसकी भी कांग्रेस के आंतरिक कामकाज में वास्तविक रुचि है, वह हमारे प्रस्ताव के अनुरूप हर राज्य व जिला में कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने का स्वागत करेगा. उन्होंने कहा कि पूरी कांग्रेस कार्यसमिति का चुनाव होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य कांग्रेस को सक्रिय और मजबूत बनाना है. लेकिन जिनके पास सिर्फ अप्वाइंटमेंट कार्ड है, वे हमारे प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस कार्यसमिति के चुनाव में क्या दिक्कत है.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">मंशा कांग्रेस को मजबूत करने की थी। मैं पिछले 34 साल से वर्किंग कमेटी में हूं। जिनको कुछ भी नहीं मालुम और अप्वाइंटमेंट वाला कार्ड मिल गया है वो सब विरोध करते हैं, वो सब बाहर जाएंगे : कांग्रेस वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद <a href="https://t.co/Eh4PnWPlEl">pic.twitter.com/Eh4PnWPlEl</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1298958513260158976?ref_src=twsrc%5Etfw">August 27, 2020</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>गुलाम नबी आजाद ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब उनके नेतृत्व में 23 नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व में आमूल चूल बदलाव के लिए एक पत्र लिखा. इस पत्र में आनंद शर्मा व कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल हैं. इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति में इस तिकड़ी की घेराबंदी की गयी.</p>
<p>गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में लिखे गए पत्र के बाद सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्यसमिति की एक बैठक बुलायी और यह माना गया कि उसमें वे अंतरिम अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे का एलान कर सकती हैं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. बल्कि गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल और आनंद शर्मा को नेताओं की आलोचना का सामना करना पड़ा.</p>
<p>इसके बाद कांगे्रेस ने मोदी सरकार के अध्यादेशों के अध्ययन और उसके अनुरूप रणनीति तय करने के लिए बनायी कमेटी में इन तीनों नेताओं में किसी को जगह नहीं दी. इस कमेटी में पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश जैसे नेताओं को जगह मिली. गुलाम नबी की अनुपस्थिति ने सबको चैंकाया, क्योंकि राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उनका कामकाज शानदार रहा है. वे मोदी सरकार की मुद्दों पर जोरदार घेराबंदी करते हैं.</p>
<p>हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि नाराज चल रहे गुलाम नबी की नाराजगी को दूर करने की कोशिश में स्वयं सोनिया गांधी लगी हैं. इन नेताओं को भाजपा समर्थक भी नेहरू-गांधी परिवार के समर्थकों ने बताया था.</p>
]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/politics/ghulam-nabi-azad-broke-silence-says-entire-congress-working-committee-should-be-elected/article-7269</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/news/politics/ghulam-nabi-azad-broke-silence-says-entire-congress-working-committee-should-be-elected/article-7269</guid>
                <pubDate>Thu, 27 Aug 2020 18:10:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2020-08/gulam-nabi-azad.jpg"                         length="89606"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Samridh Jharkhand]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लाॅकडाउन बढाने पर पीएम मोदी से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के बाद गुलाम नबी आजाद ने दिया यह अहम बयान</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> क्या कोरोना महामारी को लेकर लाॅकडाउन बढेगा, इस पर अलग-अलग तरह की खबरें मीडिया में चल रही हैं. इस बीच आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने अहम बयान दिया है. उन्होंने यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडिया कान्फ्रेंसिंग में हुई बातचीत के बाद दिया है. गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 80 प्रतिशत राजनीतिक पार्टियों ने यह सलाह दी है कि लाॅकडाउन की अवधि को बढाया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज विभिन्न राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स से बात की है.</p>
<p>गुलाम नबी आजाद</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/more-than-percent-political-parties-have-suggested-extension-of-lockdown-says-gn-azad/article-6184"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-04/gulam-nabi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> क्या कोरोना महामारी को लेकर लाॅकडाउन बढेगा, इस पर अलग-अलग तरह की खबरें मीडिया में चल रही हैं. इस बीच आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने अहम बयान दिया है. उन्होंने यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडिया कान्फ्रेंसिंग में हुई बातचीत के बाद दिया है. गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 80 प्रतिशत राजनीतिक पार्टियों ने यह सलाह दी है कि लाॅकडाउन की अवधि को बढाया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज विभिन्न राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स से बात की है.</p>
<p>गुलाम नबी आजाद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि वे लोगों से इस संबंध में सूचनाएं प्राप्त कर रहे हैं कि वे लोग लाॅकडाउन बढाना चाहते हैं, लेकिन इस संबंध में आखिरी निर्णय मुख्यमंत्रियों व अन्य पक्षों से बातचीत के बीच लिया जाएगा. मालूम हो कि प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ 11 अप्रैल को वीडियो कान्फ्रेंसिंग करने वाले हैं, जिसमें लाॅकडाउन बढाने सहित को़ेरोना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">80%से अधिक राजनीतिक दलों ने लॉकडाउन को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है।PMने कहा कि उन्हें लोगों से जानकारी मिल रही है कि वे लॉकडाउन को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय सीएम और अन्य लोगों के साथ बैठक के बाद लिया जाएगा: सांसदों का पीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद जीएन आज़ाद <a href="https://t.co/mPIOydOfEM">pic.twitter.com/mPIOydOfEM</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1247858114235224064?ref_src=twsrc%5Etfw">April 8, 2020</a></p></blockquote>
<p><br />
मालूम हो कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बड़ी मुखरता से देश में लाॅकडाउन बढाने की कल मांग की थी. उन्होंने कहा था कि इससे तकलीफें होंगी, हमारी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा लेकिन हम उसे बाद में ठीक कर लेंगे, लेकिन हमारे लोगों की जान जाएगी तो उसे वापस नहीं ला सकेंगे.</p>
<p>वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राज्य में जारी लाॅकडाउन से बाहर निकलने के तरीके खोजने के लिए जल्द ही एक टास्क फोर्स का गठन करने की घोषणा की है.</p>
<p>अबतक मीडिया रिपोर्टाें में लाॅकडाउन के लेकर कई तरह के दावे किए गए हैं. कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 अप्रैल के बाद सिर्फ उन जिलों में लाॅकडाउन रहेगा जहां कोरोना मरीज मिले हैं तो कुछ में कहा गया है कि लाॅकडाउन को चार कटेगरी में बांटा जाएगा. कुछ रिपोर्ट में इसके तीन जून तक बढने तक की बात कही गयी है. हालांकि अबतक इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया गया है और आखिरी फैसला प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न पक्षों से बातचीत के बाद लेंगे. हालांकि उनसे राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली कोरोना से संबंधित जीओएम ने भी लाॅकडाउन बढाने की सिफारिश की है.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">COVID-19 : PM Modi to interact with Chief Ministers on April 11</p>
<p>Read <a href="https://twitter.com/ANI?ref_src=twsrc%5Etfw">@ANI</a> Story | <a href="https://t.co/5iQX1KhrEy">https://t.co/5iQX1KhrEy</a> <a href="https://t.co/S1yOHqnJiD">pic.twitter.com/S1yOHqnJiD</a></p>
<p>— ANI Digital (@ani_digital) <a href="https://twitter.com/ani_digital/status/1247859699795582977?ref_src=twsrc%5Etfw">April 8, 2020</a></p></blockquote>
<p></p>
]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/national/more-than-percent-political-parties-have-suggested-extension-of-lockdown-says-gn-azad/article-6184</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/news/national/more-than-percent-political-parties-have-suggested-extension-of-lockdown-says-gn-azad/article-6184</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Apr 2020 18:36:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2020-04/gulam-nabi.jpg"                         length="36857"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Samridh Jharkhand]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उमर से मिले फारुक अब्दुल्ला, गुलाम नबी बोले &amp;#8211; लीडरों को तोते की तरह बंद करने से तरक्की नहीं होगी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>श्रीनगर :</strong> नेशनल कान्फ्रेंस के नेता व जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला का आज जेल से रिहाई का दूसरा दिन है. कल ही उन्हें सात महीने बाद नजरबंदी से रिहा किया गया. वे केंद्र द्वारा जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद सात महीने से जम्मू कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत नजरबंद थे. कल जहां उन्होंने रिहाई के बाद परिवार के लोगों से मुलाकात की थी और संसद के सत्र में शामिल होने का संकल्प व्यक्त किया था, वहीं आज वे अपने बेटे व राज्य के एक और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिले. अब्दुल्ला</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/ghulam-nabi-azad-met-farooq-abdullah-demand-election-in-jammu-and-kashmir/article-5912"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-03/gulam-nabi-farooq.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>श्रीनगर :</strong> नेशनल कान्फ्रेंस के नेता व जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला का आज जेल से रिहाई का दूसरा दिन है. कल ही उन्हें सात महीने बाद नजरबंदी से रिहा किया गया. वे केंद्र द्वारा जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद सात महीने से जम्मू कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत नजरबंद थे. कल जहां उन्होंने रिहाई के बाद परिवार के लोगों से मुलाकात की थी और संसद के सत्र में शामिल होने का संकल्प व्यक्त किया था, वहीं आज वे अपने बेटे व राज्य के एक और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिले. अब्दुल्ला पिता-पुत्र एवं पीडीपी चीफ व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को भी नजरबंद किया गया था. सीनियर अब्दुल्ला को जहां मुक्त कर दिया गया, वहीं बाकी दोनों अभी नजरबंद ही हैं.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/JammuAndKashmir?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#JammuAndKashmir</a> Congress’ Ghulam Nabi Azad: The decision to declare the state of J&amp;K as a Union Territory is an insult to the people of J&amp;K. It must be revoked. J&amp;K should be declared a state again. <a href="https://t.co/b09D0QQEUR">https://t.co/b09D0QQEUR</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1238768824486260737?ref_src=twsrc%5Etfw">March 14, 2020</a></p></blockquote>
<p><br />
फारुक अब्दुल्ला से श्रीनगर में आज वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद भी मिले. मुलाकात के बाद नबी ने कहा कि साढे सात महीने के बाद इनसे मुलाकात हुई है. मुझे आज तक समझ नहीं आया कि इन्हें नजरबंद क्यों किया गया था. 370 आने से पहले ही इन्हें नजरबंद कर दिया गया था.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Srinagar: National Conference leader Farooq Abdullah today met his son &amp; party leader Omar Abdullah at the place where the latter has been detained in Srinagar, under Public Safety Act (PSA). Farooq Abdullah was released from detention yesterday. <a href="https://t.co/4bdAhOK2bS">pic.twitter.com/4bdAhOK2bS</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1238739317972852736?ref_src=twsrc%5Etfw">March 14, 2020</a></p></blockquote>
<p><br />
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि लीडरों को तोते की तरह पिंजरे में बंद करने से कश्मीर में तरक्की नहीं होगी. लीडरों को छोड़ देना होगा, रिहा करना होगा, राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करनी होगी. उन्होंने कहा कि यहां चुनाव कराए जाएं और जम्मू कश्मीर के लोग जिसे चाहें वो सरकार चुन का आए.</p>
<p>गुलाम नबी ने कहा कि जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करना यहां के लोगों का अपमान है. उन्होंने कहा कि यह फैसला वापस लिया जाना चाहिए और इसे राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए.</p>
]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/national/ghulam-nabi-azad-met-farooq-abdullah-demand-election-in-jammu-and-kashmir/article-5912</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/news/national/ghulam-nabi-azad-met-farooq-abdullah-demand-election-in-jammu-and-kashmir/article-5912</guid>
                <pubDate>Sat, 14 Mar 2020 15:59:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2020-03/gulam-nabi-farooq.jpg"                         length="102002"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Samridh Jharkhand]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        