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                <title>Koderma News: तिलैया डैम में बोटिंग पूरी तरह से बंद, देर रात खोले गए डैम के गेट</title>
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                        <![CDATA[उन्होंने बताया कि डैम से फिलहाल पनबिजली उत्पादन हेतु प्रतिदिन 650 क्यूबिक पानी छोड़ा जाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/koderma/koderma-news-boating-in-tilaiya-dam-completely-closed-late-night/article-15771"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(87)3.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>कोडरमा</strong>: पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के बाद कोडरमा जिले के विभिन्न प्रखंडो के डैम, नदियां व तालाब में पानी लबालब हो गया है। कई नदियां उफान पर हैं, तो कई जलाशयों में पानी का स्तर खतरे से ऊपर चला गया है। वहीं दूसरी ओर कोडरमा जिले के तिलैया डैम का भी जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचने को है, जिसके कारण एहतियातन शुक्रवार की देर रात 9 बजे डैम के गेट खोल दिए गए। इधर डैम के गेट खोलने से पूर्व डीवीसी प्रबंधन द्वारा कोडरमा जिला प्रशासन के अलावे गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और जामताड़ा जिले को अलर्ट भेज दिया गया था। इसके अलावे डैम के आसपास अवस्थित गांव में माइकिंग के द्वारा लोगों को डैम के किनारे नहीं जाने की सलाह भी दी जा चुकी है। इधर, डैम का गेट खोले जाने को लेकर डीवीसी प्रबंधन और कोडरमा जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क रहे।</p>
<p>तिलैया डैम के हेडल इंचार्ज सैयद महताब कादरी ने बताया कि उनकी अगुवाई में टेक्निकल टीम लगातार डैम से प्रभावित गांव का दौरा कर रही है। इससे पूर्व कुछ दिन पूर्व डैम का गेट खोले जाने को लेकर टेस्ट भी किया जा चुका था। इधर, एतिहात के तौर पर डैम में बोटिंग पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, साथ ही डैम के ऊपरी हिस्से में लोगों की आवाजाही पर भी फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दिया गया है।</p>
<p>बताते चलें कि डैम में पानी का स्तर खतरे के निशान से अभी भी लगभग 5 फ़ीट नीचे था बावजूद इसके आने वाले दिनों में बारिश की संभावनाओं को देखते हुए पानी का दबाव ज्यादा ना बने, इसी के मद्देनजर डैम का गेट खोल दिया गया। हेडल इंचार्ज सैयद माहताब कादरी ने बताया कि डैम का मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में लगातार बारिश की संभावना भी जताई गई है। ऐसे में वाटर डिस्चार्ज करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि डैम से फिलहाल पनबिजली उत्पादन हेतु प्रतिदिन 650 क्यूबिक पानी छोड़ा जाता है।</p>
<p>अब डैम के फाटक खुल जाने के कारण 1 हजार क्यूबिक प्रति सेकेंड पानी अतिरिक्त डिस्चार्ज किया जा रहा है। यानी कुल मिलाकर डैम से अभी लगभग 16 सौ क्यूबिक पानी प्रति सेकंड के हिसाब से प्रतिदिन छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि जब तक डैम में जलस्तर पूरी तरह से खतरे के निशान से नीचे नहीं आता है, तब तक पानी का डिस्चार्ज जारी रहेगा।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>कोडरमा</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 20:24:05 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Kumar Ramesham]]>
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                <title>कोडरमा यूनिट डीवीसी का सबसे बड़ा बिजली उत्पादन केंद्र होगा: एस सुरेश</title>
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                        <![CDATA[कार्यक्रम में  डीवीसी अध्यक्ष एस सुरेश कुमार ने कहा कि आप सबों एवं डीवीसी प्रबंधन के प्रयास से यह कार्य सफल हुआ है. केटीपीएस का दूसरा फेज 2 गुना 800 मेगावाट 4 वर्षों में कार्य संपन्न किया जाएगा. ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/koderma/koderma-unit-will-be-the-largest-power-generation-center-of/article-13236"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-12/ca3f7154-2863-405d-bc56-bebaba17fc45.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोडरमा:</strong> जयनगर प्रखंड के कोडरमा ताप विद्युत केंद्र फेज 2 कार्य शुरू हो गया है. बुधवार को आयोजित कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों के द्वारा स्वागत गीत के साथ किया गया. कार्यक्रम में  डीवीसी अध्यक्ष एस सुरेश कुमार ने कहा कि आप सबों एवं डीवीसी प्रबंधन के प्रयास से यह कार्य सफल हुआ है. केटीपीएस का दूसरा फेज 2 गुना 800 मेगावाट 4 वर्षों में कार्य संपन्न किया जाएगा. </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, केटीपीएस बहुत अच्छा से चल रहा है और आगे भी अच्छा से चलेगा. कोडरमा यूनिट डीवीसी का सबसे बड़ा बिजली उत्पादन केंद्र होगा. मौके पर सहायक कमांडेंट सीआईएसएफ कुलदीप कुमार, असूचना सीआईएसफ कृष्णकांत, अरुमय मुखर्जी, एसके घोष, संजय कुमार सिन्हा, एके दत्ता, एसके अर्जरिया, अमित कुमार, प्रवीण चांद, कुलदीप राम, सुरेश यादव, मनोज सिंह, अमित सिंह, मुन्ना मोदी, उमेश यादव सहित सैकड़ो के संख्या में लोग मौजूद थे.</p>]]>
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                                                            <category>कोडरमा</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Dec 2024 19:38:09 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Kumar Ramesham]]>
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            <item>
                <title>Koderma News: केटीपीएस बनेगा डीवीसी का सबसे अधिक विद्युत उत्पादन करने वाला केंद्र </title>
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                        <![CDATA[केटीपीएस में 800 मेगावाट के दो नए यूनिटों के माध्यम से कुल 1600 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा. इसके लिए भेल को 14 हजार करोड़ से अधिक का टेंडर अवॉर्ड किया गया है.]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/koderma/koderma-news-ktps-will-become-the-largest-power-generating-center/article-13211"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-12/009465de-fd84-4a51-99a2-40cb2236f482.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोडरमा:</strong> जिले के बांझेडीह में स्थित कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन (केटीपीएस) के विस्तारीकरण का कार्य नए साल 2025 में शुरू हो जाएगा. यहां 800 मेगावाट के दो नए यूनिटों के माध्यम से कुल 1600 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा. इसके लिए भेल को 14 हजार करोड़ से अधिक का टेंडर अवॉर्ड किया गया है. डीवीसी के मुख्य अभियंता मनोज ठाकुर ने बताया कि विस्तारीकरण के बाद कोडरमा डीवीसी का सबसे बड़ा और अधिक विद्युत उत्पादन करने वाला केंद्र बन जाएगा. वर्तमान में यहां 1000 मेगावाट का विद्युत उत्पादन हो रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">प्लांट के विस्तारीकरण के बाद यहां 2600 मेगावाट का अतिरिक्त विद्युत उत्पादन होगा. थर्मल पावर प्लांट के नए दो यूनिट का निर्माण का कार्य करीब चार साल तक चलेगा. इससे यहां 4 हजार से अधिक रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे. इसके साथ ही तिलैया डैम में 155 मेगावाट सोलर पावर का भी निर्माण होगा. कोडरमा के तिलैया डैम और डीवीसी के पंचेत डैम में 155 -155 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है. तिलैया डैम में इसका कार्य स्टर्लिंग विल्सन कंपनी और पंचेत डैम में एलएंडटी को दिया गया है. </p>
<p style="text-align:justify;">डीवीसी (केटीपीएस) के मुख्य अभियंता मनोज कुमार ठाकुर ने बताया कि 18 महीने में इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा. यहां उत्पादित बिजली सीधे नेशनल ग्रिड को भेजा जाएगा. अब रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में देश काफी आगे बढ़ चुका है. जिले के बांझेडीह में स्थित कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन के विस्तारीकरण का कार्य 800 मेगावाट के दो नए यूनिटों के माध्यम से कुल 1600 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा. इसके लिए भेल को 14 हजार करोड़ से अधिक का टेंडर अवॉर्ड किया जा चुका है.</p>]]>
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                                                            <category>कोडरमा</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Dec 2024 19:21:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Kumar Ramesham]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>Bokaro News: DVC के पावर प्लांट में लगी आग, एक यूनिट बंद</title>
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                        <![CDATA[पावर प्लांट के टरबाइन फ्लोर के नीचे साढ़े तीन मीटर हाईट पर लगे एचटी पैनल के इलेक्ट्रिकल ब्रेकर के वन बीबी बोर्ड में शार्ट सर्किट से आग लगी. जिसके बाद पावर प्लांट के एक यूनिट को बंद कर दिया गया, जबकि दूसरा पैनल पूरी तरह से जलकर खाक हो गया.   ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/bokaro/bokaro-news-fire-in-dvc-power-plant-one-unit-closed/article-11977"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/448-252-19776269-934-19776269-1697388693856.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बोकारो: </strong>बोकारो स्थित डीवीसी के 500 मेगावाट के पावर प्लांट में बुधवार की सुबह अचानक आग लग गयी. जिसके बाद आनन फानन में पावर प्लांट के एक यूनिट को बंद कर दिया गया, जबकि दूसरा पैनल पूरी तरह से जलकर खाक हो गया. आग पावर प्लांट के टरबाइन फ्लोर के  नीचे एचटी पैनल में लगी. आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है. बताया गया कि पावर प्लांट के टरबाइन फ्लोर के नीचे साढ़े तीन मीटर हाईट पर लगे एचटी पैनल के इलेक्ट्रिकल ब्रेकर के वन बीबी बोर्ड में शार्ट सर्किट से आग लगी. </p>
<p style="text-align:justify;">घटना की सूचना पावर प्लांट के सीआईएसएफ फायर विंग को दी गई. फायर विंग के जवानों एवं अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए धधकती आग को कड़ी मशक्कत के बाद बुझाने में सफलता हासिल की. इस दौरान पैनल और बोर्ड पूरी तरह से जलकर खाक हो गया. आग लगने से बर्बाद हुए इलेक्ट्रिकल सिस्टम के काम नहीं करने पर यूनिट भी ट्रिप कर गया. घटना के समय यूनिट से लगभग 350 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था. फिलहाल विभाग आग लगने की कारणों की जांच में जुट गया है.</p>]]>
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                                                            <category>बोकारो</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/bokaro/bokaro-news-fire-in-dvc-power-plant-one-unit-closed/article-11977</link>
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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2024 15:21:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Subodh Kumar]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
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                <title>Bokaro News: छः सूत्री मांग को लेकर मजदूरों ने किया ट्रांसपोर्टिंग ठप्प, दिया धरना</title>
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                        <![CDATA[54 मजदूरों ने छः सूत्री मांगों को लेकर डीवीसी छाई ट्रांसपोर्टिंग कार्य को अनिश्चितकालीन के लिए ठप कर दिया है. जब तक मांगें नहीं मानी जायेंगी तब तक ढुलाई नहीं होने की बात कही गयी है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/bokaro/bokaro-news-workers-stopped-transportation-and-staged-strike-for-six-point/article-11684"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/whatsapp-image-2024-10-01-at-17.31.42_28a4766a-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बोकारो:</strong> डीवीसी बोकारो थर्मल नुरीनगर स्थित ऐश पौंड में कार्यरत 54 मजदूरों ने छः सूत्री मांगों को लेकर डीवीसी छाई ट्रांसपोर्टिंग कार्य को अनिश्चितकालीन के लिए ठप कर दिया और धरना पर बैठ गए. मजदूर नेता शहादत हुसैन, उमेश राम,प्रेमचंद महतो,इकबाल अंसारी कादीर हुसैन आदि मजदूरों ने बताया कि डीवीसी छाई ऐश पौंड निर्माण से लगातार आज दस वर्ष हो गए हैं लेकिन मजदूरों का पहचान पत्र आज तक निर्गत नही किया गया है. मजदूरों के साथ रात या दिन में मजदूर अपने ड्यूटी आते समय कहीं प्रशासन के द्वारा चेकिंग लगाया जाता है तो उस समय मजदूरों के पास प्रशासन को दिखाने के लिए मजदूरों के पास कुछ नहीं रहता है. ऐसी स्थिति में मजदूरों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. </p>
<p>ना मजदूरों को मास्टर रूल से पेमेंट, सभी मजदूरों को ईपीएफ,प्रत्येक महीना 10 तारीख से पहले भुगतान,सभी मजदूरों को पहचान पत्र, सभी मजदूरों को वार्षिक बोनस, महीने में मजदूरों को 04 दिन छुट्टी सहित अन्य समस्याओं के लिए मजदूर अपनी आवाज को 10 वर्षो से लगातार उठाते आ रहे हैं. लेकिन डीवीसी प्रबंधन और कंपनी मजदूरों के हक अधिकार से वंचित रखने का काम करते आ रहे हैं. मजदूर अपने खून पसीना एक करके दिन रात डीवीसी और कंपनी के हित में काम करते हैं ताकि डीवीसी और कंपनी का मुनाफा हो. लेकिन डीवीसी प्रबंधन और कंपनी मजदूरों के साथ शोषण जुल्म अत्याचार करने से कही नही चूकती है. जबकि मजदूरों के संघर्ष से ही डीवीसी और कंपनी खड़ी होती है. उन्होंने कहा,अगर डीवीसी प्रबंधन और कंपनी मिलकर मजदूरों की मांग पर अगर पहल नहीं करती है तो मजदूर डीवीसी छाई ट्रांसपोर्टिंग कार्य अनिश्चित कालीन के लिए ठप रहेगा. </p>
<p>मौके पर शहादत हुसैन कादिर हुसैन, इजराइल अंसारी, किशोर महतो, प्रेमचंद महतो, भागीरथ तुरी, उमेश राम, मुरारी महतो,मुबारक अंसारी, साबिर हुसैन, जावेद अंसारी, निर्मल महतो, ताज मोहम्मद, अब्दुल लतीफ,भीम यादव, दिलीप राम,अब्दुल सलाम, जिब्रेल अंसारी,, पुरन महतो, सुरेंद्र महतो, पवन महतो, नारायण महतो, महेश महतो,दुर्गा किस्कू ,मनोज बेसरा, नरेश टुडु, जैबून निशा, चरकी देवी,मंजू देवी,पनवा देवी, इतवारिया देवी आदि लोग शामिल थे.</p>]]>
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                                                            <category>बोकारो</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Oct 2024 20:37:50 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Manoj Garg]]>
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                <title>झारखंड-बंगाल बॉर्डर खोला गया, ममता सरकार ने 24 घंटे से कर रखा था सील   </title>
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                        <![CDATA[झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, सीमाएं सील करने का ममता बनर्जी का फैसला उन पर काफी भारी पड़ेगा. अगर झारखंड अपनी सीमाएं बंद कर दे तो पश्चिम बंगाल भारत के पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों से कट जाएगा.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/jharkhand-bengal-border-opened-mamata-government-had-sealed-it-for-24/article-11418"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/906596d7-aff7-4e7f-8764-cfc629b11b4c.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>बंगाल सरकार द्वारा सील किये गए झारखंड-बंगाल बॉर्डर को खोल दिया गया है. करीब 24 घंटे बाद बंगाल सरकार ने बॉर्डर सील करने के निर्णय को वापस ले लिया है. बता दें कि बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में बाढ़ के हालात बनने का जिम्मेवार झारखंड को बताया था. इससे नाराज़ बंगाल की ममता सरकार ने गुरुवार को झारखंड-बंगाल बॉर्डर को सील कर दिया. ममता बनर्जी का मानना है कि दामोदर घाटी निगम डीवीसी (DVC) द्वारा झारखंड के डैमों से पानी छोड़े जाने के कारण पश्चिम बंगाल में बाढ़ के हालात बन गये. इससे क्षुब्ध होकर बंगाल सरकार ने मैथन समेत जमशेदपुर,दुमका,जामताड़ा,पाकुड़ और बोकारो से लगी सीमाएं को बंद कर दिया था. इस वजह से हजारों मालवाहक वाहन बॉर्डर में फंसी रही.</p>
<p>झारखंड-बंगाल बॉर्डर के बंद होने के कारण जाम में फंसे हजारों ट्रक के चालक व सहयोगी परेशान हो गए. इस दौरान वाहनों की कतार लगातार बढ़ती जा रही थी. इस बीच 24 घंटे बॉर्डर बंद रहने से दोनों राज्यों की सरकार के बीच काफी गहमागहमी रही. मामले को लेकर ममता बनर्जी ने DVC से सभी रिश्ते तोड़ने की बात भी कही. इस मामले में DVC के एक अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली स्थित केन्द्रीय जल आयोग (CWC) के निर्देश पर पानी छोड़ा गया था, लेकिन अब इसे रोक दिया गया है. </p>
<h3><strong>झामुमो ने भी किया पलटवार</strong></h3>
<p>इधर झामुमो  ने भी अंतर-राज्यीय सीमा सील करने के लिए ममता सरकार पर तीखा प्रहार किया. मामले में झामुमो ने भी पलटवार किया. झामुमो महासचिव सह केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, सीमाएं सील करने का ममता बनर्जी का फैसला उन पर काफी भारी पड़ेगा. उन्होंने कहा, अगर झारखंड अपनी सीमाएं बंद कर दे तो पश्चिम बंगाल भारत के पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों से कट जाएगा. मैं दीदी से संवेदनशील रुख अपनाने का अनुरोध करता हूं. सामान लेकर जा रहे वाहन आपके राज्य में बाढ़ लाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं. DVC ने गुरुवार को स्पष्ट किया था कि पानी छोड़ने का निर्णय पश्चिम बंगाल जल संसाधन विभाग, झारखंड जल संसाधन विभाग और DVC की तकनीकी विशेषज्ञ समिति द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया था. </p>
<h3><strong>विवाद गहराने पर वापस लिया निर्णय</strong></h3>
<p>मामले को लेकर दोनों राज्य की सरकारों में बात होने के बाद पश्चिम बंगाल और झारखंड बॉर्डर के बीच ट्रकों की आवागमन शुरू कर दिया गया. बंगाल-झारखंड बॉर्डर करीब 24 घंटे तक बंद रहने के बाद आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया गया. इस बाबत झारखंड सरकार के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि अंतरराज्यीय सीमा खोल दी गई है. NH-2 और NH-6 पर आवागमन शुरू हो गया है. जाम में फंसे सामान से लदे हजारों ट्रक पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो गए हैं.</p>]]>
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                                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Sep 2024 15:52:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Subodh Kumar]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झारखंड और पश्चिम बंगाल में दामोदर नदी का ‘शोक’ अब भी जारी</title>
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                        <![CDATA[<p><span style="color:#ff6600;"><strong>राहुल सिंह एवं कुंदन पांडेय </strong></span></p>
<p>दामोदर नदी हाल ही में दो कारणों से चर्चा में थी- प्रदूषण और पश्चिम बंगाल में बाढ़। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में आई बाढ़ के लिए बिजली कंपनी दामोदर वैली कॉरपोरेशन को जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p>दामोदर नदी झारखंड और पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों की जीवन रेखा है। यह नदी भारत के कुछेक खनिज संपन्न क्षेत्र से होकर गुजरती है और नदी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। अत्यधिक प्रदूषण के रूप में।</p>
<p>डीवीसी न बाढ़ रोकने में सक्षम हो पा रहा है और इसकी वजह से जो</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/environment/damodar-river/article-9201"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-09/damodar-river.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff6600;"><strong>राहुल सिंह एवं कुंदन पांडेय </strong></span></p>
<p>दामोदर नदी हाल ही में दो कारणों से चर्चा में थी- प्रदूषण और पश्चिम बंगाल में बाढ़। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में आई बाढ़ के लिए बिजली कंपनी दामोदर वैली कॉरपोरेशन को जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p>दामोदर नदी झारखंड और पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों की जीवन रेखा है। यह नदी भारत के कुछेक खनिज संपन्न क्षेत्र से होकर गुजरती है और नदी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। अत्यधिक प्रदूषण के रूप में।</p>
<p>डीवीसी न बाढ़ रोकने में सक्षम हो पा रहा है और इसकी वजह से जो प्रदूषण हो रहा है सो अलग। केंद्र की गठित एक समिति ने कहा था कि डीवीसी जलाशयों में गाद का जमाव इतनी तेजी से हो रहा है कि एक दशक बाद ये बांध, भीषण बाढ़ को नहीं रोक पाएंगे।</p>
<p>दामोदर नदी, झारखंड और पश्चिम बंगाल के करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा है पर इसे बंगाल के शोक के तौर पर जाना जाता है। दशकों से इस पर काम होने के बावजूद भी इसके आस-पास रहने वाले लोगों का शोक कम नहीं हो रहा है। बस उसके रूप बदल रहे हैं।</p>
<p>छोटा नागपुर की पहाड़ियों से निकलने वाली और हुगली नदी में जाकर मिल जाने वाली यह नदी आजकल प्रदूषण और बाढ़ की वजह से पुनः सुर्खियों में है।</p>
<p>हाल ही में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) की चंद्रपुरा इकाई द्वारा दामोदर में प्रदूषण फैलाने के मामले को लेकर 1.69 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। उधर पश्चिम बंगाल में आए बाढ़ में छः जिले बुरी तरह प्रभावित हुए तो वहन की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर डीवीसी पर कई आरोप लगाए।</p>
<p>विडंबना यह है कि डीवीसी बाढ़ नियंत्रण के लिए ही अस्तित्व में आया था। आजादी के पहले के दिनों में इस नदी की वजह से पश्चिम बंगाल में अक्सर बाढ़ आया करती थी और जान-माल की व्यापक क्षति होती थी। ऐसी ही एक भीषण बाढ़ 1943 में आई और सरकार के खिलाफ स्थानीय लोगों को गुस्सा बढ़ा। इसे देखते हुए बंगाल सरकार ने दामोदर बाढ़ जांच समिति के नाम से एक बोर्ड का गठन किया। इस बोर्ड के सुझाव पर देश की आजादी के तुरंत बाद 1948 में दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) की स्थापना संसद में डीवीसी एक्ट पारित कर की गयी।</p>
<p>इधर बाढ़ की तीव्रता इत्यादि में कमी जरूर आई है पर नदी से होने वाले शोक में कोई कमी नहीं दिखती। इसकी वजह है, नदी का प्रदूषण।</p>
<p><strong>दामोदर नदी के प्रदूषण का लंबा इतिहास</strong></p>
<p>दामोदर अपने उदगम बिंदु के आस-पास अपनी पवित्रता एवं स्वच्छता के कारण देवनद भी बुलाया जाता है। यह नदी देश के कुछेक खास खनिज संपन्न क्षेत्र से होकर गुजरती है। ये खनिज झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए तो वरदान है पर यहां होने वाली खनन की गतिविधियों की वजह से, नदी और आस-पास रह रहे लोगों के लिए अभिशाप साबित हो रहा है।</p>
<p>दामोदर नदी झारखंड के साथ जिले- लोहरदगा, लातेहार, रांची, चतरा, रामगढ़, धनबाद और पश्चिम बंगाल के पांच जिले- बांकुरा, पुरुलिया, बर्धमान, हावड़ा और हुगली से होकर गुजरती है। अपने उद्गम से शुरू होकर हुगली नदी में मिलने से पहले यह नदी 547 किलोमीटर की यात्रा पूरी करती है। इस नदी का कैचमेंट क्षेत्र 23,370.98 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इस नदी में होने वाले जल प्रदूषण से ढाई करोड़ लोगों प्रभावित हो सकते हैं।</p>
<p>नदी की राह में कोयला खदानों, कोल वाशरियों, ताप एवं पन बिजली उत्पादन इकाइयों, स्टील प्लांट, उर्वरक, सीमेंट व रासायनिक कारखानों की भरमार है। इनसे निकल कचरा इस नदी को भयंकर रूप से प्रदूषित करता है।</p>
<p>जैसे, 1990 में बोकारो स्टील लिमिटेड के प्लांट से तेल का बहाव हुआ, जिसका संज्ञान अधिकारियों ने चार दिन बाद लिया। तब तक यह कचरा बहकर 150 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर तक पहुंच गया था और इस दूषित जल को पचास लाख लोगों ने पी लिया था। अनेकों बीमार हो गए थे।</p>
<p>इसी तरह दो साल पहले यानी 2019 में चंद्रपुरा थर्मल पॉवर प्लांट से 13 अक्टूबर 2019 को 41 घंटे तक फर्निश ऑयल का बहाव दामोदर नदी में होता रहा। दामोदर बचाओ आंदोलन के संयोजक प्रवीण कुमार सिंह ने इस मामले की शिकायत एनजीटी में की और जांच के बाद डीवीसी पर कुल 1,640,8000 रुपये का जुर्माना लगा।</p>
<p>इस नदी में प्रदूषण के लिए फ्लाई ऐश (उद्योगों से निकली राख) भी एक बड़ी वजह है। 12 सितंबर 2019 को बोकारो थर्मल पॉवर प्लांट का फ्लाई एश पाउंड टूट गया था, जो बड़े स्तर पर प्रदूषण की वजह बना। जांच में पाया गया कि वह फ्लाई ऐश पाउंड न तो स्वीकृत योजना के अनुरूप बना था और न ही उसके अनुरूप उसका रखरखाव होता था। इस मामले में भी एनजीटी ने 2.89 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।</p>
<p>ये अतिरेक घटनाएं नहीं हैं। हाल में ऐसे कई अध्ययन हुए हैं जिनसे दामोदर नदी में अत्यधिक प्रदूषण का पता चलता है।</p>
<p>मसलन, वर्ष 2012 में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ। इसमें कहा गया कि इस नदी का पानी पीने के योग्य नहीं है। नहाने के लायक भी नहीं। इस अध्ययन का निष्कर्ष था, “इसमें नहाने या इसके पानी पीने से लोगों को चर्म रोग या आंत की बीमारियाां हो सकती हैं।”</p>
<p>हाल ही कोविड-19 के बाद लगे लॉकडाउन के दामोदर नदी पर होने वाले असर को समझने के लिए एक अध्ययन किया गया। इसका निष्कर्ष था, “लॉकडाउन के पहले जल प्रदूषण इंडेक्स से पता चलता है कि सौ फीसदी सैम्पल प्रदूषित थे। लॉकडाउन के बाद 90 फीसदी सैम्पल को स्वच्छ पाया गया और महज 9.10 फीसदी सैम्पल ‘कुछ हद’ तक प्रदूषित थे।” इससे नदी के प्रदूषित होने में उद्योगों की भूमिका स्पष्ट होती है।</p>
<p>मोंगाबे-हिन्दी से बात करते हुए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी दुर्गापुर के सेंटर फॉर रिसर्च ऑन इनवायरनमेंट एण्ड वाटर से जुड़े एशोसिएट प्रोफेसर हिरोक चौधरी कहते हैं कि दामोदर नदी अत्यधिक प्रदूषित है और इसका पानी इंसानों के इस्तेमाल के लायक नहीं है। अपने एक अध्ययन का जिक्र करते हुए चौधरी कहते हैं कि नदी के ऊपरी हिस्से में सिंघभूम पड़ता है जहां यूरेनियम इत्यादि के खान मौजूद हैं। पूरी संभावना है कि इसकी वजह से नदी भी रेडियोऐक्टिव पदार्थ से प्रदूषित हो। “हमलोग इसको लेकर एक अध्ययन कर रहे हैं और हमारा डर सही साबित हो रहा है,” चौधरी कहते हैं। यह अध्ययन अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है।</p>
<p>उधर इस नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता एवं राजनेता सरयू राय ने पिछले ही महीने केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह से शिकायत की थी कि बोकारो स्टील लिमिटेड जीरो डिस्चार्ज के वादे से मुकर गया है और उसका जहरीला पानी अब भी दामोदर नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। राय के अनुसार, बोकारो स्टील लिमिटेड ने 2018 में अपना एक नाला बंद कर दिया था, जबकि दिसंबर 2019 तक दूसरे नाले से भी जीरो डिस्चार्ज का वादा किया।</p>
<p><strong>डीवीसी की भूमिका पर सवाल</strong></p>
<p>डीवीसी की स्थापना का मूल उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण था। सिंचाई, बिजली उत्पादन व नौवहन इसके अन्य प्रमुख उद्देश्य थे। अब डीवीसी एक ऊर्जा उत्पादक कंपनी बन गया है। दामोदर घाटी क्षेत्र में डीवीसी के सात ताप विद्युत संयंत्र (थर्मल पावर प्लांट) व दो जल विद्युत संयंत्र हैं।</p>
<p>सरयू राय ने मोंगाबे हिंदी से बात करते हुए आरोप लगाया कि डीवीसी अपने गठन के मूल्य उद्देश्य से भटक गया है और वह एक ऊर्जा उत्पादक कंपनी बन गया है। 1948 में जब एक्ट बना था तो उसमें जिक्र था कि जो दामोदर नदी को प्रदूषित करेगा उसे दंडित करने का काम डीवीसी का होगा। लेकिन अब वह खुद प्रदूषण में शामिल है।</p>
<p>सरयू राय के अनुसार, डीवीसी इस बात के लिए राजी हुआ था कि वह दामोदर नदी में अपशिष्ट का प्रवाह शून्य करेगा, इसके लिए सीवेज प्लांट भी लगाएगा। चंद्रपुरा थर्मल प्लांट ने इन चीजों के लिए टेंडर भी निकाला, लेकिन फिर उसका क्या हुआ पता नहीं।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य से प्रभावित लोगों का कोई आंकड़ा नहीं</strong></p>
<p>कहने की जरूरत नहीं कि इस तरह के प्रदूषण से आम लोग प्रभावित हो रहे होंगे पर इसकी तीव्रता समझ में तब आएगी जब इसको लेकर कोई अध्ययन होगा।</p>
<p>पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था लाइफ के ट्रस्टी व डीवीए को तकनीकी सहयोग देने वाले राकेश कुमार सिंह ने मोंगाबे-हिंदी से कहा, दामोदर झारखंड की जीवन रेखा है, यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर राज्य के लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। उद्योगों का फ्लाई ऐश जाने के कारण जहरीले पदार्थ व हैवी मैटल भी नदी में मिलता है जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इस पानी में क्लोरीन या ब्लीचिंग डालकर उसके हानिकारक तत्वों को नष्ट नहीं किया नहीं जा सकता।</p>
<p>सिंह कहते हैं कि सरकार हेल्थ स्टडी नहीं करवाती हैं और उद्योग लोगों की गरीबी व जागरूकता के अभाव का बेजा लाभ लेते हैं।</p>
<p>झारखंड में पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था युगांतर भारती के सचिव आशीष शीतल कहते हैं कि प्रदूषण से लोगों को शारीरिक और आर्थिक क्षति हो रही है।</p>
<p>सबकी राय है कि इस प्रदूषण से होने वाले प्रभाव का वृहत्तर अध्ययन होना चाहिए।</p>
<p><strong>बाढ़ रोकने में कितनी कारगर दामोदर नदी घाटी परियोजना?</strong></p>
<p>इस साल जुलाई के आखिरी दिनों एवं अगस्त के शुरुआत में भारी बारिश के बाद जब पश्चिम बंगाल के आधा दर्जन जिलों में बाढ़ आयी तो राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिफरते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और इस बाढ़ के लिए दामोदर घाटी निगम को जिम्मेदार ठहराया. इस बाढ़ में 15 लोगों की मौत हो गयी और छह जिलों के तीन लाख लोग विस्थापित हुए।</p>
<p>पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने लिखा कि पश्चिम बंगाल व झारखंड दोनों ओर बैराज एवं बांधों के माध्यम से बाढ नियंत्रण प्रणाली बहुत पुरानी हो चुकी है। गाद जमने और रख-रखाव की कमी के कारण दामोदर नदी की जल धारण क्षमता भी कम हो गयी है। हालांकि, डीवीसी ने इस आरोप का जवाब यह कह कर दिया कि वह राज्य सरकार की सहमति लेकर ही पानी छोड़ता है। साथ में यह भी कहा कि दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति में राज्य के सिंचाई सचिव भी सदस्य होते हैं।</p>
<p>ममता बनर्जी ने डीवीसी पर जो आरोप लगाये उसकी एक पृष्ठभूमि है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने साल 2013 में यह अनुमान व्यक्त किया था कि डीवीसी के मैथन एवं पंचेत जलाशयों से गाद हटाने में 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय आएगा। विशेषज्ञ समिति का कहना था कि इन जलाशयों में गाद का जमाव इतनी तेजी से हो रहा है कि दोनों बांध एक दशक बाद भीषण बाढ को रोक नहीं पाएंगे। समिति का अनुमान था कि पंचेत में गाद की दर निर्धारित दर से छह गुणा और मैथन में नौ गुणा है। अगर गाद का जमाव इसी तीव्रता से बिना किसी रोक-टोक के जारी रहा तो 10 वर्षों में पंचेत अपनी जल संग्रहण क्षमता का आधा से अधिक और मैथन दो तिहाई से अधिक खो देगा।</p>
<p>यह संयोग है कि उस रिपोर्ट के आठ साल बाद इन्हीं दो जलाशयों के पानी के प्रवाह की वजह से पश्चिम बंगाल में बाढ़ आयी। हालांकि डीवीसी के एक पूर्व अधिकारी ने नाम का उल्लेख नहीं करने की शर्त पर कहा कि अगर पानी नहीं खोला जाएगा तो बांध टूटने से स्थिति और भयावह हो जाएगी। इनके अनुसार, पानी की सुचारू निकासी नहीं हो पाने की एक बड़ी वजह है, बंगाल में ड्रेन प्वाइंट पर अवैध बसवाट।</p>
<p>मोंगाबे हिंदी ने गाद की सफाई सहित प्रदूषण को लेकर दूसरे सवाल दामोदर घाटी निगम से मेल के जरिए पूछा और मुख्य जन संपर्क अधिकारी से इसके लिए फोन के माध्यम से संपर्क भी किया। संपर्क अधिकारी ने अन्य संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर, अपेक्षित जवाब देने की बात कही। हालांकि उन सवालों का जवाब रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक तक नहीं आया है।</p>
<p> </p>
<p><strong>यह स्टोरी पर्यावरण व प्रकृति पर केंद्रित वेबसाइट <a href="https://hindi.mongabay.com/">मोंगाबे</a> से साभार ली गयी है। मूल स्टोरी को पढने के लिए इस लिंक को क्लिक करें :</strong></p>
<h1><a href="https://hindi.mongabay.com/2021/09/09/the-sorrow-of-damodar-river-continues-for-millions-of-people/">[वीडियो] झारखंड और पश्चिम बंगाल में दामोदर नदी का ‘शोक’ अब भी जारी</a></h1>
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                                                            <category>पर्यावरण</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Sep 2021 19:54:15 +0530</pubDate>
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                <title>कोडरमा के थर्मल पॉवर प्लांट में बड़ा हादसा, निरीक्षण करने गयी टीम के चार सदस्यों की लिफ्ट से गिर कर मौत</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>कोडरमा :</strong> झारखंड के कोडरमा जिले के बांझेडीह स्थित कोडरमा थर्मल पॉवर प्लांट में गुरुवार, 26 अगस्त 2021 को बड़ा हादसा हुआ। थर्मल पॉवर का निरीक्षण करने के दौरान हादसे में प्रोजेक्ट हेड, प्रोजेक्ट अधिकारी सहित चार लोगों की मौत हो गयी। मरने वालों में अन्य दो इंजीनियर शामिल हैं। यह हादसा गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे हुआ है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, अधिकारियों की यह टीम पॉवर प्लांट का निरीक्षण करने गयी थी, तभी हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, मृतकों में प्रोजेक्ट हेड कृष्णा प्रसाद कोडाली, प्रोजेक्ट ऑफिसर विनोद चौधरी व इंजीनियर कार्तिक सागर एवं नवीन कुमार शामिल हैं।</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/koderma/major-accident-in-koderma-thermal-power-plant-in-jharkhand-four-personnel-of-the-team-who-went-to-inspect-died-after-falling-from-the-lift/article-8877"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-08/koderma-tharmal.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोडरमा :</strong> झारखंड के कोडरमा जिले के बांझेडीह स्थित कोडरमा थर्मल पॉवर प्लांट में गुरुवार, 26 अगस्त 2021 को बड़ा हादसा हुआ। थर्मल पॉवर का निरीक्षण करने के दौरान हादसे में प्रोजेक्ट हेड, प्रोजेक्ट अधिकारी सहित चार लोगों की मौत हो गयी। मरने वालों में अन्य दो इंजीनियर शामिल हैं। यह हादसा गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे हुआ है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, अधिकारियों की यह टीम पॉवर प्लांट का निरीक्षण करने गयी थी, तभी हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, मृतकों में प्रोजेक्ट हेड कृष्णा प्रसाद कोडाली, प्रोजेक्ट ऑफिसर विनोद चौधरी व इंजीनियर कार्तिक सागर एवं नवीन कुमार शामिल हैं।</p>
<p>मृतक अधिकारी व कर्मी प्लांट में काम कर रही थर्मेक्स की सबलेट कंपनी श्री विजया के कर्मचारी थे। यह कंपनी डीवीसी की इकाई केटीपीपी में चिमनी बनाने का काम कर रही है। संबंधित अधिकारी दोपहर में जब निरीक्षण कर 80 मीटर की ऊंचाई से लिफ्ट से नीचे उतर रहे तभी 10 मीटर नीचे आने पर उसका तार टूट गया जिससे लिफ्ट नीचे गिर गयी। दुर्घटना के बाद दो लोगों की मौत मौके पर हो गयी, जबकि दो अन्य की मौत कोडरमा सदर अस्पताल ले जाने के क्रम में हो गयी।</p>
<p>इस बड़े हादसे के बाद प्लांट के सुरक्षा मानकों पर सवाल उठ खड़ा हुआ है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गयी। घटना को लेकर मामले की जांच की जा रही है।</p>
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                                                            <category>कोडरमा</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Aug 2021 19:58:06 +0530</pubDate>
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                <title>डीवीसी प्लांट के पैनल में ब्लास्ट, दो मजदूर की हालत गंभीर</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कोडरमा:</strong> कोडरमा जिले में डीवीसी द्वारा संचालित कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन में रविवार की देर रात पैनल ब्लास्ट होने की वजह से दो मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए. घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए दोनों को रांची रेफर कर दिया गया है.</p>
<p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसीर कोडरमा जिले में डीवीसी द्वारा संचालित कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन, बांझेडीह (जयनगर) में पैनल ब्लास्ट में झुलसे मजदूरों की पहचान राजेंद्र यादव व रंजीत यादव के रूप में हुई है. राजेंद्र यादव झारखंड जनरल मजदूर यूनियन, बांझेडीह के अध्यक्ष बताए जाते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/blast-in-panel-of-dvc-plant-two-laborers-in-critical-condition/article-7429"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-09/download.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोडरमा:</strong> कोडरमा जिले में डीवीसी द्वारा संचालित कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन में रविवार की देर रात पैनल ब्लास्ट होने की वजह से दो मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए. घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए दोनों को रांची रेफर कर दिया गया है.</p>
<p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसीर कोडरमा जिले में डीवीसी द्वारा संचालित कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन, बांझेडीह (जयनगर) में पैनल ब्लास्ट में झुलसे मजदूरों की पहचान राजेंद्र यादव व रंजीत यादव के रूप में हुई है. राजेंद्र यादव झारखंड जनरल मजदूर यूनियन, बांझेडीह के अध्यक्ष बताए जाते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार पावर प्लांट में टेक कंपनी का कार्य चल रहा था. इसी दौरान पैनल ब्लास्ट हो गया. हादसे में रात्रि ड्यूटी में तैनात दो मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं. घायलों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रांची रेफर कर दिया गया है.</p>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Sep 2020 12:49:19 +0530</pubDate>
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                <title>अब नहीं होगी बिजली में कटौती, डीवीसी को हुआ 400 करोड़ रूपए का भुगतान</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>रांची: </strong>राज्य के कई जिलों में बकाये का भुगतान नहीं होने पर बिजली कटौती को लेकर शुक्रवार को झारखंड बिजली वितरण निगम ने डीवीसी को चार सौ करोड़ रुपयों का भुगतान कर दिया<span style="text-transform:initial;">। </span><span style="text-transform:initial;">कोषागार के जरिए फंड ट्रांसफर करने के बाद जेबीवीएनएल ने डीवीसी को बिजली कटौती बंद करने के लिए पत्र भी लिखा। इसमें लिखा है कि समझौते के मुताबिक जेबीवीएनएल ने फौरी तौर पर तय राशि का भुगतान कर दिया है। ऐसे मेें डीवीसी भी तत्काल लोड शेडिंग और कटौती बंद कर आपूर्ति को तत्काल नियमित करे।</span></p>
<p>डीवीसी ने जेबीवीएनएल पर नवम्बर 2019 तक 4955 करोड़ रुपयों</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/dvc-gets-rs-400-crore-to-stop-power-cuts/article-5908"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-03/power-cut1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>राज्य के कई जिलों में बकाये का भुगतान नहीं होने पर बिजली कटौती को लेकर शुक्रवार को झारखंड बिजली वितरण निगम ने डीवीसी को चार सौ करोड़ रुपयों का भुगतान कर दिया<span style="text-transform:initial;">। </span><span style="text-transform:initial;">कोषागार के जरिए फंड ट्रांसफर करने के बाद जेबीवीएनएल ने डीवीसी को बिजली कटौती बंद करने के लिए पत्र भी लिखा। इसमें लिखा है कि समझौते के मुताबिक जेबीवीएनएल ने फौरी तौर पर तय राशि का भुगतान कर दिया है। ऐसे मेें डीवीसी भी तत्काल लोड शेडिंग और कटौती बंद कर आपूर्ति को तत्काल नियमित करे।</span></p>
<p>डीवीसी ने जेबीवीएनएल पर नवम्बर 2019 तक 4955 करोड़ रुपयों के बकाये का दावा किया है<span style="text-transform:initial;">। </span>साथ ही बकाये का भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी डीवीसी ने शुक्रवार को बिजली कटौती बंद नहीं की थी<span style="text-transform:initial;">।</span> जिसके चलते धनबाद, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, कोडरमा और बोकारो के लोग परेशान रहे<span style="text-transform:initial;">। </span>वहीं, बिजली कटौती से आक्रोशित लोगों द्वारा जगह-जगह पर विरोध-प्रदर्शन करने की ख़बरें भी आईं<span style="text-transform:initial;">।</span></p>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/dvc-gets-rs-400-crore-to-stop-power-cuts/article-5908</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2020 14:21:41 +0530</pubDate>
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                <title>विधानसभा सत्र में छाया रहा डीवीसी के बिजली कटौती का मुद्दा</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>रांची: </strong>झारखंड विधान सभा के बजट सत्र में गुरुवार को बिजली कटौती का मुद्दा छाया रहा। सदन में कार्यवाही शुरू होते ही पूरे झारखंड में डीवीसी की बिजली कटौती का मामला गूंजा। सत्र में विधायकों ने कहा कि वर्तमान में जिलों को दिनभर में सिर्फ चार से पांच घंटे ही बिजली आपूर्ति की जा रही है।</p>
<p>ज्ञात हो कि झारखंड बिजली वितरण निगम को डीवीसी को 4995 करोड़ रुपयों की राशि चुकानी है। यह राशि गत वर्ष के नवम्बर माह से बकाया है। इसे लेकर डीवीसी ने राज्य सरकार को 25 फरवरी से बिजली कटौती को लेकर  अल्टीमेटम दिया था,</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/the-issue-of-dvcs-power-cut-overshadowed-the-assembly-session/article-5878"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-03/power-cut.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>झारखंड विधान सभा के बजट सत्र में गुरुवार को बिजली कटौती का मुद्दा छाया रहा। सदन में कार्यवाही शुरू होते ही पूरे झारखंड में डीवीसी की बिजली कटौती का मामला गूंजा। सत्र में विधायकों ने कहा कि वर्तमान में जिलों को दिनभर में सिर्फ चार से पांच घंटे ही बिजली आपूर्ति की जा रही है।</p>
<p>ज्ञात हो कि झारखंड बिजली वितरण निगम को डीवीसी को 4995 करोड़ रुपयों की राशि चुकानी है। यह राशि गत वर्ष के नवम्बर माह से बकाया है। इसे लेकर डीवीसी ने राज्य सरकार को 25 फरवरी से बिजली कटौती को लेकर  अल्टीमेटम दिया था, जिसे आग्रह कर तीन दिन आगे यानी 28 फरवरी तक के लिए बढ़ाया गया। लेकिन 28 फरवरी को राशि भुगतान न होने की स्थिति में डीवीसी के मुख्यालय ने बिजली कटौती का आदेश जारी कर दिया था।</p>
<p>इसके अलावा भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने सदन को आश्वस्त किया कि भाजपा के विधायक नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे को लेकर सदन की कार्यवाही को प्रभावित नहीं करेंगे।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2020 19:06:19 +0530</pubDate>
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