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                <title>Asaduddin Owaisi - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Asaduddin Owaisi RSS Feed</description>
                
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                <title>Opinion : भारतीय लोकतंत्र में मुस्लिम नेतृत्व: नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में योगदान की गहन समीक्षा</title>
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                        <![CDATA[यह लेख भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेताओं की विविध भूमिका और प्रभाव को उजागर करता है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समकालीन राजनीति तक, ये नेता नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में महत्वपूर्ण योगदान देते आए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-an-in-depth-review-of-the-contribution-of-muslim-leadership/article-17905"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/3ccb2867-6d79-40a1-9ac1-40ce0a9a0be1_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>भारतीय लोकतंत्र की मूल शक्ति उसकी विविधता, विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, विचारधाराओं और समूहों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की संरचना में निहित है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए नेता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आकार देते हैं।</p>
<p>इस व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में मुस्लिम समुदाय का योगदान केवल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि नीति-निर्माण, संगठनात्मक राजनीति, विदेश नीति, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय संतुलन जैसे क्षेत्रों में भी उसकी निरंतर और प्रभावशाली भूमिका रही है।</p>
<p>स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समकालीन राजनीति तक, मुस्लिम नेताओं ने अलग-अलग वैचारिक धाराओं और राजनीतिक दलों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। बेशक इन नेताओं की राजनीतिक यात्राएँ एक-दूसरे से भिन्न रही हैं, जहां कुछ ने प्रशासनिक और संवैधानिक भूमिकाओं में योगदान दिया, वहीं कुछ ने संगठनात्मक रणनीति के माध्यम से शक्ति अर्जित की, जबकि कुछ ने स्पष्ट और मुखर राजनीतिक विमर्श के जरिए अपना जनाधार बनाया।</p>
<p>यह विविधता भारतीय राजनीति की जटिलता और समावेशिता दोनों को रेखांकित करती है। इस लेख के माध्यम से मैं ऐसे ही कुछ मुस्लिम नेताओं के राजनीतिक योगदान और प्रभाव का जिक्र करने जा रहा हूँ, जिन्होंने अलग-अलग कालखंडों, दलों और भूमिकाओं में राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया।</p>
<p>सलमान खुर्शीद उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पहचान अकादमिक पृष्ठभूमि और संसदीय शालीनता से जुड़ी रही है। कानून, विदेश और अल्पसंख्यक मामलों जैसे मंत्रालयों में उनकी भूमिका नीतिगत निरंतरता और संस्थागत संतुलन का उदाहरण रही। विदेश मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भारत की वैश्विक छवि के प्रबंधन के संदर्भ में उल्लेखनीय रहा।</p>
<p>वे उस राजनीतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ वैचारिक स्पष्टता और संवाद की संस्कृति को प्राथमिकता दी जाती है। सैयद शाहनवाज़ हुसैन भारतीय जनता पार्टी में उन शुरुआती मुस्लिम नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>अपेक्षाकृत कम उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करने वाले शाहनवाज़ हुसैन ने केंद्र सरकार में नागरिक उड्डयन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे मंत्रालयों में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका राजनीतिक सफर संगठनात्मक निष्ठा, पार्टी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और संवाद आधारित राजनीति का उदाहरण रहा है।</p>
<p>बिहार की राजनीति में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही, जहाँ उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय और व्यापक सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। वे उस दौर के प्रतिनिधि रहे हैं जब भाजपा मुस्लिम नेतृत्व को अपनी मुख्यधारा की राजनीति में स्थान देने की कोशिश कर रही थी।</p>
<p> मुख्तार अब्बास नक़वी भारतीय जनता पार्टी में मुस्लिम नेतृत्व का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। संसदीय कार्य, अल्पसंख्यक मामलों और कौशल विकास जैसे मंत्रालयों में उनके कार्यकाल के दौरान कई नीतिगत फैसले लिए गए, जिन पर व्यापक बहस भी हुई। वे उस राजनीतिक धारा का प्रतिनिधित्व करते हैं जो वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक अनुशासन को प्राथमिकता देती है।</p>
<p>असदुद्दीन ओवैसी समकालीन राजनीति में सबसे मुखर मुस्लिम नेताओं में गिने जाते हैं। संसद में उनके हस्तक्षेप संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं। उनकी राजनीतिक शैली स्पष्ट, तर्कप्रधान और कई बार टकरावपूर्ण रही है। ओवैसी ने क्षेत्रीय आधार से राष्ट्रीय विमर्श तक अपनी उपस्थिति को विस्तार दिया है, जो बदलती चुनावी राजनीति की एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति को दर्शाता है।</p>
<p>तारिक अनवर कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने संगठनात्मक राजनीति और संसदीय कार्य दोनों में लंबा अनुभव अर्जित किया है। उनका राजनीतिक योगदान मुख्यतः पार्टी संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर संपर्क बनाए रखने से जुड़ा रहा है। वे एक सफल सांसद होने के साथ-साथ निरंतरता और संगठनात्मक स्थायित्व के प्रतिनिधि माने जाते हैं।</p>
<p>फ़ारूक़ अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाले नेता रहे हैं। उनका राजनीतिक जीवन क्षेत्रीय आकांक्षाओं, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने का प्रयास रहा है। कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उनकी भूमिका भारतीय राजनीति के जटिल आयामों को समझने में मदद करती है।</p>
<p>मोहसिना किदवई का योगदान मुख्यतः संसदीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है। अल्पसंख्यक अधिकारों और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर उनकी सक्रियता उन्हें कांग्रेस के भीतर एक सम्मानित स्थान दिलाती है। वे उस पीढ़ी की नेता हैं जिन्होंने अपेक्षाकृत शांत लेकिन निरंतर राजनीतिक भूमिका निभाई है।</p>
<p> अहमद पटेल भारतीय राजनीति के उन रणनीतिकारों में थे जिनकी भूमिका सार्वजनिक मंच से अधिक संगठन के भीतर प्रभावशाली रही। चुनावी रणनीति, गठबंधन प्रबंधन और संकट काल में निर्णय लेने की उनकी क्षमता ने कांग्रेस को कई बार राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद की।</p>
<p>उनका योगदान इस बात का उदाहरण है कि सत्ता और प्रभाव हमेशा सार्वजनिक पदों से ही नहीं आते। ग़ुलाम नबी आज़ाद का राजनीतिक अनुभव प्रशासनिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर रहा है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने उन्हें एक अनुभवी प्रशासक की पहचान दी।</p>
<p>वे संवाद और सहमति आधारित राजनीति के समर्थक माने जाते हैं, जिन्हे पक्ष-विपक्ष, दोनों से ही बराबर सम्मान मिलता है। नजमा हेपतुल्ला भाजपा की उन महिला नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने संसदीय संस्थाओं और मंत्रालयों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। अल्पसंख्यक मामलों और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर उनका कार्य भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व के विस्तार को दर्शाता है।</p>
<p>उन्होंने मणिपुर राज्य के राज्यपाल की भूमिका भी निभाई है। इन नेताओं का राजनीतिक सफर यह स्पष्ट करता है कि भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व किसी एक विचारधारा या रणनीति तक सीमित नहीं है। यह नेतृत्व कहीं संस्थागत और शांत, कहीं मुखर और वैचारिक, तो कहीं रणनीतिक और संगठनात्मक रूप में विविध रहा है।</p>
<p>इनकी भूमिका यह समझने में सहायक है कि लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व केवल पहचान का प्रश्न नहीं, बल्कि नीति, संवाद और राष्ट्रीय हित के साथ संतुलन साधने की प्रक्रिया है। भारतीय राजनीति की इस बहुमूल्य संरचना को मजबूत बनाए रखने में ऐसे नेताओं की उपस्थिति और योगदान आगे भी महत्वपूर्ण बना रहेगा क्योंकि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती विविध आवाज़ों के सहअस्तित्व से ही सुनिश्चित होती है।</p>
<p><strong>डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 13:00:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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                <title>बिहार चुनाव 2025: ईमान, इस्लाम और इंतकाम के त्रिकोण में उलझा मुस्लिम वोट बैंक</title>
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                        <![CDATA[यह न सिर्फ चुनावी रणनीतियों को जटिल बना रहा है, बल्कि मुस्लिम मतदाताओं को भी गहरे अंतर्द्वंद्व में डाल रहा है. राज्य में लगभग 1.8 करोड़ मुस्लिम मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 17.8% हिस्सा हैं. सीमांचल, मिथिलांचल, कोसी, सारण और पटना जिलों की करीब 47 विधानसभा सीटों पर ये वोट निर्णायक हैं]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/bihar/bihar-elections-2025-iman-islam-and-triangle-triangle-muslim-vote/article-14765"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-07/resized-image---2025-07-17t141116.594.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बिहार की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक हमेशा से एक निर्णायक शक्ति रहा है, लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में यह वोट बैंक पहली बार तीन गहरे और परस्पर विरोधी विमर्शों के बीच फंसा हुआ है ईमान, इस्लाम, और इंतकाम. यह न सिर्फ चुनावी रणनीतियों को जटिल बना रहा है, बल्कि मुस्लिम मतदाताओं को भी गहरे अंतर्द्वंद्व में डाल रहा है. राज्य में लगभग 1.8 करोड़ मुस्लिम मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 17.8% हिस्सा हैं. सीमांचल, मिथिलांचल, कोसी, सारण और पटना जिलों की करीब 47 विधानसभा सीटों पर ये वोट निर्णायक हैं. ऐसे में हर दल इस वर्ग को अपने पाले में लाने की होड़ में है लेकिन इस बार वह होड़ विचारधारात्मक स्तर तक जा पहुंची है.</p>
<p style="text-align:justify;">राजद नेता तेजस्वी यादव मुस्लिम मतदाताओं को साधने के लिए दो प्रमुख आयामों पर काम कर रहे हैं पहला, धार्मिक पहचान की रक्षा और दूसरा, केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रोश को संगठित करना. वक्फ अधिनियम में बदलाव, एनआरसी, एनपीआर और वोटर लिस्ट से मुस्लिम नामों को हटाने जैसे मुद्दों को उन्होंने चुनावी मंचों पर बार-बार उठाया है. इससे वे मुस्लिम मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि महागठबंधन ही उनकी धार्मिक और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी है. हालांकि, 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM के जीते पांच में से चार विधायकों को तोड़कर राजद में शामिल कर लेना तेजस्वी के “मुस्लिम हितैषी” दावे को कमजोर भी करता है. असदुद्दीन ओवैसी इसे “सियासी धोखा” बताते हैं. तेजस्वी यादव के लिए सीमांचल की सीटें अभी भी एक परीक्षा की घड़ी हैं, जहां मुस्लिम मतदाता न केवल पहचान के आधार पर, बल्कि अब प्रतिनिधित्व और आत्मसम्मान के आधार पर भी सोचने लगे हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी इस बार राजद से दूरी बनाते हुए बिहार में एक तीसरे मोर्चे की भूमिका में आना चाहते हैं. उनका तर्क है कि जब 2020 में सीमांचल की जनता ने उन्हें चुना, तब महागठबंधन ने उनके विधायकों को तोड़कर राजनीतिक विश्वासघात किया. इसी “इंतकाम” की भावना को वे इस बार चुनावी मुद्दा बना रहे हैं. ओवैसी ने महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन जब कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो उन्होंने 50 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी. AIMIM अब सीमांचल से बाहर दरभंगा, पटना, भागलपुर और किशनगंज जैसे इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इससे महागठबंधन को नुकसान तय है, क्योंकि मुस्लिम वोटों में बिखराव होगा, जो अंततः बीजेपी-एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इस चुनाव में एक अलग तरह का नैरेटिव लेकर आए हैं. वे मुस्लिम समुदाय की गरीबी और पिछड़ेपन को उसकी ‘राजनीतिक चूक’ का नतीजा बताते हैं. उनका साफ कहना है कि “मुसलमानों ने दशकों तक सिर्फ डर के आधार पर वोट डाले हैं, खासकर राजद को, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ प्रतिनिधित्व की बजाय प्रतीकात्मकता मिली है. प्रशांत किशोर का आह्वान है कि मुस्लिम मतदाता अब ‘ईमान’ यानी नैतिक दृष्टिकोण से वोट करें और ऐसे प्रतिनिधि चुनें जो सिर्फ धार्मिक भावनाओं की राजनीति न करें बल्कि समाज के आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान की बात करें. उनकी योजना है कि वे 75 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारें और इन्हें नए नेतृत्व के रूप में पेश करें. हालांकि, उनकी पार्टी की संगठनात्मक उपस्थिति अभी कमजोर है और उन्हें जमीन पर पकड़ बनाने के लिए अधिक मेहनत करनी होगी.</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू इस बार एनडीए के भीतर एक सॉफ्ट सेकुलर छवि पेश करने की कोशिश में लगे हैं. वे मुस्लिम मतदाताओं को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि जेडीयू ने पिछले दो दशकों में अल्पसंख्यकों के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं जैसे छात्रवृत्ति, मदरसा आधुनिकीकरण, अल्पसंख्यक आवास योजना आदि. इसके अलावा, बीजेपी और जेडीयू की रणनीति पसमांदा मुसलमानों यानी अजलाफ और अरजाल वर्गों को साधने की है. बीजेपी ने ‘पसमांदा मुस्लिम सम्मेलन’ कर संकेत दिया है कि वह अब अल्पसंख्यक समाज के उस वर्ग को साथ जोड़ना चाहती है, जो अभी तक मुख्यधारा से बाहर रहा है.लेकिन वक्फ अधिनियम में बदलाव और NRC पर नीतीश कुमार की चुप्पी मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग को असहज कर रही है. खासकर वह तबका जो खुद को सामाजिक न्याय के दायरे में देखता है, वह इस चुप्पी को 'राजनीतिक सहमति' मानता है.</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुस्लिम वोट बैंक बिखरेगा या किसी एक राजनीतिक ध्रुव के इर्द-गिर्द संगठित हो जाएगा? 2020 में महागठबंधन को 76% मुस्लिम वोट मिले थे, AIMIM को 11% और एनडीए को 10% से भी कम. लेकिन 2025 में AIMIM के विस्तार, PK के हस्तक्षेप और NDA की रणनीति के चलते यह समीकरण पूरी तरह से बदल सकता है. यदि तेजस्वी, ओवैसी और प्रशांत किशोर आपस में कोई सामंजस्य नहीं बनाते, तो मुस्लिम वोट कम से कम तीन हिस्सों में बंट सकता है. इसका सीधा फायदा बीजेपी और जेडीयू को मिल सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां बहुमत थोड़ा-बहुत फर्क कर सकता है दूसरी ओर, यदि AIMIM सीमांचल में अपनी सीटें बरकरार रखती है, PK पसमांदा मुस्लिमों को कुछ हद तक प्रभावित करते हैं और राजद पारंपरिक MY समीकरण को बचा पाती है, तो मुस्लिम वोटरों की भूमिका सत्ता के संतुलन को पूरी तरह से बदल सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार में मुस्लिम वोट बैंक अब केवल धार्मिक पहचान का मामला नहीं रहा. यह अब प्रतिनिधित्व, आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और राजनीतिक आत्मसम्मान का मुद्दा बन चुका है. ईमान (सही प्रतिनिधित्व), इस्लाम (धार्मिक सुरक्षा) और इंतकाम (सियासी बदला) इन तीनों आयामों के बीच मुस्लिम मतदाता अब विचार कर रहा है. अगले कुछ महीनों में यह तय होगा कि मुस्लिम वोटर पारंपरिक ध्रुवीकरण से ऊपर उठकर नए विकल्पों की ओर जाते हैं या फिर एक बार फिर पुराने समीकरणों को ही दोहराते हैं. लेकिन इतना तय है कि इस बार उनका वोट सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सत्ता का संतुलन भी तय करेगा.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजय सक्सेना,लखनऊ </strong><br /><strong>  वरिष्ठ पत्रकार</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>बिहार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 13:56:16 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
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                <title>लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने वाला विधेयक लोकसभा में पेश, ओवैसी को आपत्ति</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने मंगलवार को लोकसभा में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल करने संबंधी विधेयक पेश किया। इस विधेयक को बाल विवाह निषेध संशोधन विधेयक, 2021 नाम दिया गया है। इस विधेयक में महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल से बढा कर 21 साल करने का प्रावधान है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया। इस विधेयक में महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रावधान है। <a href="https://t.co/aOcmHm7KW3">pic.twitter.com/aOcmHm7KW3</a></p>
<p>— ANI_HindiNews</p></blockquote>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/woman/union-cabinet-minister-smriti-irani-introduces-the-prohibition-of-child-marriage-amendment-bill-in-loksabha/article-9534"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-12/smriti-irani.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने मंगलवार को लोकसभा में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल करने संबंधी विधेयक पेश किया। इस विधेयक को बाल विवाह निषेध संशोधन विधेयक, 2021 नाम दिया गया है। इस विधेयक में महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल से बढा कर 21 साल करने का प्रावधान है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया। इस विधेयक में महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रावधान है। <a href="https://t.co/aOcmHm7KW3">pic.twitter.com/aOcmHm7KW3</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1473215195283558400?ref_src=twsrc%5Etfw">December 21, 2021</a></p></blockquote>
<p><br />
एमआइएम सांसद असदु्दीन ओवैसी ने इस विधेयक पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि जब 18 साल की उम्र में लड़कियां पीएम और सीएम चुन सकती हैं तो भला वे अपना जीवनसाथी क्यों नहीं चुन सकती हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">सरकार 18 साल की लड़कियों के स्वतंत्रता के अधिकार को घटा रही है। अगर 18 साल की लड़की देश का PM और CM चुन सकती है तो अपना जीवनसाथी क्यों नहीं ? आप लड़कियों को लिव इन रिलेशनशिप की इजाज़त तो दे रहे हैं: शादी की कानूनी उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने के विधेयक पर असदुद्दीन ओवैसी, AIMIM <a href="https://t.co/82pzmev78R">pic.twitter.com/82pzmev78R</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1473256621383946240?ref_src=twsrc%5Etfw">December 21, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>जबकि मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस प्रस्ताव को व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करार दिया है। बोर्ड ने सरकार से शादी की उम्र तय करने से परहेज करने को कहा है। बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा है कि इस्लाम सहित विभिन्न धर्माें की शादी की उम्र तय नहीं की गयी है, यह अभिभावकों के विवेक पर निर्भर करता है। अगर किसी लड़की के माता-पिता यह समझते हैं कि लड़की शादी की जिम्मेवारी निभा सकती है तो उसे कानून से रोकना क्रूरता है।</p>
<p>वहीं, उत्तरप्रदेश के प्रयागराज के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि कुछ दिन पहले ही हमारी सरकार द्वारा बेटियों की शादी की उम्र 21 साल करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इससे किसे तकलीफ हो रही है, यह सब देख रहे हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">बेटियों के लिए शादी की उम्र को 21 साल करने का प्रयास किया जा रहा है। देश ये फैसला बेटियों के लिए कर रहा है लेकिन किसको इससे तकलीफ हो रही है ये सब देख रहे हैं: प्रयागराज में प्रधानमंत्री <a href="https://t.co/jRIHCXB2KZ">pic.twitter.com/jRIHCXB2KZ</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1473219603518029829?ref_src=twsrc%5Etfw">December 21, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
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                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>महिला</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/article/woman/union-cabinet-minister-smriti-irani-introduces-the-prohibition-of-child-marriage-amendment-bill-in-loksabha/article-9534</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Dec 2021 18:56:52 +0530</pubDate>
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                <title>ओवैसी ने महंगाई, पाकिस्तान, चीन के मुद्दे पर मोदी पर साधा निशाना, देखें Video</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>  PM Modi never speaks on 2 things — rise in petrol and diesel prices &amp; China sitting in our territory in Ladakh. PM is afraid of speaking on China. Our 9 soldiers died (in J&amp;K) &amp; on Oct 24 India-Pakistan T20 match will happen: AIMIM chief Asaduddin Owaisi, in Hyderabad</strong></p>
<p><strong>  Hyderabad :</strong> एमआइएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महंगाई, पाकिस्तान और चीन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल 100 रुपये लीटर पार कर गया लेकिन प्रधानमंत्री उस पर कुछ नहीं बोलते।</p>
<p>ओवैसी ने कहा कि पुलवामा हमला हुआ था तो मोदी</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/pm-modi-never-speaks-on-2-things-rise-in-petrol-and-diesel-prices-china-sitting-in-our-territory-in-ladakh-says-asaduddin-owaisi/article-9325"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-10/default.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> PM Modi never speaks on 2 things — rise in petrol and diesel prices &amp; China sitting in our territory in Ladakh. PM is afraid of speaking on China. Our 9 soldiers died (in J&amp;K) &amp; on Oct 24 India-Pakistan T20 match will happen: AIMIM chief Asaduddin Owaisi, in Hyderabad</strong></p>
<p><strong> Hyderabad :</strong> एमआइएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महंगाई, पाकिस्तान और चीन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल 100 रुपये लीटर पार कर गया लेकिन प्रधानमंत्री उस पर कुछ नहीं बोलते।</p>
<p>ओवैसी ने कहा कि पुलवामा हमला हुआ था तो मोदी ने पाकिस्तान को लेकर कहा था कि हम घर में घुस कर मारंेंगे, हमने कहा मारिए।</p>
<p>पर, चीज आज हमारे घर में घुस कर बैठ जाता है, हमारे प्रधानमंत्री कुछ नहीं बोलते हैं। ऐसा लगता है कि वे चीन से डरते हैं।</p>
<p>ओवैसी ने कहा कि एलओसी पर हमारे नौ सैनिक मारे गए और पास टी – 20 खेलेंगे।</p>
<p><strong>ओवैसी का यह पूरा वीडियो इस ट्विटर लिंक में देखें।</strong></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | PM Modi never speaks on 2 things — rise in petrol and diesel prices &amp; China sitting in our territory in Ladakh. PM is afraid of speaking on China. Our 9 soldiers died (in J&amp;K) &amp; on Oct 24 India-Pakistan T20 match will happen: AIMIM chief Asaduddin Owaisi, in Hyderabad <a href="https://t.co/Q0AabFZ0BU">pic.twitter.com/Q0AabFZ0BU</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1450278108108496898?ref_src=twsrc%5Etfw">October 19, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>वीडियो न्यूज़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 09:12:47 +0530</pubDate>
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                <title>ममता बनर्जी के बाद अब राकेश टिकैत ने ओवैसी को बताया बीजेपी का दोस्त, बतायी वजह</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> उत्तरप्रदेश चुनाव करीब आते-आते राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो रही हैं। एमआइएम के चीफ व हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर अब किसान नेता राकेश टिकैत ने हमला बोला है और उन्हें भाजपा से मिला हुआ बताया है। ओवैसी पर हमला बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि भाजपा के चाचा जान उन्हें जिताने के लिए उत्तरप्रदेश प्रवेश कर गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी भाजपा को गाली देते हैं तो वे उनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं करते हैं। दरअसल, वे एक ही टीम में हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/uttar-pradesh/rakesh-tikait-attack-asaduddin-owaisi-says-bjp-s-chacha-jaan-owaisi-has-entered-uttar-pradesh-for-bjp-help/article-9123"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-09/rakesh-tikait-e1631682418791.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> उत्तरप्रदेश चुनाव करीब आते-आते राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो रही हैं। एमआइएम के चीफ व हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर अब किसान नेता राकेश टिकैत ने हमला बोला है और उन्हें भाजपा से मिला हुआ बताया है। ओवैसी पर हमला बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि भाजपा के चाचा जान उन्हें जिताने के लिए उत्तरप्रदेश प्रवेश कर गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी भाजपा को गाली देते हैं तो वे उनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं करते हैं। दरअसल, वे एक ही टीम में हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि ये उनका सहारा लेंगे और उनको इनका आशीर्वाद प्राप्त है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">“…BJP’s Chacha Jaan, Asaduddin Owaisi has entered Uttar Pradesh. If he (Owaisi) will abuse them (BJP), they will not file any case against him. They are a team..”: BKU leader Rakesh Tikait in Baghpat (14.09) <a href="https://t.co/qaisUNKr8R">pic.twitter.com/qaisUNKr8R</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1437986789180858372?ref_src=twsrc%5Etfw">September 15, 2021</a></p></blockquote>
<p><br />
टिकैत ने कहा कि वह गाली देंगे पर ये मुकदमा दर्ज नहीं करेंगे। वह किसानों को यह बरबाद करेंगे। उन्होंने कहा कि यह ए व बी टीम हैं। आपको इनकी चाल समझने की जरूरत है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">BJP का चाचा जान(असदुद्दीन ओवैसी) उत्तर प्रदेश आ गया है। ये उसका सहारा लेंगे इनका उसको आशीर्वाद है। वह गाली देगा ये मुकदमा दर्ज़ नहीं करेंगे। वह किसानों को यहां बरबाद करेगा। ये सब A और B टीम है। आपको इनकी चाल समझने की ज़रूरत है: किसान नेता राकेश टिकैत, बागपत, उत्तर प्रदेश (14.09) <a href="https://t.co/uTq2FCrUu4">pic.twitter.com/uTq2FCrUu4</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1437981972815495169?ref_src=twsrc%5Etfw">September 15, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>मालूम हो कि उत्तरप्रदेश में किसान आंदोलन मे ंशामिल नेताओं ने भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।</p>
<p>इससे पहले इस साल के आरंभ में पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने ओवैसी को भाजपा का दोस्त बनाया था और कहा था कि उनका उद्देश्य उन्हें भाजपा को जीत दिलाना है।</p>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>उत्तर-प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Sep 2021 10:37:11 +0530</pubDate>
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                <title>ममता बनर्जी फिर बोलीं, हैदराबाद से आने वाला आदमी(ओवैसी) बीजेपी से पैसे खाता है</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>कूचबिहार (पश्चिम बंगाल) :</strong> पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को चुनाव प्रचार करने कूचबिहार पहुंची। ममता बनर्जी ने यहां लोगों को संबोधित करते हुए खुद की जीत का भरोसा जताया और असदु्दीदन ओवैसी पर आरोप लगाया कि वे भारतीय जनता पार्टी से पैसे लेते हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">A person came to Bengal from Hyderabad, he took money from BJP. Don’t allow him here: West Bengal CM and TMC leader Mamata Banerjee, in Cooch Behar <a href="https://twitter.com/hashtag/WestBengalPolls?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WestBengalPolls</a> <a href="https://t.co/JcZNhTpkkh">pic.twitter.com/JcZNhTpkkh</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1377883418025893894?ref_src=twsrc%5Etfw">April 2, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>ममता बनर्जी ने कहा कि एक व्यक्ति हैदराबाद से बंगाल आता है, वह भाजपा से पैसे लेता है।</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/mamta-banerjee-again-spoke-a-person-came-to-bengal-from-hyderabad-he-took-money-from-bjp/article-8429"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-04/mamta-banergee-in-kutch-bihar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कूचबिहार (पश्चिम बंगाल) :</strong> पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को चुनाव प्रचार करने कूचबिहार पहुंची। ममता बनर्जी ने यहां लोगों को संबोधित करते हुए खुद की जीत का भरोसा जताया और असदु्दीदन ओवैसी पर आरोप लगाया कि वे भारतीय जनता पार्टी से पैसे लेते हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">A person came to Bengal from Hyderabad, he took money from BJP. Don’t allow him here: West Bengal CM and TMC leader Mamata Banerjee, in Cooch Behar <a href="https://twitter.com/hashtag/WestBengalPolls?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WestBengalPolls</a> <a href="https://t.co/JcZNhTpkkh">pic.twitter.com/JcZNhTpkkh</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1377883418025893894?ref_src=twsrc%5Etfw">April 2, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>ममता बनर्जी ने कहा कि एक व्यक्ति हैदराबाद से बंगाल आता है, वह भाजपा से पैसे लेता है। आप उन्हें अनुमति नहीं दें। ममता बनर्जी इससे पहले भी चुनाव के ऐलान से पहले एमआइएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी पर भाजपा से पैसे लेने का आरोप लगा चुकी हैं, जिस पर पिछली बार ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">I will definitely win from Nandigram. No need to worry: West Bengal CM and TMC leader Mamata Banerjee, in Cooch Behar <a href="https://twitter.com/hashtag/WestBengalPolls?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WestBengalPolls</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1377883877478305795?ref_src=twsrc%5Etfw">April 2, 2021</a></p></blockquote>
<p><br />
ममता बनर्जी ने आज यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतेंगी और उनकी पार्टी को कम से कम 200 सीटें हासिल होंगी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ही राज्य में सरकार बनाएगी। उन्होंने लोगों से अपील यह वजह है कि आप क्यों तृणमूल कांग्रेस को अपना वोट दें।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">I know I will win, but along with me, at least 200 candidates have to win so that we can make our government. That is why cast your vote for TMC candidates: West Bengal CM and TMC leader Mamata Banerjee, in Cooch Behar <a href="https://twitter.com/hashtag/WestBengalPolls?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WestBengalPolls</a> <a href="https://t.co/H7eiMrf5uB">pic.twitter.com/H7eiMrf5uB</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1377882841070010373?ref_src=twsrc%5Etfw">April 2, 2021</a></p></blockquote>
<p><br />
ममता बनर्जी ने यह दावा किया कि वे नंदीग्राम से विधानसभा का चुनाव जीत रही हैं और चिंता की कोई बात नहीं है।</p>
<p>उधर, भाजपा नेता व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी आज पश्चिम बंगाल में कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया। अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के सीतलकुची में कहा कि दीदी के मन में आप लोगो की चिंता नहीं है, बल्कि उनके मन में भतीजे की चिंता है। वो अपने भतीजे को मुख्यमंत्री बनाना चाहती हैं। दीदी भतीजा कल्याण में विश्वास करती हैं और मोदी जी उत्तर बंगाल के कल्याण में विश्वास करती हैं। अमित शाह ने दावा किया कि नंदीग्राम से ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव हार रही हैं। अमित शाह ने यह भी दावा किया कि पहले दो चरण में जिन 60 सीटों पर विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें भाारतीय जनता कम से कम 50 सीटें जीतेंगी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">दीदी 3 टी मॉडल पर सरकार चला रही हैं- तानाशाही, टोलाबाजी, तुष्टीकरण। जबकि मोदी जी 3 वी पर सरकार चलाते हैं- विकास, विश्वास और व्यापार। इन तीन वी के आधार पर हम बंगाल का विकास करेंगे: पश्चिम बंगाल के सीतलकुची में गृहमंत्री और बीजेपी नेता अमित शाह <a href="https://twitter.com/hashtag/WestBengalElections2021?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WestBengalElections2021</a> <a href="https://t.co/y2ASjMknwq">pic.twitter.com/y2ASjMknwq</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1377880714151006208?ref_src=twsrc%5Etfw">April 2, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/national/mamta-banerjee-again-spoke-a-person-came-to-bengal-from-hyderabad-he-took-money-from-bjp/article-8429</link>
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                <pubDate>Fri, 02 Apr 2021 14:24:08 +0530</pubDate>
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                <title>असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी के बांग्लादेश के लिए सत्याग्रह वाले बयान पर पूछा यह सवाल</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>मुर्शिदाबाद (West Bengal Elections 2021) :</strong> एआइएमआइएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम के लिए सत्याग्रह करने वाले बयान पर सवाल पूछा है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा कि बांग्लादेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश की मुक्ति के लिए सत्याग्रह किया था, अगर आपने बांग्लादेश के लिए सत्याग्रह किया तो मुर्शिदाबाद के लोगों को बांग्लादेशी क्यों कहते हैं?</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">In Bangladesh, PM Narendra Modi yesterday said he did Satyagrah for liberation of Bangladesh. If you did</p></blockquote>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/asaduddin-owaisi-narendra-modi-bangladesh/article-8403"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-03/owaisi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुर्शिदाबाद (West Bengal Elections 2021) :</strong> एआइएमआइएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम के लिए सत्याग्रह करने वाले बयान पर सवाल पूछा है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा कि बांग्लादेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश की मुक्ति के लिए सत्याग्रह किया था, अगर आपने बांग्लादेश के लिए सत्याग्रह किया तो मुर्शिदाबाद के लोगों को बांग्लादेशी क्यों कहते हैं?</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">In Bangladesh, PM Narendra Modi yesterday said he did Satyagrah for liberation of Bangladesh. If you did Satyagrah for Bangladesh, then why are you calling people of Murshidabad Bangladeshis. Why are you abusing us?: AIMIM chief Asaduddin Owaisi in Murshidabad, West Bengal <a href="https://t.co/y0ir5SQ8mv">pic.twitter.com/y0ir5SQ8mv</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1375783806985142276?ref_src=twsrc%5Etfw">March 27, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>असदु्दीन ओवैसी ने कहा कि भाजपा लोगों के बीच नफरत फैला रही है। जब एक मुसलिम बच्चा पानी के लिए मंदिर जाता है तो उसकी पिटाई की जाती है। मुसलिमों को जिहादी कहा जाता है, आदिवासियों को नक्सली कहा जाता है और सेकुलर सोच के लोगों को राष्ट्रविरोधी कहा जाता है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">BJP has spread so much hatred in the country that when a child with a Muslim name goes to a temple for water, he is thrashed. Muslims are being called ‘jihadi’, tribals are being called ‘Naxals’ &amp; secular thinkers are being called ‘anti-nationals’: AIMIM chief Asaduddin Owaisi <a href="https://t.co/E7Vr9KkNY2">pic.twitter.com/E7Vr9KkNY2</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1375785534971289612?ref_src=twsrc%5Etfw">March 27, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय बांग्लादेश के दौरे पर हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उनके बांग्लादेश दौरे और वहां पश्चिम बंगाल का जिक्र करने पर तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भी सवाल उठाया है और चुनाव आयोग से शिकायत करने की बात कही है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Mar 2021 18:28:31 +0530</pubDate>
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                <title>ओपिनियन : ओवैसी जी ! राम का नाम तो लेगा ही भारतवासी</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>आर.के.सिन्हा</strong></p>
<p><strong>अयोध्या</strong> में राम मंदिर का शिलान्यास क्या हो गया कि असदुद्दीन ओवैसी तथा आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की छाती पर सांप लोटने लगा। ये तब से ही यह कहने लग रहे हैं कि भारत में धर्मनिरपेक्षता खतरे में है। ओवैसी को तो मानो एक बड़ा मौका ही मिल गया है हिन्दुओं को उकसाने और मुसलमानों को भड़काने का। असदुद्दीन ओवैसी तथा आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जिस बेशर्मी से राम मंदिर के भूमि पूजन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज़रिये उसकी आधारशिला रखे जाने पर अनाप-शनाप बोला उससे तो कुछ न कुछ समाज बंटेगा ही।</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/ayodhya-ram-mandir-and-asaduddin-owaisi-by-rk-sinha/article-7177"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-08/asaduddin-owaisi1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>आर.के.सिन्हा</strong></p>
<p><strong>अयोध्या</strong> में राम मंदिर का शिलान्यास क्या हो गया कि असदुद्दीन ओवैसी तथा आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की छाती पर सांप लोटने लगा। ये तब से ही यह कहने लग रहे हैं कि भारत में धर्मनिरपेक्षता खतरे में है। ओवैसी को तो मानो एक बड़ा मौका ही मिल गया है हिन्दुओं को उकसाने और मुसलमानों को भड़काने का। असदुद्दीन ओवैसी तथा आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जिस बेशर्मी से राम मंदिर के भूमि पूजन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज़रिये उसकी आधारशिला रखे जाने पर अनाप-शनाप बोला उससे तो कुछ न कुछ समाज बंटेगा ही। ओवैसी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने घोर गैर-जिम्मेदारी का परिचय दिया है। ये नहीं चाहते कि भारत विकसित हो और एक विश्व गुरु बने।</p>
<p>भविष्य में क्या होगा इसका दावा तो कोई नहीं कर सकता। लेकिन, अब अगर बाबरी पर प्रश्न उठेगा तो साफ है कि मुसलमान समाज अपने वादे से मुकर रहे हैं कि वे पूरी तौर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानेंगे। राममंदिर तो अब बन कर रहेगा ही और इतने लम्बे संघर्ष के बाद भी अगर ओवैसी को हिंदुओं का दृढ़ संकल्प समझ में नहीं आया तो वह फिर आग से खेल रहे हैं जिसका अंजाम उन्हें समझना चाहिए । मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को किसने अधिकार दे दिया कि वह देश के तमाम मुसलमानों की ठेकेदारी करे। पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि राम मंदिर के निर्णय को समय के बदलने के पश्चात् वे उसे उसी प्रकार से बदल देंगे जैसे हगिया सोफिया मस्जिद के साथ हुआ। यह धमकाने वाला लहजा बड़ा ही खतरनाक है और सुप्रीम कोर्ट की खुलेआम अवहेलना है । पर मजाल है कि किसी भी सेक्युलरवादी की जुबान खुली हो।</p>
<p>अभी भी ऐसे सैकड़ों मंदिर हैं जिन्हें तोड़कर उन पर मस्जिदें बनी हैं और जिनमें किसी सुबूत की भी ज़रूरत नहीं है । अगर राम मंदिर को सोफिया की तरह होना है तो अकेला वही क्यों ? एक नज़र मूल काशी विश्वनाथ मंदिर पर भी डाल लें जहाँ आज ज्ञानवापी मस्जिद खड़ी है। दिल्ली के कुतुब मीनार को जाकर भी देखें। वहां पर आपको कई इमारतें मिलेंगी जिन पर हिन्दुओं के प्रतीक अंकित हैं।</p>
<p>निस्सदेह असदुद्दीन ओवैसी तथा आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भाषा 9 नवम्बर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी खुला अपमान करती है। इनपर सुप्रीम कोर्ट के अपमान का मुकदमा कायम होना चाहिये I इन्हें प्रधानमंत्री मोदी के अयोध्या जाने पर खासतौर कष्ट है। क्या इन्होंने तब भी कभी आपत्ति जताई थी जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते रहते थे? ये सब नेहरू जी को अपना आदर्श मानते हैं। बहुत अच्छी बात है। उनसे किसी का भी कोई विरोध नहीं है। पर क्या इन्हें पता है कि वे भी कुंभ स्नान के लिए जाते थे?</p>
<p>ओवैसी जिस तरह का लगातार आचरण कर रहे है वह बेहद आपत्तिजनक है। एक सांसद से इस तरह के आचरण की कतई उम्मीद की जाती। वह सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे। कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर नोएडा में पुलिस ने पार्कों में मुसलमानों को बिना अनमुति के नमाज अदा करने पर रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने साल 2009 के एक आदेश में साफ कहा है कि सार्वजिनक स्थलों पर धार्मिक-सामाजिक आयोजनों के लिए पुलिस-प्रशासन की अनुमति लेना जरूरी है। उत्तर प्रदेश पुलिस के एक्शन के बाद हंगामा खड़ा होने लगा। इसे अल्पसंख्यकों की धार्मिक आस्थाओं पर कुठाराघात बताने वाले हाय-तौबा करने लगे।</p>
<p>यह विवाद गरमाया तो असदुद्दीन ओवैसी ने तुरंत आग में घी डालने का काम चालू कर दिया। ओवैसी कहने लगे कि यूपी पुलिस कांवड़ियों पर फूल बरसाती है। लेकिन, नमाजियों पर रोक लगाती है। क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करवाना उनके हिसाब से गलत है? ओवैसी जी की राजनीति का स्तर निहायत ही बदबूदार हो चुका है। आप शुक्रवार को जुमा की नमाज सड़कों, रेलवे स्टेशनों, पार्कों, बाजारों वगैरह पर देखते हैं। चूंकि, देश के संविधान का मूलभूत चरित्र धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए नमाज को अदा करने को लेकर किसी तरह का विरोध किए जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। यानी भारत में सभी को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों को मानने-मनाने की अनुमति मिली हुई है। ये संवैधानिक गारंटी है। पर इसका यह कहां से अर्थ निकाला जाए कि रातोंरात किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे मंदिर खड़ा हो जाए या किसी चौराहे पर काजर बना दिया जाये या कहीं भी नमाज पढ़ना चालू कर दिया जाए। अगर हम पार्कों पर नमाज या दूसरे धार्मिक आयोजनों को नहीं रोकते तो हमें ये कहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचता कि हमारे बच्चों के लिए खेलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं हैं? क्या पार्कों में नमाज या रामलीला की इजाजत दे दी जाए?</p>
<p>दरअसल कुछ शरारती तत्व असहिष्णुता के सवाल पर कोलहाल और कोहराम मचाए रहते हैं। इन्हें नसीरुद्दीन शाह जैसे बयानवीरों का साथ तो मिल ही जाता है। अब इन्हें कौन समझाए कि पुरातन भारतीय सभ्यता की आत्मा में ही सहिष्णुता है। अगर यह नहीं होता तो जिस तरह की हालत पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हिन्दुओं और सिखों की हो रही है वही हालत तो भारत में भी अल्पसंख्यकों की हो जाती I लेकिन, बहुसंख्यक हिन्दू समाज ही भारत में अल्पसंख्यकों का रक्षक है I हिन्दू संस्कृति की छांव में बौद्ध,जैन,सिख के साथ साथ अरब से आया इस्लाम भी फलता-फूलता रहा।</p>
<p>भारत धर्मनिरपेक्ष इसलिए है क्योंकि, हिन्दू धर्म ही मूलतः धर्मनिरपेक्ष है। भारत को असहिष्णु कहने वाले जरा इतिहास के पन्ने भी खंगाल लें। उनकी आंखें स्वयं खुल जाएँगी। पर इस देश ने बाहर से आने वाले धर्मावलंबियों का सदैव स्वागत ही किया।</p>
<p>भारत के मालाबार समुद्र तट पर 542 ईंसा पूर्व यहुदी पहुंचे। और वे तब से भारत में अमन-चैन से गुजर-बसर कर रहे हैं। ईसाइयों का भारत में आगमन चालू हुआ 52वीं ईसवी में। वे भी सबसे पहले केरल में आए। फिर पारसी आए। वे कट्टरपंथी मुसलमानों से जान बचाकर ईरान से साल 720 ईस्वी में गुजरात के नवसरी समुद्र तट पर आए। इस्लाम भी केरल के रास्ते ही भारत में आया।</p>
<p>लेकिन, भारत में इस्लाम के मानने वाले बाद के दौर में शरण लेने के इरादे से नहीं आए थे। उनका लक्ष्य भारत को लूटना और राज करना था। वे आक्रमणकारी और लुटेरे थे।</p>
<p>भारतीय इतिहास को जानने वाले जानते हैं कि यहां सबसे बाद के विदेशी हमलावर अंग्रेज थे। उन्होंने 1757 में पलासी के युद्ध में विजय पाई। लेकिन गोरे पहले के आक्रमणकारियों की तुलना में ज्यादा समझदार थे। वे समझ गए थे कि भारत में धर्मांतरण करवाने से ब्रिटिश हुकुमत का विस्तार संभव नहीं होगा। भारत से कच्चा माल ले जाकर वे अपने देश में औद्योगिक क्रांति की नींव रख सकेंगे। इसलिए ब्रिटेन, जो एक प्रोटेस्टेंट देश हैं, ने भारत में 190 सालों के शासनकाल में धर्मांतरण शायद ही कभी किया हो। इसलिए ही भारत में प्रोटेस्टेंट ईसाई बहुत कम हैं। भारत में ज्यादातर ईसाई कैथोलिक हैं। इनका धर्मातरण करवाया आयरिश,पुर्तगाली स्पेनिश ईसाई मिशनरियों ने। इन्होंने गोवा, पुडुचेरी और देश के अन्य भागों में अपने लक्ष्य को साधा।</p>
<p>अब एक बात सब समझ लें कि भारत के तो कण-कण में राम बसे हैं। भारत की राम के बिना तो कल्पना करना भी असंभव है। सारा भारत राम को अपना अराध्य और पूजनीय मानता है। राम मनोहर लोहिया कहते थे कि भारत के तीन सबसे बड़े पौराणिक और पूजनीय नाम – राम, कृष्ण और शिव ही हैं। उनके काम के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी प्राय: सभी को, कम से कम दो में एक भारतीय को तो होगी ही। उनके विचार व कर्म, या उन्होंने कौन-से शब्द कब कहे, उसे विस्तारपूर्वक दस में एक तो जानता ही होगा। कभी सोचिए कि एक दिन में भारत में कितनी बार यहां की जनता प्रभु राम का नाम लेती है। ये आंकड़ा तो अरबों – खरबों में पहुंच जाएगा। भारत राम का नाम तो लेता रहेगा।</p>
<p><strong>(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार और पूर्व सांसद हैं।)</strong></p>
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                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Aug 2020 07:05:37 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर शिलान्यास में पीएम मोदी के शामिल होने पर क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी?</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> राम मंदिर भूमि पूजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने पर एमआइएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेकर जो प्रतिज्ञा ली थी, उसका उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा कि संविधान के बुनियादी ढांचे में सेक्युलरिज्म का उन्होंने उल्लंघन किया है. ओवैसी ने कहा कि आज का दिन ंिहंदुत्व की कामयाबी का दिन है और सेक्युलरिज्म की शिकस्त का.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">The Prime Minister today said he was emotional. I want to say that I am also equally emotional because I believe in coexistence</p></blockquote>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/prime-minister-narendra-modi-has-violated-the-oath-of-the-office-by-laying-the-foundation-stone-of-ram-mandir-in-ayodhya-says-aimim-chief-asaduddin-owaisi/article-7154"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-08/asaduddin-owaisi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> राम मंदिर भूमि पूजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने पर एमआइएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेकर जो प्रतिज्ञा ली थी, उसका उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा कि संविधान के बुनियादी ढांचे में सेक्युलरिज्म का उन्होंने उल्लंघन किया है. ओवैसी ने कहा कि आज का दिन ंिहंदुत्व की कामयाबी का दिन है और सेक्युलरिज्म की शिकस्त का.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">The Prime Minister today said he was emotional. I want to say that I am also equally emotional because I believe in coexistence and equality of citizenship. Mr Prime Minister, I am emotional because a mosque stood there for 450 years: AIMIM chief Asaduddin Owaisi <a href="https://t.co/2nUjt9IKCk">https://t.co/2nUjt9IKCk</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1290956933285871616?ref_src=twsrc%5Etfw">August 5, 2020</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>ओवैसी ने भूमि पूजन से पहले कहा था कि अयोध्या में उक्त स्थल पर मसजिद थी और रहेगी. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि 1528 में अयोध्या में मुगल सम्राट बाबार ने मसजिद की नींव रखी थी, जिसके गुंबद को 1992 में छह दिसंबर के दिन राम मंदिर आंदोलन के तहत कार सेवकों ने गिरा दिया था. ओवैसी ने इस ट्वीट में लिखा था, बाबारी मसजिद थी, है और रहेगी.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Congress is equally responsible for the demolition of Babri Mosque. These secular parties have been completely exposed: AIMIM chief Asaduddin Owaisi <a href="https://twitter.com/hashtag/RamMandir?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#RamMandir</a> <a href="https://t.co/euIfdgzQG4">pic.twitter.com/euIfdgzQG4</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1290964729079320577?ref_src=twsrc%5Etfw">August 5, 2020</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>इससे पहले ओवैसी इस मामले में कांग्रेस को जिम्मेवार ठहरा चुके हैं. उन्होंने पहले कहा था कि जिसका हक बनता है, उसे क्रेडिट दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि राजीव गांधी ही थे, जिन्होंने बाबरी मसजिद का ताला खोला था और वो पीवी नरसिम्हा राव ही थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए यह पूरा विध्वंस देखा था. कांग्रेस संघ परिवार के साथ इस विध्वंस में हाथ में हाथ डाल कर खड़ी रही.</p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/national/prime-minister-narendra-modi-has-violated-the-oath-of-the-office-by-laying-the-foundation-stone-of-ram-mandir-in-ayodhya-says-aimim-chief-asaduddin-owaisi/article-7154</link>
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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2020 17:02:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>#AmulyaLeona पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाली अमूल्या को पिता ने समझाया था, पहले पढ लो फिर गरीबों के लिए लड़ना</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>  </p>
<p>बेंगलुरु में एंटी सीएए रैली के एक मंच से एक लड़की द्वारा गुरुद्वार को पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए थे. उस लड़की का नाम अमूल्या लियोना है. उसने जिस मंच से यह नारा लगाया था उस पर एमआइएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी मौजूद थे, जिन्होंने उसे ऐसा करने के लिए रोका और इस घटना पर दुःख जताया. इस घटना के बाद लोग अमूल्या के बारे में जानना चाहते हैं कि वह आखिर है कौन, उसकी पृष्ठभूमि क्या है.</p>
<p>अमूल्या कर्नाटक के चिकमगलूर के कोप्पा की रहने वाली है और बीए की छात्रा है. उसके पिता वजी एक किसान हैं जो एकड़</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/amulya-leona-know-who-is-pakistan-jindabad-slogan-girl/article-5545"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-02/amulya-1.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>बेंगलुरु में एंटी सीएए रैली के एक मंच से एक लड़की द्वारा गुरुद्वार को पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए थे. उस लड़की का नाम अमूल्या लियोना है. उसने जिस मंच से यह नारा लगाया था उस पर एमआइएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी मौजूद थे, जिन्होंने उसे ऐसा करने के लिए रोका और इस घटना पर दुःख जताया. इस घटना के बाद लोग अमूल्या के बारे में जानना चाहते हैं कि वह आखिर है कौन, उसकी पृष्ठभूमि क्या है.</p>
<p>अमूल्या कर्नाटक के चिकमगलूर के कोप्पा की रहने वाली है और बीए की छात्रा है. उसके पिता वजी एक किसान हैं जो एकड़ भूमि पर खेती करते हैं और एक पाल्ट्री चलाते हैं. वे बेटी के कृत्य से बहुत आहत हैं और कहते हैं कि वे उसके बेल के लिए भी प्रयास नहीं करेंगे. अमूल्या पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया है. अमूल्या के पिता ने कहा कि उसकी बातों का किसी भी तरह समर्थन नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि मैंने उसे समझाया था कि पहले तुम अपनी पढाई पूरी कर लो, अच्छे से पढो और उसके बाद गरीबों के लिए लड़ना. जाहिर है पिता का जोर इस बात पर था कि बेटी की समझ अध्ययन से विकसित हो.</p>
<p>इस घटना के बाद उसके घर के आसपास सुरक्षा बढा दी गयी है. यह भी खबर है कि उसके घर पर पत्थरबाजी की गयी और इसमें भाजपा समर्थकों का हाथ बताया गया. उसके पिता एक राजनीतिक कार्यकर्ता रहे हैं और भाजपा व जनता दल सेकुलर राज्य की दोनों बड़ी पाटियों के लिए समय-समय पर काम किया है. उसके पिता कहते हैं कि वह राष्ट्रभक्त हैं और सालों से कई लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता व राजनेता मेरे घर आते रहते हैं. वजी को यह सफाई अपनी बेटी की वजह से देनी पड़ रही है.</p>
<p>उधर, अमूल्या का एक पुराना वीडिया आया है जिसमें उसने कहा है कि उसके पीछे एक बड़ा ग्रुप है, जिसमें स्टूडेंट व सीनियर एक्टिविस्ट हैं, जो यह बताता है कि मंच से क्या बोलना है, क्या नारा लगाना चाहिए. उसके पीछे बड़ी ताकत है. अमूल्या ने इस कड़ी में अपनी माता-पिता का भी नाम लिया था.</p>
<p>अमूल्या सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव है. फुसबुक, ट्विटर के साथ वह एक ब्लाॅग भी चलाती है. अमूल्या को 14 दिन के रिमांड पर जेल भेज दिया गया है. वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री वीएस येदियुरप्पा ने उसके कृत्य की निंदा करते हुए इसे समाज का का माहौल बिगाड़ने वाला बताया. उन्होंने कहा कि उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए.</p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Feb 2020 16:32:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>#Amulya बेंगलुरु में ओवैसी के मंच से युवती ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए, देशद्रोह का केस दर्ज</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>  </p>
<p><strong>बेंगलुरु :</strong> एआइएमआइएम नेता असदुद्दीन ओवैसी के लिए आज उस समय विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गयी, जब बेंगलुरु में उनके मंच से एक युवती ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना आरंभ कर दिया. उस वक्त ओवैसी मंच पर ही थे. ओवैसी सहित अन्य लोगों ने युवती को रोकने की कोशिश की, पर वह नहीं मानी. युवती पर बाद में केस दर्ज कर लिया. दरअसल, आज यहां एक सीएए-एनआरसी विरोधी रैली आयोजित की गयी थी, जिसे संबोधित करने ओवैसी पहुंचे थे. उसी मंच से युवती ने माइक लेकर नारा लगाना शुरू कर दिया.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> उस घटना की पूरी क्लिप जहां बेंगलुरु</p></blockquote>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/a-woman-at-an-anti-caa-nrc-rally-in-bengaluru-raised-slogan-of-pakistan-zindabad-today-aimim-chief-asaddudin-owaisi-present/article-5533"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-02/owaisee-stage.png" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><strong>बेंगलुरु :</strong> एआइएमआइएम नेता असदुद्दीन ओवैसी के लिए आज उस समय विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गयी, जब बेंगलुरु में उनके मंच से एक युवती ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना आरंभ कर दिया. उस वक्त ओवैसी मंच पर ही थे. ओवैसी सहित अन्य लोगों ने युवती को रोकने की कोशिश की, पर वह नहीं मानी. युवती पर बाद में केस दर्ज कर लिया. दरअसल, आज यहां एक सीएए-एनआरसी विरोधी रैली आयोजित की गयी थी, जिसे संबोधित करने ओवैसी पहुंचे थे. उसी मंच से युवती ने माइक लेकर नारा लगाना शुरू कर दिया.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> उस घटना की पूरी क्लिप जहां बेंगलुरु में एक सीएए-एनआरसी विरोधी रैली में अमूल्या नाम की एक महिला ने आज ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाया। रैली में मौजूद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महिला को नारा लगाने से रोका; उन्होंने घटना की निंदा की है। <a href="https://t.co/TYXXUJgObT">pic.twitter.com/TYXXUJgObT</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1230522446073225217?ref_src=twsrc%5Etfw">February 20, 2020</a></p></blockquote>
<p><br />
पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाली महिला का नाम अमूल्या है. उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (देशद्रोह) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस उससे पूछताछ भी कर रही है. पूछताछ के बाद उसे अदालत में पेश किया जाएगा. असदुद्दीन ओवैसी ने महिला के इस कृत्य की निंदा की है.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">आज बेंगलुरु में एक रैली के दौरान ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने वाली अमूल्या नाम की महिला के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (देशद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने उससे पूछताछ की। उसे पूछताछ के बाद अदालत में पेश किया जाएगा। <a href="https://t.co/amIoJZG5T6">https://t.co/amIoJZG5T6</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1230523240646209536?ref_src=twsrc%5Etfw">February 20, 2020</a></p></blockquote>
<p></p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Feb 2020 23:59:12 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Jharkhand]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>#WarisPathan ओवैसी की पार्टी एमआइएम के नेता वारिस पठान के विवादित बयान का वीडियो वायरल</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>  </p>
<p>नयी दिल्ली: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआइएम के नेता वारिस पठान का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे आपत्तिजनक बयान देते दिख रहे हैं. इस वीडियो में एक जनसभा में यह कहते हुए दिख रहे हैं कि आजादी मांगने से नहीं मिलती है तो इसे छिनना पड़ता है. उन्होंने कहा कि हमारी जुबान की आतिशबाजी का मुकबला आप नहीं कर सकते हो. पठान इस वीडियो में यह कहते हुए दिख रहे हैं कि लेकिन इकट्ठा होकर चलना पड़ेगा. वे कह रहे हैं कि आजादी लेनी पड़ेगी और जो चीज मांगने से नहीं मिलती है उसे छीन कर लेना पड़ेगा.</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/aimim-leader-waris-pathan-stokes-a-fresh-controversy-15-crore-muslims-will-outweigh-the-100-crore-hindus/article-5521"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-02/waris-pathan.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>नयी दिल्ली: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआइएम के नेता वारिस पठान का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे आपत्तिजनक बयान देते दिख रहे हैं. इस वीडियो में एक जनसभा में यह कहते हुए दिख रहे हैं कि आजादी मांगने से नहीं मिलती है तो इसे छिनना पड़ता है. उन्होंने कहा कि हमारी जुबान की आतिशबाजी का मुकबला आप नहीं कर सकते हो. पठान इस वीडियो में यह कहते हुए दिख रहे हैं कि लेकिन इकट्ठा होकर चलना पड़ेगा. वे कह रहे हैं कि आजादी लेनी पड़ेगी और जो चीज मांगने से नहीं मिलती है उसे छीन कर लेना पड़ेगा. वे कह रहे हैं कि अब वक्त आ गया.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">AIMIM leader Waris Pathan: …</p>
<p>“Hum 15 cr hain magar 100 ke upar bhaari hain, ye yaad rakh lena”</p>
<p><a href="https://t.co/ZXFGyDoO9g">pic.twitter.com/ZXFGyDoO9g</a></p>
<p>— Srikanth (@srikanthbjp_) <a href="https://twitter.com/srikanthbjp_/status/1230427464540868608?ref_src=twsrc%5Etfw">February 20, 2020</a></p></blockquote>
<p><br />
वारिस पठान इस वीडियो में यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि हमको कर रहे हैं कि मां-बहन को आगे कर दिया, अरे अभी तो सिर्फ शेरनियां बाहर निकली हैं और तुम्हारे पसीने छूट गए और समझ लो हमलोग साथ में आ गए तो फिर क्या होगा. वे कह रहे हैं कि 15 करोड़ हैं, लेकिन 100 करोड़ पर भारी हैं याद कर लेना यह बात.</p>
<p>वारिस पठान एमआइएम के प्रवक्ता हैं. उन्होंने कर्नाटक के गुलबर्गा में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए यह बयान दिया है. यह वीडियो वायरल होने के बाद वारिस पठान ट्विटर पर ट्रेंड में आ गए हैं और लोग इस हैसटैग पर जमकर ट्वीट कर अपनी बात कर रहे हैं.</p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Feb 2020 15:17:46 +0530</pubDate>
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