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                <title>Jharkhand liquor scam - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Jharkhand liquor scam RSS Feed</description>
                
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                <title>750 करोड़ शराब घोटाले में ACB पर सवाल, CBI जांच की मांग तेज</title>
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                        <![CDATA[झारखंड के बहुचर्चित 750 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल को पत्र लिखकर ACB की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जांच एजेंसी ने समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर जानबूझकर आरोपियों को डिफॉल्ट बेल दिलाने का रास्ता साफ किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/baboolal-marandi-submits-memorandum-to-jharkhand-governor/article-19709"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/6e90329d-cf86-408e-a53d-028ef0b5372f_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> झारखंड के बहुचर्चित 750 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले में राज्यपाल को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं और जांच तत्काल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की है।</p>
<p>नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि राज्य की जांच एजेंसी ACB इस गंभीर आर्थिक अपराध की निष्पक्ष जांच करने के बजाय सत्ता-संपोषित भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट हो चुका है कि ACB ने जानबूझकर वैधानिक समय-सीमा के भीतर आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं किया, जिसके कारण कई आरोपियों को ‘डिफॉल्ट बेल’ मिल गई।</p>
<p>पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2022 में राज्य की उत्पाद नीति में बदलाव कर एक सिंडिकेट को लाभ पहुंचाया गया, जिससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ। शुरुआती तौर पर 38 करोड़ रुपये का आंका गया यह घोटाला अब बढ़कर 750 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है। मामले में ACB ने 20 और 21 मई 2025 को कई बड़े अधिकारियों और संबंधित लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन इसके बावजूद जांच की गति और दिशा पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि 90 दिनों की निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने के कारण कुल 17 में से 14 आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई। उन्होंने इसे जांच एजेंसी की “लचर और मिलीभगत वाली कार्यप्रणाली” करार दिया।</p>
<p>मामले में एक अन्य उदाहरण देते हुए कहा गया कि छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी नवीन केडिया की गिरफ्तारी के बाद भी वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया, जिसे अब तक ACB गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इसे भी जांच एजेंसी की विफलता बताया गया।</p>
<p>नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से मांग की है कि ACB को तत्काल चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे CBI को सौंपा जाए, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और जनता का कानून व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।</p>
<p>इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर घमासान तेज हो गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:07:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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            <item>
                <title>शराब घोटाले पर सियासी घमासान: बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, CBI जांच की मांग </title>
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                        <![CDATA[झारखंड में चर्चित शराब घोटाले को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर सरकार की मंशा और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और पत्र के माध्यम से सीबीआई जांच की मांग की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/political-fierce-battle-on-liquor-scam-babulal-marandi-wrote-a/article-15693"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/बाबूलाल-मरांडी.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची: </strong>झारखंड में चर्चित शराब घोटाले को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर सरकार की मंशा और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मरांडी ने आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामले में सरकार ने जानबूझकर तीन महीने तक चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिसके कारण एक-एक कर आरोपी जमानत पर छूटते चले गए। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकार निष्पक्ष जांच नहीं, बल्कि जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">नेता प्रतिपक्ष ने यह भी दावा किया कि एसीबी द्वारा पूछताछ के दौरान अधिकारियों की रिकॉर्डिंग तक नहीं की गई। इससे बयान में हेरफेर की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सब मुख्यमंत्री की जानकारी में हो रहा है या अधिकारी अपनी मर्जी से इतना बड़ा खेल खेल रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मरांडी ने अपने पत्र में इस घोटाले को छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट से जुड़ा बताते हुए कहा कि रायपुर से दिल्ली तक फैले माफियाओं को बचाने की साजिश रची जा रही है। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने बड़ी "डील" कर समय पर चार्जशीट दाखिल न करके आरोपियों को बेल दिलाने का रास्ता साफ किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री को सीधी चेतावनी दी है कि यदि यह सब उनकी जानकारी में हो रहा है तो वे भी जिम्मेदार हैं, और यदि नहीं, तो उन्हें तुरंत संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि जांच की आंच खुद उन तक न पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">मरांडी ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए एसीबी जांच को महज "दिखावा" करार दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार असली दोषियों को बचाने में जुटी है। मरांडी का यह पत्र झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचाने वाला साबित हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बाबूलाल मरांडी द्वारा लिखा गया पत्र </strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><a href="https://samridhjharkhand.com/media/2025-08/letter.-(2).pdf">https://samridhjharkhand.com/media/2025-08/letter.-(2).pdf</a></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 16:42:15 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शराब घोटाले में आईएएस अधिकारी विनय चौबे को जमानत, एसीबी की कार्रवाई सवालों के घेरे में</title>
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                        <![CDATA[शराब घोटाले में गिरफ्तारी की कार्रवाई राज्य सरकार की एजेंसी एसीबी ने की थी। एसीबी ने कई अन्य अधिकारियों और शराब कारोबारियों को पकड़ा । झारखंड से लेकर छत्तीसगढ़ तक कार्रवाई हुई। घोटाले से संबंधित कई बड़े खुलासे किए गए। विनय चौबे के सगे संबंधी भी लपेटे में आए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ias-officer-vinay-choubey-in-liquor-scam-to-bail-acb/article-15627"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(17)3.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची:</strong> झारखंड में शराब घोटाले का शोर इतना मचा कि पूरे देश में इसकी गूंज सुनाई दी। घोटाले के आरोप में जब झारखंड के वरिष्ठ अधिकारी विनय चौबे की गिरफ्तारी हुई तो एकबारगी सनसनी फैल गई। विनय चौबे झारखंड के ताकतवर आईएएस ऑफिसर माने जाते हैं। मुख्यमंत्री के साथ लंबे समय तक काम कर चुके हैं। देश में संभवत यह पहला ऐसा मामला था कि मुख्यमंत्री का विश्वास पात्र और उनके साथ काम करने वाला अधिकारी घोटाले में पकड़ा गया। </p>
<p style="text-align:justify;">शराब घोटाले में गिरफ्तारी की कार्रवाई राज्य सरकार की एजेंसी एसीबी ने की थी। एसीबी ने कई अन्य अधिकारियों और शराब कारोबारियों को पकड़ा । झारखंड से लेकर छत्तीसगढ़ तक कार्रवाई हुई। घोटाले से संबंधित कई बड़े खुलासे किए गए। विनय चौबे के सगे संबंधी भी लपेटे में आए। विनय चौबे पर घोटाले में शामिल होने और इसके जरिए अकूत संपत्ति अर्जित करने की खबरें आई। दो महीने तक अखबारों की सुर्खियां शराब घोटाले को लेकर बनती रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">एसीबी के दावे की तब पोल खुल गई जब एसीबी ने 90 दिनों के अंदर विनय चौबे के खिलाफ  कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं किया। एसीबी का कहना है की सरकार से अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिली। इसलिए चार्जशीट दाखिल नहीं किया जा सका। अब भला इस तर्क पर कौन भरोसा करेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट में समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने का लाभ विनय चौबे को मिला और उन्हें जमानत मिल गई। अब एसीबी की करवाई और भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">आखिर जब इतने सारे सबूत थे। सबूतों का ढिंढोरा पीटा गया तो फिर 90 दिनों के अंदर आरोप पत्र दाखिल क्यों नहीं किया जा सका? इसके पीछे की मंशा क्या है? पहले कार्रवाई का दिखावा करो और फिर बचा लो। यानी मैच फिक्सिंग जैसा मामला। </p>
<p style="text-align:justify;">एसीबी की कार्रवाई पर पहले दिन से ही सवाल उठ रहे थे। विनय चौबे की गिरफ्तारी को एक बड़ा साजिश बताया जा रहा था। कहा जा रहा था कि शराब घोटाले में विनय चौबे को बलि का बकरा बनाया गया है। सरकार के इतने खासमखास अधिकारी को अचानक पकड़ लिया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">विरोधियों ने तो यहां तक कहा कि शराब घोटाले की जांच ईडी या सीबीआई न करे। जांच की आंच दूर तलक न जाए इसलिए एसीबी ने अपनी तत्परता दिखाई। सीबीआई और ईडी अगर जांच करेगी तो कई लोग फसेंगे। घोटाले का तार दूर तक जाएगा। इसलिए विनय चौबे के गिरफ्तारी दिखाकर कार्रवाई का संदेश दिया गया।<br />विनय चौबे के करियर पर तो दाग लग गया। पूरे देश में बदनामी हुई। अब यदि उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं होगा तो उनको जो नुकसान हुआ, जो पीड़ा हुई, बदनामी हुई इसकी भरपाई कौन करेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">बहुत संभव है कि देर सवेर इस मामले की जांच  सीबीआई या ईडी करे। क्योंकि इस घोटाले पर पहले से ही इन दोनों एजेंसियों की नजर है। जब विनय चौबे को जमानत मिल गई तो संभव है अन्य आरोपियों को भी जमानत मिल जाएगी। इस मामले में सरकार की भी बदनामी हुई है।<br /> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 17:12:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sunil Singh]]>
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