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                <title>Ramdas Soren political journey - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Ramdas Soren political journey RSS Feed</description>
                
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                <title>जगरनाथ महतो के बाद रामदास सोरेन का भी निधन, अब अगला शिक्षा मंत्री कौन? विस के साथ भी अजीब संयोग</title>
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                        <![CDATA[जगरनाथ महतो के बाद अब रामदास सोरेन भी कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. 8 महीने के अल्प कार्यकाल में ही उनका निधन हो गया. अब झारखंड में नया शिक्षा मंत्री कौन होगा और घाटशिला सीट पर उपचुनाव कब होगा, यह बड़ा सवाल है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ramdas-soren-also-died-after-jagarnath-mahato-now-the-next/article-15519"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/533153264_800163882362082_7612528448161475142_n-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध डेस्क:</strong> तीन दिन पहले हमने "शिक्षा मंत्री पर ग्रहण, संयोग या अपशगुन" शीर्षक से एक पोस्ट लिखा था. जिसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के कोटे से बनने वाले शिक्षा शिक्षा मंत्रियों के संबंध में लिखा था. झारखंड मुक्ति मोर्चा के कोटे से बनने वाले पहले शिक्षा मंत्री झारखंड आंदोलनकारी स्वर्गीय जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन की चर्चा की थी. मैंने अपने पोस्ट में पहले ही बता दिया था कि रामदास सोरेन का ब्रेन डेड हो चुका है. ऐसी स्थिति में अब बचना संभव नहीं है. डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे. आखिरकार 15 अगस्त की रात रामदास सोरेन भी दुनिया छोड़कर चले गए. </p>
<p style="text-align:justify;">जगरनाथ महतो के बाद रामदास सोरेन दूसरे ऐसे शिक्षा मंत्री रहे जो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. रामदास सोरेन लगभग 8 महीने ही मंत्री रह पाए. </p>
<p style="text-align:justify;">रामदास सोरेन बड़े झारखंड आंदोलनकारी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कद्दावर नेता थे. स्वर्गीय शिबू सोरेन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी थे. कोल्हान टाइगर के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन जब झारखंड मुक्ति मोर्चा छोड़कर भाजपा में गए तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चंपई सोरेन के बदले रामदास सोरेन को मंत्रिमंडल में शामिल कर कोल्हान में राजनीतिक क्षतिपूर्ति की भरपाई करने की कोशिश की. </p>
<p style="text-align:justify;">चंपई के बदले रामदास सोरेन को आगे किया गया. लेकिन दुर्भाग्य से रामदास सोरेन अब हमारे बीच नहीं रहे. उनके जाने से झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी भारी नुकसान हुआ है. रामदास सोरेन ऐसे समय पर दुनिया छोड़ गए जब गुरु जी का श्रद्धा कर्म भी संपन्न नहीं हुआ था. रामदास सोरेन अपने प्रिय नेता के पास चले गए. </p>
<p style="text-align:justify;">हमने जिस संयोग और अपशगुन की चर्चा की थी अब वही हुआ. अब यह देखना है कि अगला शिक्षा मंत्री कौन होता है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यह जिम्मेदारी किसको देते हैं. किसी नए मंत्री को यह जिम्मेदारी मिलेगी या उच्च शिक्षा मंत्री का प्रभार संभाल रहे सुदिव्य कुमार सोनू को पूरा प्रभार दे दिया जाएगा. फिलहाल तो यही संभावना है. आगे क्या होगा यह देखना होगा. </p>
<p style="text-align:justify;">एक संजोग और अलग राज्य बनने के बाद से अभी तक संभवत किसी भी विधानसभा का कार्यकाल ऐसा नहीं रहा जिसमें उपचुनाव नहीं हुआ हो. हर विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पूर्व किसी न किसी कारण से उपचुनाव होता रहा है. अब रामदास सोरेन के निधन के बाद घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव चुनाव होना तय है. 6 महीना के अंदर यहां चुनाव होगा. संभव है अक्टूबर में जब बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा हो तो घाटशिला में भी चुनाव की घोषणा हो जाए.<br /> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 10:43:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sunil Singh]]>
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                <title>ग्राम प्रधान से मंत्री तक: रामदास सोरेन की संघर्षगाथा</title>
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                        <![CDATA[रामदास सोरेन ने राजनीति की शुरुआत ग्राम प्रधान से की और जनता से गहरे जुड़ाव के बल पर झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया. मेहनत और संघर्ष ने उन्हें मंत्री पद तक पहुंचाया. 2005 में टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए रामदास सोरेन ने जनता का अपार समर्थन पाया. 35 हजार वोट लेकर उन्होंने अपनी लोकप्रियता साबित की और झारखंड की राजनीति में मजबूत पहचान बनाई.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ramdas-sorens-struggle-from-village-head-to-minister/article-15517"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/gyab8mqxcaaxki31.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> दिल्ली के निजी अस्पताल में शुक्रवार को झारखंड के स्कूली शिक्षा, साक्षरता एवं निबंधन मंत्री और झामुमो के वरिष्ठ नेता रामदास सोरेन ने अंतिम सांस ली. 2 अगस्त को जमशेदपुर स्थित आवास पर बाथरूम में गिरने से उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया गया था. तब से वह लाइफ सपोर्ट पर थे.</p>
<h4><strong>शिक्षा सुधारों के मजबूत पैरोकार रहे रामदास सोरेन</strong></h4>
<p>जमशेदपुर के को-ऑपरेटिव कॉलेज से स्नातक किए रामदास सोरेन ने हमेशा सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और आदिवासी अंचलों में शिक्षा का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया. मंत्री बनने के बाद उन्होंने खुद स्कूलों का दौरा कर बच्चों और शिक्षकों की समस्याएं सुनीं. उनकी पहचान जमीन से जुड़े नेता और शिक्षा सुधारक की रही.</p>
<h4><strong>ग्राम प्रधान से शुरू हुई राजनीति, तीन बार बने विधायक</strong></h4>
<p>1 जनवरी 1963 को पूर्वी सिंहभूम के घोराबांधा गांव में जन्मे रामदास सोरेन ने अपनी राजनीति की शुरुआत ग्राम प्रधान के तौर पर की. जनता से निरंतर जुड़ाव ने उन्हें राज्य की राजनीति में बड़ा मुकाम दिलाया. 2009 में पहली बार विधायक बने, 2019 और 2024 में घाटशिला से लगातार जीत दर्ज की.</p>
<h4><strong>निर्दलीय लड़कर भी साबित किया था राजनीतिक कद</strong></h4>
<p>वर्ष 2005 में कांग्रेस-झामुमो गठबंधन के कारण टिकट न मिलने पर सोरेन ने पार्टी पद से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ा. 35 हजार वोट पाकर उन्होंने यह साबित किया कि जनता में उनकी मजबूत पकड़ है. 2009 में झामुमो ने उन्हें टिकट दिया और वे पहली बार विधानसभा पहुंचे.</p>
<h4><strong>2014 में हार, लेकिन जनता से जुड़ाव बनाए रखा</strong></h4>
<p>2014 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मण टुडू से हारने के बावजूद सोरेन ने हार नहीं मानी. वे लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय रहे और जनता के बीच भरोसा बनाए रखा. इसका नतीजा यह रहा कि 2019 और 2024 में उन्होंने दोबारा भारी बहुमत से जीत दर्ज की.</p>
<h4><strong>मंत्री बनने पर पैतृक गांव में मना था जश्न</strong></h4>
<p>2024 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कैबिनेट मंत्री बनते ही उनके पैतृक गांव खरस्वती और पूरे घाटशिला में जश्न का माहौल था. ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटीं और लोगों ने कहा था—“रामदास बाबू गरीब-गुरबा की सेवा के लिए बने हैं.”</p>
<h4><strong>अचानक हादसे ने छीन लिया लोकप्रिय नेता</strong></h4>
<p>2 अगस्त की सुबह बाथरूम में गिरने से उनके सिर में गंभीर चोट लगी. ब्लड क्लॉटिंग और ब्रेन हेमरेज के चलते उनकी हालत बिगड़ गई. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजा गया. इलाज के दौरान शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली.</p>
<h4><strong>राज्य में शोक की लहर, नेताओं ने जताया दुख</strong></h4>
<p>उनके निधन पर राज्यपाल संतोष गंगावार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन सहित कई नेताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की. झामुमो ने इसे पार्टी और राज्य की अपूरणीय क्षति बताया.<br /> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 09:50:39 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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