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                <title>Irfan Ansari health minister - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Irfan Ansari health minister RSS Feed</description>
                
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                <title>झारखंड सरकार खून देने में नहीं, खून चूसने में लगी है: राफ़िया नाज़</title>
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                        <![CDATA[भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राफ़िया नाज़ ने झारखंड की वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था को 'मौत का तंत्र' करार देते हुए हेमंत सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को HIV संक्रमित खून चढ़ाने और ब्लड बैंकों में रक्त की भारी कमी (30-40%) का मुद्दा उठाया। राफ़िया ने स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी पर केवल बयानबाजी करने और धरातल पर काम न करने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने राज्य में खून की ब्लैक मार्केटिंग और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा में विफलता को लेकर सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े किए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/the-jharkhand-government-is-engaged-not-in-donating-blood--but-in-sucking-it--rafia-naz/article-19271"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/download_samridh_1200x720-(17).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची: </strong>भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता राफ़िया नाज़ ने झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और राज्य सरकार जनता की जिंदगी के साथ खुला खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा,यह सरकार खून देने वाली नहीं, खून चूसने वाली बन चुकी है। जिस राज्य में थैलेसीमिया के मासूम बच्चों को एचआईवी संक्रमित (HIV+) खून चढ़ाया जाए और बिना सही मिलान के मिसमैच ब्लड देकर मरीजों की जान ली जाए, वह व्यवस्था नहीं बल्कि मौत का तंत्र बन चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">राफ़िया नाज़ ने सरकार की नीयत और नाकामी पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर भारतीय जनता पार्टी लगातार रक्तदान शिविर लगाकर मानवता की सेवा कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार के पास न तो खून के सुरक्षित संग्रहण की तकनीक है और न ही आधुनिक भंडारण की व्यवस्था। हैरानी की बात है कि सरकार रक्तदान को लेकर कोई जागरूकता अभियान तक नहीं चला रही……यह सीधी लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा,स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी केवल बयानबाजी में व्यस्त हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत सुधारने की कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखती। पूरा सिस्टम लापरवाही, अराजकता का प्रतीक बन चुका है। आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह निष्क्रिय हो गया है……ब्लड बैंक की गाड़ियां धूल फांक रही हैं और विभाग के कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जामताड़ा, दुमका, देवघर, साहिबगंज, पाकुड़, गिरिडीह और पलामू जैसे जिलों में ब्लड बैंक या तो खाली हैं या बेहद कम स्टॉक पर चल रहे हैं। जहां रोजाना 15–25 यूनिट रक्त की जरूरत है, वहां आधा भी उपलब्ध नहीं…..यह सरकार की घोर विफलता का जीता-जागता प्रमाण है। राफिया ने कहा, प्रसव के दौरान खून की कमी से गर्भवती महिलाओं की मौत और नवजात बच्चों का खतरे में पड़ना अत्यंत दर्दनाक है। गंभीर मरीज खून के अभाव में तड़प रहे हैं, और गलत रक्त चढ़ाने से लोगों की जान जा रही है ………यह केवल लापरवाही नहीं, यह सरकार की अमानवीयता और असंवेदनशीलता का प्रमाण है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में खून की भारी कमी के बीच ब्लैक मार्केटिंग (Black Marketing )का गंदा खेल खुलेआम चल रहा है। गरीबों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना दिया गया है। सरकार अगर चाहे तो इस पर तुरंत रोक लगाकर दोषियों को सख्त सजा दे सकती है, लेकिन इच्छाशक्ति की कमी साफ दिखती है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में हर महीने 10,000–12,000 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जबकि उपलब्धता कई बार 6,000–7,000 यूनिट तक ही सीमित रहती है — यानी 30–40% की भारी कमी।यह कमी ही लोगों की जान ले रही है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">राफ़िया नाज़ ने कहा,यह केवल विफलता नहीं, बल्कि जनजीवन के साथ सीधा अपराध है। झारखंड सरकार के दावे खोखले हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त करने की ज़रूरत है साथ ही नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाएं और लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाए ,ताकि किसी भी नागरिक की मौत खून के अभाव में न हो।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:03:31 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Sinha]]>
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                <title>Ranchi news: झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा का हमला, प्रवक्ता अजय साह ने कहा - 'विभाग अनाथ है'</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>रांची: </strong>भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने झारखंड में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट के बाद अब झारखंड हाई कोर्ट भी सरकार की निष्क्रियता से क्षुब्ध हो चुका है, लेकिन सरकार अब भी गहरी नींद में है और जनता के स्वास्थ्य की चिंता उससे कोसों दूर है।</p>
<p>उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने राज्य सरकार को चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के रिक्त पदों पर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है, जो यह दर्शाता</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ranchi-news-bjps-attack-on-health-system-in-jharkhand-spokesperson/article-15344"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-07t195319.615.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने झारखंड में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट के बाद अब झारखंड हाई कोर्ट भी सरकार की निष्क्रियता से क्षुब्ध हो चुका है, लेकिन सरकार अब भी गहरी नींद में है और जनता के स्वास्थ्य की चिंता उससे कोसों दूर है।</p>
<p>उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने राज्य सरकार को चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के रिक्त पदों पर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है, जो यह दर्शाता है कि अब न्यायपालिका को भी सरकार की लापरवाही को संज्ञान में लेना पड़ रहा है। अजय के अनुसार, यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार की प्राथमिकता सूची में स्वास्थ्य सेवा कहीं नहीं है।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर निशाना साधते हुए अजय ने यह भी कहा कि मंत्री को हजारीबाग और रामगढ़ की घटनाओं तथा अन्य विभागीय मामलों में तो गहरी रुचि है, लेकिन अपने विभाग की स्थिति पर उनका ध्यान ही नहीं है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की हालत इस समय एक अनाथ विभाग की तरह हो गई है, जहां न डॉक्टर हैं, न नर्सें, और न ही कोई ठोस व्यवस्था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए जहां एक ओर नए डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी कर्मियों की तत्काल आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य मंत्री का पूरा ध्यान सिर्फ रिम्स की नई इमारत के निर्माण पर केंद्रित है। उन्होंने इसे सरकार की कमीशन आधारित राजनीति का प्रतीक बताया।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि जब वित्त विभाग द्वारा पहले ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए स्वीकृति दे दी गई है, तो उसके बावजूद आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियां करने का निर्णय संदेहास्पद है। उनके अनुसार, यह फैसला अपने चहेते लोगों को लाभ पहुंचाने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है।</p>
<p>प्रवक्ता ने झारखंड सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि जब राज्य के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी खुद दिल्ली में जाकर इलाज करवा रहे हैं, तो यह इस बात का प्रमाण है कि वे स्वयं भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा नहीं करते। अजय साह के अनुसार, यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि राज्य की जनता के साथ एक क्रूर मज़ाक भी है</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
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                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Aug 2025 19:53:58 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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