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                <title>शिबू सोरेन का निधन - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>शिबू सोरेन का निधन RSS Feed</description>
                
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                <title>Shibu Soren Funeral: पंचतत्व में विलीन हुए 'गुरुजी', सासु मां रूपी सोरेन को संभालते दिखीं कल्पना सोरेन, फूट-फूटकर रोए सीएम</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>रामगढ़:</strong> झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन का आज उनके पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके बड़े बेटे और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।</p>
<p>81 वर्षीय शिबू सोरेन का सोमवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को मंगलवार सुबह रांची स्थित उनके आवास से झारखंड विधानसभा ले जाया गया, जहां</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/kalpana-soren-was-seen-handling-soren-sasu-maa-rupi-soren/article-15260"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(94)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रामगढ़:</strong> झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन का आज उनके पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके बड़े बेटे और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।</p>
<p>81 वर्षीय शिबू सोरेन का सोमवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को मंगलवार सुबह रांची स्थित उनके आवास से झारखंड विधानसभा ले जाया गया, जहां राज्यपाल, कई मंत्रियों, विधायकों और अन्य गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>विधानसभा से उनकी अंतिम यात्रा पैतृक गांव नेमरा के लिए निकली। सड़क के दोनों ओर हजारों की संख्या में लोग अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए खड़े थे। "गुरुजी अमर रहें" के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।</p>
<p>नेमरा में अंतिम संस्कार के समय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और कई अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के नेता मौजूद थे। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।</p>
<p>झारखंड सरकार ने शिबू सोरेन के सम्मान में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है। शिबू सोरेन को झारखंड के आदिवासियों और वंचितों के सबसे बड़े नेता के रूप में जाना जाता था। उन्होंने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनके निधन को झारखंड की राजनीति के लिए एक युग का अंत माना जा रहा है।</p>
<h4><strong>सासु मां रूपी सोरेन को संभालते दिखीं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन</strong></h4>
<p><strong><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2025-08/resized-image-(94)1.jpeg" alt="resized-image (94)" width="1200" height="720"></img></strong></p>
<p>शिबू सोरेन को जब घाट पर ले जाने की तैयारी चल रही थी उसले पहले पत्नी रूपी सोरेन फफक कर रो पड़ी. सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन उन्हें संभालते दिखाई पड़ी. इस दौरान वहां पर जितने लोग मौजूद थे सबकी आंखें नम हो गयी थी.</p>
<h4><strong>पिता को अंतिम विदाई देते हुए छलक पड़े आंसू, फूट-फूटकर रोए मुख्यमंत्री</strong></h4>
<p>यह एक बेहद भावुक क्षण था जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए घाट की ओर ले जाया जा रहा था। अपने पिता के पार्थिव शरीर को देखते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने सब्र का बांध खो बैठे और बच्चों की तरह फूट-फूटकर रो पड़े। पिता को खोने का दुख उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। इस दौरान उनके भाई बसंत सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्य भी बेहद भावुक थे और उनकी आंखें नम थीं।</p>
<p><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2025-08/resized-image-(94)1.jpeg" alt="resized-image (94)" width="1200" height="720"></img></p>
<h4>आज सुबह 10 बजे:</h4>
<p><strong>अंतिम यात्रा पर निकले शिबू सोरेन</strong></p>
<p>दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को उनके मोरहाबादी स्थित आवास से अंतिम यात्रा के लिए निकाला गया. कुछ ही समय में उनका पार्थिव शरीर झारखंड विधानसभा पहुंचेगा, जहां विधायकों एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों के अंतिम दर्शन के लिए एक घंटे रखा जायेगा.</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/ANI/status/1952590686802288903">https://twitter.com/ANI/status/1952590686802288903</a></blockquote>
<p>

</p>
<p> </p>
<p>इस बेहद मार्मिक अवसर पर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद सोशल मीडिया पर अपने पिता के अंतिम संस्कार की कुछ तस्वीरें और एक वीडियो साझा किया। इन तस्वीरों में वे एक बेटे के तौर पर सभी रस्में निभाते हुए बेहद भावुक नजर आ रहे हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1952628414227075079">https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1952628414227075079</a></blockquote>
<p>

</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1952644156989300963">https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1952644156989300963</a></blockquote>
<p>

</p>]]>
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                                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 20:13:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिबू सोरेन निधन: एक शिक्षक के बेटे से 'दिशोम गुरु' और झारखंड के पितामह बनने का सफर समाप्त</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ ही नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं लड़े, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की नियति को आकार दिया। 'गुरुजी' और 'दिशोम गुरु' (देश के गुरु) के नाम से विख्यात शिबू सोरेन एक ऐसा ही नाम हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधारक, एक जन-आंदोलन के प्रणेता और झारखंड राज्य के निर्माता थे। उनका जीवन आदिवासियों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए अनवरत संघर्ष की एक गाथा है, जिसने उन्हें झारखंड के "पितामह" के रूप में स्थापित किया।</p>
<hr />
<h3><strong>प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की चिंगारी</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का जन्म</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/shibu-soren-passed-away-from-a-teachers-son-to-become/article-15210"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(90)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ ही नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं लड़े, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की नियति को आकार दिया। 'गुरुजी' और 'दिशोम गुरु' (देश के गुरु) के नाम से विख्यात शिबू सोरेन एक ऐसा ही नाम हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधारक, एक जन-आंदोलन के प्रणेता और झारखंड राज्य के निर्माता थे। उनका जीवन आदिवासियों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए अनवरत संघर्ष की एक गाथा है, जिसने उन्हें झारखंड के "पितामह" के रूप में स्थापित किया।</p>
<hr />
<h3><strong>प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की चिंगारी</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को तत्कालीन बिहार के हजारीबाग (अब रामगढ़) जिले के नेमरा गाँव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता, सोबरन सोरेन, एक सम्मानित शिक्षक थे, लेकिन उनकी हत्या साहूकारों और महाजनों ने कर दी क्योंकि वे आदिवासियों को उनकी शोषणकारी प्रथाओं के खिलाफ संगठित कर रहे थे। पिता की नृशंस हत्या ने युवा शिबू के मन पर गहरा आघात किया और यहीं से उनके भीतर अन्याय के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला धधक उठी। इस घटना ने उन्हें औपचारिक शिक्षा छोड़ने और सामाजिक न्याय के पथ पर चलने के लिए विवश कर दिया।</p>
<hr />
<h3><strong>सामाजिक सुधारक के रूप में उदय</strong></h3>
<p>अपने राजनीतिक जीवन से पहले, शिबू सोरेन ने 1970 के दशक की शुरुआत में एक सामाजिक सुधारक के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने आदिवासियों के बीच व्याप्त सामाजिक कुरीतियों, विशेष रूप से शराबखोरी और महाजनी प्रथा के खिलाफ एक सशक्त अभियान चलाया।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>महाजनी प्रथा के विरुद्ध आंदोलन:</strong> उस समय महाजन (साहूकार) आदिवासियों की जमीनों को कर्ज के बदले हड़प लेते थे। शिबू सोरेन ने 'धनकटनी आंदोलन' चलाया, जिसके तहत आदिवासी एकजुट होकर अपनी उन फसलों को काटते थे जिन पर महाजनों ने कब्जा कर लिया था। इस आंदोलन ने आदिवासियों को उनकी जमीनें वापस दिलाईं और उन्हें आर्थिक शोषण से मुक्त कराया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>नशामुक्ति अभियान:</strong> उन्होंने आदिवासी समाज में शराबखोरी की लत को एक बड़ी सामाजिक बुराई के रूप में पहचाना और इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>आदिवासी अस्मिता का संरक्षण:</strong> उन्होंने आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संरक्षित करने और बढ़ावा देने पर जोर दिया, जिससे आदिवासी समाज में एक नई चेतना और आत्म-सम्मान का संचार हुआ।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>झारखंड आंदोलन के महानायक</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का सबसे महत्वपूर्ण योगदान अलग झारखंड राज्य के आंदोलन का नेतृत्व करना था। वे इस विचार के प्रबल समर्थक थे कि 'जल, जंगल और जमीन' पर स्थानीय आदिवासियों का अधिकार होना चाहिए और इस क्षेत्र के खनिज संसाधनों का लाभ यहाँ के मूल निवासियों को मिलना चाहिए।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना:</strong> इस सपने को साकार करने के लिए, उन्होंने 4 फरवरी 1972 को बिनोद बिहारी महतो और ए.के. रॉय जैसे नेताओं के साथ मिलकर <strong>झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)</strong> की स्थापना की। यह केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन था जिसका उद्देश्य दक्षिणी बिहार के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग राज्य का निर्माण करना था।</p>
</li>
<li>
<p><strong>दशकों का संघर्ष:</strong> झामुमो के बैनर तले, सोरेन ने दशकों तक सड़क से लेकर संसद तक एक लंबा और अथक संघर्ष किया। उन्होंने रैलियाँ कीं, प्रदर्शन किए, और आदिवासी अधिकारों के लिए लगातार आवाज बुलंद की।</p>
</li>
<li>
<p><strong>राज्य का निर्माण:</strong> उनके दशकों के संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार ने उनकी मांग को स्वीकार किया और <strong>15 नवंबर 2000</strong> को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर बिहार पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से <strong>झारखंड</strong> एक नए और स्वतंत्र राज्य के रूप में भारत के मानचित्र पर उभरा।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>राजनीतिक सफर और प्रमुख पद</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने झारखंड की राजनीति पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>संसद सदस्य:</strong> वे कई बार बिहार और बाद में झारखंड की दुमका लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। संसद में उन्होंने मजबूती से झारखंड के हितों की पैरवी की।</p>
</li>
<li>
<p><strong>केंद्रीय मंत्री:</strong> वे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में कोयला मंत्री भी रहे।</p>
</li>
<li>
<p><strong>झारखंड के मुख्यमंत्री:</strong> शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुए:</p>
<ul>
<li>
<p><strong>पहली बार:</strong> 2 मार्च 2005 - 12 मार्च 2005</p>
</li>
<li>
<p><strong>दूसरी बार:</strong> 27 अगस्त 2008 - 19 जनवरी 2009</p>
</li>
<li>
<p><strong>तीसरी बार:</strong> 30 दिसंबर 2009 - 1 जून 2010</p>
</li>
</ul>
</li>
</ul>
<p>वे झारखंड से राज्यसभा के सांसद थे और पार्टी के अध्यक्ष के रूप में संगठन का मार्गदर्शन कर रहे थे।</p>
<hr />
<p><strong><span class="citation-19 citation-end-19">झारखंड की राजनीति के पितामह और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार, 4 अगस्त, 2025 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-18 citation-end-18">वे 81 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे।<sup class="superscript"></sup></span> उनके निधन से झारखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर है।</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 14:47:15 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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