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                <title>Shibu Soren death - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>पिता के श्राद्ध कर्म के बाद आज रांची लौटेंगे सीएम हेमंत सोरेन, जा सकते हैं घाटशिला</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>रांची: </strong>झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिता शिबू सोरेन के निधन के बाद से रामगढ़ स्थित अपने पैतृक गांव नेमरा में ही थे. वहां से आज वह वापस रांची लौटेंगे. मालूम हो की पिता शिबू सोरेन का निधन के बाद से ही श्राद्ध कर्म एवं पारंपरिक विधि-विधान से पूरा करने के लिए नेमरा में थे उन्होंने रविवार को दिशोम गुरु की अस्थियां दामोदर नदी में प्रवाहित की एवं सपरिवार रजरप्पा मंदिर पहुंचे थे, जहां उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दामोदर में अस्थि विसर्जन किया.</p>
<p style="text-align:justify;">रांची लौटने के बाद सीएम के घाटशिला जाने की संभावना है. वहां वह शिक्षा मंत्री रामदास</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/cm-hemant-soren-will-return-to-ranchi-today-after-fathers/article-15579"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-17t155328.779.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची: </strong>झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिता शिबू सोरेन के निधन के बाद से रामगढ़ स्थित अपने पैतृक गांव नेमरा में ही थे. वहां से आज वह वापस रांची लौटेंगे. मालूम हो की पिता शिबू सोरेन का निधन के बाद से ही श्राद्ध कर्म एवं पारंपरिक विधि-विधान से पूरा करने के लिए नेमरा में थे उन्होंने रविवार को दिशोम गुरु की अस्थियां दामोदर नदी में प्रवाहित की एवं सपरिवार रजरप्पा मंदिर पहुंचे थे, जहां उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दामोदर में अस्थि विसर्जन किया.</p>
<p style="text-align:justify;">रांची लौटने के बाद सीएम के घाटशिला जाने की संभावना है. वहां वह शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना देने जा सकते हैं. उल्लेखनीय है कि पिता के श्राद्ध कर्म में व्यस्त होने के कारण सीएम हेमंत सोरेन शिक्षा मंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित करने नहीं पहुंच पाये थे. हालांकि उन्होंने सोशल मीडिया पर उनके लिए एक बेहद खास और भावुक संदेश लिखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी.</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 11:43:19 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>नेमरा में उमड़ा जनसैलाब, लाखों लोगों ने दी दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि</title>
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                        <![CDATA[नेमरा में आयोजित संस्कार भोज में लाखों लोग दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने पहुंचे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कठिन समय में जनता के संबल को याद किया. राज्यपाल संतोष गंगवार, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की. गुरुजी को त्याग, संघर्ष और झारखंड आंदोलन का अग्रदूत बताते हुए लोगों ने कहा कि उनके आदर्श सदैव प्रेरणा देते रहेंगे.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/millions-of-people-gathered-in-nemra-and-paid-tribute-to/article-15531"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-16t195356.735.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रामगढ़: </strong>नेमरा की माटी आज फिर भावुक हो उठी, जब लाखों की संख्या में आगंतुक यहां अपने महानायक स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन को नमन करने उमड़ पड़े थे. सभी ने स्मृति शेष दिशोम गुरु की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अद्वितीय योगदान को स्मरण किया. </p>
<h4><strong> मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सभी आगंतुकों का जताया आभार </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्मृति शेष शिबू सोरेन के संस्कार भोज में शामिल होने के लिए राज्य के कोने-कोने से आए लोगों के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि बाबा जब नई दिल्ली के एक अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे, उन कठिन परिस्थितियों में राज्य वासियों का हमारे परिवार को संबल प्राप्त हुआ उसे कभी भूल नहीं सकता हूं. लोगों ने बाबा की जिंदगी के लिए दुआएं की, लेकिन ईश्वर को शायद कुछ और मंजूर था. आज  दिशोम गुरु हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके अंत्येष्टि संस्कार से लेकर आज के संस्कार भोज में लाखों लोगों का शामिल होना, पूरे श्राद्ध कर्म के दौरान  नेमरा आकर उनका हमारे साथ खड़े रहने से हमें और हमारे घर-  परिवार को दुःख की इस घड़ी में काफी आत्मबल मिला. राज्य की जनता जिस तरह हमारे साथ हर पल मौजूद रही, वह यह बताने के लिए काफी है कि उनका "बाबा" से  कितना गहरा लगाव था. "बाबा" भले ही हमें हमेशा-  हमेशा के लिए छोड़कर चले गए हैं,  लेकिन, इस राज्य के मार्गदर्शक एवं पथ प्रदर्शक के रूप में वे सदैव याद रखे जाएंगे.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>विशिष्ट मेहमानों के साथ लाखों आमजन हुए शामिल, स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन को किया नमन </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">स्मृति शेष दिशोम गुरुजी के संस्कार भोज में अनेक अति विशिष्ट एवं विशिष्ट मेहमानों के साथ लाखों की संख्या में आमजन शामिल हुए. इनमें झारखंड के राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार, केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, तेलंगाना के मुख्यालय रेवंत रेड्डी  सहित कई मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, पूर्व मंत्री, सांसद एवं पूर्व विधायकगण, पदाधिकारीगण तथा प्रबुद्धजन शामिल थे. सभी ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से कामना की.. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की. उन्होंने "गुरुजी" के साथ अपने संबंधों, बिताये गए पलों तथा अनुभवों को  साझा किया . उन्होंने कहा कि वे सिर्फ झारखंड हित की बातें करते थे. उनका इस तरह दुनिया को अलविदा कहना इस राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है. </p>
<h4><strong>संघर्ष और त्याग की मिसाल थे बाबा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">संस्कार भोज में सम्मिलित लोग "दिशोम गुरु" की जिंदगी और व्यक्तित्व की ही बातें करते दिखे.  उनका कहना था कि उनका जीवन संघर्षों से भरा था, लेकिन उन्होंने संघर्ष को ही अपना हथियार बनाया. "बाबा" का पूरा जीवन इस राज्य की खातिर समर्पित रहा. वे एक तरफ त्याग और संघर्ष की मिसाल थे तो दूसरी तरफ आदिवासी चेतना के वाहक.  शोषण एवं अत्याचार के खिलाफ उलगुलान उनकी पहचान बनी तो झारखंड आंदोलन के अग्रदूत भी थे. झारखंड अलग राज्य बना तो यह उनके ही आंदोलन की ही देन है. वे एक कुशल नेतृत्वकर्ता तथा संगठन कर्ता थे. उन्हें हम ना हम कभी भूले थे, ना भूले हैं और ना ही भूलेंगे. वे हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे. उनके आदर्शों को हम अपने जीवन में आत्मसात करें. उनके दिखाए मार्ग पर चलें, यही उन्हें सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी. दिशोम गुरु जी को एक बार फिर शत- शत नमन.</p>
<h4><strong>मुकम्मल व्यवस्था, लोगों को नहीं हुई कोई असुविधा </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इधर, स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संस्कार भोज में मुकम्मल प्रशासनिक व्यवस्था देखने को मिली. यहां योजनाबद्ध तरीके से सारी व्यवस्थायें की गई थी,  जिस वजह से आगंतुकों को असुविधाएं नहीं हुई. सुरक्षा के साथ भीड़ नियंत्रण की पुख्ता व्यवस्था थी. लोगों को जानकारी देने के लिए माइक से लगातार अनाउंसमेंट हो रहा था. वाहनों के पार्किंग के विशेष इंतजाम किए गए थे. सभी जवान ड्यूटी पर लगातार मुस्तैद रहे, ताकि किसी को कोई परेशानी नहीं हो. अति विशिष्ट एवं विशिष्ट मेहमानों के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही. पार्किंग स्थल से लोगों को लाने- ले जाने के लिए ऑटो की व्यवस्था थी. यहां आनेवाला हर व्यक्ति स्मृति शेष दिशोम गुरु को श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनकी आज से जुड़ी यादें अपने में समाहित कर वापस लौटे,  मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन इस खातिर स्वयं सभी व्यवस्थाओं पर नज़र रखे हुए थे.</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 19:55:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Dhanbad News: पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समाहरणालय में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के निधन पर गुरुवार को समाहरणालय सभागार में शोक सभा का आयोजन किया गया. उपायुक्त आदित्य रंजन, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार सहित सभी वरीय पदाधिकारियों व कर्मियों ने दिशोम गुरु की तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dhanbad/dhanbad-news-former-chief-minister-dishom-guru-shibu-soren-paid/article-15477"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-14t190208.876.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>धनबाद: </strong>पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के निधन पर गुरुवार को समाहरणालय सभागार में शोक सभा का आयोजन किया गया. उपायुक्त आदित्य रंजन, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार सहित सभी वरीय पदाधिकारियों व कर्मियों ने दिशोम गुरु की तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. दो मिनट का मौन रखकर आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की.</p>
<p style="text-align:justify;">उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन भारत की आदिवासी चेतना के महानायक थे. उनका संघर्ष, बलिदान व नेतृत्व सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा. झारखंड की माटी के कण-कण में जीवंत रहेंगे. </p>
<p style="text-align:justify;">श्रद्धांजलि सभा में उप विकास आयुक्त सादात अनवर, अपर समाहर्ता विनोद कुमार, निदेशक डीआरडीबी राजीव रंजन, अनुमंडल पदाधिकारी राजेश कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी मुकेश बावरी, जिला शिक्षा पदाधिकारी अभिषेक कुमार झा, जिला शिक्षा अधीक्षक आयुष कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनीता कुजुर, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा नियाज अहमद के अलावा अन्य जिलास्तरीय पदाधिकारी, कार्यालय प्रमुख, कर्मचारी आदि मौजूद थे.<br /> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>धनबाद</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dhanbad/dhanbad-news-former-chief-minister-dishom-guru-shibu-soren-paid/article-15477</link>
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                <pubDate>Thu, 14 Aug 2025 19:03:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकगायक आशुतोष द्विवेदी ने शिबू सोरेन को दी संगीतमय श्रद्धांजलि, सीएम हेमंत सोरेन हुए भावुक</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>रामगढ़:</strong> झारखंड के लोकगायक आशुतोष द्विवेदी ने झारखंड के नायक वीर शिबू सोरेन जी की नव निर्मित गीत "वीर शिबू सोरेन जी का झारखंड दीवाना है" को आशुतोष द्विवेदी यूट्यूब पर लॉन्च कर उन्हें अपनी ओर से सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित किया। उन्होंने गीत गाकर नेमरा जाकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को पोस्टर सौंपकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<h4><strong>सीएम हेमंत सोरेन ने दिया आशीर्वाद</strong></h4>
<p>ज्ञात हैं कि कुछ दिन पहले ही देशोम गुरु शिबू सोरेन जी का निधन हुआ था। झारखंड आंदोलन के प्रणेता और झारखंड के जननायक गुरु शिबू सोरेन जी को याद कर अपनी मधुर आवाज से</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ramgarh/folk-singer-ashutosh-dwivedi-paid-musical-tribute-to-shibu-soren/article-15429"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/jhn-mb.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रामगढ़:</strong> झारखंड के लोकगायक आशुतोष द्विवेदी ने झारखंड के नायक वीर शिबू सोरेन जी की नव निर्मित गीत "वीर शिबू सोरेन जी का झारखंड दीवाना है" को आशुतोष द्विवेदी यूट्यूब पर लॉन्च कर उन्हें अपनी ओर से सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित किया। उन्होंने गीत गाकर नेमरा जाकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को पोस्टर सौंपकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<h4><strong>सीएम हेमंत सोरेन ने दिया आशीर्वाद</strong></h4>
<p>ज्ञात हैं कि कुछ दिन पहले ही देशोम गुरु शिबू सोरेन जी का निधन हुआ था। झारखंड आंदोलन के प्रणेता और झारखंड के जननायक गुरु शिबू सोरेन जी को याद कर अपनी मधुर आवाज से लोकगायक आशुतोष द्विवेदी जी ने उनकी पूरी जीवनी को इस गीत के माध्यम से परिभाषित किया है। इस गीत में उन्होंने वीर शिबू सोरेन जी की गाथा का पूर्ण वर्णन किया है तथा उनके किए गए संघर्षों को भी दर्शाया है।</p>
<p>उनके जाने से झारखंड तो शून्य हो गया परन्तु उनके बताए हुए र।स्ते को जन जन तक पहुंचाने को लेकर आशुतोष ने यह कर्णप्रिय गीत बनाया है।</p>
<ul>
<li><strong>गीत का नाम</strong> - वीर शिबू सोरेन जी का झारखंड दीवाना है।</li>
<li><strong>प्रोड्यूसर</strong> - राजीव सिंह</li>
<li><strong>उप निर्माता</strong> - डॉ अनिल कुमार,</li>
<li><strong>म्यूजिक</strong> - हर्ष उपाध्याय</li>
</ul>
<p>इस अवसर पर मुख्य रूप से अवधेश ठाकुर, सतीश मिश्रा , अतिंद्र नाथ वैध समेत कई लोग उपस्थित थे।</p>
<p>ये गीत लोगों को काफ़ी पसंद आ रहा है।</p>
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<p><br />आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि वीर शिबू सोरेन जी की झारखंड के पुरोधा थे, एसे सच्चे पुरुष को मैने गीत गाकर उन्हें अपनी ओर से सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है। ऐसे महापुरुष को लोग सदियों सदियों तक याद रखेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रामगढ़</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 14:40:20 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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            <item>
                <title>दिशोम गुरु के श्राद्ध कर्म का चौथा दिन: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निभाई भोजन परोसने की रस्म</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>रामगढ़: </strong>दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के पारंपरिक श्राद्ध  कर्म का आज चौथा दिन है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने धार्मिक मान्यताओं, संस्कारों और स्थानीय परंपराओं  के अनुरूप आज सवेरे बाबा को भोजन परोसे जाने की रस्म निभाई।</p>
<p>दरअसल यह एक ऐसा रस्म -रिवाज है, जिसमें  दिवंगत व्यक्ति की आत्मा की शांति और मोक्ष के  लिए श्राद्ध कर्म के दौरान हर दिन स्थानीय विधि- विधान और परंपरा के अनुरूप  इसे निभाया जाता है।</p>
<p>इस अवसर पर परिवार और समाज के लोग भी दिवंगत दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद हैं। पूरा माहौल <strong>धार्मिक भावना और आत्मीय श्रद्धा</strong> से</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/chief-minister-hemant-soren-played-the-ritual-of-serving-food/article-15371"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-08t151116.796.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रामगढ़: </strong>दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के पारंपरिक श्राद्ध  कर्म का आज चौथा दिन है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने धार्मिक मान्यताओं, संस्कारों और स्थानीय परंपराओं  के अनुरूप आज सवेरे बाबा को भोजन परोसे जाने की रस्म निभाई।</p>
<p>दरअसल यह एक ऐसा रस्म -रिवाज है, जिसमें  दिवंगत व्यक्ति की आत्मा की शांति और मोक्ष के  लिए श्राद्ध कर्म के दौरान हर दिन स्थानीय विधि- विधान और परंपरा के अनुरूप  इसे निभाया जाता है।</p>
<p>इस अवसर पर परिवार और समाज के लोग भी दिवंगत दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद हैं। पूरा माहौल <strong>धार्मिक भावना और आत्मीय श्रद्धा</strong> से ओत-प्रोत है। यह श्राद्ध कर्म सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह <strong>पारिवारिक मूल्यों और पीढ़ियों के बीच के भावनात्मक जुड़ाव</strong> को भी दर्शाता है।</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 15:13:01 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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            <item>
                <title>Shibu Soren Funeral: पंचतत्व में विलीन हुए 'गुरुजी', सासु मां रूपी सोरेन को संभालते दिखीं कल्पना सोरेन, फूट-फूटकर रोए सीएम</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>रामगढ़:</strong> झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन का आज उनके पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके बड़े बेटे और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।</p>
<p>81 वर्षीय शिबू सोरेन का सोमवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को मंगलवार सुबह रांची स्थित उनके आवास से झारखंड विधानसभा ले जाया गया, जहां</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/kalpana-soren-was-seen-handling-soren-sasu-maa-rupi-soren/article-15260"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(94)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रामगढ़:</strong> झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन का आज उनके पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके बड़े बेटे और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।</p>
<p>81 वर्षीय शिबू सोरेन का सोमवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को मंगलवार सुबह रांची स्थित उनके आवास से झारखंड विधानसभा ले जाया गया, जहां राज्यपाल, कई मंत्रियों, विधायकों और अन्य गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>विधानसभा से उनकी अंतिम यात्रा पैतृक गांव नेमरा के लिए निकली। सड़क के दोनों ओर हजारों की संख्या में लोग अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए खड़े थे। "गुरुजी अमर रहें" के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।</p>
<p>नेमरा में अंतिम संस्कार के समय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और कई अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के नेता मौजूद थे। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।</p>
<p>झारखंड सरकार ने शिबू सोरेन के सम्मान में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है। शिबू सोरेन को झारखंड के आदिवासियों और वंचितों के सबसे बड़े नेता के रूप में जाना जाता था। उन्होंने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनके निधन को झारखंड की राजनीति के लिए एक युग का अंत माना जा रहा है।</p>
<h4><strong>सासु मां रूपी सोरेन को संभालते दिखीं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन</strong></h4>
<p><strong><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2025-08/resized-image-(94)1.jpeg" alt="resized-image (94)" width="1200" height="720"></img></strong></p>
<p>शिबू सोरेन को जब घाट पर ले जाने की तैयारी चल रही थी उसले पहले पत्नी रूपी सोरेन फफक कर रो पड़ी. सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन उन्हें संभालते दिखाई पड़ी. इस दौरान वहां पर जितने लोग मौजूद थे सबकी आंखें नम हो गयी थी.</p>
<h4><strong>पिता को अंतिम विदाई देते हुए छलक पड़े आंसू, फूट-फूटकर रोए मुख्यमंत्री</strong></h4>
<p>यह एक बेहद भावुक क्षण था जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए घाट की ओर ले जाया जा रहा था। अपने पिता के पार्थिव शरीर को देखते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने सब्र का बांध खो बैठे और बच्चों की तरह फूट-फूटकर रो पड़े। पिता को खोने का दुख उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। इस दौरान उनके भाई बसंत सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्य भी बेहद भावुक थे और उनकी आंखें नम थीं।</p>
<p><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2025-08/resized-image-(94)1.jpeg" alt="resized-image (94)" width="1200" height="720"></img></p>
<h4>आज सुबह 10 बजे:</h4>
<p><strong>अंतिम यात्रा पर निकले शिबू सोरेन</strong></p>
<p>दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को उनके मोरहाबादी स्थित आवास से अंतिम यात्रा के लिए निकाला गया. कुछ ही समय में उनका पार्थिव शरीर झारखंड विधानसभा पहुंचेगा, जहां विधायकों एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों के अंतिम दर्शन के लिए एक घंटे रखा जायेगा.</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/ANI/status/1952590686802288903">https://twitter.com/ANI/status/1952590686802288903</a></blockquote>
<p>

</p>
<p> </p>
<p>इस बेहद मार्मिक अवसर पर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद सोशल मीडिया पर अपने पिता के अंतिम संस्कार की कुछ तस्वीरें और एक वीडियो साझा किया। इन तस्वीरों में वे एक बेटे के तौर पर सभी रस्में निभाते हुए बेहद भावुक नजर आ रहे हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1952628414227075079">https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1952628414227075079</a></blockquote>
<p>

</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1952644156989300963">https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1952644156989300963</a></blockquote>
<p>

</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 20:13:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>Ranchi News: दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर एसबीयू में शोकसभा का आयोजन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>रांची: </strong>दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर सरला बिरला विश्वविद्यालय में श्रद्धांजलि एवं शोकसभा का आयोजन किया गया. विवि के तमाम शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने इस दौरान दो मिनट का मौन रखकर दिशोम गुरु की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.</p>
<p style="text-align:justify;">अपने विचार व्यक्त करते हुए विवि के महानिदेशक प्रो गोपाल पाठक एवं कुलपति प्रो सी जगनाथन ने स्वर्गीय शिबू सोरेन के व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने के लिए दशकों तक चला उनका संघर्ष सर्वदा स्मरणीय रहेगा. वक्ताओं ने समाज को जोड़े रखने में उनके योगदान की</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ranchi-news-dishom-guru-shibu-soren-organized-a-condolence-meeting/article-15248"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-05t170317.001.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची: </strong>दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर सरला बिरला विश्वविद्यालय में श्रद्धांजलि एवं शोकसभा का आयोजन किया गया. विवि के तमाम शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने इस दौरान दो मिनट का मौन रखकर दिशोम गुरु की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.</p>
<p style="text-align:justify;">अपने विचार व्यक्त करते हुए विवि के महानिदेशक प्रो गोपाल पाठक एवं कुलपति प्रो सी जगनाथन ने स्वर्गीय शिबू सोरेन के व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने के लिए दशकों तक चला उनका संघर्ष सर्वदा स्मरणीय रहेगा. वक्ताओं ने समाज को जोड़े रखने में उनके योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि देश और समाज को उनकी कमी हमेशा खलेगी.</p>
<p style="text-align:justify;">एसबीयू के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान एवं राज्यसभा सांसद डॉ प्रदीप कुमार वर्मा ने दिशोम गुरु के निधन पर शोक संदेश प्रेषित किया है.</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 17:05:13 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
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            <item>
                <title>जयश्री सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा संदेश, 'आप चले गए, यकीन नहीं होता'</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>रांची:</strong> झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद उनकी पोती जयश्री सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश लिखा है. जयश्री, जो दिवंगत दुर्गा सोरेन की बेटी हैं, ने अपने बाबा के साथ बचपन की एक तस्वीर साझा करते हुए अपनी भावनाओं को व्यक्त किया.</p>
<p style="text-align:justify;">जयश्री ने लिखा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि उनके बाबा अब नहीं रहे. उन्होंने महसूस किया कि उनके घर का एक कोना हमेशा के लिए खामोश हो गया है. जयश्री ने शिबू सोरेन के साथ बिताए पलों को याद करते हुए लिखा कि उनकी बातें,</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/jayashree-soren-wrote-the-message-on-social-media-you-are/article-15243"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-05t155336.878.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची:</strong> झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद उनकी पोती जयश्री सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश लिखा है. जयश्री, जो दिवंगत दुर्गा सोरेन की बेटी हैं, ने अपने बाबा के साथ बचपन की एक तस्वीर साझा करते हुए अपनी भावनाओं को व्यक्त किया.</p>
<p style="text-align:justify;">जयश्री ने लिखा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि उनके बाबा अब नहीं रहे. उन्होंने महसूस किया कि उनके घर का एक कोना हमेशा के लिए खामोश हो गया है. जयश्री ने शिबू सोरेन के साथ बिताए पलों को याद करते हुए लिखा कि उनकी बातें, उनका अंदाज़ और उनकी छोटी-छोटी सलाहें आज भी उनके दिल में गूंजती हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी याद किया कि उनके बाबा ने उन्हें सिखाया कि कैसे मुश्किल समय में सीधा खड़े रहना है. जयश्री ने कहा कि आज जब भी कुछ अच्छा होता है, तो उनका दिल करता है कि वह जाकर बाबा को बताएं.</p>
<p style="text-align:justify;">इस भावुक संदेश में जयश्री ने लिखा कि उन्हें अपने बाबा को अलविदा कहना बहुत मुश्किल है, लेकिन वह हमेशा उनके साथ रहेंगे. उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा, "आप तो हर उस पल में हो जब मैं थोड़ा और मजबूत बनती हूँ." उन्होंने कहा कि वह अपने बाबा से बहुत प्यार करती हैं और हमेशा करती रहेंगी.</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/jayshreesorenn/status/1952349300484112862">https://twitter.com/jayshreesorenn/status/1952349300484112862</a></blockquote>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 15:54:30 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
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            <item>
                <title>शिबू सोरेन निधन: एक शिक्षक के बेटे से 'दिशोम गुरु' और झारखंड के पितामह बनने का सफर समाप्त</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ ही नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं लड़े, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की नियति को आकार दिया। 'गुरुजी' और 'दिशोम गुरु' (देश के गुरु) के नाम से विख्यात शिबू सोरेन एक ऐसा ही नाम हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधारक, एक जन-आंदोलन के प्रणेता और झारखंड राज्य के निर्माता थे। उनका जीवन आदिवासियों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए अनवरत संघर्ष की एक गाथा है, जिसने उन्हें झारखंड के "पितामह" के रूप में स्थापित किया।</p>
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<h3><strong>प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की चिंगारी</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का जन्म</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/shibu-soren-passed-away-from-a-teachers-son-to-become/article-15210"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(90)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ ही नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं लड़े, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की नियति को आकार दिया। 'गुरुजी' और 'दिशोम गुरु' (देश के गुरु) के नाम से विख्यात शिबू सोरेन एक ऐसा ही नाम हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधारक, एक जन-आंदोलन के प्रणेता और झारखंड राज्य के निर्माता थे। उनका जीवन आदिवासियों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए अनवरत संघर्ष की एक गाथा है, जिसने उन्हें झारखंड के "पितामह" के रूप में स्थापित किया।</p>
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<h3><strong>प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की चिंगारी</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को तत्कालीन बिहार के हजारीबाग (अब रामगढ़) जिले के नेमरा गाँव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता, सोबरन सोरेन, एक सम्मानित शिक्षक थे, लेकिन उनकी हत्या साहूकारों और महाजनों ने कर दी क्योंकि वे आदिवासियों को उनकी शोषणकारी प्रथाओं के खिलाफ संगठित कर रहे थे। पिता की नृशंस हत्या ने युवा शिबू के मन पर गहरा आघात किया और यहीं से उनके भीतर अन्याय के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला धधक उठी। इस घटना ने उन्हें औपचारिक शिक्षा छोड़ने और सामाजिक न्याय के पथ पर चलने के लिए विवश कर दिया।</p>
<hr />
<h3><strong>सामाजिक सुधारक के रूप में उदय</strong></h3>
<p>अपने राजनीतिक जीवन से पहले, शिबू सोरेन ने 1970 के दशक की शुरुआत में एक सामाजिक सुधारक के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने आदिवासियों के बीच व्याप्त सामाजिक कुरीतियों, विशेष रूप से शराबखोरी और महाजनी प्रथा के खिलाफ एक सशक्त अभियान चलाया।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>महाजनी प्रथा के विरुद्ध आंदोलन:</strong> उस समय महाजन (साहूकार) आदिवासियों की जमीनों को कर्ज के बदले हड़प लेते थे। शिबू सोरेन ने 'धनकटनी आंदोलन' चलाया, जिसके तहत आदिवासी एकजुट होकर अपनी उन फसलों को काटते थे जिन पर महाजनों ने कब्जा कर लिया था। इस आंदोलन ने आदिवासियों को उनकी जमीनें वापस दिलाईं और उन्हें आर्थिक शोषण से मुक्त कराया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>नशामुक्ति अभियान:</strong> उन्होंने आदिवासी समाज में शराबखोरी की लत को एक बड़ी सामाजिक बुराई के रूप में पहचाना और इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>आदिवासी अस्मिता का संरक्षण:</strong> उन्होंने आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संरक्षित करने और बढ़ावा देने पर जोर दिया, जिससे आदिवासी समाज में एक नई चेतना और आत्म-सम्मान का संचार हुआ।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>झारखंड आंदोलन के महानायक</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का सबसे महत्वपूर्ण योगदान अलग झारखंड राज्य के आंदोलन का नेतृत्व करना था। वे इस विचार के प्रबल समर्थक थे कि 'जल, जंगल और जमीन' पर स्थानीय आदिवासियों का अधिकार होना चाहिए और इस क्षेत्र के खनिज संसाधनों का लाभ यहाँ के मूल निवासियों को मिलना चाहिए।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना:</strong> इस सपने को साकार करने के लिए, उन्होंने 4 फरवरी 1972 को बिनोद बिहारी महतो और ए.के. रॉय जैसे नेताओं के साथ मिलकर <strong>झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)</strong> की स्थापना की। यह केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन था जिसका उद्देश्य दक्षिणी बिहार के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग राज्य का निर्माण करना था।</p>
</li>
<li>
<p><strong>दशकों का संघर्ष:</strong> झामुमो के बैनर तले, सोरेन ने दशकों तक सड़क से लेकर संसद तक एक लंबा और अथक संघर्ष किया। उन्होंने रैलियाँ कीं, प्रदर्शन किए, और आदिवासी अधिकारों के लिए लगातार आवाज बुलंद की।</p>
</li>
<li>
<p><strong>राज्य का निर्माण:</strong> उनके दशकों के संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार ने उनकी मांग को स्वीकार किया और <strong>15 नवंबर 2000</strong> को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर बिहार पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से <strong>झारखंड</strong> एक नए और स्वतंत्र राज्य के रूप में भारत के मानचित्र पर उभरा।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>राजनीतिक सफर और प्रमुख पद</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने झारखंड की राजनीति पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>संसद सदस्य:</strong> वे कई बार बिहार और बाद में झारखंड की दुमका लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। संसद में उन्होंने मजबूती से झारखंड के हितों की पैरवी की।</p>
</li>
<li>
<p><strong>केंद्रीय मंत्री:</strong> वे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में कोयला मंत्री भी रहे।</p>
</li>
<li>
<p><strong>झारखंड के मुख्यमंत्री:</strong> शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुए:</p>
<ul>
<li>
<p><strong>पहली बार:</strong> 2 मार्च 2005 - 12 मार्च 2005</p>
</li>
<li>
<p><strong>दूसरी बार:</strong> 27 अगस्त 2008 - 19 जनवरी 2009</p>
</li>
<li>
<p><strong>तीसरी बार:</strong> 30 दिसंबर 2009 - 1 जून 2010</p>
</li>
</ul>
</li>
</ul>
<p>वे झारखंड से राज्यसभा के सांसद थे और पार्टी के अध्यक्ष के रूप में संगठन का मार्गदर्शन कर रहे थे।</p>
<hr />
<p><strong><span class="citation-19 citation-end-19">झारखंड की राजनीति के पितामह और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार, 4 अगस्त, 2025 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-18 citation-end-18">वे 81 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे।<sup class="superscript"></sup></span> उनके निधन से झारखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर है।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 14:47:15 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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