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                <title>India US relations - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>India US relations RSS Feed</description>
                
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                <title>पीओके और अक्साई चिन को अमेरिका ने बताया भारत का हिस्सा</title>
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                        <![CDATA[अमेरिका द्वारा जारी नए मानचित्र में पीओके, अक्साई चिन और पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाया गया है। इस कदम को भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले इन क्षेत्रों को विवादित दिखाया जाता था, लेकिन नए नक्शे ने भू-राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/delhi/pok-and-aksai-chin/article-17925"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/443659d4eb5bdca0c477770c1529a521_1307513308_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा के बाद संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय द्वारा जारी नक्शे में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन समेत पूरा जम्मू-कश्मीर भारत के हिस्से के रूप में दर्शाया गया है। यूएसटीआर कार्यालय के एक्स पोस्ट पर साझा इस नक्शे को भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप माना जा रहा है।</p>
<h4><strong>अरुणाचल प्रदेश भी भारत की सीमा में दर्शाया गया</strong></h4>
<p>यूएसटीआर द्वारा साझा नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश के सभी हिस्सों को भी भारत की क्षेत्रीय सीमा के भीतर दिखाया गया है, जिसे भारत लंबे समय से अपने अभिन्न अंग के रूप में मानता रहा है।</p>
<h4><strong>पहले भी नक्शों को लेकर उठती रही आपत्ति</strong></h4>
<p>भारत ने पूर्व में कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा जारी नक्शों में जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं की गलत प्रस्तुति पर आपत्ति जताई थी। नए नक्शे को उन आपत्तियों के बाद सही रूप में प्रस्तुत माना जा रहा है। पहले अमेरिकी एजेंसियों द्वारा जारी नक्शों में पीओके को अक्सर विवादित क्षेत्र के रूप में दिखाया जाता था।</p>
<h4><strong>भारत के रुख के अनुरूप माना जा रहा कदम</strong></h4>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम भारत के रुख के अनुरूप माना जा रहा है और इसे अमेरिका की पूर्व नीति से कुछ अलग दृष्टिकोण के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि पहले ऐसे नक्शों में डॉटेड लाइन या अलग लेबल का इस्तेमाल किया जाता रहा है।</p>
<h4><strong>पाकिस्तान और चीन के दावों को भारत कर चुका है खारिज</strong></h4>
<p>पाकिस्तान ने वर्ष 2020 में एक राजनीतिक नक्शा जारी कर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के कुछ हिस्सों और गुजरात के जूनागढ़ एवं सर क्रीक पर दावा किया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था। इसी तरह चीन ने अगस्त 2023 में जारी नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपना हिस्सा दिखाया था, जिसे भारत ने अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा था कि नक्शे बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती।</p>
<h4><strong>क्षेत्रीय विवाद का ऐतिहासिक संदर्भ</strong></h4>
<p>पीओके विवाद 1947 से भारत और पाकिस्तान के बीच जारी है। विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी, जिसके महाराजा हरि सिंह ने पाकिस्तान के हमले के बाद भारत में विलय का निर्णय लिया। इसके बाद पाकिस्तान ने पश्चिमी और उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया, जिसे आज पीओके कहा जाता है।</p>
<p>अक्साई चिन क्षेत्र लद्दाख के उत्तर-पूर्व में स्थित है। चीन ने 1950 के दशक में यहां सड़क निर्माण कर नियंत्रण स्थापित किया और 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना कब्जा बनाए रखा है, जबकि भारत इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 17:46:34 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-अमेरिका में फिर तल्खी: रूसी तेल पर विवाद के बीच इंडियन आर्मी ने याद दिलाया 1971 का इतिहास</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली:</strong>  भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर कूटनीतिक तल्खी देखने को मिली, जब भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध की एक ऐतिहासिक क्लिप शेयर कर अमेरिका को अप्रत्यक्ष रूप से जवाब दिया। इस क्लिप में यह दिखाया गया कि 1954 से 1971 के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को करीब 2 अरब डॉलर के हथियार भेजे थे, जो भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए गए।</p>
<p>यह प्रतिक्रिया उस वक्त आई जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को रूस से तेल खरीदने को लेकर निशाने पर लिया और भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी।</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/indian-army-reminds-1971-history-amidst-controversy-over-russian-oil/article-15240"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/dfzxvc.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली:</strong> भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर कूटनीतिक तल्खी देखने को मिली, जब भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध की एक ऐतिहासिक क्लिप शेयर कर अमेरिका को अप्रत्यक्ष रूप से जवाब दिया। इस क्लिप में यह दिखाया गया कि 1954 से 1971 के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को करीब 2 अरब डॉलर के हथियार भेजे थे, जो भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए गए।</p>
<p>यह प्रतिक्रिया उस वक्त आई जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को रूस से तेल खरीदने को लेकर निशाने पर लिया और भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी। ट्रम्प ने यह भी आरोप लगाया कि भारत सस्ते रूसी तेल को खरीदकर दुनिया में ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा कमा रहा है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/easterncomd/status/1952589020497690782">https://twitter.com/easterncomd/status/1952589020497690782</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>भारतीय सेना की ओर से आई यह 'थ्रोबैक' पोस्ट न केवल इतिहास की याद दिलाने वाला था, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि भारत को अमेरिका से नैतिकता का पाठ पढ़ाने की ज़रूरत नहीं है, खासकर जब अमेरिका खुद पाकिस्तान को 1971 में हथियार देता रहा।</p>
<h4><strong>क्या था ट्रंप का बयान?</strong></h4>
<p>सोशल मीडिया पर डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी एक पोस्ट में भारत को धमकी देते हुए लिखा, "भारत रूस से बड़ी मात्रा में सिर्फ तेल नहीं खरीद रहा, बल्कि खरीदे गए इस तेल का एक बड़ा हिस्सा बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है. उसे इस बात की परवाह नहीं है कि रूस की वॉर मशीन यूक्रेन में कितने लोगों को मार रही है. यही वजह है कि मैं भारत पर टैरिफ बढ़ाने जा रहा हूं."</p>
<p>भारत के विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के अनुसार फैसले लेता है और कोई भी दबाव उसकी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रभावित नहीं कर सकता। साथ ही ये भी कहा गया कि भारत 'इंडिया फर्स्ट' नीति पर चलता है और किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अब केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक शक्ति संतुलन का मामला बन चुका है। ऐसे में 1971 का इतिहास फिर से याद दिलाता है कि भारत किसी भी महाशक्ति के आगे न तब झुका था, न अब झुकेगा।</p>
<p>यह पूरी घटना बताती है कि भारत अपने आत्मसम्मान, इतिहास और भविष्य तीनों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है – चाहे सामने कोई भी ताकत क्यों न हो।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 15:28:28 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                <title>ट्रंप के युद्धविराम दावों पर भारत में सियासी घमासान: राहुल गांधी ने मोदी को ललकारा</title>
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                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम में भूमिका के दावे पर कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार को घेरा, पारदर्शिता की मांग की और प्रधानमंत्री मोदी से जवाब की उम्मीद जताई।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/rahul-gandhi-challenged-modi-on-trumps-ceasefire-claims/article-15069"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-07/ythfg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए उस बयान ने भारत की सियासत में एक बार फिर उबाल ला दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच 2025  में हुए संघर्षविराम में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इस बयान को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।</p>
<p>राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर ट्रंप का दावा गलत है, तो प्रधानमंत्री मोदी को खुलकर सामने आकर यह कहना चाहिए कि ट्रंप झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री चुप रहते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि डोनाल्ड ट्रंप का दावा सही है और यह देश की संप्रभुता के लिए एक गंभीर सवाल है।</p>
<h4><strong>राहुल गांधी ने साधा निशाना</strong></h4>
<p>राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर पीएम मोदी बोलेंगे तो ट्रंप सच सामने ला देंगे, इसलिए मोदी चुप हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी व्यापार डील के लिए पीएम मोदी पर दबाव बना रहे हैं और देखना होगा यह डील कैसी बनती है।</p>
<h4><strong>प्रियंका गांधी ने क्या कहा?</strong></h4>
<p>राहुल गांधी के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी पीएम मोदी पर ट्रंप के दावों को लेकर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान गोलमोल हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सुझाव दिया कि उन्हें साफ-साफ कहना चाहिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति झूठ बोल रहे हैं। देखा जाए तो संसद में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर चल रहे बहस के दौरान कांग्रेस नेताओं की यह आलोचना मोदी सरकार की अमेरिका के प्रति नरम रुख पर सवाल उठाती है।</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 15:57:09 +0530</pubDate>
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