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                <title>आज की ताजा खबर - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>शिबू सोरेन निधन: एक शिक्षक के बेटे से 'दिशोम गुरु' और झारखंड के पितामह बनने का सफर समाप्त</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ ही नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं लड़े, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की नियति को आकार दिया। 'गुरुजी' और 'दिशोम गुरु' (देश के गुरु) के नाम से विख्यात शिबू सोरेन एक ऐसा ही नाम हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधारक, एक जन-आंदोलन के प्रणेता और झारखंड राज्य के निर्माता थे। उनका जीवन आदिवासियों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए अनवरत संघर्ष की एक गाथा है, जिसने उन्हें झारखंड के "पितामह" के रूप में स्थापित किया।</p>
<hr />
<h3><strong>प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की चिंगारी</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का जन्म</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/shibu-soren-passed-away-from-a-teachers-son-to-become/article-15210"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(90)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ ही नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं लड़े, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की नियति को आकार दिया। 'गुरुजी' और 'दिशोम गुरु' (देश के गुरु) के नाम से विख्यात शिबू सोरेन एक ऐसा ही नाम हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधारक, एक जन-आंदोलन के प्रणेता और झारखंड राज्य के निर्माता थे। उनका जीवन आदिवासियों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए अनवरत संघर्ष की एक गाथा है, जिसने उन्हें झारखंड के "पितामह" के रूप में स्थापित किया।</p>
<hr />
<h3><strong>प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की चिंगारी</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को तत्कालीन बिहार के हजारीबाग (अब रामगढ़) जिले के नेमरा गाँव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता, सोबरन सोरेन, एक सम्मानित शिक्षक थे, लेकिन उनकी हत्या साहूकारों और महाजनों ने कर दी क्योंकि वे आदिवासियों को उनकी शोषणकारी प्रथाओं के खिलाफ संगठित कर रहे थे। पिता की नृशंस हत्या ने युवा शिबू के मन पर गहरा आघात किया और यहीं से उनके भीतर अन्याय के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला धधक उठी। इस घटना ने उन्हें औपचारिक शिक्षा छोड़ने और सामाजिक न्याय के पथ पर चलने के लिए विवश कर दिया।</p>
<hr />
<h3><strong>सामाजिक सुधारक के रूप में उदय</strong></h3>
<p>अपने राजनीतिक जीवन से पहले, शिबू सोरेन ने 1970 के दशक की शुरुआत में एक सामाजिक सुधारक के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने आदिवासियों के बीच व्याप्त सामाजिक कुरीतियों, विशेष रूप से शराबखोरी और महाजनी प्रथा के खिलाफ एक सशक्त अभियान चलाया।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>महाजनी प्रथा के विरुद्ध आंदोलन:</strong> उस समय महाजन (साहूकार) आदिवासियों की जमीनों को कर्ज के बदले हड़प लेते थे। शिबू सोरेन ने 'धनकटनी आंदोलन' चलाया, जिसके तहत आदिवासी एकजुट होकर अपनी उन फसलों को काटते थे जिन पर महाजनों ने कब्जा कर लिया था। इस आंदोलन ने आदिवासियों को उनकी जमीनें वापस दिलाईं और उन्हें आर्थिक शोषण से मुक्त कराया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>नशामुक्ति अभियान:</strong> उन्होंने आदिवासी समाज में शराबखोरी की लत को एक बड़ी सामाजिक बुराई के रूप में पहचाना और इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>आदिवासी अस्मिता का संरक्षण:</strong> उन्होंने आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संरक्षित करने और बढ़ावा देने पर जोर दिया, जिससे आदिवासी समाज में एक नई चेतना और आत्म-सम्मान का संचार हुआ।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>झारखंड आंदोलन के महानायक</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का सबसे महत्वपूर्ण योगदान अलग झारखंड राज्य के आंदोलन का नेतृत्व करना था। वे इस विचार के प्रबल समर्थक थे कि 'जल, जंगल और जमीन' पर स्थानीय आदिवासियों का अधिकार होना चाहिए और इस क्षेत्र के खनिज संसाधनों का लाभ यहाँ के मूल निवासियों को मिलना चाहिए।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना:</strong> इस सपने को साकार करने के लिए, उन्होंने 4 फरवरी 1972 को बिनोद बिहारी महतो और ए.के. रॉय जैसे नेताओं के साथ मिलकर <strong>झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)</strong> की स्थापना की। यह केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन था जिसका उद्देश्य दक्षिणी बिहार के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग राज्य का निर्माण करना था।</p>
</li>
<li>
<p><strong>दशकों का संघर्ष:</strong> झामुमो के बैनर तले, सोरेन ने दशकों तक सड़क से लेकर संसद तक एक लंबा और अथक संघर्ष किया। उन्होंने रैलियाँ कीं, प्रदर्शन किए, और आदिवासी अधिकारों के लिए लगातार आवाज बुलंद की।</p>
</li>
<li>
<p><strong>राज्य का निर्माण:</strong> उनके दशकों के संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार ने उनकी मांग को स्वीकार किया और <strong>15 नवंबर 2000</strong> को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर बिहार पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से <strong>झारखंड</strong> एक नए और स्वतंत्र राज्य के रूप में भारत के मानचित्र पर उभरा।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>राजनीतिक सफर और प्रमुख पद</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने झारखंड की राजनीति पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>संसद सदस्य:</strong> वे कई बार बिहार और बाद में झारखंड की दुमका लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। संसद में उन्होंने मजबूती से झारखंड के हितों की पैरवी की।</p>
</li>
<li>
<p><strong>केंद्रीय मंत्री:</strong> वे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में कोयला मंत्री भी रहे।</p>
</li>
<li>
<p><strong>झारखंड के मुख्यमंत्री:</strong> शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुए:</p>
<ul>
<li>
<p><strong>पहली बार:</strong> 2 मार्च 2005 - 12 मार्च 2005</p>
</li>
<li>
<p><strong>दूसरी बार:</strong> 27 अगस्त 2008 - 19 जनवरी 2009</p>
</li>
<li>
<p><strong>तीसरी बार:</strong> 30 दिसंबर 2009 - 1 जून 2010</p>
</li>
</ul>
</li>
</ul>
<p>वे झारखंड से राज्यसभा के सांसद थे और पार्टी के अध्यक्ष के रूप में संगठन का मार्गदर्शन कर रहे थे।</p>
<hr />
<p><strong><span class="citation-19 citation-end-19">झारखंड की राजनीति के पितामह और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार, 4 अगस्त, 2025 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-18 citation-end-18">वे 81 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे।<sup class="superscript"></sup></span> उनके निधन से झारखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर है।</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 14:47:15 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>Malegaon Blast: रिहाई के बाद साध्वी प्रज्ञा का बड़ा हमला, 'भगवा नहीं, आतंकवाद का रंग हरा होता है'</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली:</strong> 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में 17 साल बाद आए विशेष NIA अदालत के फैसले ने जहां सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया, वहीं इस मामले पर राजनीतिक और सामाजिक बहस का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। मामले में बरी हुईं पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अपनी रिहाई के बाद आतंकवाद को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।</p>
<p><strong>साध्वी प्रज्ञा का विवादित बयान</strong></p>
<p>साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर अपने गृह नगर भोपाल पहुचने के बाद मीडिया से बात करते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/after-malegaon-blast-release-sadhvi-pragyas-big-attack-is-not/article-15184"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/dvsxcz.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली:</strong> 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में 17 साल बाद आए विशेष NIA अदालत के फैसले ने जहां सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया, वहीं इस मामले पर राजनीतिक और सामाजिक बहस का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। मामले में बरी हुईं पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अपनी रिहाई के बाद आतंकवाद को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।</p>
<p><strong>साध्वी प्रज्ञा का विवादित बयान</strong></p>
<p>साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर अपने गृह नगर भोपाल पहुचने के बाद मीडिया से बात करते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा, "आतंकवाद का रंग हरा होता है। यह हरे झंडे के नीचे ही पनपता है।" उन्होंने इस फैसले को "भगवा की विजय" और "सनातन की विजय" करार दिया। अपने बयानों में उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस की यूपीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि "भगवा आतंकवाद" जैसा कोई शब्द नहीं होता, बल्कि यह कांग्रेस द्वारा हिंदुओं और सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए गढ़ा गया एक राजनीतिक षड्यंत्र था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों ने उन पर दबाव बनाया और उन्हें प्रताड़ित किया।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि खुद अदालत ने अपने फैसले में यह टिप्पणी की थी कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।</p>
<p>यह मामला एक बार फिर इस बहस को सामने ले आया है कि क्या आतंकवाद का कोई धर्म होता है और क्या राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। फिलहाल, साध्वी प्रज्ञा के बयान ने मालेगांव ब्लास्ट मामले को कानूनी दायरे से निकालकर एक बार फिर राजनीतिक अखाड़े के केंद्र में ला खड़ा किया है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 17:13:24 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुंछ की खामोशी में छिपी दहशत: 'ऑपरेशन शिवशक्ति' ने नाकाम की एक और नापाक साजिश</title>
                                    <description>
                        <![CDATA['ऑपरेशन शिवशक्ति' ने जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से घुसपैठ की कोशिश विफल की। भारतीय सेना की बड़ी कामयाबी और बदलती आतंकी रणनीति का विश्लेषण।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/panic-operation-shiv-shakti-failed-another-nefarious-conspiracy-hidden-in/article-15068"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-07/uhy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। हाल ही में पुंछ जिले में चलाए गए 'ऑपरेशन शिवशक्ति' ने घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया। यह केवल एक सामान्य मुठभेड़ नहीं, बल्कि सीमा पार से उत्पन्न होने वाले खतरों का मुकाबला करने के लिए एक सुविचारित और समन्वित प्रयास का प्रतीक है। खासकर हाल के दिनों में बढ़ी हुई आतंकवादी गतिविधियों के मद्देनजर।</p>
<h4><strong>ऑपरेशन शिवशक्ति: विवरण और सफलता</strong></h4>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/ANI/status/1950415211669688507">https://twitter.com/ANI/status/1950415211669688507</a></blockquote>
<p><strong>

</strong></p>
<p>सोमवार की रात जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) के संयुक्त अभियान 'ऑपरेशन शिवशक्ति' के तहत दो आतंकवादियों को मार गिराया गया। ये आतंकवादी सीमा पार से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे थे। सेना के व्हाइट नाइट कोर ने बताया कि सतर्क सैनिकों की त्वरित कार्रवाई और सटीक गोलाबारी ने आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को विफल कर दिया। मुठभेड़ स्थल से तीन हथियार भी बरामद किए गए।</p>
<p>दो आतंकवादियों के मारे जाने के बावजूद तीन हथियारों की बरामदगी से पता चलता है कि वे अच्छी तरह से हथियारों से लैस थे। यह इस संभावना को भी इंगित करता है कि वे एक बड़े, सुसज्जित घुसपैठ समूह का हिस्सा हो सकते थे, या उनका इरादा भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने पर स्थानीय संपर्कों को हथियार उपलब्ध कराना था। यह स्थिति उस खतरे के पैमाने को रेखांकित करती है जिसे विफल किया गया था। ऑपरेशन के बाद भी क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी रहा, जिससे यह संभावना बनी रहती है कि कुछ अन्य घुसपैठिए बच निकले हों या अभी भी छिपे हों। यह तथ्य सीमा पर ऐसे हथियारों की घुसपैठ को रोकने के महत्व पर जोर देता है, क्योंकि यह जम्मू-कश्मीर के भीतर आतंकवादियों के लिए निरंतर संचालन क्षमता को प्रभावित करता है।</p>
<h4><strong>पृष्ठभूमि और संबंधित अभियान</strong></h4>
<p>ऑपरेशन शिवशक्ति की यह सफलता 'ऑपरेशन महादेव' के ठीक दो दिन बाद मिली, जिसने 28 जुलाई, 2025 को श्रीनगर के बाहरी इलाकों में तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। इन आतंकवादियों में सुलेमान उर्फ आसिफ/हाशिम मूसा भी शामिल था, जिसे 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड माना जाता था। ऑपरेशन महादेव ने लश्कर-ए-तैयबा के एक छाया संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) से जुड़े इन आतंकवादियों को खुफिया जानकारी के आधार पर ट्रैक किया और समाप्त किया। इस अभियान में चीनी सैटेलाइट फोन के सिग्नल का उपयोग करके आतंकवादियों को ट्रैक किया गया था।</p>
<p>आतंकवादियों द्वारा उन्नत संचार विधियों का उपयोग करने के बावजूद, भारतीय खुफिया एजेंसियों की ऐसी जानकारी को इंटरसेप्ट करने और उसका उपयोग करने की क्षमता उच्च स्तर की तकनीकी निगरानी क्षमता और विशेषज्ञता को प्रदर्शित करती है। यह आधुनिक आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक महत्वपूर्ण शक्ति गुणक है, जो पारंपरिक मानव खुफिया जानकारी से परे, मायावी आतंकी ठिकानों के खिलाफ सटीक लक्ष्यीकरण और पूर्व-खाली कार्रवाई की अनुमति देता है।</p>
<p>इन लगातार सफल अभियानों से पता चलता है कि भारतीय सुरक्षा बल जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए एक समन्वित और गहन रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऑपरेशन महादेव में उच्च मूल्य वाले लक्ष्यों को खत्म करने की सफलता ने आतंकवादी नेटवर्क को सतर्क कर दिया होगा, जिससे नए घुसपैठ के प्रयासों को बढ़ावा मिला होगा। इसके विपरीत, महादेव से प्राप्त खुफिया जानकारी या उसके बाद बढ़ी हुई सतर्कता ने सीधे शिवशक्ति के लिए सूचना प्रदान की होगी। "तालमेल और सिंक्रनाइज़ खुफिया जानकारी" का स्पष्ट उल्लेख इस संबंध का समर्थन करता है।</p>
<p class="MsoNormal"><span style="background-color:rgb(251,238,184);">हालिया प्रमुख आतंकवाद-रोधी अभियान:</span></p>
<table class="MsoNormalTable" style="width:100%;height:378px;" border="0" cellpadding="0">
<thead>
<tr style="height:54px;">
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:30.5488%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">विशेषता </p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:32.6686%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">ऑपरेशन शिवशक्ति (Operation Shivshakti)</p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:36.6779%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">ऑपरेशन महादेव (Operation Mahadev)</p>
</td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr style="height:54px;">
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:30.5488%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">तिथि </p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:32.6686%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">30 जुलाई, 2025</p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:36.6779%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">28 जुलाई, 2025</p>
</td>
</tr>
<tr style="height:54px;">
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:30.5488%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">स्थान </p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:32.6686%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">पुंछ, जम्मू-कश्मीर (नियंत्रण रेखा)</p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:36.6779%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर</p>
</td>
</tr>
<tr style="height:54px;">
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:30.5488%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">मुख्य उद्देश्य </p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:32.6686%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">घुसपैठ को रोकना, सीमा सुरक्षा</p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:36.6779%;height:54px;">
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal, serif;"><span style="font-size:13.3333px;">पहलगाम हमले के आतंकियों का सफाया </span></span></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:54px;">
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:30.5488%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">परिणाम </p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:32.6686%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">2 आतंकवादी ढेर, 3 हथियार बरामद</p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:36.6779%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">3 आतंकवादी ढेर (मास्टरमाइंड सहित)</p>
</td>
</tr>
<tr style="height:54px;">
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:30.5488%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">शामिल बल </p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:32.6686%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">भारतीय सेना (व्हाइट नाइट कोर), JKP</p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:36.6779%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">भारतीय सेना (स्पेशल फोर्सेज, चिनार कोर), JKP, CRPF</p>
</td>
</tr>
<tr style="height:54px;">
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:30.5488%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">प्राथमिक खुफिया </p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:32.6686%;height:54px;">
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समन्वित खुफिया इनपुट</span></p>
</td>
<td style="border:1pt solid;padding:6pt 9pt;width:36.6779%;height:54px;">
<p class="MsoNormal">चीनी सैटेलाइट फोन सिग्नल, टिप-ऑफ</p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 14:58:07 +0530</pubDate>
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