<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://samridhjharkhand.com/tribal-culture/tag-27893" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Samridh Jharkhand RSS Feed Generator</generator>
                <title>आदिवासी संस्कृति - Samridh Jharkhand</title>
                <link>https://samridhjharkhand.com/tag/27893/rss</link>
                <description>आदिवासी संस्कृति RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Dumka News: संताल समाज की पहल: मांझी थान में हर सप्ताह होगी पूजा, युवाओं को जोड़ने का प्रयास</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दुमका जिले के मोहनपुर गांव में संताल आदिवासी समुदाय ने मांझी थान में साप्ताहिक पूजा की शुरुआत की है। समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन और अन्य के प्रयास से शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य सामुदायिक एकता, आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dumka/dumka-news-initiative-of-santal-community-puja-will-be-held/article-20126"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/7d218611-9ac9-496a-a9bc-ea172947a8f7_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दुमका:</strong> रानीश्वर प्रखंड के मोहनपुर गांव में आदिवासी समुदाय ने सामुदायिक एकता, आध्यात्मिक शांति तथा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से साप्ताहिक मांझी थान पूजा की शुरुआत की है। यह पहल समाजसेवी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">सच्चिदानंद सोरेन</span></span>, आनंद टुडू और संजय मुर्मू के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव के लेखा होड़ (गांव को संचालित करने वाले) तथा ग्रामीणों ने संताल आदिवासी समुदाय के पारंपरिक पूजा स्थल मांझी थान में साप्ताहिक पूजा प्रारंभ की। इस अवसर पर गांव के महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सामूहिक रूप से एकत्र हुए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार धूप, अगरबत्ती, जल, लड्डू, गुड़, चूड़ा और पानी अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए मांझी थान में सामूहिक साप्ताहिक पूजा अत्यंत आवश्यक है। यह पूजा संताल आदिवासी समाज के आराध्य देव मरांग बुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए आयोजित की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन ने कहा कि साप्ताहिक मांझी थान बोंगा बुरु (पूजा) का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक एकता, आध्यात्मिक शांति तथा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यह पहल विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को अपनी परंपरा और संस्कृति से जोड़ने के लिए की गई है, ताकि वे अपने रीति-रिवाजों को समझें, उनका सम्मान करें और उस पर गर्व महसूस करें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा कि यह साप्ताहिक पूजा संताल समाज के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जो आगे चलकर समाज को धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूती प्रदान करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर बच्चों को सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करने के लिए विशेष प्रार्थना भी की गई। इसमें नशे से दूर रहने, नियमित रूप से विद्यालय जाने, माता-पिता एवं बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करने का संदेश दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों का मानना है कि साप्ताहिक मांझी थान बोंगा बुरु (पूजा) से गांव और परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और भाईचारा बढ़ेगा तथा धर्म, संस्कृति और सभ्यता को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी। पूजा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर मंझी बाबा प्रधान हेम्ब्रम, नायकी गोविंद मुर्मू, देवीसिंह मुर्मू, पुलिस मुर्मू, मोतीलाल मुर्मू, सिकंदर मुर्मू, नानी मरांडी, सुबोरी हेम्ब्रम, मीना मरांडी, सेबेन मुर्मू, चुकह सोरेन, राजू सोरेन, मंगल सोरेन, लुखी बास्की, रमनी मुर्मू सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे उपस्थित थे।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दुमका</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dumka/dumka-news-initiative-of-santal-community-puja-will-be-held/article-20126</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dumka/dumka-news-initiative-of-santal-community-puja-will-be-held/article-20126</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 15:51:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2026-04/7d218611-9ac9-496a-a9bc-ea172947a8f7_samridh_1200x720.jpeg"                         length="46692"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Anshika Ambasta]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरहुल: एक ऐसा पर्व जो सिखाता है जिंदगी जीने का सही तरीका</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[सरहुल झारखंड का एक प्रमुख आदिवासी पर्व है, जो प्रकृति और मानव के गहरे संबंध का प्रतीक है। साल वृक्ष की पूजा के माध्यम से यह पर्व जल, जंगल और जमीन के प्रति आभार प्रकट करता है। उरांव, मुंडा और हो जनजाति इसे पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/sarhul-is-a-festival-which-teaches-the-right-way-to/article-19048"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/365fa778-5006-431e-b037-a858c80501df_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>लेखक: विजय शंकर नायक</strong></p>
<p>झारखंड की धरती पर जब साल वृक्षों की डालियों पर नई कोपलें फूटती हैं, जब जंगलों में हरियाली का नवजीवन उमड़ता है, तब आदिवासी समाज पूरे उल्लास के साथ सरहुल पर्व का स्वागत करता है। सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह प्रकृति और मानव के बीच गहरे रिश्ते का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन का वास्तविक आधार प्रकृति है और उसकी रक्षा करना ही हमारे अस्तित्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।</p>
<h3><strong>सरहुल का अर्थ और महत्व</strong></h3>
<p>‘सरहुल’ शब्द दो भागों से मिलकर बना है—‘सर’ अर्थात साल वृक्ष और ‘हुल’ अर्थात पूजा या उत्सव। यानी यह साल वृक्ष की पूजा का पर्व है। झारखंड के आदिवासी समुदाय, विशेषकर उरांव, मुंडा और हो जनजाति, इस पर्व को अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। सरहुल प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर है, जिसमें धरती माता, जंगल, जल, हवा और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।</p>
<p>यह पर्व इस बात का भी प्रतीक है कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहना चाहिए। जब हम प्रकृति के साथ तालमेल बिठाते हैं, तभी जीवन सुखमय और समृद्ध बनता है।</p>
<h3><strong>सरहुल का धार्मिक और सांस्कृतिक पक्ष</strong></h3>
<p>सरहुल का पर्व आदिवासी समाज के धार्मिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन ‘पाहन’ (गांव का पुजारी) गांव के सरना स्थल पर जाकर पूजा करता है। सरना स्थल वह पवित्र स्थान होता है, जहां साल वृक्षों के बीच देवताओं का वास माना जाता है।</p>
<p>पाहन भगवान से अच्छी फसल, वर्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करता है। पूजा के दौरान मुर्गा, हंडिया (चावल से बनी पारंपरिक शराब) और अन्य पारंपरिक वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं। इसके बाद पूरे गांव में प्रसाद वितरित किया जाता है।</p>
<p>यह पूजा केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह समाज की एकता और सामूहिकता का प्रतीक भी है। सभी लोग एक साथ मिलकर पूजा करते हैं, जिससे सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।</p>
<h3><strong>प्रकृति के साथ गहरा संबंध</strong></h3>
<p>सरहुल हमें यह सिखाता है कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि हमारी जीवनदायिनी शक्ति है। आज के आधुनिक युग में, जहां लोग प्रकृति का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं, वहीं सरहुल जैसे पर्व हमें चेतावनी देते हैं कि यदि हमने प्रकृति का सम्मान नहीं किया, तो इसका परिणाम विनाशकारी होगा।</p>
<p>साल वृक्ष को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि यह झारखंड के जंगलों का प्रमुख वृक्ष है। इसके फूलों को पवित्र माना जाता है और इन्हें घरों में सजाया जाता है। यह प्रकृति के नवजीवन और पुनर्जन्म का प्रतीक है।</p>
<h3><strong>सामाजिक एकता और भाईचारे का पर्व</strong></h3>
<p>सरहुल केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेल-जोल का भी पर्व है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, नाच-गान करते हैं और एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देते हैं।</p>
<p>गांवों में अखाड़ा सजाया जाता है, जहां पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए जाते हैं। महिलाएं और पुरुष मिलकर ‘झूमर’ और ‘डोमकच’ जैसे लोकनृत्य करते हैं। मांदर और नगाड़े की धुन पर पूरा वातावरण उत्सवमय हो जाता है।</p>
<p>यह पर्व जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव को समाप्त कर सभी को एक मंच पर लाता है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।</p>
<h3><strong>पर्यावरण संरक्षण का संदेश</strong></h3>
<p>आज, जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब सरहुल का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि यदि हम प्रकृति को बचाएंगे, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।</p>
<p>आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीता आया है। उन्होंने कभी भी प्रकृति का शोषण नहीं किया, बल्कि उसे पूजनीय माना। यही कारण है कि उनके जीवन में पर्यावरणीय संतुलन बना रहा।</p>
<p>सरहुल के माध्यम से हमें यह सीखने की जरूरत है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।</p>
<h3><strong>आधुनिक समय में सरहुल की प्रासंगिकता</strong></h3>
<p>आज के दौर में, जब लोग अपनी जड़ों से कटते जा रहे हैं, सरहुल जैसे पर्व हमें हमारी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं। यह हमें हमारी पहचान का अहसास कराते हैं।</p>
<p>शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण कई परंपराएं धीरे-धीरे समाप्त हो रही हैं, लेकिन सरहुल आज भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह इस बात का प्रमाण है कि आदिवासी समाज अपनी संस्कृति को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>हमें भी इस परंपरा को समझने और सम्मान देने की आवश्यकता है। यह केवल एक समुदाय का त्योहार नहीं, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए एक प्रेरणा है।</p>
<h3><strong>महिलाओं की भूमिका</strong></h3>
<p>सरहुल पर्व में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वे इस पर्व की तैयारियों में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। घर की साफ-सफाई, भोजन की व्यवस्था और पारंपरिक परिधानों की तैयारी में उनका योगदान अहम होता है।</p>
<p>नृत्य और गीतों में भी महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। उनके बिना यह उत्सव अधूरा लगता है। यह पर्व महिलाओं के सम्मान और उनकी भागीदारी का प्रतीक भी है।</p>
<h3><strong>आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव</strong></h3>
<p>सरहुल का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस दौरान बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। पारंपरिक वस्त्र, आभूषण और खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है।</p>
<p>इसके साथ ही, यह पर्व पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। बाहर से आने वाले लोग इस उत्सव को देखने के लिए झारखंड आते हैं, जिससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलती है।</p>
<h3><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p>सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक शैली है। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही हम सच्चे अर्थों में खुशहाल जीवन जी सकते हैं।</p>
<p>आज, जब दुनिया विकास की अंधी दौड़ में लगी हुई है, तब सरहुल हमें रुककर सोचने का अवसर देता है कि क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं? क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण छोड़ पाएंगे?</p>
<p>सरहुल का संदेश स्पष्ट है—प्रकृति का सम्मान करो, उसे बचाओ और उसके साथ मिलकर जीवन जीओ। यही हमारे अस्तित्व की कुंजी है।</p>
<p>अंततः, सरहुल हमें यह सिखाता है कि सच्ची समृद्धि केवल भौतिक साधनों में नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन में है। यह पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और हमें एक बेहतर भविष्य की ओर प्रेरित करता है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/religion/sarhul-is-a-festival-which-teaches-the-right-way-to/article-19048</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/news/religion/sarhul-is-a-festival-which-teaches-the-right-way-to/article-19048</guid>
                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 22:07:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2026-03/365fa778-5006-431e-b037-a858c80501df_samridh_1200x720.jpeg"                         length="50853"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ranchi News : एनयूएसआरएल में सरहुल पूर्व संध्या कार्यक्रम, महादेव टोप्पो ने आदिवासी संस्कृति और प्रकृति पर दी जानकारी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[एनयूएसआरएल में सरहुल पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में महादेव टोप्पो ने आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और पर्यावरण जागरूकता पर छात्रों को प्रेरित किया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/sarhul-eve-program-at-nusrl-mahadev-toppo-gave-information-on/article-18961"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/55646a34-822d-4452-ba5f-fd773945eb48_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची : </strong>नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची के सेंटर फॉर स्टडी एंड रिसर्च इन ट्राइबल राइट्स द्वारा सरहुल की पूर्व संध्या पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ लेखक, कवि एवं समाज सुधारक महादेव टोप्पो मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2026-03/68b90e67-bd0c-47ac-ae6e-d02f68311aa3_samridh_1200x720.jpeg" alt="Ranchi News : एनयूएसआरएल में सरहुल पूर्व संध्या कार्यक्रम, महादेव टोप्पो ने आदिवासी संस्कृति और प्रकृति पर दी जानकारी" width="1200" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक स्वागत गान एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। छात्रों ने सरहुल के महत्व और समाज में उसकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए साथ ही, बाहा पर्व के इतिहास, परंपरा और महत्व को दर्शाते हुए एक छात्रों ने  नाटक का मंचन भी किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने अपने संबोधन में सरहुल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखेगा, तो आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के महत्व को बेहतर ढंग से समझ पाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय विभिन्न सेंटर और समितियों के माध्यम से छात्रों को समाज और प्रकृति से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक कर रहा है तथा ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि महादेव टोप्पो ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यह उनके लिए पहला अवसर है जब वे किसी विधि विश्वविद्यालय में इस प्रकार के कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि कानून के छात्र अपने अधिकारों और प्रकृति के साथ संबंध को लेकर जागरूक हैं। उन्होंने आदिवासी समाज के प्रकृति से गहरे जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज का प्रत्येक त्योहार प्रकृति से जुड़ा होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जंगल से लकड़ी काटने से पहले भी आदिवासी प्रकृति को प्रणाम करते हैं और जंगल से फल तोड़ते समय भी अन्य जीव-जंतुओं के अधिकारों का ध्यान रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महादेव टोप्पो ने अपनी कुछ कविताएं भी प्रस्तुत कीं, जिनके माध्यम से उन्होंने आदिवासी जीवन, प्रकृति और पारंपरिक समय-चक्र की विशेषताओं को समझाया। उन्होंने छात्रों से मौसम आधारित पारंपरिक त्योहारों को मनाने की अपील की, ताकि ये परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रहें। कार्यक्रम के समापन से पूर्व महादेव टोप्पो ने ‘विश्वरंग संवाद’ पत्रिका के आदिवासी विशेषांक को कुलपति को भेंट किया और इसे विश्वविद्यालय पुस्तकालय में स्थान देने का अनुरोध किया।</p>
<p style="text-align:justify;">अंत में धन्यवाद ज्ञापन असिस्टेंट प्रोफेसर रामचंद्र उरांव ने किया। उन्होंने प्रकृति और आदिवासी समाज के गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति सदियों से प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। उन्होंने मुख्य अतिथि के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय उनके मार्गदर्शन पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/sarhul-eve-program-at-nusrl-mahadev-toppo-gave-information-on/article-18961</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/sarhul-eve-program-at-nusrl-mahadev-toppo-gave-information-on/article-18961</guid>
                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:12:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2026-03/55646a34-822d-4452-ba5f-fd773945eb48_samridh_1200x720.jpeg"                         length="55417"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Anshika Ambasta]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Mahashivratri special 2026 : तांडव की लय और मांदर की थाप</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[यह लेख मांदर की थाप और शिव तांडव के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और जीवन की लय के बीच के संबंध को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि नृत्य और संगीत केवल कला नहीं, बल्कि जीवन की गति और सामूहिक चेतना का उत्सव हैं। लेख मनुष्य और प्रकृति के बीच के प्राचीन संबंध को पुनः समझने का संदेश देता है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/mahashivratri-special/article-18022"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/a3d643f5-79f5-4b68-86d7-c897f7d87053_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>रात जब गहराती है और जंगल की निस्तब्धता अपने भीतर किसी अनसुनी धड़कन को सँजोने लगती है, तब कहीं दूर से मांदर की थाप सुनाई देती है। वह थाप केवल एक वाद्य की ध्वनि नहीं होती; वह धरती की नाड़ी है, जो मनुष्य के कदमों से मिलकर जीवन की लय रचती है। इसी लय में शिव का तांडव भी कहीं न कहीं जीवित है—आदिम, अनगढ़ और अनंत।</p>
<p>भारतीय परंपरा में शिव का तांडव सृष्टि और संहार का नृत्य माना गया है। पर यदि हम इसे आदिवासी जीवन की दृष्टि से देखें, तो तांडव केवल विध्वंस का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन की गति का उत्सव है। जिस प्रकार मांदर की थाप पर आदिवासी समुदाय सामूहिक नृत्य करता है, उसी प्रकार तांडव भी सृष्टि की सामूहिक धड़कन है। दोनों में एक अदृश्य साम्य है—लय का, ऊर्जा का और अस्तित्व के उत्सव <br />का।</p>
<p>मांदर की थाप सरल होती है, पर उसमें एक गहरी शक्ति छिपी होती है। वह थाप जैसे ही गूँजती है, लोग एक वृत्त में इकट्ठा हो जाते हैं। कदम ताल मिलाते हैं, हाथ एक-दूसरे से जुड़ते हैं, और नृत्य शुरू हो जाता है। यह नृत्य किसी मंच के लिए नहीं, जीवन के लिए होता है। इसमें कोई दर्शक नहीं, सब सहभागी होते हैं।<br />शिव का तांडव भी ऐसा ही है—जहाँ देवता और जगत के बीच कोई दूरी नहीं रहती। डमरू की ध्वनि और मांदर की थाप जैसे एक ही लय के दो रूप प्रतीत होते हैं।</p>
<p>आदिवासी समाज में नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का उत्सव है। फसल कटने पर, पर्व आने पर, या शिवरात्रि जैसी रात्रि में मांदर की थाप पर लोग नाचते हैं। यह नृत्य धरती के प्रति कृतज्ञता का भी है और जीवन की निरंतरता का भी। जब मांदर की आवाज़ जंगल में गूँजती है, तो लगता है जैसे धरती स्वयं तांडव कर रही हो।</p>
<p>शिव का तांडव भी इसी धरती की गति है—पर्वतों का उठना-गिरना, नदियों का बहना, ऋतुओं का बदलना। यह नृत्य हमें याद दिलाता है कि जीवन स्थिर नहीं, निरंतर प्रवाहमान है।<br />तांडव की कल्पना में अग्नि है, ऊर्जा है, और परिवर्तन का साहस है। मांदर की थाप में भी वही ऊर्जा छिपी है। जब युवा और वृद्ध, स्त्री और पुरुष एक साथ नृत्य करते हैं, तो वहाँ कोई भेद नहीं रहता। सब एक लय में बँध जाते हैं। यह लय ही समाज को जोड़ती है, जैसे तांडव सृष्टि को जोड़ता है।</p>
<p>शिव के नटराज रूप में जो वृत्ताकार नृत्य है, वही वृत्त आदिवासी नृत्य में भी दिखाई देता है—जहाँ सब एक घेरे में घूमते हैं। यह घेरा केवल नृत्य का नहीं, एकता का प्रतीक है।</p>
<p>मांदर की थाप में एक आदिम स्मृति भी छिपी होती है। यह वही ध्वनि है, जो शायद मानव सभ्यता के प्रारंभ में पहली बार गूँजी होगी—जब मनुष्य ने लकड़ी या चमड़े पर प्रहार करके लय बनाई होगी। उसी लय से नृत्य जन्मा होगा, और उसी नृत्य से देवता की कल्पना। शिव का तांडव शायद उसी पहली लय का विस्तार है।<br />इसलिए जब मांदर बजता है, तो वह केवल वर्तमान का संगीत नहीं, बल्कि इतिहास की धड़कन भी होता है।</p>
<p>आज के आधुनिक जीवन में जब संगीत कृत्रिम हो गया है और नृत्य मंचों तक सीमित हो गया है, तब भी आदिवासी समाज मांदर की थाप को जीवित रखे हुए है। यह थाप हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है। वह याद दिलाती है कि मनुष्य और प्रकृति के बीच जो लय है, वही <br />जीवन का आधार है।</p>
<p>शिव का तांडव भी यही सिखाता है—कि सृष्टि का हर परिवर्तन एक नृत्य है, हर विनाश एक नई सृष्टि की भूमिका है।</p>
<p>तांडव की लय और मांदर की थाप हमें एक गहरे सत्य तक ले जाती है—कि जीवन का सार गति में है। जब तक लय है, तब तक जीवन है। जब मांदर की थाप रुकती है, तो नृत्य थम जाता है; जब तांडव रुकता है, तो सृष्टि भी ठहर जाती है।</p>
<p>इसलिए मांदर की हर थाप में शिव का तांडव छिपा है, और हर तांडव में जीवन की अनंत धड़कन।</p>
<p>शायद इसी कारण जंगल की रात में गूँजती मांदर की आवाज़ सुनकर लगता है कि कहीं दूर शिव नृत्य कर रहे हैं—अनंत, निर्भीक और मुक्त और उस नृत्य में मनुष्य भी शामिल है, धरती भी, आकाश भी। यही तांडव की लय है, यही मांदर की थाप—जीवन का शाश्वत उत्सव।</p>
<p><strong>डॉ आशुतोष प्रसाद</strong><br /><strong>साहित्यकार</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/article/mahashivratri-special/article-18022</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/article/mahashivratri-special/article-18022</guid>
                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 16:59:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2026-02/a3d643f5-79f5-4b68-86d7-c897f7d87053_samridh_1200x720.jpeg"                         length="52275"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झारखंड दौरे पर राष्ट्रपति, आदिवासी संस्कृति और जनसांस्कृतिक समागम में होंगी मुख्य अतिथि</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 28 दिसंबर से तीन दिवसीय दौरे पर झारखंड आएंगी। वे रांची, जमशेदपुर और गुमला के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/president-will-be-the-chief-guest-in-the-tribal-culture/article-17507"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-12/3a66f187bf87ca3761593947fcf7788e_1428651836_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची : </strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 28 दिसंबर से तीन दिवसीय दौरे पर झारखंड आएंगी। वह 28 दिसंबर को रांची पहुंचेंगी और आगमन के बाद रांची स्थित लोकभवन में रात्रि विश्राम करेंगी।<br /><br />राष्ट्रपति 29 दिसंबर को जमशेदपुर जाएंगी, जहां वह एनआईटी जमशेदपुर के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। इसके साथ ही वह ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भी शिरकत करेंगी। इस कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति और भाषा की समृद्ध परंपरा को रेखांकित किया जाएगा। जमशेदपुर से वापसी के बाद राष्ट्रपति रांची लौटकर लोकभवन में रात्रि विश्राम करेंगी।<br /><br />राष्ट्रपति 30 दिसंबर को गुमला जिले के रायडीह में आयोजित जनसांस्कृतिक समागम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 28 और 29 दिसंबर को रांची स्थित लोकभवन में रात्रि विश्राम करेंगी।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/president-will-be-the-chief-guest-in-the-tribal-culture/article-17507</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/president-will-be-the-chief-guest-in-the-tribal-culture/article-17507</guid>
                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 17:22:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2025-12/3a66f187bf87ca3761593947fcf7788e_1428651836_samridh_1200x720.jpeg"                         length="51660"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Anshika Ambasta]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हनोई में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में डॉ. रणधीर ने किया भारत का प्रतिनिधित्व</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>नेशनल डेस्क:</strong> जमुआ प्रखंड के नईटांड निवासी डॉ. रणधीर कुमार ने  यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर ऑफ रिफ्यूजी,ऑस्ट्रेलियन एंबेसी, आयरलैंड एंबेसी वियतनाम के तत्वाधान में  हनोई, वियतनाम में 3 से 5 अक्टूबर 2025 तक आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। </p>
<p>इस सम्मेलन में पूरे विश्व के 150 प्रतिनिधि ,लगभग 60 देशों से भाग लिया। वियतनाम में विभिन्न देशों के 8 राजदूतों एवं काउन्सलर ने  भाग लिया एवं  विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किया ।</p>
<p>इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि  यूनिसेफ , यूनिस्को, वर्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, यूनाइटेड नेशन वीमन, यूनाइटेड पॉपुलेशन फण्ड, वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम जैसे</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/dr-randhir-represented-india-at-united-nations-conference-in-hanoi/article-16546"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-10/whatsapp-image-2025-10-06-at-5.08.28-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नेशनल डेस्क:</strong> जमुआ प्रखंड के नईटांड निवासी डॉ. रणधीर कुमार ने  यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर ऑफ रिफ्यूजी,ऑस्ट्रेलियन एंबेसी, आयरलैंड एंबेसी वियतनाम के तत्वाधान में  हनोई, वियतनाम में 3 से 5 अक्टूबर 2025 तक आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। </p>
<p>इस सम्मेलन में पूरे विश्व के 150 प्रतिनिधि ,लगभग 60 देशों से भाग लिया। वियतनाम में विभिन्न देशों के 8 राजदूतों एवं काउन्सलर ने  भाग लिया एवं  विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किया ।</p>
<p>इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि  यूनिसेफ , यूनिस्को, वर्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, यूनाइटेड नेशन वीमन, यूनाइटेड पॉपुलेशन फण्ड, वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम जैसे प्रमुख संगठनों का प्रतिनिधिव किया। डॉ. रणधीर कुमार ने यूनाइटेड नेशंस एजुकेशन, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनिस्को) भारत का प्रतिनिधित्व। </p>
<p>यूनेस्को परिषद् में  भारत समेत 23 देशों ने  प्रतिनिधियों ने अपने देश का प्रतिनिधित्व किया। जिसमें प्रमुख रूप  ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों में शिक्षा प्रदान करने मे तकनीकी का योगदान, डिजिटल शिक्षा, परंपरागत शिक्षा एवं शिक्षा मे आमूल-चूल परिवर्तन पर विस्तृत चर्चा हुई।</p>
<p>यूनेस्को परिषद मे भारत के प्रतिनिधि के रूप में डॉ रणधीर ने इस सम्मेलन में " शिक्षा ,भारतीय ज्ञान प्रणाली, भारतीय पिछड़ेपन की रोकथाम, संस्कृति एवं कला के क्षेत्र में यूनेस्को की प्रासंगिकता पर स्थिति पत्र/ शोध पत्र प्रस्तुत किया । डॉ रणधीर ने भारत की शिक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, भारतीय ज्ञान परम्परा पर विस्तृत प्रकाश डाला।</p>
<p>ग्रामीण इलाके मे डिजिटल  शिक्षा पर सरकार के प्रयास की जानकारी दिया एवं शिक्षा मे आमूल-चूल परिवर्तन हेतु सभी अंतर्राष्ट्रीय देश के साथियों से सहयोग की आग्रह किया।  सम्पूर्ण विश्व मे बढ़ते मानवाधिकार हनन पर चिंता जाहिर करते हुए संयुक्त राष्ट्र से इस पर व्यापक पहल करते हुए पूरे विश्व के माध्यमिक शिक्षा पाठयक्रम मे शामिल करने का अपील किया।</p>
<p>डॉ. रणधीर ने इस सम्मलेन में  यूनेस्को से आदिवासी विरासत, संस्कृति एवं प्राचीन शिक्षा पद्धति, आदिवासी रहन- सहन ,  प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को यूनेस्को के पहचान, भारत के विलुप्त होते विरासत अशोका, मगध,मौर्य शिवाजी महाराज जैसे दर्जनों विरासत को पुनरुत्थान की अपील किया। ऐसे विरासत को पुनर्जागृत कर भारतीय विरासत को मजबूत करने की अपील किया।  </p>
<p>ज्ञात हो बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ रणधीर कुमार  गिरिडीह जिला के नईटाँड निवासी पूर्व प्रधानाध्यापक, +2 उच्च विधालय जनता जरीडीह, दिनेश्वर वर्मा के पौत्र एवं उच्च विद्यालय बड्डीहा के शिक्षक दीनदयाल प्रसाद के पुत्र है। इन्होंने अंग्रेजी साहित्य में पी एच डी की उपाधि प्राप्त की है। झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईएम रांची , लंदन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस एडमिस्ट्रेशन जैसे प्रमुख संस्थानों से शिक्षा ग्रहण की है।</p>
<p>बहुत ही कम उम्र में शिक्षा एवं समाज कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु कई राज्य , राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मान प्राप्त हो चुके है। अपने शिक्षा के साथ -साथ , महज़ 21- 23 वर्ष के उम्र में डॉ. रणधीर को आदिवासी पिछड़े इलाके में शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान हेतु  यंग इंडिया फेलोशिप, झारखंड नागरिक सम्मान 2016, राष्ट्रीय शिक्षा सम्मान 2017, मानद डॉक्टरेट 2018,झारखंड रत्न सम्मान 2019, झारखंड श्री सम्मान समेत अनेक पुरस्कारों से नवाज़े जा चुके हैं। डॉ. रणधीर के द्वारा आठ पुस्तकों का लेखन, पत्रिका एवं अख़बार का संपादन किया जा चुका है। डॉ. रणधीर ने 100 से अधिक नेशनल एवं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में भाग ले चुके है जिसमे अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत किया है। शिक्षा, युवा नेतृत्व , मानवाधिकार जैसे विषयों पर कई अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन कर चुके है। </p>
<p>डॉ रणधीर कुमार के द्वारा कई शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं का स्थापना किया जा चुका है जिसमे नमन इंटरनेशनल फाउंडेशन ,एन एच आर सी सी बी एवं अन्य है। डॉ रणधीर कई महत्वपूर्ण संस्था मे बतौर सलाहकार एवं बोर्ड मेम्बर जुड़े है। देश के कई विश्विद्यालय, आयोग एवं संस्थाओं में बतौर वक्ता या गेस्ट फैकल्टी आमंत्रित किए जाते है। वर्तमान में डॉ. रणधीर झारखंड के महत्पूर्ण सरकारी संस्थान में अपनी सेवा दे रहे है । </p>
<p>बतौर चेयरमैन, एन एच आर सी सी बी, डॉ रणधीर कुमार सम्पूर्ण भारत में मानवाधिकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य  कर रही है । इनके कुशल नेतृत्व में समाज के निचले पायदान पर खड़े शोषितों वंचित एवं कमजोर वर्ग के<br />अधिकारो की रक्षा  हेतु हज़ारों सदस्य कर कार्य रही है । </p>
<p>डॉ. रणधीर ने इस उपलब्धि हेतु अपने प्रेरणा स्रोत दादा जी श्री दिनेश्वर वर्मा (पूर्व प्रधानाध्यापक, +2 उच्च विधालय जनता जरीडीह ), दादी माँ स्मृति शेष श्रीमती सावित्री देवी, पिता दीनदयाल प्रसाद ( शिक्षक उच्च विधालय बद्दीहा) माता सावित्री देवी ( निदेशक - नमन इंटरनेशनल फाउंडेशन) चाचा श्री बिनोद कुमार ( प्रभारी प्राचार्य +2 उच्च विद्यालय दुम्मा) विकास कुमार ( शिक्षक उच्च विद्यालय कबरियाबेड़ा, गिरिडीह ) डॉ. सुरेश वर्मा ( डिप्टी कमांडेंट ,गृह मंत्रालय भारत सरकार ) पत्नी सुजाता वर्मा , भाई संदीप वर्मा (समन्वयक - नमन इंटरनेशनल स्कूल रेम्बा) एवं समस्त परिवाजनों , गुरुजनों एवं साथियों का आभार व्यक्त किया है ।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/national/dr-randhir-represented-india-at-united-nations-conference-in-hanoi/article-16546</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/news/national/dr-randhir-represented-india-at-united-nations-conference-in-hanoi/article-16546</guid>
                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:23:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2025-10/whatsapp-image-2025-10-06-at-5.08.28-pm.jpeg"                         length="166211"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धरती आबा 2025: झारखंड में पहली बार धरती आबा जनजातीय फिल्म महोत्सव!</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>रांची: </strong>झारखंड में पहली बार होने जा रहा है "धरती आवा आदिवासी फ़िल्म महोत्सव" जनजातीय गौरव वर्ष के तहत राज्य सरकार का बड़ा आयोजन। यह महोत्सव अक्टूबर 2025 में भगवान बिरसा मुंडा की पावन धरती पर संस्कृति, कला और सिनेमा का भव्य उत्सव होगा.</p><h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0 md:text-lg [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>धरती आबा आदिवासी फ़िल्म महोत्सव: झारखंड की पहल</strong></span></h5><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">झारखंड सरकार एवं जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से राज्य में पहली बार "धरती आवा आदिवासी फ़िल्म महोत्सव" का आयोजन किया जा रहा है। भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में आयोजित यह महोत्सव आदिवासी समुदाय की कहानियों तथा सृजनशीलता को राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म देगा। इस महोत्सव का</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/dharti-aba-2025-dharti-aba-tribal-film-festival-for-the/article-16013"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-09/resized-image-(22)1.jpeg" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>रांची: </strong>झारखंड में पहली बार होने जा रहा है "धरती आवा आदिवासी फ़िल्म महोत्सव" जनजातीय गौरव वर्ष के तहत राज्य सरकार का बड़ा आयोजन। यह महोत्सव अक्टूबर 2025 में भगवान बिरसा मुंडा की पावन धरती पर संस्कृति, कला और सिनेमा का भव्य उत्सव होगा.</p><h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0 md:text-lg [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>धरती आबा आदिवासी फ़िल्म महोत्सव: झारखंड की पहल</strong></span></h5><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">झारखंड सरकार एवं जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से राज्य में पहली बार "धरती आवा आदिवासी फ़िल्म महोत्सव" का आयोजन किया जा रहा है। भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में आयोजित यह महोत्सव आदिवासी समुदाय की कहानियों तथा सृजनशीलता को राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म देगा। इस महोत्सव का उद्देश्य जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत, कला एवं जीवनशैली को फ़िल्मों के माध्यम से प्रस्तुत करना है, जिससे आदिवासी समाज की अनकही कहानियां सामने आएंगी.</p><h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0 md:text-lg [hr+&amp;]:mt-4"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">महोत्सव की श्रेणियाँ और पंजीकरण प्रक्रिया</span></strong></h5><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">इस फ़िल्म महोत्सव में फ़िल्मों को निम्न श्रेणियों में आमंत्रित किया गया है:</p><ul class="marker:text-quiet list-disc"><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">फीचर फ़िल्म</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">डॉक्युमेंट्री</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">शॉर्ट डॉक्युमेंट्री</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">शॉर्ट फ़िक्शन</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">एनीमेशन</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">मोबाइल/न्यू मीडिया फ़िल्म.</p></li></ul><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">फ़िल्म भेजने की अंतिम तिथि 10 सितंबर, 2025 है। पंजीकरण के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन फॉर्म उपलब्ध है। छह कैटेगरी में प्रतिभागी अपनी फ़िल्म सबमिट कर सकते हैं। पंजीकरण की विस्तृत जानकारी और दिशानिर्देश वेबसाइट पर दिए गए हैं.</p><p>ऑनलाइन पंजीकरण और सबमिशन: <span style="color:rgb(53,152,219);"><a href="https://www.tirjharkhand.in/en/dafff" style="color:rgb(53,152,219);">यहाँ क्लिक करें</a></span></p><h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0 md:text-lg [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>महोत्सव की थीम और प्रतियोगिता श्रेणियाँ</strong></span></h5><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">फ़िल्म महोत्सव की कुल सात थीम निर्धारित की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:</p><ul class="marker:text-quiet list-disc"><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">आदिवासी पहचान और प्रतिनिधित्व</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">ज्ञान प्रणाली और आदिवासी परंपराएं</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">स्वदेशी इतिहास एवं सामुदायिक कहानियां</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">आदिवासी समुदाय की समकालीन चुनौतियां</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">नायाब कला, स्लाइस ऑफ लाइफ ड्रामा एवं ट्राइबल लीडरशिप के स्वप्न.</p></li></ul><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">प्रतिभागी इन विषयों पर आधारित फ़िल्में प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आदिवासी समाज की बहुआयामी कहानियां सामने आएंगी।</p><h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0 md:text-lg [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>आयोजन का महत्व</strong></span></h5><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">"धरती आवा आदिवासी फ़िल्म महोत्सव" का उद्देश्य आदिवासी फिल्मकारों एवं युवा प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। इससे झारखंड एवं देशभर के आदिवासी सृजनशीलता को पहचान मिलेगी, नई पीढ़ी को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा, तथा आदिवासी समाज की संस्कृति, कला और इतिहास को विश्व भर में पहुंचाने का अवसर मिलेगा.</p><h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0 md:text-lg [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>विशेष जानकारी</strong></span></h5><ul class="marker:text-quiet list-disc"><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">महोत्सव के संयोजनकर्ता: डॉ. श्यामलाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, रांची, झारखंड, एवं राज्य सरकार</p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">फ़िल्म भेजने की वेबसाइट: <a class="break-word hover:text-super hover:decoration-super underline decoration-from-font underline-offset-1 transition-all duration-300" href="http://www.tirjharkhand.in/en/dafff">www.tirjharkhand.in/en/dafff</a></p></li><li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0"><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">संपर्क नंबर: 0651-2551824.</p><hr /></li></ul><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">यह फ़िल्म महोत्सव झारखंड के सांस्कृतिक गौरव और आदिवासी एकता का प्रतीक बनेगा। राज्य सरकार की यह ऐतिहासिक पहल न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के आदिवासी प्रतिभाओं को नया मंच उपलब्ध कराएगी, एवं झारखंड की विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करेगी</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/dharti-aba-2025-dharti-aba-tribal-film-festival-for-the/article-16013</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/dharti-aba-2025-dharti-aba-tribal-film-festival-for-the/article-16013</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Sep 2025 17:16:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2025-09/resized-image-%2822%291.jpeg"                         length="47542"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रांची पर्यटन स्थल: झारखंड की राजधानी, प्राकृतिक सुंदरता और प्रमुख दर्शनीय स्थलों की नगरी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>रांची, झारखंड की राजधानी, 'झरनों के शहर' के नाम से प्रसिद्ध है। यह शहर अपने प्राकृतिक सौंदर्य, ठंडी जलवायु, ऐतिहासिक महत्त्व और आधुनिक विकास के लिए जाना जाता है। भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में शामिल रांची का सांस्कृतिक और भौगोलिक महत्व भी अत्यधिक है।</p>
<hr class="bg-offsetPlus h-px border-0" />
<h3 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 dark:font-[450]"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>रांची की प्रमुख विशेषताएँ:</strong></span></h3>
<ul class="marker:text-quiet list-disc">
<li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0">
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>प्राकृतिक वातावरण और ठंडा मौसम:</strong><br />रांची समुद्र तल से करीब 650मीटर की ऊँचाई पर छोटा नागपुर पठार पर स्थित है। इसकी जलवायु पूरे वर्ष सुहावनी रहती है, जिससे यह गर्मियों में भी राहत का अहसास देता है।</p>
</li>
<li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0">
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>शहर का भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्त्व:</strong><br />रांची से होकर कर्क रेखा</p></li></ul>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ranchi-tourist-destination-the-city-of-natural-beauty-and-major/article-15620"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/fgf.png" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>रांची, झारखंड की राजधानी, 'झरनों के शहर' के नाम से प्रसिद्ध है। यह शहर अपने प्राकृतिक सौंदर्य, ठंडी जलवायु, ऐतिहासिक महत्त्व और आधुनिक विकास के लिए जाना जाता है। भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में शामिल रांची का सांस्कृतिक और भौगोलिक महत्व भी अत्यधिक है।</p>
<hr class="bg-offsetPlus h-px border-0" />
<h3 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 dark:font-[450]"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>रांची की प्रमुख विशेषताएँ:</strong></span></h3>
<ul class="marker:text-quiet list-disc">
<li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0">
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>प्राकृतिक वातावरण और ठंडा मौसम:</strong><br />रांची समुद्र तल से करीब 650मीटर की ऊँचाई पर छोटा नागपुर पठार पर स्थित है। इसकी जलवायु पूरे वर्ष सुहावनी रहती है, जिससे यह गर्मियों में भी राहत का अहसास देता है।</p>
</li>
<li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0">
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>शहर का भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्त्व:</strong><br />रांची से होकर कर्क रेखा गुजरती है, जो इसे अनोखा भौगोलिक स्थान बनाती है। ऐतिहासिक रूप से, यह झारखंड आंदोलन का भी केंद्र रहा है।</p>
</li>
<li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0">
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>औद्योगिक व शैक्षिक केंद्र:</strong><br />रांची में हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC), भारत इस्पात प्राधिकरण (SAIL) सहित कई प्रमुख कारखाने और संस्थान हैं। रांची BIT Mesra, IIM, RIMS, NIFFT जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए भी प्रसिद्ध है।</p>
</li>
<li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0">
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>सांस्कृतिक विविधता:</strong><br />शहर का खानपान, यहाँ का स्ट्रीट फूड और यहाँ के लोग बेहद आत्मीय और मददगार माने जाते हैं। यहाँ विभिन्न धर्म, भाषाएँ और जनजातियाँ आपस में मिलजुल कर रहती हैं।</p>
</li>
</ul>
<hr class="bg-offsetPlus h-px border-0" />
<h3 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 dark:font-[450]"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>रांची के प्रमुख दर्शनीय स्थल:</strong></span></h3>
<div class="group relative">
<div class="w-full overflow-x-auto md:max-w-[90vw] border-borderMain/50 ring-borderMain/50 divide-borderMain/50 bg-transparent">
<table class="border-borderMain my-[1em] w-full table-auto border">
<thead class="bg-offset">
<tr>
<th class="border-borderMain p-sm break-normal border text-left align-top">स्थल</th>
<th class="border-borderMain p-sm break-normal border text-left align-top">विशेषताएँ</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border"><strong>रॉक गार्डन और गोंडा हिल</strong></td>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border">अनूठे शिल्प और सुंदर झरनों के लिए लोकप्रिय</td>
</tr>
<tr>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border"><strong>बिरसा जैविक उद्यान</strong></td>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border">प्रकृति प्रेमियों के लिए वन्य जीव व उद्यान</td>
</tr>
<tr>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border"><strong>रांची झील</strong></td>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border">बोटिंग व परिवार के पिकनिक के लिए आदर्श</td>
</tr>
<tr>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border"><strong>जगन्नाथ मंदिर (पहाड़गंज)</strong></td>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border">धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व</td>
</tr>
<tr>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border"><strong>टैगोर हिल</strong></td>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border">शांतिपूर्ण नजारों व प्रेरणा के लिए प्रसिद्ध</td>
</tr>
<tr>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border"><strong>मैक क्लुस्कीगंज</strong></td>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border">ऐतिहासिक अंग्रेज़ी बसावट, सुरम्य स्थल</td>
</tr>
<tr>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border"><strong>आदिवासी संग्राहलय</strong></td>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border">आदिवासी संस्कृति को जानने के लिए बेहतरीन जगह</td>
</tr>
<tr>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border"><strong>पंच घाट झरना, हुंडरू फॉल्स, धुर्वा डैम आदि</strong></td>
<td class="border-borderMain px-sm min-w-[48px] break-normal border">शहर के आसपास के मशहूर जलप्रपात और पिकनिक स्पॉट, जो हर साल हज़ारों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
<div class="px-two bg-base border-borderMain shadow-subtle pointer-coarse:opacity-100 right-xs absolute bottom-0 flex gap-2 rounded-lg border py-px opacity-0 transition-opacity group-hover:opacity-100">
<h3><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span style="font-family:Mukta, sans;font-size:2rem;">आधुनिक रांची:</span></strong></span></h3>
</div>
</div>
<ul class="marker:text-quiet list-disc">
<li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0">
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">शहर में कई मॉल, शॉपिंग सेंटर, पार्क, होटल और उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं।</p>
</li>
<li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0">
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">खेल के प्रति समर्पित शहर – यहाँ क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल आदि के इंटरनेशनल स्टेडियम हैं। रांची, क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी का गृह नगर भी है।</p>
</li>
<li class="py-0 my-0 prose-p:pt-0 prose-p:mb-2 prose-p:my-0 [&amp;&gt;p]:pt-0 [&amp;&gt;p]:mb-2 [&amp;&gt;p]:my-0">
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">रांची-जोन में आधुनिक ट्रांसपोर्टेशन व अन्य सुविधाओं का लगातार विकास हो रहा है।</p>
</li>
</ul>
<hr class="bg-offsetPlus h-px border-0" />
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">रांची प्राकृतिक और सांस्कृतिक से लेकर आधुनिक जीवनशैली तक, सब कुछ समेटे हुए है। यहाँ के दर्शनीय स्थल, हिल स्टेशन जैसा मौसम, जलप्रपात और जनजातीय रंग, हर शख्स के लिए यादगार अनुभव बनाते हैं। यदि आप शांति, सुंदरता और विविधता से भरे किसी शहर की तलाश में हैं, तो रांची आपका अगला गंतव्य अवश्य हो सकता है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ranchi-tourist-destination-the-city-of-natural-beauty-and-major/article-15620</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ranchi-tourist-destination-the-city-of-natural-beauty-and-major/article-15620</guid>
                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 15:53:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2025-08/fgf.png"                         length="1796979"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेटे का फर्ज और राजधर्म: दुख की घड़ी में हेमंत सोरेन निभा रहें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong class="animating"><span class="citation-10">रामगढ़:</span></strong> दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद, मुख्यमंत्री <span class="citation-10">हेमंत सोरेन</span> अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं।<span class="animating"> एक ओर जहां वह अपने पिता के </span><span class="animating">श्राद्ध कर्म</span> में शामिल होकर पुत्र का फर्ज निभा रहे हैं,<span class="animating"> वहीं दूसरी ओर वह </span><span class="animating">राज्य के प्रति अपनी जिम्मेदारियों</span><span class="animating"> को भी पूरी लगन से निभा रहे हैं। सरकारी कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए वह अपने पैतृक निवास </span><span class="animating">नेमरा</span><span class="animating"> से ही अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं और जरूरी फाइलें निपटा रहे हैं।</span></p>
<p>यह स्थिति मुख्यमंत्री के समर्पण और कार्य के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती है।</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ramgarh/hemant-soren-is-responsible-for-chief-minister/article-15372"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-08t152025.004.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong class="animating"><span class="citation-10">रामगढ़:</span></strong> दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद, मुख्यमंत्री <span class="citation-10">हेमंत सोरेन</span> अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं।<span class="animating"> एक ओर जहां वह अपने पिता के </span><span class="animating">श्राद्ध कर्म</span> में शामिल होकर पुत्र का फर्ज निभा रहे हैं,<span class="animating"> वहीं दूसरी ओर वह </span><span class="animating">राज्य के प्रति अपनी जिम्मेदारियों</span><span class="animating"> को भी पूरी लगन से निभा रहे हैं। सरकारी कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए वह अपने पैतृक निवास </span><span class="animating">नेमरा</span><span class="animating"> से ही अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं और जरूरी फाइलें निपटा रहे हैं।</span></p>
<p>यह स्थिति मुख्यमंत्री के समर्पण और कार्य के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती है। व्यक्तिगत दुख और शोक की इस घड़ी में भी, उन्होंने राजधर्म को सर्वोपरि रखा है। वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि राज्य का विकास कार्य और प्रशासन का संचालन बिना किसी बाधा के चलता रहे। इस अवसर पर परिवार और समाज के लोग भी दिवंगत दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद हैं, और पूरा माहौल आत्मीय श्रद्धा से भरा हुआ है।</p>
<h4><strong>दिगम्बर दिशोम गुरु शिबू सोरेन के श्राद्ध कर्म का चौथा दिन:</strong></h4>
<p>यह श्राद्ध कर्म झारखंड की आदिवासी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का एक अभिन्न अंग है, जिसमें परिवार के सदस्य प्रतिदिन विधि-विधान से दिवंगत पूर्वज को अन्न समर्पित करते हैं। हेमंत सोरेन इन सभी रस्मों को पूरी श्रद्धा और आदर के साथ निभा रहे हैं, जो उनके पारिवारिक मूल्यों और अपनी जड़ों से जुड़ाव को भी दर्शाता है। उनका यह प्रयास दिखाता है कि वह एक संवेदनशील पुत्र होने के साथ-साथ एक जिम्मेदार मुख्यमंत्री भी हैं।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रामगढ़</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ramgarh/hemant-soren-is-responsible-for-chief-minister/article-15372</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ramgarh/hemant-soren-is-responsible-for-chief-minister/article-15372</guid>
                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 15:25:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2025-08/resized-image---2025-08-08t152025.004.jpeg"                         length="39812"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संस्कृति, अधिकार और अस्मिता की आवाज़ बनकर निकला जागरूकता रथ: आदिवासी महोत्सव की तैयारी तेज</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[आदिवासी महोत्सव 2025 के लिए जागरूकता रथ रांची से रवाना हुआ। यह रथ राज्य भर में आदिवासी कला, संस्कृति और गौरवपूर्ण विरासत का संदेश फैलाएगा। 9-11 अगस्त को होने वाले इस आयोजन की जानकारी जन-जन तक पहुंचाई जाएगी।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/preparations-for-the-awareness-chariot-tribal-festival-intensified-as-the/article-15059"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-07/resized-image-(78)2.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>झारखंड विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आगामी 9, 10 एवं 11 अगस्त 2025 को आयोजित होने वाले "आदिवासी महोत्सव 2025" को लेकर तैयारियां अपने चरम पर है। इसी क्रम में महोत्सव से जुड़ी जानकारी, महत्व और संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जागरूकता रथ का शुभारंभ किया गया। </p>
<p>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के विशेष सचिव राजीव लोचन बक्शी ने हरी झंडी दिखाकर जागरूकता रथ को रवाना किया। उन्होंने कहा कि जागरूकता रथ इस आयोजन की भूमिका को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। </p>
<p>राजीव लोचन बक्शी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के मार्गदर्शन में आदिवासी महोत्सव 2025 एक समावेशी और गौरवशाली आयोजन के रूप में उभरने जा रहा है। यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक पहचान, एक संघर्ष, एक गर्व का उत्सव है, जिसमें पारंपरिक आदिवासी संस्कृति के साथ-साथ आधुनिकता का  भी समावेश देखने को मिलेगा। आदिवासी महोत्सव 2025 के माध्यम से हम आदिवासी संस्कृति , अस्मिता, अधिकार और योगदान से रू ब रू हो सकेंगे । इस महोत्सव के माध्यम से राज्य और देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में फैले आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, लोककला, भाषा, वेशभूषा, और खान-पान को प्रदर्शित कर एक सशक्त सांस्कृतिक संवाद स्थापित करेंगे । </p>
<h4><strong>जागरूकता रथ की विशेषताएँ:</strong></h4>
<p>राजधानी रांची के प्रमुख चौराहों, बाजारों, स्कूल-कॉलेजों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में यह रथ घूमेगा। रथ पर पोस्टर, फ्लैक्स के माध्यम से आदिवासी कलाकृतियाँ, तथा सांस्कृतिक संदेश प्रदर्शित किए जाएंगे,जिससे जनता को आदिवासी समुदाय की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचित होने का अवसर मिले।</p>
<p>रथ यात्रा के माध्यम से लोगों को महोत्सव की तारीख, स्थान, विशेष आकर्षण, आमंत्रित कलाकार, और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की जानकारी दी जाएगी। केवल रांची ही नहीं, राज्य के अन्य जिलों में भी यह जागरूकता रथ भ्रमण करेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आयोजन से जुड़ सकें और इसकी गरिमा में वृद्धि हो।</p>
<p>इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक आनंद सहित विभाग के अन्य पदाधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/preparations-for-the-awareness-chariot-tribal-festival-intensified-as-the/article-15059</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/preparations-for-the-awareness-chariot-tribal-festival-intensified-as-the/article-15059</guid>
                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 19:55:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2025-07/resized-image-%2878%292.jpeg"                         length="50649"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        