<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://samridhjharkhand.com/congress-statement/tag-27646" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Samridh Jharkhand RSS Feed Generator</generator>
                <title>कांग्रेस बयान - Samridh Jharkhand</title>
                <link>https://samridhjharkhand.com/tag/27646/rss</link>
                <description>कांग्रेस बयान RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत–अमेरिका ट्रेड डील: ‘आत्मनिर्भर भारत’ नहीं, आर्थिक आत्मसमर्पण है : विजय शंकर नायक</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस नेता विजय शंकर नायक ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह समझौता किसानों, MSME उद्योगों और रोजगार के लिए नुकसानदायक हो सकता है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/india-us-trade-deal-is-not-self-reliant-india-but-economic-surrender/article-17985"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/77ca887d-caa4-4f0c-b7f2-458dfcb780e2_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>भारत–अमेरिका ट्रेड डील को भाजपा सरकार एक “ऐतिहासिक उपलब्धि” के रूप में प्रचारित कर रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि यह समझौता भारत के किसानों, छोटे उद्योगों, श्रमिकों और घरेलू बाजार के लिए एक आर्थिक खतरे की घंटी है। यह डील आत्मनिर्भर भारत का विस्तार नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विदेशी कॉर्पोरेट के सामने झुकाने की नीति प्रतीत होती है।</p>
<p>सवाल यह नहीं है कि अमेरिका को कितना फायदा होगा — सवाल यह है कि भारत को कितना नुकसान झेलना पड़ेगा।</p>
<p><strong>किसानों के लिए खतरा: अमेरिकी कृषि आयात का हमला</strong> — अमेरिका अपने किसानों को भारत की तुलना में 5–10 गुना अधिक सब्सिडी देता है। जहाँ अमेरिकी किसानों को प्रति वर्ष ₹3–5 लाख तक सरकारी सहायता मिलती है, वहीं भारतीय किसान को औसतन ₹14,000–₹18,000 प्रति वर्ष सहायता मिलती है।</p>
<p><strong>डेटा क्या कहता है?</strong><br />2025 में अमेरिका से भारत में कृषि आयात में 34% से अधिक वृद्धि, भारत के कृषि निर्यात में 13.6% की गिरावट। यदि सोयाबीन, डेयरी, मक्का, एथेनॉल और प्रोसेस्ड फूड पर आयात खुला, भारतीय किसान मूल्य प्रतिस्पर्धा में तबाह हो जाएगा। यह किसानों की आय, MSP और ग्रामीण रोज़गार पर सीधा हमला है।</p>
<p><strong>MSME और घरेलू उद्योग: रोज़गार पर सीधा वार</strong><br />भारत की लगभग 30% GDP और 11 करोड़ से अधिक नौकरियाँ MSME सेक्टर पर निर्भर हैं। लेकिन — अमेरिकी टैरिफ दबाव से वस्त्र निर्यात में 20–30% गिरावट, चमड़ा, खिलौना, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में छोटे उद्योग बंद होने के कगार पर। यदि अमेरिकी उत्पाद सस्ते टैरिफ पर आए — लाखों MSME इकाइयाँ बंद होंगी, करोड़ों नौकरियाँ जाएँगी।</p>
<p>भाजपा सरकार कॉर्पोरेट मित्र व्यापार कर रही है — लेकिन छोटे उद्योगों और श्रमिकों के लिए कोई सुरक्षा नीति नहीं है।</p>
<p><strong>व्यापार असंतुलन: अमेरिका को लाभ, भारत को घाटा</strong><br />2024–25 में — अमेरिका का भारत को कृषि निर्यात ≈ $2 अरब, भारत का अमेरिका को कृषि निर्यात ≈ $5.5 अरब। लेकिन नई डील के बाद — अमेरिकी कंपनियों को अधिक टैरिफ राहत और बाज़ार पहुँच, भारतीय उत्पादों पर गैर-टैरिफ बाधाएँ बनी रहेंगी।</p>
<p>इसका अर्थ है — लाभ अमेरिका का, बाज़ार भारत का, नुकसान भारतीय उत्पादक का।</p>
<p><strong>खाद्य सुरक्षा, GM फसल और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खतरा</strong><br />इस ट्रेड डील के तहत — GM फसलें, केमिकल-इंटेंसिव कृषि उत्पाद, बड़े पैमाने पर प्रोसेस्ड फूड भारत के बाज़ार में आ सकते हैं।</p>
<p><strong>जोखिम:</strong><br />पारंपरिक खेती का विनाश, स्वास्थ्य संकट, जैव विविधता और पर्यावरण को नुकसान। यह केवल व्यापार नहीं — भारत की खाद्य संप्रभुता पर हमला है।</p>
<p><strong>रोजगार संकट: व्यापार युद्ध का सीधा असर</strong><br />वैश्विक शोध बताता है कि ट्रेड लिबरलाइजेशन और टैरिफ वॉर से विकासशील देशों में नौकरियाँ सबसे पहले खत्म होती हैं।</p>
<p>भारत पहले ही झेल रहा है — 45 वर्षों में सबसे अधिक बेरोज़गारी, युवाओं में रिकॉर्ड-स्तरीय जॉब क्राइसिस है, और अब भाजपा सरकार एक ऐसी डील कर रही है — जो रोज़गार संकट को और गहरा करेगी।</p>
<p><strong>पारदर्शिता का अभाव: भाजपा देश से सच क्यों छुपा रही है?</strong><br />ट्रेड डील का पूरा मसौदा सार्वजनिक नहीं, संसद में व्यापक चर्चा नहीं, किसानों, MSME और ट्रेड यूनियनों से कोई परामर्श नहीं। यह लोकतंत्र नहीं — यह कॉर्पोरेट दबाव में बनाई गई नीति है।</p>
<p>यदि यह डील भारत के हित में है — तो सरकार डर क्यों रही है इसे सार्वजनिक करने से?</p>
<p><strong>भाजपा की नीति बनाम कांग्रेस की सोच</strong></p>
<p><strong>भाजपा का मॉडल:</strong><br />विदेशी कॉर्पोरेट को प्राथमिकता, घरेलू उद्योगों की उपेक्षा, किसानों की अनदेखी, प्रचार आधारित राष्ट्रवाद।</p>
<p><strong>कांग्रेस का दृष्टिकोण:</strong><br />किसान-केंद्रित व्यापार नीति, MSME और घरेलू उद्योग की सुरक्षा, संतुलित वैश्विक व्यापार, रोजगार और सामाजिक न्याय पर प्राथमिकता।</p>
<p>कांग्रेस मानती है कि — व्यापार राष्ट्रीय हित के लिए होना चाहिए, विदेशी दबाव के लिए नहीं।</p>
<p>यह डील ‘विकसित भारत’ नहीं — आर्थिक उपनिवेशवाद है।</p>
<p>यदि — किसान घाटे में जाए, छोटे उद्योग बंद हों, रोज़गार घटे, विदेशी कंपनियाँ भारतीय बाज़ार पर कब्ज़ा करें — तो यह विकास नहीं, यह 21वीं सदी का आर्थिक उपनिवेशवाद होगा।</p>
<p><strong>अंतिम निष्कर्ष: भाजपा जवाब दे — देश चुप नहीं बैठेगा</strong></p>
<p>भारत–अमेरिका ट्रेड डील राष्ट्रीय गर्व का नहीं, राष्ट्रीय चिंता का विषय है।</p>
<p>देश को जानने का अधिकार है —<br />क्या किसान सुरक्षित हैं?<br />क्या MSME सुरक्षित हैं?<br />क्या रोज़गार सुरक्षित हैं?<br />और क्या यह समझौता भारत को मजबूत करेगा या निर्भर?</p>
<p>यदि भाजपा सरकार जवाब नहीं देगी — तो इतिहास इस डील को किसानों, युवाओं और घरेलू उद्योग के साथ सबसे बड़ा आर्थिक धोखा मानेगा।</p>
<p>कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाती रहेगी — क्योंकि भारत बिकने के लिए नहीं, बनाने के लिए है।</p>
<p><strong><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2026-02/92ef12b5-44dc-4c7f-9800-26f54d07d656.jpg" alt="92ef12b5-44dc-4c7f-9800-26f54d07d656" width="121" height="182"></img></strong></p>
<p><strong>लेखक: विजय शंकर नायक</strong><br /><strong>वरिष्ठ कांग्रेस नेता</strong></p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/article/india-us-trade-deal-is-not-self-reliant-india-but-economic-surrender/article-17985</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/article/india-us-trade-deal-is-not-self-reliant-india-but-economic-surrender/article-17985</guid>
                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:07:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2026-02/77ca887d-caa4-4f0c-b7f2-458dfcb780e2_samridh_1200x720.jpeg"                         length="47668"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कल तक विरोध, आज समर्थन: चिराग की बदली हुई भाषा क्या संकेत देती है?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[चिराग पासवान ने नीतीश कुमार की तारीफ कर राजनीतिक रुख में बड़ा बदलाव दिखाया है, जिससे बिहार में एनडीए की नई रणनीति और संभावित गठबंधन की दिशा साफ होती है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/bihar/patna/till-yesterday-what-indicates-the-changed-language-of-the-lamp/article-15042"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-07/refgdxvc.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पटना: </strong>बिहार की राजनीति में समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और जमुई से सांसद चिराग पासवान का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर बदला हुआ रवैया इस बात का संकेत दे रहा है कि राजनीतिक परिस्थितियां न सिर्फ लचीली हैं, बल्कि व्यक्तिगत समीकरण भी लगातार नई दिशा ले रहे हैं।<br /></p><p>चिराग पासवान ने हाल ही में एक बयान में स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नेतृत्व स्थिर और अनुभवपूर्ण है। यह वही चिराग हैं जिन्होंने कुछ दिन पहले तक नीतीश कुमार के खिलाफ कड़ी बयानबाजी की थी और यहां तक कह दिया था कि उन्हें एनडीए में शामिल करने का फैसला गलत था। उस समय उन्होंने समर्थन पर अफसोस भी जताया था।<br /></p><p>लेकिन अब हालात बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। एक कार्यक्रम के दौरान चिराग ने कहा कि अगर एनडीए को बिहार में मजबूती से आगे बढ़ाना है, तो नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेताओं का साथ जरूरी है। उनका यह बयान न केवल एनडीए में नीतीश कुमार की भूमिका को और मजबूत करता है, बल्कि आने वाले चुनावों में संभावित गठबंधन की दिशा भी स्पष्ट करता है।<br /></p><p>चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू हो चुकी है और बीजेपी के साथ एनडीए का चेहरा कौन होगा, इसे लेकर चर्चा तेज हो रही है। माना जा रहा है कि चिराग का यह बदला रुख राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें स्थायित्व और सत्ता में भागीदारी दोनों को साधने की कोशिश हो रही है।<br /></p><p>चिराग पासवान के इस बयान को नीतीश कुमार के लिए एक राजनीतिक राहत की तरह देखा जा रहा है। एनडीए में पहले से ही कई दलों के बीच आपसी मतभेद सामने आते रहे हैं, ऐसे में चिराग का समर्थन सत्ता पक्ष के लिए एकजुटता का संकेत बन सकता है।<br /></p><p>हालांकि, विपक्षी दल इस बदलाव को 'राजनीतिक अवसरवाद' बता रहे हैं। आरजेडी और कांग्रेस के नेताओं ने चिराग पासवान के इस बयान को 'डैमेज कंट्रोल' बताया और कहा कि यह जनता को भ्रमित करने की रणनीति है।<br /></p><p>बिहार की राजनीति में यह बदलाव कितनी दूर तक जाएगा, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी, लेकिन चिराग पासवान के बयान ने ज़रूर यह संकेत दे दिया है कि गठबंधन की राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता – न विरोध, न समर्थन।<br /></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>बिहार</category>
                                            <category>पटना</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/bihar/patna/till-yesterday-what-indicates-the-changed-language-of-the-lamp/article-15042</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/bihar/patna/till-yesterday-what-indicates-the-changed-language-of-the-lamp/article-15042</guid>
                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 16:00:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2025-07/refgdxvc.jpg"                         length="234875"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        