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                <title>Tribal issues - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Tribal issues RSS Feed</description>
                
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                <title>Opinion : ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट पर विकास बनाम पर्यावरण की जंग</title>
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                        <![CDATA[ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित 90 हजार करोड़ रुपये की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने के बाद विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। यह परियोजना भारत को समुद्री व्यापार और रणनीतिक शक्ति में नई ऊंचाई दे सकती है, लेकिन इससे जैव विविधता और आदिवासी समुदायों पर खतरे की आशंका भी जताई जा रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-battle-of-development-vs-environment-on-great-nicobar-mega/article-18230"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/2b1c13ed-b467-4f49-ac3f-dc485429b5cd_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:left;">अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार आज भारत की रणनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय बहस का केंद्र बन चुका है। करीब 90 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या भारत विकास और संरक्षण के बीच संतुलन साध पाएगा।</p>
<p style="text-align:left;">ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा है कि परियोजना को दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं और इसे रोका नहीं जा सकता, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि हर शर्त का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा। ग्रेट निकोबार द्वीप भारत का सबसे दक्षिणी बड़ा द्वीप है और भौगोलिक दृष्टि से इसकी स्थिति असाधारण मानी जाती है। यह द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य से करीब 35 से 40 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है।</p>
<p style="text-align:left;">अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों और शिपिंग डेटा के मुताबिक, दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। चीन के कुल ऊर्जा आयात का करीब 60 प्रतिशत और जापान तथा दक्षिण कोरिया के व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते पर निर्भर है। यही वजह है कि इसे हिंद महासागर क्षेत्र की सबसे अहम ‘चोक पॉइंट’ माना जाता है।</p>
<p style="text-align:left;">भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अभी तक देश के पास इस इलाके में कोई बड़ा ट्रांसशिपमेंट हब नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत का करीब 75 प्रतिशत कंटेनर ट्रांसशिपमेंट विदेशी बंदरगाहों जैसे सिंगापुर, कोलंबो और पोर्ट क्लांग के जरिए होता है। इससे न केवल समय बढ़ता है, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी 10 से 15 प्रतिशत तक ज्यादा हो जाती है।</p>
<p style="text-align:left;">रिजर्व बैंक और शिपिंग मंत्रालय से जुड़े अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि उच्च लॉजिस्टिक लागत के कारण भारत की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। इसी कमी को दूर करने के लिए ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट को गेमचेंजर बताया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली होगी। इसमें गैलेथिया बे पर अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांस शिपमेंट टर्मिनल, ड्यूल यूज सिविल-मिलिट्री एयरपोर्ट, 450 मेगावॉट का गैस और सौर ऊर्जा आधारित पावर प्लांट और एक नई इंटीग्रेटेड टाउनशिप शामिल है।</p>
<p style="text-align:left;">सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि सिर्फ पोर्ट परियोजना पर करीब 40,040 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पहले चरण में 18,000 करोड़ रुपये की लागत से 2028 तक इसे चालू करने का लक्ष्य है। शुरुआती क्षमता 4 मिलियन टीईयू से अधिक होगी, जबकि पूरी तरह विकसित होने पर यह क्षमता 16 मिलियन टीईयू तक पहुंच सकती है।</p>
<p style="text-align:left;">अगर इन आंकड़ों की तुलना की जाए तो भारत का कुल कंटेनर ट्रैफिक 2020 में करीब 17 मिलियन टीईयू था, जबकि चीन का आंकड़ा 245 मिलियन टीईयू से अधिक रहा। यह अंतर साफ दिखाता है कि भारत को अपने समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में कितनी बड़ी छलांग की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़े कंटेनर जहाज सीधे ग्रेट निकोबार पर रुकने लगते हैं, तो छोटे फीडर जहाजों के जरिए देश के पूर्वी और पश्चिमी तट के बंदरगाहों तक माल पहुंचाना आसान होगा।</p>
<p style="text-align:left;">इससे ट्रांजिट टाइम में कई दिन की बचत हो सकती है और लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।रणनीतिक दृष्टि से यह परियोजना भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती दे सकती है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार ग्रेट निकोबार का विकास हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी, खुफिया गतिविधियों और त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया की क्षमता को बढ़ाएगा। आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता अभियानों के लिहाज से भी यह द्वीप एक अहम बेस बन सकता है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सामरिक हलचलों के बीच भारत के लिए यह एक अतिरिक्त बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:left;">लेकिन जितनी बड़ी इसकी रणनीतिक और आर्थिक अहमियत है, उतनी ही गहरी इसकी पर्यावरणीय चुनौतियां भी हैं। ग्रेट निकोबार एक बायोस्फीयर रिजर्व है, जहां घने वर्षावन, मैंग्रोव, कोरल रीफ और कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। पर्यावरण आकलनों के मुताबिक परियोजना के लिए 8.5 लाख से लेकर 50 लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई की आशंका जताई गई है।</p>
<p style="text-align:left;">यह इलाका लेदरबैक समुद्री कछुओं के सबसे महत्वपूर्ण प्रजनन स्थलों में से एक है। इसके अलावा निकोबार मेगापोड पक्षी, खारे पानी के मगरमच्छ, निकोबार मकाक और रॉबर क्रैब जैसी प्रजातियों पर भी खतरे की बात कही जा रही है यही वजह है कि इस परियोजना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विरोध भी सामने आया। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई पर्यावरणविदों ने आरोप लगाया कि परियोजना में पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के भविष्य को नजरअंदाज किया गया है।</p>
<p style="text-align:left;">उनका कहना रहा कि क्लाइमेट चेंज के दौर में समुद्र स्तर बढ़ रहा है और ऐसे में इतने बड़े तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ग्रेट निकोबार सिर्फ जैव विविधता का केंद्र नहीं है, बल्कि शोंपेन और निकोबारी जैसी जनजातियों का भी घर है। खासतौर पर शोंपेन जनजाति की आबादी 200 से 300 के बीच बताई जाती है और उन्हें दुनिया की सबसे संवेदनशील आदिवासी जनजातियों में गिना जाता है।</p>
<p style="text-align:left;">विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर बाहरी आबादी के आने से उनकी पारंपरिक जीवन शैली, संस्कृति और अस्तित्व पर गंभीर असर पड़ सकता है। सरकार का दावा है कि आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं और उनके क्षेत्रों में न्यूनतम हस्तक्षेप होगा, लेकिन इस पर लगातार निगरानी की मांग की जा रही है।एनजीटी ने अपने आदेश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई सख्त निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:left;">इनमें मैंग्रोव पुनर्स्थापन, कोरल ट्रांसलोकेशन, तटरेखा संरक्षण, वन्य जीवों के प्रजनन स्थलों की सुरक्षा और आदिवासी हितों की रक्षा शामिल है। ट्रिब्यूनल ने यह भी साफ किया है कि आईलैंड कोस्टल रेगुलेशन जोन नियमों का किसी भी स्तर पर उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर, ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट भारत के सामने एक बड़ी परीक्षा है। एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा, समुद्री शक्ति और आर्थिक विकास की जरूरत है, तो दूसरी तरफ पर्यावरण संतुलन और स्थानीय समुदायों की रक्षा की जिम्मेदारी।</p>
<p style="text-align:left;">आने वाले वर्षों में यह परियोजना किस दिशा में आगे बढ़ती है, यही तय करेगा कि ग्रेट निकोबार भारत के लिए अगला सिंगापुर बनता है या विकास और संरक्षण की टकराहट का सबसे बड़ा उदाहरण। फिलहाल इतना तय है कि यह द्वीप अब सिर्फ भारत का सबसे दक्षिणी भूभाग नहीं, बल्कि देश की समुद्री राजनीति और दीर्घकालिक रणनीति का केंद्र बन चुका है</p>
<p style="text-align:left;"><strong>अजय कुमार</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 16:28:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[अजय कुमार, लखनऊ]]>
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                <title>पेसा कानून लागू करने में देरी पर फूटा आदिवासी–मूलवासी जनाधिकार मंच का गुस्सा</title>
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                        <![CDATA[रांची में आदिवासी–मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने झारखंड सरकार पर पेसा कानून लागू करने में हो रही देरी को लेकर गंभीर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार खनन और कॉरपोरेट दबाव में काम कर रही है तथा ग्रामसभाओं को अधिकार देने में स्पष्टता नहीं दिखा रही। नायक ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द तिथि घोषित नहीं करती तो राज्यव्यापी जन-अभियान शुरू किया जाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/tribal-indigenous-peoples-rights-forums-anger-over-delay-in-implementing-pesa/article-17192"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-11/resized-image---2025-11-22t172911.095.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची :</strong> आदिवासी–मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने झारखंड सरकार द्वारा पेसा  कानून के कार्यान्वयन में लगातार हो रही देरी पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पेसा सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि झारखंडी समाज के अस्तित्व, पहचान और स्वशासन का मूलाधार है। सरकार की चुप्पी और अस्पष्ट रुख सीधे तौर पर जनता की ग्रामसभा-आधारित परंपरागत सत्ता को कमजोर करता है नायक ने आगे कहा  की “सरकार किसके दबाव में काम कर रही है, जनता जानना चाहती है” |</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा की पेसा लागू करने से सबसे ज़्यादा प्रभावित वे क्षेत्र होंगे जहाँ खनन और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाएँ तेज़ हैं। यही कारण है कि समाज में यह गहरी आशंका है कि सरकार कहीं खनन–कॉरपोरेट दबाव में तो नहीं है। सरकार स्पष्ट करे कि वह किसके  दबाव में पेसा पर ठोस कदम नहीं उठा रही।”आज ग्रामसभाओं को अधिकार नहीं है |</p>
<p style="text-align:justify;">नायक ने आगे कहा  की राज्य सरकार द्वारा बार-बार बयान दिए जा रहे हैं, लेकिन आज तक—पेसा  लागू करने की अधिसूचना जारी नही की ,ग्रामसभा सशक्तिकरण के नियम,तथा ज़मीनी स्तर पर पंचायतों की भूमिका पर कोई ठोस स्पष्टता नहीं है सरकार का जिससे झारखंडी जनता असमंजस में पड़ी है ।उन्होंने कहा कि सरकार की यह धीमी प्रक्रिया ग्रामसभाओं को अधिकार देने के बजाय एक संवैधानिक अधिकार को लटकाने का प्रयास लगता है।“पेसा नहीं लागू तो अस्तित्व संकट और बड़ा होगा”अपने बयान में नायक ने कहा की पेसा झारखंडी समाज के लिए सिर्फ विकास नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिना पेसा  के – जमीन छीनी जाएगी, खनिज बाहर जाएगा, और झारखंडी समाज और अधिक हाशिये पर चले  जायेंगे ।”उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और देरी करती रही तो आने वाले वर्षों में ब्यापक रूप से विस्थापन बढ़ेगा,परंपरागत शासन कमजोर होगा, और खनिज आधारित लूट और भी  तेज़ होगी। सरकार को स्पष्ट संदेश अभी नहीं, तो कभी नहीं’|</p>
<p>नायक ने कहा कि सरकार के दूसरे (लगातार) कार्यकाल का पहला वर्ष पूरा होने जा रहा है, इसलिए यह समय निर्णायक है और झारखंडी समाज के आकांक्षाओ  का प्रतीक भी है ।“यदि सरकार सच में झारखंडी समाज के साथ है, तो उसे 28 नवंबर 2025 से पहले या तुरंत बाद पेसा लागू करने की स्पष्ट तिथि घोषित करनी चाहिए।”इन्होने आगे यह भी कहा कि यदि सरकार चुप्पी बरकरार रखती है तो आदिवासी–मूलवासी संगठन राज्यव्यापी जन-अभियान चलाने पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता अब और  इंतजार करने को तैयार नहीं है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 17:37:22 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>केंद्र की खनिज नीतियों पर भड़के विजय शंकर नायक, झारखंड को “संगठित लूट” का शिकार बताया</title>
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                        <![CDATA[रांची में विजय शंकर नायक ने केंद्र की खनिज नीतियों को झारखंड विरोधी करार देते हुए कोयला राजस्व, जीएसटी, MMDR एक्ट और कोल ब्लॉक निजीकरण को “संगठित लूट” बताया। उन्होंने राज्य के अधिकार बहाल करने, ग्राम सभा की स्वीकृति अनिवार्य करने और खनिज राजस्व में 50% हिस्सेदारी की मांग उठाई।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/vijay-shankar-nayak-angry-over-the-mineral-policies-of-the/article-17170"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-11/resized-image---2025-11-20t171933.914.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची :</strong>  झारखंड की खनिज संपदा पर भाजपा सरकार की केंद्रीय नीतियों को लेकर राज्य में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने केंद्र की नीतियों को “पूरी तरह लूट-प्रधान, कॉर्पोरेट-परस्त और संविधान-विरोधी” करार दिया है।<br /> नायक आगे ने कहा की “दिल्ली की हर नीति झारखंड के खिलाफ, और निजी कंपनियों के पक्ष में बनाई गई है।खनिज अधिकार छीन, कर अधिकार छीना, और बदले में झारखंड को गरीबी, विस्थापन और कुपोषण सौंपा—यह एक योजनाबद्ध लूट है जो अब बर्दाश्त नही किया जायेगा ।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्होने आरोप लगाते हुए कहा की केंद्र की 5 सबसे बड़ी ‘लूट नीति’ने झारखंडी समाज की खनिज सम्पन्न होते हुए भी कंगाल बना कर रखा है जो संविधान के भी विरुद्ध है | उदाहरन देते हुए आगे कहा की (1) कोयला संपदा पर सीधा कब्ज़ा — 35 लाख करोड़ निकाला, झारखंड को 4–5% टुकड़ा । इन्होने यह भी बताया कि पिछले 8 वर्षों में झारखंड से 35 लाख करोड़ रुपए का कोयला निकाला गया, लेकिन राज्य को रॉयल्टी के रूप में सिर्फ 4–5% हिस्सा मिला। संसाधन हमारे और मुनाफा दिल्ली व कंपनियों का—यह लोकतंत्र नहीं, संगठित सरकारी लूट है।” (2) 90% कोल ब्लॉक निजी कंपनियों को — पाँचवीं अनुसूची को कचरे में फेंका 2015 से 2023 के बीच झारखंड के अधिकांश कोल ब्लॉक निजी कॉर्पोरेट घरानों को सौंप दिए गए।</p>
<p>यह न केवल गाँवों को उनके अधिकार से वंचित करता है बल्कि ग्राम सभा की भूमिका को भी खत्म कर देता है |नायक ने आगे कहा की —“पाँचवीं अनुसूची और PESA एक्ट को केंद्र सरकार ने कागज़ का टुकड़ा बना दिया।ग्राम सभा, आदिवासी, जल-जंगल-जमीन—सभी को बेमानी कर दिया गया।” (3)  ऊर्जा राष्ट्र की, अंधेरा झारखंड का — विकास का दोहरा मानदंड झारखंड के कोयले से आज महाराष्ट्र दिल्ली एवं अन्य राज्यों में 24 घंटे बिजली, गुजरात एवं अन्य राज्यों में में बड़े - बड़े उद्योगो ,कारखानों का तेज़ विस्तार हो रहा है लेकिन झारखंड में अब भी हमारे गाँवों में अंधेरा है, बेरोजगारी, कुपोष , पलायन ,गरीबी  बुनियादी सुविधाओं का अभाव है ।</p>
<p>नायक ने तीखा सवाल उठाया—“हमारे कोयले से दूसरे राज्यों की चमक क्यों और हमारे ही गाँवों के बच्चे अंधेरे में क्यों (4) जीएसटी—राज्य के अधिकारों की दूसरी बड़ी लूट जीएसटी लागू होने के बाद झारखंड का 18,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का अपना स्थायी कर अधिकार खत्म हुआ। 2022 से मुआवजा भी रोक दिया गया। “पहले खनिज लूट, फिर टैक्स लूट—केंद्र सरकार ने झारखंड की रीढ़ तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।”<br />(5)  MMDR एक्ट—संविधान का गला घोंटने वाली नीति,  MMDR के संशोधनों (1957, 2015, 2021) के जरिए राज्य की खनिज पर संप्रभुता लगभग खत्म कर दी गई।यह सातवीं अनुसूची की पूरी तरह अवमानना है।</p>
<p>नायक ने आगे कहा की —“केंद्र ने संसाधन का अधिकार भी छीना और नियमन का अधिकार भी।यह न नीति है, न सुधार—यह राज्य संघीय ढांचे पर सीधा हमला है।” झारखंड के खिलाफ संघीय हमला तीन स्तरों पर लूट-(1) खनिज लूट ब्लॉक निजी हाथों में, लाभ बाहर। (2) कर लूट राज्य का कर अधिकार खत्म, जीएसटी का मुआवजा रोककर नुकसान बढ़ाया। (3) अधिकार लूट ग्राम सभा की सहमति, PESA, पाँचवीं अनुसूची—सभी को कमजोर किया।</p>
<p>नायक ने कहा की —“ये अलग-अलग नीतियाँ नहीं, बल्कि केंद्र की ‘कॉर्पोरेट-फ्रेंडली लूट व्यवस्था’ का हिस्सा हैं।”नायक की माँगें — ‘लूट निरस्त करो, अधिकार बहाल करो’<br />1. MMDR के सभी विवादित संशोधन तुरंत रद्द हों।<br />2. सभी कोल ब्लॉक का स्वामित्व झारखंड सरकार को वापस दिया जाए।<br />3. खनिज राजस्व का 50% से अधिक सीधे राज्य को मिले।<br />4. पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य की जाए।<br />5. झारखंड को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा मिले।<br />6. जीएसटी नुकसान का पूर्ण और तत्काल मुआवजा दिया जाए।</p>
<p>नायक ने स्पष्ट कहा कि “अब झारखंड झारखंडी समाज चुप नहीं बैठेगा और “केंद्र की लूट के खिलाफ अब न्याय अदालत में नहीं,जनता की अदालत—सड़कों पर होगा।संविधान बचाएँगे, झारखंड बचाएँगे,और अपना हक़ लेकर रहेंगे।”<br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 17:23:08 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>RIMS-2 विरोध: भाजपा पर दलालों को लाभ पहुंचाने का आरोप</title>
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                        <![CDATA[<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>रांची: </strong>झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने हाल ही में रिम्स-2 (RIMS 2) को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन को “प्रायोजित” बताते हुए भाजपा (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री अंसारी ने कहा है कि राज्य सरकार झारखंड के लोगों को गंभीर बीमारियों से निजात दिलाकर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना चाहती है, लेकिन भाजपा जमीन दलालों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से रिम्स-2 के विरोध में जुटी है।</p>
<h5 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 md:text-lg dark:font-[450] [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>विरोध को लेकर मंत्री इरफान अंसारी का बयान</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में बाहर से बुलाए गए लोगों द्वारा रिम्स-2 के विरोध का कोई ठोस आधार नहीं</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/rims-2-protest-bjp-accused-of-benefiting-brokers/article-15802"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(65)3.jpeg" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>रांची: </strong>झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने हाल ही में रिम्स-2 (RIMS 2) को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन को “प्रायोजित” बताते हुए भाजपा (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री अंसारी ने कहा है कि राज्य सरकार झारखंड के लोगों को गंभीर बीमारियों से निजात दिलाकर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना चाहती है, लेकिन भाजपा जमीन दलालों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से रिम्स-2 के विरोध में जुटी है।</p>
<h5 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 md:text-lg dark:font-[450] [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>विरोध को लेकर मंत्री इरफान अंसारी का बयान</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में बाहर से बुलाए गए लोगों द्वारा रिम्स-2 के विरोध का कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारी स्थानीय नहीं बल्कि बाहरी थे, जिनका मकसद सिर्फ विरोध-प्रदर्शन कर माहौल बिगाड़ना था। मंत्री ने साफ किया कि इस मसले की जांच की जा रही है और असली तथ्य जल्द जनता के सामने आएंगे।</p>
<h5 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 md:text-lg dark:font-[450] [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>आदिवासियों का सबसे बड़ा हितैषी कौन?</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">डॉ. अंसारी ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और स्वास्थ्य झारखंड की प्राथमिकता में सर्वोपरि हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के नकली लोग आदिवासियों पर बार-बार फर्जी बातें और गोली चलाने के आरोप लगाते हैं, जबकि सच्चाई अलग है। मंत्री ने खुद को आदिवासियों का सबसे बड़ा हितैषी बताते हुए यह भी कहा कि राज्य में स्वास्थ्य के मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।</p>
<h5 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 md:text-lg dark:font-[450] [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>‘जमीन दलालों को फायदा देने के लिए BJP का विरोध’</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">स्वास्थ्य मंत्री का तर्क है कि भाजपा को रिम्स-2 से नहीं, बल्कि जमीन दलालों को होने वाले नुकसान से चिंता है। मंत्री ने कहा कि विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है, ताकि उनकी पसंद के दलालों को फायदा मिलता रहे।</p>
<h5 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 md:text-lg dark:font-[450] [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>130वां संविधान संशोधन बिल पर भी प्रतिक्रिया</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">मंत्री इरफान अंसारी ने संसद में लाए गए 130वें संविधान संशोधन बिल पर अपनी राय देते हुए कहा कि यह बिल संसद और आमजनता, दोनों का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के जरिए संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है।</p>
<h5 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 md:text-lg dark:font-[450] [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>विपक्ष की भूमिका और लोकसभा स्पीकर का समर्थन</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">इरफान अंसारी ने कहा कि लोकसभा स्पीकर का पद बड़ा जिम्मेदार और संवैधानिक होता है, इसलिए विपक्ष भी संसद की गरिमा बचाने के लिए संसद में आवाज उठाता रहा है। मंत्री ने भाजपा नेताओं पर लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाने का आरोप भी लगाया।</p>
<h5 class="mb-2 mt-4 text-base font-[475] first:mt-0 md:text-lg dark:font-[450] [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>बिहार में राहुल गांधी की भूमिका</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">राहुल गांधी की भूमिका पर डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि बिहार की राजनीति में राहुल गांधी की सक्रियता से कांग्रेस को मजबूती मिली है। उन्होंने तेजस्वी यादव की नेतृत्वकारी भूमिका और युवा नेतृत्व को कांग्रेस के लिए फायदेमंद बताया।</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 16:24:40 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                <title>आदिवासी मुद्दों पर बनेगी फिल्म, टीसीआइ की संचालन समिति का हुआ गठन</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>रांची:</strong> आदिवासी मुद्दों पर आधारित फिल्मों के निर्माण के लिए ट्राइबल सिनेमा आफ इंडिया (टीसीआइ) की बैठक सह कार्यशाला गुरुवार को डा कामिल बुल्के पथ स्थित सत्यभारती सभागार में आयोजित की गई. इस बैठक में संचालन समिति का गठन हुआ. इस मुद्दे पर तीन फिल्मों का निर्माण होगा, जिसकी फंडिंग टीसीआइ करेगी.  </p>
<p style="text-align:justify;">दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के अनुसार इसमें डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता बिजू टोप्पो को अध्यक्ष, संगीत निर्माता तेज मुंडू को उपाध्यक्ष के अलावा प्रिंसी लकड़ा को सचिव, नीरज समद को उप-सचिव, इनुस कुजूर व सुरेंद्र कुजूर को संयोजक बनाया गया. बैठक का संचालन डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता दीपक बाड़ा</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/film-tcis-steering-committee-will-be-formed-on-tribal-issues/article-14913"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-07/download-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची:</strong> आदिवासी मुद्दों पर आधारित फिल्मों के निर्माण के लिए ट्राइबल सिनेमा आफ इंडिया (टीसीआइ) की बैठक सह कार्यशाला गुरुवार को डा कामिल बुल्के पथ स्थित सत्यभारती सभागार में आयोजित की गई. इस बैठक में संचालन समिति का गठन हुआ. इस मुद्दे पर तीन फिल्मों का निर्माण होगा, जिसकी फंडिंग टीसीआइ करेगी.  </p>
<p style="text-align:justify;">दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के अनुसार इसमें डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता बिजू टोप्पो को अध्यक्ष, संगीत निर्माता तेज मुंडू को उपाध्यक्ष के अलावा प्रिंसी लकड़ा को सचिव, नीरज समद को उप-सचिव, इनुस कुजूर व सुरेंद्र कुजूर को संयोजक बनाया गया. बैठक का संचालन डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता दीपक बाड़ा ने किया. इसी क्रम में सर्वसम्मति से टीसीआइ का संचालन समिति का गठन किया गया. </p>
<p style="text-align:justify;">इस समिति में संताली गायक टाम मुर्मू, आर्टिस ज्योति वंदना लकड़ा, शोधकर्ता आकृति लकड़ा, जेनिफर बाखला, आशीष तिग्गा, बालेश्वर बेसरा को चुना गया. बैठक में संयुक्त रूप से सहमति बनी कि टीसीआइ की ओर से इस वर्ष तीन आदिवासी मुद्दों, भाषा, संस्कृति पर फिल्म बनाई जाएगी. साथ ही नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने, टीसीआइ का फिल्म निर्माताओं व कलाकारों व तकनीशियनों के साथ कार्यशाला परिचर्चा आयोजित होगी. झारखंड के सभी जिलों में आदिवासी विषयों पर फिल्मों की स्क्रीनिंग, टीसीआइ का अपना यूट्यूब चैनल खोलने, आदिवासी फिल्म निर्माताओं को फिल्म निर्माण में आर्थिक सहयोग, आदिवासी मुद्दों, भाषा संस्कृति पर आधारित फिल्म नीति की ड्राफ्टिंग टीसीआइ द्वारा बनाने और सरकार को सौंपने को लेकर सभी ने सहमति जताई. </p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा झारखंड के फिल्म बोर्ड में आदिवासी प्रतिनिधित्व को स्थापित करने, फिल्म नीति में आदिवासी हित को शामिल करने सहित अन्य विषयों पर चर्चा की गई. बैठक में चर्चा की गई कि ट्राइबल सिनेमा आफ इंडिया का झारखंड के अलावा आदिवासी बहुल अन्य राज्यों में भी विस्तार किया जाएगा. साथ ही बांग्लादेश व नेपाल जैसे देशों के आदिवासी फिल्म निर्माताओं से भी संपर्क कर एक साझा मंच तैयार की जाएगी. मौके पर पूर्व न्यायाधीश रत्नाकर भेंगरा, टीएसी के पूर्व सदस्य पीसी मुर्मू के अलावा अमन दीप, पवन दीप खाखा, वाल्टर भँगरा, अमल दीप कुजूर, विक्की मिंज, सुनिता लकड़ा, काजल मुंडू, राकेश किड़ो सहित अन्य आदिवासी फिल्म निर्माता, कलाकार व फिल्म विशेषज्ञ मौजूद थे.</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Jul 2025 08:31:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
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