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                <title>Mukhtar Abbas Naqvi - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Mukhtar Abbas Naqvi RSS Feed</description>
                
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                <title>Opinion : भारतीय लोकतंत्र में मुस्लिम नेतृत्व: नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में योगदान की गहन समीक्षा</title>
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                        <![CDATA[यह लेख भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेताओं की विविध भूमिका और प्रभाव को उजागर करता है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समकालीन राजनीति तक, ये नेता नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में महत्वपूर्ण योगदान देते आए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-an-in-depth-review-of-the-contribution-of-muslim-leadership/article-17905"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/3ccb2867-6d79-40a1-9ac1-40ce0a9a0be1_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>भारतीय लोकतंत्र की मूल शक्ति उसकी विविधता, विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, विचारधाराओं और समूहों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की संरचना में निहित है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए नेता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आकार देते हैं।</p>
<p>इस व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में मुस्लिम समुदाय का योगदान केवल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि नीति-निर्माण, संगठनात्मक राजनीति, विदेश नीति, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय संतुलन जैसे क्षेत्रों में भी उसकी निरंतर और प्रभावशाली भूमिका रही है।</p>
<p>स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समकालीन राजनीति तक, मुस्लिम नेताओं ने अलग-अलग वैचारिक धाराओं और राजनीतिक दलों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। बेशक इन नेताओं की राजनीतिक यात्राएँ एक-दूसरे से भिन्न रही हैं, जहां कुछ ने प्रशासनिक और संवैधानिक भूमिकाओं में योगदान दिया, वहीं कुछ ने संगठनात्मक रणनीति के माध्यम से शक्ति अर्जित की, जबकि कुछ ने स्पष्ट और मुखर राजनीतिक विमर्श के जरिए अपना जनाधार बनाया।</p>
<p>यह विविधता भारतीय राजनीति की जटिलता और समावेशिता दोनों को रेखांकित करती है। इस लेख के माध्यम से मैं ऐसे ही कुछ मुस्लिम नेताओं के राजनीतिक योगदान और प्रभाव का जिक्र करने जा रहा हूँ, जिन्होंने अलग-अलग कालखंडों, दलों और भूमिकाओं में राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया।</p>
<p>सलमान खुर्शीद उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पहचान अकादमिक पृष्ठभूमि और संसदीय शालीनता से जुड़ी रही है। कानून, विदेश और अल्पसंख्यक मामलों जैसे मंत्रालयों में उनकी भूमिका नीतिगत निरंतरता और संस्थागत संतुलन का उदाहरण रही। विदेश मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भारत की वैश्विक छवि के प्रबंधन के संदर्भ में उल्लेखनीय रहा।</p>
<p>वे उस राजनीतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ वैचारिक स्पष्टता और संवाद की संस्कृति को प्राथमिकता दी जाती है। सैयद शाहनवाज़ हुसैन भारतीय जनता पार्टी में उन शुरुआती मुस्लिम नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>अपेक्षाकृत कम उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करने वाले शाहनवाज़ हुसैन ने केंद्र सरकार में नागरिक उड्डयन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे मंत्रालयों में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका राजनीतिक सफर संगठनात्मक निष्ठा, पार्टी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और संवाद आधारित राजनीति का उदाहरण रहा है।</p>
<p>बिहार की राजनीति में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही, जहाँ उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय और व्यापक सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। वे उस दौर के प्रतिनिधि रहे हैं जब भाजपा मुस्लिम नेतृत्व को अपनी मुख्यधारा की राजनीति में स्थान देने की कोशिश कर रही थी।</p>
<p> मुख्तार अब्बास नक़वी भारतीय जनता पार्टी में मुस्लिम नेतृत्व का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। संसदीय कार्य, अल्पसंख्यक मामलों और कौशल विकास जैसे मंत्रालयों में उनके कार्यकाल के दौरान कई नीतिगत फैसले लिए गए, जिन पर व्यापक बहस भी हुई। वे उस राजनीतिक धारा का प्रतिनिधित्व करते हैं जो वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक अनुशासन को प्राथमिकता देती है।</p>
<p>असदुद्दीन ओवैसी समकालीन राजनीति में सबसे मुखर मुस्लिम नेताओं में गिने जाते हैं। संसद में उनके हस्तक्षेप संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं। उनकी राजनीतिक शैली स्पष्ट, तर्कप्रधान और कई बार टकरावपूर्ण रही है। ओवैसी ने क्षेत्रीय आधार से राष्ट्रीय विमर्श तक अपनी उपस्थिति को विस्तार दिया है, जो बदलती चुनावी राजनीति की एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति को दर्शाता है।</p>
<p>तारिक अनवर कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने संगठनात्मक राजनीति और संसदीय कार्य दोनों में लंबा अनुभव अर्जित किया है। उनका राजनीतिक योगदान मुख्यतः पार्टी संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर संपर्क बनाए रखने से जुड़ा रहा है। वे एक सफल सांसद होने के साथ-साथ निरंतरता और संगठनात्मक स्थायित्व के प्रतिनिधि माने जाते हैं।</p>
<p>फ़ारूक़ अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाले नेता रहे हैं। उनका राजनीतिक जीवन क्षेत्रीय आकांक्षाओं, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने का प्रयास रहा है। कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उनकी भूमिका भारतीय राजनीति के जटिल आयामों को समझने में मदद करती है।</p>
<p>मोहसिना किदवई का योगदान मुख्यतः संसदीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है। अल्पसंख्यक अधिकारों और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर उनकी सक्रियता उन्हें कांग्रेस के भीतर एक सम्मानित स्थान दिलाती है। वे उस पीढ़ी की नेता हैं जिन्होंने अपेक्षाकृत शांत लेकिन निरंतर राजनीतिक भूमिका निभाई है।</p>
<p> अहमद पटेल भारतीय राजनीति के उन रणनीतिकारों में थे जिनकी भूमिका सार्वजनिक मंच से अधिक संगठन के भीतर प्रभावशाली रही। चुनावी रणनीति, गठबंधन प्रबंधन और संकट काल में निर्णय लेने की उनकी क्षमता ने कांग्रेस को कई बार राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद की।</p>
<p>उनका योगदान इस बात का उदाहरण है कि सत्ता और प्रभाव हमेशा सार्वजनिक पदों से ही नहीं आते। ग़ुलाम नबी आज़ाद का राजनीतिक अनुभव प्रशासनिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर रहा है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने उन्हें एक अनुभवी प्रशासक की पहचान दी।</p>
<p>वे संवाद और सहमति आधारित राजनीति के समर्थक माने जाते हैं, जिन्हे पक्ष-विपक्ष, दोनों से ही बराबर सम्मान मिलता है। नजमा हेपतुल्ला भाजपा की उन महिला नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने संसदीय संस्थाओं और मंत्रालयों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। अल्पसंख्यक मामलों और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर उनका कार्य भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व के विस्तार को दर्शाता है।</p>
<p>उन्होंने मणिपुर राज्य के राज्यपाल की भूमिका भी निभाई है। इन नेताओं का राजनीतिक सफर यह स्पष्ट करता है कि भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व किसी एक विचारधारा या रणनीति तक सीमित नहीं है। यह नेतृत्व कहीं संस्थागत और शांत, कहीं मुखर और वैचारिक, तो कहीं रणनीतिक और संगठनात्मक रूप में विविध रहा है।</p>
<p>इनकी भूमिका यह समझने में सहायक है कि लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व केवल पहचान का प्रश्न नहीं, बल्कि नीति, संवाद और राष्ट्रीय हित के साथ संतुलन साधने की प्रक्रिया है। भारतीय राजनीति की इस बहुमूल्य संरचना को मजबूत बनाए रखने में ऐसे नेताओं की उपस्थिति और योगदान आगे भी महत्वपूर्ण बना रहेगा क्योंकि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती विविध आवाज़ों के सहअस्तित्व से ही सुनिश्चित होती है।</p>
<p><strong>डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 13:00:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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                <title>#EidAlAdha ईद-उल-अजहा की पीएम मोदी ने बधाई, कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया नमाज अता</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> इस्लाम धर्मावलंबियों का आज पवित्र ईद-उल-अजहा त्यौहार है। इस मौके पर देश भर में खुशी का माहौल है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न हस्तियों ने इस पावन त्यौहार की शुभकामनाएं दी हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Prime Minister Narendra Modi wishes Eid Mubarak to everyone. <a href="https://twitter.com/hashtag/EidAlAdha?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#EidAlAdha</a> <a href="https://t.co/TAFPzuQj4G">pic.twitter.com/TAFPzuQj4G</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1417679602483228674?ref_src=twsrc%5Etfw">July 21, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्यौहार की शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि यह दिन सामूहिक सहानुभूति, सद्भाव और सेवा की भावना बढाए। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी ईद की शुभकानमाएं उन्होंने कहा कि देशवासियों को ईद मुबारक! ईद-उज़-ज़ुहा प्रेम, त्‍याग, बलिदान की भावना के प्रति</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/eidaladha-pm-modi-wishes-on-eid-ul-azha-devotees-offer-prayers-follows-covid19-protocol/article-8586"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-07/mukhtar-abbas-naqui.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> इस्लाम धर्मावलंबियों का आज पवित्र ईद-उल-अजहा त्यौहार है। इस मौके पर देश भर में खुशी का माहौल है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न हस्तियों ने इस पावन त्यौहार की शुभकामनाएं दी हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Prime Minister Narendra Modi wishes Eid Mubarak to everyone. <a href="https://twitter.com/hashtag/EidAlAdha?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#EidAlAdha</a> <a href="https://t.co/TAFPzuQj4G">pic.twitter.com/TAFPzuQj4G</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1417679602483228674?ref_src=twsrc%5Etfw">July 21, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्यौहार की शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि यह दिन सामूहिक सहानुभूति, सद्भाव और सेवा की भावना बढाए। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी ईद की शुभकानमाएं उन्होंने कहा कि देशवासियों को ईद मुबारक! ईद-उज़-ज़ुहा प्रेम, त्‍याग, बलिदान की भावना के प्रति आदर व्‍यक्‍त करने और समावेशी समाज में एकता और भाईचारे के लिए मिलकर कार्य करने का त्‍योहार है। हम कोविड19 से बचाव के उपाय अपनाते हुए समाज के हर वर्ग की खुशहाली के लिए काम करने का संकल्‍प लें।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Eid Mubarak to all fellow citizens. Eid-uz-Zuha is a festival to express regard for spirit of love &amp; sacrifice &amp; to work together for unity&amp;fraternity in an inclusive society. Let us resolve to follow COVID guidelines &amp; work for happiness of all, tweets President Ram Nath Kovind <a href="https://t.co/TpAArtL5lc">pic.twitter.com/TpAArtL5lc</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1417660022998245384?ref_src=twsrc%5Etfw">July 21, 2021</a></p></blockquote>
<p><br />
वहीं, दिल्ली के फतेहपुरी मसजिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम ने कहा, मैं सभी भारतवासियों को ईद की मुबारकबाद और शुभकामनाएं देता हूं। सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है, उसके मुताबिक आज मस्जिद के अंदर के लोगों ने ही नमाज़ अदा की। हम दुआ करते हैं कि हमारे देश से कोरोना खत्म हो जाए।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Devotees offer prayers at Khairuddin Masjid in Amritsar, Punjab to mark <a href="https://twitter.com/hashtag/EidAlAdha?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#EidAlAdha</a> <a href="https://t.co/6T4RlTTsAa">pic.twitter.com/6T4RlTTsAa</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1417677125486739457?ref_src=twsrc%5Etfw">July 21, 2021</a></p></blockquote>
<p><br />
ईद के मौके पर जामा मसजिद में कोविड नियमों का पालन करते हुए नमाज पढी गयी। गुजरात के अहमदाबाद के जामा मसजिद में लोगों ने नमाज अता की।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">In line with COVID guidelines, Union Minister Mukhtar Abbas Naqvi offered namaz at his residence on the occasion of <a href="https://twitter.com/hashtag/EidAlAdha?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#EidAlAdha</a> <a href="https://t.co/rkDIueNCkY">pic.twitter.com/rkDIueNCkY</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1417700654731042820?ref_src=twsrc%5Etfw">July 21, 2021</a></p></blockquote>
<p><br />
कर्नाटक के मेंगलुरु, केरल के कोट्टायम, पंजाब के अमृतसर ने नमाज पढी गयी। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने घर पर ही कोविड19 की वजह से नमाज अता की।</p>
]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
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                <pubDate>Wed, 21 Jul 2021 11:04:24 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Jharkhand]]>
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                <title>24 अप्रैल से रमजान, नकवी की अपील लोग घरों में रहें</title>
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                        <![CDATA[<p>  </p>
<p>नयी दिल्ली: 12 दिन बाद मुसलिम धर्मावलंबियों का पवित्र महीना रमजान शुरू हो रहा है. कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे को लेकर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इस दौरान लोगों से घरों में रहने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि 24 अप्रेल को रमजान का पवित्र महीना शुरू होने वाला है, कोरोना महामारी की वजह से सभी धार्मिक स्थल बंद हैं, इसलिए आज हमने धर्मगुरुओं से अपील की है कि वे लोग जागरूकता फैलाएं और लोगों से अपील करें कि रमजान के पवित्र महीने में वे अपने घरों में नमाज अदा करें.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">24अप्रैल से रमज़ान का</p></blockquote>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/ramadan-month-start-from-april-24-mukhtar-abbas-naqvi-appeals-people-stay-in-homes/article-6226"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-04/mukhtar-abbas-naqwi.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>नयी दिल्ली: 12 दिन बाद मुसलिम धर्मावलंबियों का पवित्र महीना रमजान शुरू हो रहा है. कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे को लेकर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इस दौरान लोगों से घरों में रहने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि 24 अप्रेल को रमजान का पवित्र महीना शुरू होने वाला है, कोरोना महामारी की वजह से सभी धार्मिक स्थल बंद हैं, इसलिए आज हमने धर्मगुरुओं से अपील की है कि वे लोग जागरूकता फैलाएं और लोगों से अपील करें कि रमजान के पवित्र महीने में वे अपने घरों में नमाज अदा करें.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">24अप्रैल से रमज़ान का पवित्र महीना शुरू होने वाला है,<a href="https://twitter.com/hashtag/CornavirusPandemic?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#CornavirusPandemic</a> की वजह से सभी धार्मिक स्थल बंद है इसलिए आज हमने धर्मगुरुओं से अपील की है कि वो लोगों में जागरूकता फैलाए और लोगों से अपील करें कि रमज़ान के पवित्र महीने में वो अपने घरों में नमाज़ अदा करें:मुख्तारअब्बास नक़वी <a href="https://t.co/CPjgzyhYUE">pic.twitter.com/CPjgzyhYUE</a></p>
<p>— ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1249622474829910017?ref_src=twsrc%5Etfw">April 13, 2020</a></p></blockquote>
<p><br />
नकवी ने यह अपील ऐसे समय में की है जब यह संभावना मजबूत है कि देश में लाॅकडाउन की मियाद बढेगी. कई राज्यो ंने तो स्वंय अपने यहां लाॅकडाउन की अवधि बढा कर अप्रैल के अंत तक कर दी है. वहीं, अधिकतर राज्य कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की प्रतीक्षा में हैं. कल प्रधानमंत्री सुबह दस बजे देश को संबोधित करेंगे. संभावना बहुत मजबूत है कि प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान लाॅकडाउन की अवधि को बढाने का एलान कर सकते हैं.</p>
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                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2020 16:44:20 +0530</pubDate>
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                <title>जनजातीय मामलों के मंत्री बने अर्जुन, साधेंगे विधानसभा चुनाव का लक्ष्य</title>
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                        <![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong>झारखंड से राज्यसभा सदस्य नकवी भी बने हैं मंत्री</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span style="color:#ff9900;">आलोक कुमार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>लोकसभा चुनाव में प्रचंड सफलता हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑपरेशन राज्य मिशन पर अमलीजामा पहनाने की कोशिशों में जुट गये हैं। अपनी सरकार: 2 में जहां एक ओर देश को चलाने में युवा व अनुभवी मिश्रित चेहरों को तरजीह दी है, वहीं दूसरी ओर उनका निशाना वैसे राज्य हैं, जहां विधानसभा चुनाव होना है। जनजातीय बहुल प्रदेश की आदिवासी सीट खूंटी से सांसद बने पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा को जनजातीय मंत्रालय सौंपकर उन्होंने एक साथ कई मोर्चों पर निशाना साधा है। झारखंड में आगामी चार-पांच महीनों</strong></h5>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/politics/arjun-will-be-the-tribal-affairs-minister-target-of-assembly-elections/article-1855"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2019-05/whatsapp-image-2019-05-31-at-6.34.03-pm-e1559307924735.jpeg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong>झारखंड से राज्यसभा सदस्य नकवी भी बने हैं मंत्री</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span style="color:#ff9900;">आलोक कुमार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>लोकसभा चुनाव में प्रचंड सफलता हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑपरेशन राज्य मिशन पर अमलीजामा पहनाने की कोशिशों में जुट गये हैं। अपनी सरकार: 2 में जहां एक ओर देश को चलाने में युवा व अनुभवी मिश्रित चेहरों को तरजीह दी है, वहीं दूसरी ओर उनका निशाना वैसे राज्य हैं, जहां विधानसभा चुनाव होना है। जनजातीय बहुल प्रदेश की आदिवासी सीट खूंटी से सांसद बने पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा को जनजातीय मंत्रालय सौंपकर उन्होंने एक साथ कई मोर्चों पर निशाना साधा है। झारखंड में आगामी चार-पांच महीनों बाद विधानसभा चुनाव होना है, इसी लिहाज से यहां के सर्वाधिक बड़े आदिवासी चेहरे अर्जुन मुंडा बतौर कैबिनेट मंत्री भाजपा की नैइया पार करने में तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं। खास बात ये है कि यहां से राज्यसभा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी को अल्पसंख्यक मंत्रालय का प्रभार मिला है, ऐसे में ये झारखंड के अलावे बिहार के अल्पसंख्यकों को भी एकीकृत करने में बड़ी कड़ी साबित हो सकते हैं।</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;">2014 के विधानसभा चुनाव में खरसावां सीट से अप्रत्याशित रूप से चुनाव हारने के बाद अर्जुन मुंडा को करीब साढ़े चार साल का राजनीतिक वनवास झेलना पड़ा, लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में उनका सितारा फिर से चमका है। खूंटी संसदीय सीट से 23 मई को मतगणना के कई राउंड में पिछड़ने के बाद अंत में 1445 वोट से चुनाव जीतने में सफल रहे अर्जुन मुंडा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा जताया व उन्हें अपनी टीम में शामिल किया है। इधर लोकसभा चुनाव में भाजपा को झारखंड से मिली प्रचंड सफलता के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री रघुवर दास का कद भी बढ़ गया है। अर्जुन मुंडा व रघुवर दास के आपसी राजनीतिक द्वंद की बातें भी कई बार सतही तौर पर सामने आती रहीं हैं, मुंडा झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके है, 2014 में यदि वे खरसावां विधानसभा क्षेत्र से चुनाव नहीं हारते थे, तो वे संभवतः फिर से मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल होते। पिछले कुछ वर्षां में राज्य सरकार द्वारा सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन की कोशिश, स्थानीयता नीति, विस्थापन, भूमि अधिग्रहण समेत कई मुद्दों पर आदिवासी और मूलवासी समाज में नाराजगी उत्पन्न हुई थी, भाजपा नेतृत्व की ओर से उस नाराजगी को दूर करने की हरसंभव कोशिश की गयी है। इसके बावजूद जनजातीय समाज का एक तबका अब भी भाजपा से नाराज है, यही कारण है कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सिंहभूम और राजमहल सीट पर भाजपा की हार हुई, वहीं लोहरदगा व खूंटी सहित दुमका जैसे जनजातीय बाहुल्य इलाके में भी भाजपा की जीत का अंतर काफी कम रहा है। ऐसे में पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि जनजातीय क्षेत्रों में अर्जुन मुंडा काफी हद तक लोगों को समझाने में सफल होंगे। आदिवासियों के मुद्दों पर पिछले दिनों मुंडा सरकार के खिलाफ मुखर भी हुये थे, जिसके फलस्वरुप झामुमो ने इनपर डोरा डालने का प्रयास भी किया था। लेकिन इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट में मुंडा को स्थान मिलने के बाद ऐसा माना जा रहा है सीएम के साथ मिलकर अब ये प्रदेश की राजनीति को पुरजोर तरीके से गति देने का काम करेंगे।</h5>
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<h5 style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमित शाह की जोड़ी द्वारा इन तमाम तथ्यों को बारीकी से गौर किया जा रहा था। अब केंद्र में दूसरी बार सरकार बनने के फौरन बाद न सिर्फ इन विवादों का अंत करने का प्रयास किया गया है, बल्कि इनके भाजपा को मजबूत करने का इरादा भी साफ झलक रहा है। आदिवासी मंत्रालय देकर आदिवासियों को विकास के माध्यम से अपने खेमे में करने का भी श्री गणेश किया है। जाहिर है, कि पीएम ने झारखंड से कैबिनेट मंत्री तो मात्र एक बनाया है, लेकिन निशाना कई खानों में सामूहिक रुप से साधा है। इसमें कोई शक नही, कि अर्जुन मुंडा लोकप्रिय व प्रभावशाली ऐसे नेता हैं, जो जनजातीय समाज का तो वे प्रतिनिधित्व करते ही हैं। ऐसे में भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में मुंडा की लोकप्रियता को भुनाने का भरपूर प्रयास करेगी। अर्जुन मुंडा खुद भी कह रहे हैं, कि मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे देश की सेवा का अवसर मिला। प्रधानमंत्री जी ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, मैं उस पर खरा उतरने का प्रयास करुंगा। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में जनजातीय सीटों पर एनडीए व महागठबंधन में कांटे की लड़ाई हुई थी। पांच जनजातीय सीटों में तीन भाजपा के कोटे में गई, तो दो महागठबंधन के। अब अगली सीढ़ी में विधानसभा चुनाव है। ऐसे में मुंडा को जनजातीय मंत्री बनाने के बाद आदिवासी समाज के बीच बड़ा संदेश गया है, जो विस चुनाव के दौरान 28 जनजातीय क्षेत्रों में बड़ी उलटफेर कर सकता है। दूसरी ओर झारखंड से चुनकर राज्यसभा गए मुख्तार अब्बास नकवी को भी अल्‍पसंख्‍यक मंत्रालय दिया गया है, जिसके कारण राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय के बीच भी अच्छा पैगाम पहुंचा है।</h5>
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                <pubDate>Fri, 31 May 2019 18:35:52 +0530</pubDate>
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