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                <title>Nirmala Sitharaman - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Nirmala Sitharaman RSS Feed</description>
                
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                <title>आम बजट 2026: शराब-बीड़ी सस्ती, छोटे करदाताओं को बड़ी राहत</title>
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                        <![CDATA[आम बजट 2026 में सरकार ने कर व्यवस्था को सरल बनाने और आम जनता को राहत देने के कई फैसले लिए हैं। शराब, बीड़ी, दवाएं और सीएनजी सस्ती करने के साथ छोटे करदाताओं के लिए स्वचालित टैक्स प्रक्रिया लागू की जाएगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/delhi/general-budget-2026-liquor-and-beedis-cheaper-big-relief-to/article-17749"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/633de4b0c14ca52ea2432a3c8a5c4c31_364583058_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह मौजूदा वित्त वर्ष में 4.8 प्रतिशत रहा है, जिसे संशोधित अनुमान के अनुसार हासिल किया गया।</p>
<p>वित्त मंत्री ने बजट भाषण में बताया कि शराब और बीड़ी सस्ती होंगी। इसके अलावा जूते, कपड़ा निर्यात और बैटरी भी सस्ती होंगी। कैंसर से जुड़ी 17 दवाएं सस्ती होंगी, वहीं सात दुर्लभ बीमारियों की दवाएं भी सस्ती होंगी। दवाओं और चिकित्सीय उपकरणों पर सीमा शुल्क घटाने का ऐलान किया गया है। इसके अलावा सीएनजी और बायोगैस को भी सस्ता करने की घोषणा की गई है, जिससे सीएनजी से चलने वाले वाहनों के मालिकों को राहत मिलेगी।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा कि इनकम टैक्स रिटर्न में गड़बड़ी पर अब सजा नहीं होगी। सरकार ने जुर्माने का प्रावधान किया है। जो अपनी आय छिपाएगा, उससे 30 प्रतिशत कर लिया जाएगा, लेकिन उसे जेल या सजा नहीं होगी।</p>
<p>सीतारमण ने विदेशियों को राहत देते हुए कहा कि भारत में पाँच साल तक रहने वाले विदेशी नागरिकों को उनकी गैर-भारत आय पर कर से छूट मिलेगी। साथ ही, भारत में डेटा सेंटरों का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों को 2047 तक टैक्स अवकाश दिया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि छोटे करदाताओं के लिए नियम आधारित स्वचालित प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके जरिए कम या शून्य टीडीएस कटौती प्रमाणपत्र बिना असेसिंग अधिकारी को आवेदन दिए प्राप्त किया जा सकेगा। जिन निवेशकों के पास कई कंपनियों की प्रतिभूतियाँ हैं, उनके लिए डिपॉजिटरी को अनुमति दी जाएगी कि वे निवेशकों से फॉर्म 15G या 15H स्वीकार कर सीधे संबंधित कंपनियों को भेज सकें।</p>
<p>वित्त मंत्री ने बताया कि संपत्ति बेचने वाले अनिवासी भारतीयों पर टीडीएस नियम भी बदले गए हैं। अब कटौती निवासी खरीदार करेगा और इसके लिए टैक्स अकाउंट नंबर की आवश्यकता नहीं होगी।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 15:27:44 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>जीएसटी सुधार प्रधानमंत्री की तरफ से दीपावली का उपहार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ</title>
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                        <![CDATA[गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीएसटी सुधारों को दीपावली का तोहफा बताते हुए कहा कि घटाई गई दरें उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ाएंगी, खपत और उत्पादन को बढ़ावा देंगी और नए रोजगार सृजन में मदद करेंगी। उन्होंने किसानों, आम जनता और जीवनरक्षक दवाओं पर कर राहत की जानकारी दी और प्रधानमंत्री मोदी व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आभार व्यक्त किया।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/gst-reform-chief-minister-yogi-adityanath-on-behalf-of-prime/article-16396"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-09/resized-image---2025-09-22t145700.002.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गोरखपुर: </strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीएसटी सुधारों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से देशवासियों को दीपावली का उपहार बताते हुए जीएसटी की घटी दरों को रोजगार बढ़ाने में सहायक बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी कम होने से आम उपभोक्ता की क्रय शक्ति बढ़ेगी। क्रय शक्ति बढ़ने से मांग बढ़ेगी। मांग से खपत, खपत से उत्पादन बढ़ेगा और उत्पादन बढ़ने से नया रोजगार सृजन भी होगा। सोमवार को जीएसटी रिफॉर्म पर जन जागरण पदयात्रा और व्यापारियों से संवाद करने के बाद यहां मीडिया से वार्ता कर रहे थे। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शारदीय नवरात्र के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में जीएसटी की घटी दरें पूरे देश में लागू कर दी गई हैं। जीएसटी में यह अब तक सबसे बड़ा रिफॉर्म है। कई वस्तुओं और सेवाओं में कर की दरों को पांच प्रतिशत या शून्य पर ला दिया गया है। जीवनरक्षक दवाओं को करमुक्त कर दिया गया है, जबकि अन्य दवाओं पर कर की दर को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। किसानों के लिए जीएसटी पांच प्रतिशत या शून्य कर दी गई है। शिक्षण सामग्री पर कर की दर को बारह से शून्य कर दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी एक है, लेकिन इसके लाभ अनेक हैं। जीएसटी रिफॉर्म अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे। क्रयशक्ति बढ़ने से आम ग्राहक उल्लास और उमंग से पर्व-त्योहार मनाएगा। बाजार में मजबूती आने से खपत और उत्पादन बढ़ने का सकारात्मक असर रोजगार पर पड़ेगा। उन्होंने व्यापक जनहित में जीएसटी सुधारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 14:59:24 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>उप राष्ट्रपति चुनाव में मतदान जारी, प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले डाला वोट</title>
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                        <![CDATA[संसद भवन में देश के 17वें उप राष्ट्रपति पद के लिए सोमवार को मतदान जारी है।  इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन और विपक्षी इंडी गठबंधन के उम्मीदवार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है। मतदान शाम 5 बजे तक चलेगा, जिसके बाद शाम 6 बजे से मतगणना शुरू होगी और देर रात तक परिणाम आने की संभावना है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/delhi/prime-minister-modi-first-cast-votes-in-the-vice-presidential/article-16096"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-09/resized-image---2025-09-09t153814.858.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>: संसद भवन में देश के 17वें उप राष्ट्रपति पद के लिए सोमवार को मतदान जारी है। सुबह 10 बजे शुरू हुए मतदान में सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना वोट डाला। इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन और विपक्षी इंडी गठबंधन के उम्मीदवार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है। मतदान शाम 5 बजे तक चलेगा, जिसके बाद शाम 6 बजे से मतगणना शुरू होगी और देर रात तक परिणाम आने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">मतदान में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, नितिन गडकरी, अश्विनी वैष्णव, किरेन रिजिजू, किशन रेड्डी, रवनीत सिंह बिट्टू और ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई केंद्रीय मंत्रियों व सांसदों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर भी वोट डालने पहुंचे। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा व्हीलचेयर पर संसद पहुंचे और मतदान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">वोट डालने के बाद बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि वह लोगों की अंतरात्मा को जगाने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें जीत का विश्वास है। भाजपा सांसद प्रताप चंद्र सारंगी ने दावा किया कि पार्टी उम्मीदवार अच्छे अंतर से विजयी होंगे, जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सीपी राधाकृष्णन की जीत तय है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसका काम दलों को इस्तेमाल कर बर्बाद करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस चुनाव से बीजद, बीआरएस और शिरोमणि अकाली दल ने दूरी बनाई है। बीजद के सांसदों ने कहा कि वे एनडीए और इंडी गठबंधन दोनों से समान दूरी बनाए रखना चाहते हैं। बीआरएस ने यूरिया संकट और सरकारों की उदासीनता के विरोध में मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जबकि हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब में बाढ़ और केंद्र की निष्क्रियता का हवाला देकर मतदान से परहेज किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल 788 सांसदों में से 781 मतदान के पात्र थे, लेकिन 14 सांसदों ने मतदान से दूरी बना ली। ऐसे में अब 767 सांसद वोट डाल रहे हैं और बहुमत का आंकड़ा 384 तय हुआ है। लोकसभा में एनडीए को 293 सांसदों का समर्थन प्राप्त है, जबकि राज्यसभा में 125 सांसद उसके पक्ष में हैं। एनडीए को टीडीपी, जेडीयू, शिवसेना और लोजपा का भी साथ है, वहीं वाईएसआर कांग्रेस भी उसके पक्ष में खड़ी है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                <pubDate>Tue, 09 Sep 2025 15:42:13 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>Opinion: कोई बताए तो सही कि क्या कमी है 'एक देश एक चुनाव' में</title>
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                        <![CDATA[एक देश, एक चुनाव लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनाव सभी एक साथ होंगे. यह सब 100 दिनों के अंदर ही संपन्न होगा. सरकार का मानना है कि इससे देश की जीडीपी में 1-1.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-if-someone-tells-me-what-is-missing-in-one/article-13426"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-12/d1f4839f-f19f-4140-9268-ff7f702063ff.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">'एक देश एक चुनाव' के सपने को साकार करने की तरफ देश बढ़ रहा है. बेशक,लगातार चुनाव देश की प्रगति में बाधा बन रहे हैं. भारत में 'एक देश-एक चुनाव' का विचार एक ऐसा विषय है जिस पर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय है. कुछ लोगों का मानना है कि इससे देश को कई फायदे होंगे, वहीं कुछ लोग इसके कुछ नुकसान भी बताते हैं. पर ये सच है कि बार-बार चुनाव कराने में काफी पैसा खर्च होता है. एक साथ चुनाव कराने से इस खर्च को काफ़ी हाद थे कम किया जा सके. चुनावों में सरकारी कर्मचारियों और सुरक्षा बलों की भारी संख्या में तैनाती करनी पड़ती है. जाहिर है, बार-बार चुनाव होने से कामकाज में बाधा तो आती ही है साथ ही संसाधनों का भारी दुरुपयोग भी होता है. एक साथ चुनाव कराने से इस समस्या को दूर काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है. पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के बाद सरकार एक देश-एक चुनाव की तरफ तेजी से  बढ़ रही है. इससे लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनाव सभी एक साथ होंगे. यह सब 100 दिनों के अंदर ही संपन्न होगा. सरकार का मानना है कि इससे देश की जीडीपी में 1-1.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी. केंद्र सरकार इस मुद्दे पर आम सहमति बनाना चाहती है. यह मामला किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश के हित में है. यह सबको पता है कि देश में बार-बार चुनाव होने से जनता और सरकारी अधिकारियों का समय और संसाधन बर्बाद होता है. एक साथ चुनाव कराने से यह सब नहीं होगा. एक साथ चुनाव होने से राजनीतिक स्थिरता में सुधार आएगा, क्योंकि सरकार को बार-बार चुनावों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी. इसके साथ ही एक साथ चुनाव होने से प्रशासन पर दबाव कम होगा और वे अपने काम पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगे. तो आप कह सकते हैं कि 'एक देश, एक चुनाव' से कई मसलों का हल हो जाएगा. चुनावों की अवधि कम हो जाने से, शासन और विकास कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा.</p>
<p style="text-align:justify;">एक देश, एक चुनाव भाजपा और नरेंद्र मोदी का पुराना एजेंडा है. प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही मोदी जी इसकी वकालत करते रहे हैं. अपने दूसरे कार्यकाल में 2 सितंबर 2023 को कोविंद कमिटी बना कर उन्होंने पहला कदम बढ़ाया था. निश्चित रूप से बार-बार चुनाव होने से सरकारें नई नीतियों और योजनाओं को लागू करने में झिझकती हैं. एक साथ चुनाव होने से सरकारों को स्थिरता मिलती है और वे बेहतर ढंग से काम कर पाती हैं. एक बात और कि बार-बार चुनाव होने से राजनीतिक दल विकास के मुद्दों से भटक जाते हैं और चुनाव जीतने पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं. एक साथ चुनाव होने से राजनीतिक दलों को विकास पर ध्यान केंद्रित करने का अधिक अवसर मिलता है.</p>
<p style="text-align:justify;">'एक देश-एक चुनाव' के विपक्ष में तर्क में कुछ पिलपिले तर्क आ रहे हैं. जैसे कि  राष्ट्रीय चुनावों के साथ-साथ राज्यों के चुनाव होने से क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय दलों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई हो सकती है. कुछ लोगों का मानना है कि एक साथ चुनाव कराने से लोकतंत्र कमजोर हो सकता है क्योंकि इससे राष्ट्रीय स्तर पर एक ही राजनीतिक दल का दबदबा हो सकता है. यह सब तर्क कमजोर हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया के कई देशों में अलग-अलग चुनाव व्यवस्थाएं हैं. कुछ देशों में एक साथ चुनाव होते हैं, जबकि कुछ देशों में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं. स्वीडन, बेल्जियम और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में राष्ट्रीय और स्थानीय चुनाव एक साथ कराए जाते हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में राष्ट्रीय और स्थानीय चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, एक देश-एक चुनाव से देश के आम जनमानस में राष्ट्र की अवधारणा सशक्त होगी. भारत में साल 1967 तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए चुनाव एक साथ ही होते थे. साल 1947 में आज़ादी के बाद भारत में नए संविधान के तहत देश में पहला आम चुनाव साल 1952 में हुआ था. उस समय राज्य विधानसभाओं के लिए भी चुनाव साथ ही कराए गए थे, क्योंकि आज़ादी के बाद विधानसभा के लिए भी पहली बार चुनाव हो रहे थे. उसके बाद साल 1957, 1962 और 1967 में भी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ ही हुए थे. यह सिलसिला पहली बार उस वक़्त टूटा था जब केरल में साल 1957 के चुनाव में ईएमएस नंबूदरीबाद की वामपंथी सरकार बनी. साल 1967 के बाद कुछ राज्यों की विधानसभा जल्दी भंग हो गई और वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया, इसके अलावा साल 1972 में होनेवाले लोकसभा चुनाव भी समय से पहले कराए गए थे. साल 1967 के चुनावों में कांग्रेस को कई राज्यों में विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था. बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे कई राज्यों में विरोधी दलों या गठबंधन की सरकार बनी थी. इनमें से कई सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं और विधानसभा समय से पहले भंग हो गई थी. यह भी माना जा रहा है कि एक साथ चुनाव होने से मतदाता भागीदारी में वृद्धि हो सकती है क्योंकि लोगों को बार-बार मतदान करने की आवश्यकता नहीं होगी. कुल मिलाकर बात यह है कि 'एक देश एक चुनाव' को दलगत आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए. इस पर हर स्तर पर खुल कर ईमानदारी से चर्चा होनी चाहिए. उसके बाद ही किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचा जाना चाहिए.  अगर इसे भाजपा या मोदी जी के किसी एंजेडे के रूप में देखा गया तो यह सही नहीं होगा. अभी तक जो विपक्षी नेता 'एक देश एक चुनाव' के विचार का विरोध कर रहे हैं, उन्हें अपने दिल पर हाथ रखकर पूछना चाहिए कि क्या उन्हें बार-बार चुनावी रणभूमि में उतरना पसंद है?</p>
<p style="text-align:justify;">(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार और पूर्व सांसद हैं)</p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 17:09:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[आर.के. सिन्हा]]>
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                <title>2024 का केंद्रीय बजट : ऊर्जा और पर्यावरण पर ध्यान  </title>
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                        <![CDATA[<p><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2024-07/nirmala-2.jpg" alt="Nirmala 2" width="650" height="434" /></p>
<p>क्लाइमेट चेंज की चुनौती से निपटने और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया। कुल बजटीय आवंटन ₹48.21 लाख करोड़ रुपये के साथ, यह बजट रिन्यूबल एनेर्जी, जलवायु अनुकूलन और पर्यावरणीय स्थिरता पर जोर देता है।<br />  <br /><strong>एक नज़र बजट की मुख्य बातों पर  </strong></p>
<p><strong>पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना</strong></p>
<p>इस महत्वाकांशी पहल का लक्ष्य 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सौर पैनल लगाना है, जिससे हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी। ₹6,250 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ, यह कार्यक्रम गैर-रिन्यूबल</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/environment/union-budget-2024-to-focus-on-energy-and-environment-%C2%A0/article-10965"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-07/nirmala-2.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://samridhjharkhand.com/media/2024-07/nirmala-2.jpg" alt="Nirmala 2" width="650" height="434"></img></p>
<p>क्लाइमेट चेंज की चुनौती से निपटने और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया। कुल बजटीय आवंटन ₹48.21 लाख करोड़ रुपये के साथ, यह बजट रिन्यूबल एनेर्जी, जलवायु अनुकूलन और पर्यावरणीय स्थिरता पर जोर देता है।<br /> <br /><strong>एक नज़र बजट की मुख्य बातों पर  </strong></p>
<p><strong>पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना</strong></p>
<p>इस महत्वाकांशी पहल का लक्ष्य 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सौर पैनल लगाना है, जिससे हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी। ₹6,250 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ, यह कार्यक्रम गैर-रिन्यूबल एनर्जी पर निर्भरता कम करने और रिन्यूबल एनर्जी अपनाने को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी है।</p>
<p><strong>पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाएं</strong></p>
<p>रिन्यूबल एनर्जी को बिजली ग्रिड में एकीकृत करने में स्थिरता लाने के लिए, सरकार पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। ये परियोजनाएं रिन्यूबल एनर्जी स्रोतों के परिवर्तनशील स्वरूप को प्रबंधित करने में मदद करेंगी, जिससे एक विश्वसनीय बिजली आपूर्त्ति सुनिश्चित होगी।</p>
<p><strong>परमाणु ऊर्जा विकास</strong></p>
<p>बजट में भारत स्मॉल रिएक्टर और भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी करने की योजना है। इसमें नई परमाणु प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास के लिए समर्थन भी शामिल है।</p>
<p><strong>आवश्यक खनिज मिशन</strong></p>
<p>नया महत्वपूर्ण खनिज मिशन विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू उत्पादन, पुनर्चक्रण और अधिग्रहण को बढ़ावा देगा। यह मिशन प्रौद्योगिकी विकास, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और वित्तपोषण व्यवस्था स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।</p>
<p><strong>उन्नत अति महत्वपूर्ण ताप विद्युत संयंत्र (एयूएससी)</strong></p>
<p>एनटीपीसी और बीएचईएल के सहयोग से, उच्च दक्षता वाली बिजली उत्पादन के लिए 800 मेगावाट का एयूएससी तकनीक वाला थर्मल पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा।</p>
<p><strong>पारंपरिक उद्योगों के लिए समर्थन</strong></p>
<p>अधिक टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए, 60 पारंपरिक लघु और कुटीर उद्योगों के समूहों में ऊर्जा जांच और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।</p>
<p><strong>जलवायु अनुकूलन और शमन के प्रयास  </strong></p>
<p><strong>जलवायु के अनुकूल कृषि</strong></p>
<p>सरकार 109 उच्च उपज देने वाली, जलवायु-सहने वाली फसल किस्मों को जारी करेगी और 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।</p>
<p><strong>कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना</strong></p>
<p>कृषि में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के कार्यान्वयन में 400 जिलों में खरीफ फसल का डिजिटल सर्वेक्षण और 6 करोड़ किसानों और उनकी जमीन को रजिस्ट्री में शामिल करना शामिल है।</p>
<p><strong>जलवायु वित्त के लिए वर्गीकरण</strong></p>
<p>जलवायु अनुकूलन और कमी के प्रयासों के लिए पूंजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जलवायु वित्त के लिए एक नया वर्गीकरण प्रणाली विकसित की जाएगी।</p>
<p><strong>बाढ़ प्रबंधन और पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय सहायता</strong></p>
<p>बजट में बिहार, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम जैसे बाढ़ प्रभावित राज्यों में बाढ़ प्रबंधन और पुनर्निर्माण के लिए प्रावधान शामिल हैं। ये उपाय प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने और पुनर्निर्माण कार्यों का समर्थन करने का लक्ष्य रखते हैं।</p>
<p><strong>ऊर्जा क्षेत्र की पहल  </strong></p>
<p><strong>एनर्जी ट्रांज़िशन नीति दस्तावेज</strong></p>
<p><br />सरकार एक नीति दस्तावेज जारी करेगी जिसमें रोजगार, वृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता को संतुलित करने वाले उपयुक्त ऊर्जा परिवर्तन मार्गों को रेखांकित किया जाएगा।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन</strong></p>
<p>भारत के ऊर्जा परिवर्तन में हरित हाइड्रोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए बजटीय आवंटन ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹600 करोड़ कर दिया गया है।</p>
<p><strong>इलेक्ट्रिक वाहन और ऑटोमोटिव क्षेत्र</strong></p>
<p>बजट में ऑटोमोटिव क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण 25 महत्वपूर्ण खनिजों पर सीमा शुल्क पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। साथ ही, घरेलू उत्पादन और महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज मिशन की स्थापना शामिल है।</p>
<p><strong>उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं</strong></p>
<p>ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स (₹3,500 करोड़) और राष्ट्रीय उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण (₹250 करोड़) के लिए पीएलआई योजना के लिए महत्वपूर्ण आवंटन किए गए हैं।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं  </strong></p>
<p>आरती खोसला, क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक: "बजट 2024-25 जलवायु के अनुकूल कृषि के लिए ₹1.52 लाख करोड़ रुपये जैसे आवंटन के साथ सतत विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र और जलवायु वित्त जुटाने के लिए विस्तृत रणनीतियों के लिए समयसीमा का अभाव है।"</p>
<p>डॉ. अरुणाभ घोष, सीईईडब्ल्यू के सीईओ: "बजट स्वच्छ ऊर्जा और हरित औद्योगिकीकरण के लिए भारत की महत्वाकांक्षाओं को संबोधित करता है और जलवायु घटनाओं से हानि रोकने और बजटीय समर्थन से परे वित्तपोषण पर ध्यान देने की सराहना करता हूं।"<br />भूषण रस्तोगी, मर्कडोस एनर्जी मार्केट्स इंडिया के प्रबंध निदेशक: भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) की शुरुआत से विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में एनेर्जी मिक्स में विविधता आएगी और लचीलापन बढ़ेगा। माइक्रो और स्मॉल उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा रूपों में परिवर्तन के लिए समर्थन एक और सराहनीय कदम है। कुल मिलाकर, बजट में रिन्यूबल एनर्जी, बुनियादी ढांचे के विकास और नवाचार पर ध्यान देने से भारत ऊर्जा क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित होगा।</p>
<p>गिरीश तंती, ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल, भारत के अध्यक्ष: "हालिया बजट जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भारत के वैश्विक नेतृत्व को प्रदर्शित करता है। स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के विकास को प्राथमिकता देकर और रिन्यूबल एनेर्जी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देकर, भारत न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा बढ़ा रहा है बल्कि अपने दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ ऊर्जा परिवर्तन को भी तेज कर रहा है। मेरा मानना है कि रिन्यूबल एनर्जी में भारत की प्रगति दुनिया भर के देशों के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करेगी, जो स्वच्छ और हरित ग्रह की ओर सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करेगी।"</p>
<p><br /><strong>निष्कर्ष</strong></p>
<p>भारत का 2024-25 का केंद्रीय बजट जलवायु कार्रवाई और एनर्जी ट्रांज़िशन के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदर्शित करता है, जिसका लक्ष्य एक मजबूत और लचीली टिकाऊ अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है। रिन्यूबल एनर्जी, जलवायु अनुकूलन और पारंपरिक उद्योगों में महत्वपूर्ण निवेश के साथ, भारत वैश्विक जलवायु कार्रवाई और सतत विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।</p>]]>
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                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>पर्यावरण</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 14:52:08 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Rahul Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनरेगा श्रमिकों के धरने का 50 दिन पूरा होने पर नरेगा संघर्ष मोर्चा ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> मनरेगा श्रमिकों का गुरूवार, 13 अप्रैल 2023 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना का 50 दिन पूरा हो गया। इस आंदोलन के 50 दिन पूरे होने पर नरेगा संघर्ष मोर्चा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में वित्तमंत्री सीतारमण को हालात, मजदूरों की समस्या और उनकी मांगों से अवगत कराते हुए सरकार के दावों पर भी सवाल उठाया गया है।</p>
<p>इस पत्र में कहा गया है कि नरेगा से संबंधित नियमों व कायदों को पलट दिया गया है। काम करने का अधिकार और नरेगा के तहत समय पर मजदूरी प्राप्त करने</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/nrega-sangharsh-morcha-wrote-a-letter-to-the-finance-minister-on-completion-of-50-days-of-strike-by-mgnrega-workers/article-10586"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2023-04/narega.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> मनरेगा श्रमिकों का गुरूवार, 13 अप्रैल 2023 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना का 50 दिन पूरा हो गया। इस आंदोलन के 50 दिन पूरे होने पर नरेगा संघर्ष मोर्चा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में वित्तमंत्री सीतारमण को हालात, मजदूरों की समस्या और उनकी मांगों से अवगत कराते हुए सरकार के दावों पर भी सवाल उठाया गया है।</p>
<p>इस पत्र में कहा गया है कि नरेगा से संबंधित नियमों व कायदों को पलट दिया गया है। काम करने का अधिकार और नरेगा के तहत समय पर मजदूरी प्राप्त करने का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 को साकार करता है। ऐसे में नरेगा के प्रावधानों का उल्लंघन संविधान के उल्लंघन के समान और बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Today is the 50th day of the protest which has seen participation of <a href="https://twitter.com/hashtag/NREGA?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#NREGA</a> workers from various states of the country against the multiple violations of the provisions of <a href="https://twitter.com/hashtag/NREGA?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#NREGA</a>. The NSM shall release 50 testimonies and a letter to the <a href="https://twitter.com/FinMinIndia?ref_src=twsrc%5Etfw">@FinMinIndia</a> on denied rights. <a href="https://t.co/iVXqfxAfao">pic.twitter.com/iVXqfxAfao</a></p>
<p>— NREGA Sangharsh (@NREGA_Sangharsh) <a href="https://twitter.com/NREGA_Sangharsh/status/1646373563027562500?ref_src=twsrc%5Etfw">April 13, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>पत्र में कहा गया है कि इस साल मनरेगा के लिए बजट आवंटन में अभूतपूर्व कटौती की गयी है। इससे वेतन भुगतान में देरी होगी, काम की मांग का दमन होगा और गुणवत्ता वाली संपत्तियों की कमी पैदा हो रही है। पत्र में कहा गया है कि एनएमएमएस यानी राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली और आधार जैसी अनियमित प्रौद्योगिकी आधारित भुगतान प्रणाली श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन करती है।</p>
<p>वित्तमंत्री को लिखे गए इस पत्र में देश भर से मनरेगा के 50 श्रमिकों का साक्ष्य भी प्रस्तुत किया गया है।</p>
<p>इस पत्र में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष में काम करने वाले कम से कम सभी लोगों के लिए कानूनी तौर पर 100 दिनों के काम की गारंटी देने के लिए 2.72 लाख करोड़ रुपये की कम से कम जरूरत होगी। जबकि इस साल का मनरेगा का बजट 60 हजार करोड़ रुपये है, जो जीडीपी का 0.198 प्रतिशत है। पत्र में कहा गया है कि इससे साल में मुश्किल से 15 दिन का रोजगार मिल पाएगा। ।</p>
<p>पत्र में कहा गया है कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल को 7500 करोड़ रुपये से अधिक का फंड 26 दिसंबर 2021 से जारी नहीं किया है। ऐसा मनमाने ढंग से धारा 27 का प्रयोग कर किया गया है। 2762 करोड़ रुपये की मजदूरी मनरेगा मजदूरों की लंबित है।</p>
<p>विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी घटी है और 2021 में पांच में चार महिलाएं श्रम बल में शामिल नहीं हैं। जबकि नरेगा महिलाओं के लिए एक जीवन रेखा रही है। पिछले दशक में महिलाओं ने मनरेगा के तहत उत्पन्न कुल मानव दिवस में आधे की हिस्सेदारी की। साल 2022-23 में यह सबसे अधिक 57 प्रतिशत था। महिलाएं अन्य कार्यस्थलों की तुलना में नरेगा कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित पाती हैं। नरेगा के बजट में कटौती महिलाओं, जिसमें आदिवासी, दलित व हाशिये की महिलाएं शामिल हैं, के लिए पहले से खतरनाक स्थिति बनाती हैं।</p>
<p>एनएमएमएस की आलोचना करते हुए कहा गया है कि इससे भुगतान में तकनीकी अड़चने आती हैं और श्रमिक बिना भुगतान के रहने को मजबूर हैं। इससे मजदूरों के 15 दिन के अंदर मजदूरी के भुगतान के अधिकार का भी उल्लंघन होता है। हालांकि इस साल जनवरी से मार्च के बिना 1.75 करोड़ परिवारों ने काम किया है, लेकिन पिछले साल की तुलना में 23 प्रतिशत की कमी आयी है।</p>
<p>इस पत्र में आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम की कमियों को गिनाया गया है और कहा गया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के डेटा से ही पता चलता है कि 50 प्रतिशत से अधिक श्रमिक इसके लिए अभी भी अपात्र हैं। इसमें तीन गड़बड़ियां हैं – अस्वीकृत भुगतान, गलत भुगतान और डायवर्ट भुगतान।</p>
<p>पत्र में कहा गया है कि काम की मांग को पूरा करने और समय पर सुनिश्चित करने के लिए बजट आवंटन बढाया जाए व मजदूरी का भुगतान हो, पश्चिम बंगाल में लंबित मजदूरी भुगतान हो, एनएमएमएस ऐप को रद्द किया जाए और आधार आधारित पेमेंट सिस्टम को अनिवार्य नहीं बनाया जाए।</p>
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                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Apr 2023 23:13:25 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Jharkhand]]>
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                <title>निर्णायक साबित होगा भारत में हरित ऊर्जा परियोजनाओं पर यूके का 1.2 अरब डॉलर का निवेश</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>यूनाइटेड किंगडम (यूके)</strong> में भारतीय मूल के चांसलर ऋषि सुनक और भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल यूके और भारत के बीच 11वीं आर्थिक और वित्तीय वार्ता (ईएफडी) में जलवायु परिवर्तन से निपटने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नए कदमों की घोषणा की। इनमें हरित परियोजनाओं और रिन्युब्ल एनर्जी में सार्वजनिक और निजी निवेश का 1.2 बिलियन डॉलर का पैकेज और भारत में स्थायी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी जुटाने के लिए क्लाइमेट फाइनेंस लीडरशिप इनिशिएटिव (CFLI) भारत साझेदारी का संयुक्त लॉन्च शामिल है। ये निवेश 2030 तक भारत के 450GW रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्य का समर्थन</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/environment/uk-1-2-billion-investment-on-green-energy-projects-in-india-will-prove-decisive/article-9005"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-09/rishi-sunak.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>यूनाइटेड किंगडम (यूके)</strong> में भारतीय मूल के चांसलर ऋषि सुनक और भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल यूके और भारत के बीच 11वीं आर्थिक और वित्तीय वार्ता (ईएफडी) में जलवायु परिवर्तन से निपटने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नए कदमों की घोषणा की। इनमें हरित परियोजनाओं और रिन्युब्ल एनर्जी में सार्वजनिक और निजी निवेश का 1.2 बिलियन डॉलर का पैकेज और भारत में स्थायी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी जुटाने के लिए क्लाइमेट फाइनेंस लीडरशिप इनिशिएटिव (CFLI) भारत साझेदारी का संयुक्त लॉन्च शामिल है। ये निवेश 2030 तक भारत के 450GW रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्य का समर्थन करेंगे।</p>
<p>2020 में £18 बिलियन से अधिक के द्विदेशीय व्यापार के साथ यूके-भारत आर्थिक संबंध पहले से ही मज़बूत हैं और ये एक-दूसरे की अर्थव्यवस्थाओं में लगभग आधा मिलियन नौकरियों के लिए ज़िम्मेदार हैं। इस साल की शुरुआत में, यूके और भारतीय प्रधानमंत्रियों ने अगले दशक में अर्थव्यवस्थाओं और लोगों की नजदीकीयां बढ़ाने और दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए यूके-भारत 2030 रोडमैप लॉन्च किया। देशों ने 2030 तक व्यापार को दोगुना करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया है, जिसमें एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (मुक्त व्यापार समझौते) पर बातचीत भी शामिल है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">1/5: 🇬🇧 Chancellor <a href="https://twitter.com/RishiSunak?ref_src=twsrc%5Etfw">@rishisunak</a> and 🇮🇳 Finance Minister <a href="https://twitter.com/nsitharaman?ref_src=twsrc%5Etfw">@nsitharaman</a> welcomed new agreements at the 11th Economic and Financial Dialogue focussing on tackling <a href="https://twitter.com/hashtag/climatechange?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#climatechange</a> and boosting <a href="https://twitter.com/hashtag/investment?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#investment</a>. <a href="https://t.co/zrF6o8JPiy">pic.twitter.com/zrF6o8JPiy</a></p>
<p>— Alex Ellis (@AlexWEllis) <a href="https://twitter.com/AlexWEllis/status/1433404344855060486?ref_src=twsrc%5Etfw">September 2, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए उल्का केलकर, निदेशक, जलवायु कार्यक्रम WRI ने कहा, “भारत के लो-कार्बन ट्रांजिशन के बड़े पैमाने को अग्रिम पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी। इस तरह समर्पित फंडिंग का उपयोग नई ग्रीन ऊर्जा, उद्योग और शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण और कार्बन-गहन परियोजनाओं में लॉक-इन से बचने के लिए किया जा सकता है। इन नई फंडिंग पहलों को उत्सर्जन को कम करने और आजीविका का समर्थन करने की बड़ी क्षमता रखने वाले लेकिन वित्त तक पहुंचने की कम क्षमता रखने वाले विकेन्द्रीकृत ग्रामीण ऊर्जा और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) में निवेश को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। ”</p>
<p>आगे, अखिलेश मगल, प्रमुख- अनुसंधान सलाहकार, GERMI कहते हैं, “पर्याप्त वित्तीय सहायता हमेशा जलवायु कार्रवाई के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता रही है, और जैसे-जैसे भारत स्वच्छ भविष्य की अपनी तलाश में आगे बढ़ रहा है ये और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। यह घोषणा COP26 पर रचनात्मक वार्ता के प्रति विश्वास बढ़ाती है। यह देखना बाकी है कि धन कैसे आएगा, किन स्रोतों से और उनका उपयोग कहां किया जाएगा। फिर भी, इस विकास को स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए कम लागत वाले वित्त के प्रवाह में योगदान देना चाहिए।”</p>
<p>अंत में , क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक, आरती खोसला, ने कहा, “जलवायु कार्रवाई का वित्तपोषण एक दयाहीन मुद्दा रहा है। COP26 से पहले, इस साझेदारी से पवन और सौर सहित सस्टेनेबल बुनियादी ढांचे के लिए और अधिक निजी पूंजी आनी चाहिए। यह बिजली और परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों से उत्सर्जन को कम करने की दिशा में एक मल्टिप्लायर प्रभाव पैदा करेगा। अगले कुछ महीनों में होने वाली महत्वपूर्ण बैठकों से पहले यह अच्छी खबर है। यह केवल एक प्रतीकात्मक इशारा नहीं, बल्कि वित्तपोषण के लिए प्रतिबद्धताओं को वास्तविक बनाता है।”</p>
<p> </p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>पर्यावरण</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Sep 2021 19:42:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना की आलोचना का दिया जवाब, बोलीं &amp;#8211; राष्ट्रहित से समझौता नहीं</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन, एनएमपी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को एनएमपी योजना का बचाव करते हुए कांग्रेस को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार देशहित और पारदर्शिता को लेकर प्रतिबद्ध है लेकिन चोरी-चुपके काम करना कांग्रेस की शैली है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">“Our government is committed to forward looking, pro-people reform…acting out of conviction.Stealth and secrecy are companions to Congress-style subterfuge.This government makes no compromise with transparency and national interest.” ⁦<a href="https://twitter.com/HardeepSPuri?ref_src=twsrc%5Etfw">@HardeepSPuri</a>⁩ <a href="https://t.co/nrUVrKBxLk">https://t.co/nrUVrKBxLk</a></p>
<p>— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) <a href="https://twitter.com/nsitharaman/status/1432560643899461633?ref_src=twsrc%5Etfw">August 31,</a></p></blockquote>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/business/finance-minister-nirmala-sitharaman-responded-to-the-criticism-of-the-national-monetization-plan-said-no-compromise-with-the-national-interest/article-8928"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-08/nirmala-sitharaman.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन, एनएमपी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को एनएमपी योजना का बचाव करते हुए कांग्रेस को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार देशहित और पारदर्शिता को लेकर प्रतिबद्ध है लेकिन चोरी-चुपके काम करना कांग्रेस की शैली है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">“Our government is committed to forward looking, pro-people reform…acting out of conviction.Stealth and secrecy are companions to Congress-style subterfuge.This government makes no compromise with transparency and national interest.” ⁦<a href="https://twitter.com/HardeepSPuri?ref_src=twsrc%5Etfw">@HardeepSPuri</a>⁩ <a href="https://t.co/nrUVrKBxLk">https://t.co/nrUVrKBxLk</a></p>
<p>— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) <a href="https://twitter.com/nsitharaman/status/1432560643899461633?ref_src=twsrc%5Etfw">August 31, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>वित्त मंत्री ने ट्वीट कर कहा कि हमारी सरकार आगे की सोच, जन समर्थक सुधार के लिए प्रतिबद्ध है, जो दृढ़ विश्वास के साथ काम कर रही है। चोरी-छुपे और गुपचुप तरीके से काम करना कांग्रेस की छल वाली स्टाइल है। सीतारमण ने कहा कि यह सरकार पारदर्शिता और राष्ट्रहित के साथ कोई समझौता नहीं करती है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री ने हाल ही में 6 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन योजना का ऐलान किया था। इसके जरिए रेलवे, बिजली से लेकर सड़क जैसे अलग.अलग बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में संपत्तियों का मौद्रीकरण किया जाएगा। इसी को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियां एनएमपी योजना की आलोचना कर रहे हैं। इन पार्टियों का आरोप है कि मोदी सरकार देश की बेशकीमती संपत्तियों को निजी कंपनियों को बेचना चाहती है।</p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>व्यापार</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/business/finance-minister-nirmala-sitharaman-responded-to-the-criticism-of-the-national-monetization-plan-said-no-compromise-with-the-national-interest/article-8928</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Aug 2021 14:27:10 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर मिल ही गया बजट में पर्यावरण को एक मौका!</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>कोरोना महामारी</strong> के प्रकोप के बाद, एक फरवरी को भारत सरकार का पहला बजट घोषित हुआ। ज़ाहिर है, बजट से ख़ासी उम्मीदें थीं और कुछ बड़े फैसलों का इंतजार भी था। पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से लड़ाई की नज़र से देखें तो इंतज़ार था एक ऐसे बजट का जिसमें इन विषयों को प्राथमिकता दी जाये और अब तक उपेक्षित जन स्वास्थ्य के क्षेत्र को वरीयता मिले।</p>
<p>बजट के बाद आज तसल्ली इस बात की है कि इन सभी विषयों पर सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई और प्राथमिकता भी दी।</p>
<p>स्वास्थ्य के क्षेत्र में रु 2,23,846 के आवंटन के साथ, पिछले</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/success-story/budget-2021-environment/article-8172"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-02/nirmala-budget-2-e1612374456265.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोरोना महामारी</strong> के प्रकोप के बाद, एक फरवरी को भारत सरकार का पहला बजट घोषित हुआ। ज़ाहिर है, बजट से ख़ासी उम्मीदें थीं और कुछ बड़े फैसलों का इंतजार भी था। पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से लड़ाई की नज़र से देखें तो इंतज़ार था एक ऐसे बजट का जिसमें इन विषयों को प्राथमिकता दी जाये और अब तक उपेक्षित जन स्वास्थ्य के क्षेत्र को वरीयता मिले।</p>
<p>बजट के बाद आज तसल्ली इस बात की है कि इन सभी विषयों पर सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई और प्राथमिकता भी दी।</p>
<p>स्वास्थ्य के क्षेत्र में रु 2,23,846 के आवंटन के साथ, पिछले साल के मुकाबले बजट में 137 फ़ीसद की बढ़ोतरी घोषित की गयी है जो की अभूतपूर्व है। साथ ही बात ऊर्जा क्षेत्र की करें तो वायु प्रदूषण में अपने योगदान के लिए मशहूर इस क्षेत्र में, डिस्कॉम रिवाइवल और स्ट्रेस्ड एसेट्स पर भी ध्यान केंद्रित किया है। केंद्रीय बजट में रिन्यूएबल्स से लेकर हाइड्रोजन और यहां तक कि उपभोक्ता के पास अपनी बिजली कम्पनी चुनने का विक्प देने की भी बात की गयी है। इससे विद्युत वितरण कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा।</p>
<p>आगे, जहाँ सौर ऊर्जा निगम को 1,000 करोड़ रुपये मिले, वहीँ नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी को 1,500 करोड़ रुपये का बजट मिला।</p>
<p>भारत पर वायु प्रदूषण का कहर जग ज़ाहिर है। इस समस्या से निपटने के लिए 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले 42 शहरी केन्द्रों के लिए 2,217 करोड़ रुपये की राशि मुहैया कराने का फैसला लिया गया है। यही नहीं, सरकार ने गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए पुराने और अनुपयुक्त वाहनों को हटाने के लिए एक स्वैयच्छिक वाहन स्क्रैपिंग नीति की बात भी की है।</p>
<p>वैश्विक ट्रेंड्स की तर्ज़ पर 2021.22 में एक वृहद हाइड्रोजन एनर्जी मिशन शुरू करने का भी फैसला हुआ है।</p>
<p>इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए, क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला कहती हैं, बजट में अनेक ऐसे संकेत हैं जो इशारा करते हैं कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया बजट वैश्विक रुझानों के अनुरूप है। भारत में ग्रीन हाइड्रोजन से संबंधित एक नई नीति जल्द ही जारी होने की घोषणा बेहद स्वागत योग्य है। जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के अन्य अनेक देश पहले ही महत्वाकांक्षी ग्रीन हाइड्रोजन नीति तैयार कर चुके हैं। यहां तक कि जलवायु संबंधी कार्यवाही में परंपरागत रूप से पिछड़े माने जाने वाले संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भी ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। बजट में कोयला खनन के लिए आवंटित होने वाले धन में कमी किया जाना भी एक अच्छा संकेत है। इस बार बजट में पिछले बजट की तुलना में कोयला खनन के लिए आवंटित धन में 30ः की कटौती की गई है।</p>
<p>लेकिन आईईईएफए की सीनियर एनर्जी इकानमिस्ट विभूति गर्ग की नज़र में ये बजट पर्यावरण संबंधी प्रावधानों के लिहाज़ से मिलाजुला है। वो कहती हैं, ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार ने जहां एसईसीआई और आईआरईडीए को और अधिक धन देने का ऐलान किया है, वहीं सौर लालटेन और इनवर्टर पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई है, ताकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिल सके। साथ ही नेशनल हाइड्रोजन मिशन भी शुरू करने का ऐलान किया है। मगर बजट में दक्षतापूर्ण तरीके से काम नहीं कर रहे कोयला बिजलीघरों को बंद करने के बारे में किसी योजना का जिक्र नहीं है।</p>
<p>विभूति आगे कहती हैं, परिवहन क्षेत्र में सार्वजनिक बस सेवा को मजबूती देने के लिए धन तो आवंटित किया गया है लेकिन इस बात का जिक्र नहीं है कि वह वाहन इलेक्ट्रिक होंगे या नहीं।</p>
<p>आगे, सार्वजनिक परिवहन के बारे में डब्ल्यूआरआई इंडिया के सीईओ डॉक्टर ओ पी अग्रवाल कहते हैं, विनिर्माण और समावेशी विकास बजट 2021-22 के छह स्तंभों में से एक है। इसमें सार्वजनिक परिवहन को तरजीह दी गई है। नगरीय इलाकों में सार्वजनिक परिवहन की बसों के लिए 18000 करोड़ रुपए का आवंटन, ब्रॉड गेज रेल पटरियों के 100ः विद्युतीकरण और वर्ष 2030 तक रेलवे की साजो सामान संबंधी लागतों को कम करने तथा छोटे शहरों के लिए मेट्रो लाइट और मेट्रो नियो सेवाएं शुरू करने के ऐलान पर अमल से लोगों के आवागमन के तौर-तरीकों में बदलाव होगा। इससे हमारी हवा की गुणवत्ता सुधरेगी, सड़कों पर जाम कम होगा और भविष्य के लिए एक समान नगरीय ढांचा तैयार होगा।</p>
<p>बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने भारत के लिए सौर ऊर्जा का अपना वादा दोहराया है। साथ ही सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और इंडियन रिन्यूएबल डेवलपमेंट एजेंसी में अति आवश्यक अतिरिक्त पूंजी के जरिए इस वादे पर अमल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी बढ़ाया गया है, ये कहना है नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल के इंडिया प्रोग्राम में प्रमुख एनर्जी एक्सेस एंड क्लाइमेट पॉलिसी कंसलटेंट मधुरा जोशी का।</p>
<p>ग्रीन हाइड्रोजन के विषय में घोषणा सुन कर डब्ल्यूआरआई इंडिया की जलवायु शाखा की निदेशक उल्का केलकर ख़ासी उत्साहित हैं। वो कहती हैं, यह न सिर्फ स्टील तथा सीमेंट जैसे भारी उद्योगों को डीकार्बनाइज करने के लिए जरूरी है बल्कि यह उस स्वच्छ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो दुर्लभ खनिजों पर निर्भर नहीं करता। आगे, रेलवे की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए भारतीय रेल के डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को सहयोग देने के ऐलान पर उल्का कहती हैं, यह पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी दूरदर्शितापूर्ण कदम है, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के साथ माल ढलाई को सड़क से रेल पटरी पर लाए जाने से प्रदूषण घटेगा और तेल पर निर्भरता में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।</p>
<p>डब्ल्यूआरआई इंडिया में उल्का के सहयोगी और वायु गुणवत्ता शाखा के निदेशक डॉक्टर अजय सिंह नागपुरे कहते हैं, बजट 2021-22 में हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवंटित धन में वर्ष 2020 में आवंटित 4400 करोड़ रुपए के मुकाबले कमी देखी गई है। पिछले साल संबंध में जारी किया गया धन स्थानीय नगरीय इकाइयों द्वारा काफी हद तक खर्च नहीं किया गया। इस साल राज्यों तथा शहरों द्वारा क्षमता विकास के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों से धन को दक्षता पूर्ण तरीके से इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी और बदलाव को जमीन पर उतारने में भी आसानी होगी।</p>
<p>कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो इस बजट में पर्यावरण को यक़ीनन एक मौका ज़रूर मिला है। हाँ, इसमें कोई दो राय नहीं कि करने को बहुत कुछ अब भी है, लेकिन पर्यावरण की नज़र से देखें तो इन सकारात्मक फ़ैसलों का स्वागत ज़रूर करना चाहिए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Feb 2021 23:19:41 +0530</pubDate>
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                <title>बजट निजीकरण पर केंद्रित, देश की संपत्तियां बेचने पर तुली है मोदी सरकार : हेमंत सोरेन</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>रांची (Ranchi) :</strong> झारखंड के मुख्यमंत्री व झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन (Jharkhand Chief Minister Hemant Soren) ने सोमवार (1 February 2021) को संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) द्वारा पेश किए गए आम बजट (Budget2021)को आत्म बिक्री बजट बताया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) का यह बजट सिर्फ निजीकरण पर केंद्रित है और केंद्र सरकार देश की सारी संपत्ति बेचने पर तुली हुई है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">यह आत्म-बिक्री बजट है। सिर्फ़ निजीकरण पर केंद्रित है। देश की सारी संपत्ति बेचने पर तुली है केंद्र सरकार। बैंक से लेकर बंदरगाह बिक</p></blockquote>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/badi-khabar/budget-focused-on-privatization-modi-government-selling-countrys-assets-says-jharkhand-cm-hemant-soren/article-8167"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-02/hemant-soren-e1612184911975.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची (Ranchi) :</strong> झारखंड के मुख्यमंत्री व झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन (Jharkhand Chief Minister Hemant Soren) ने सोमवार (1 February 2021) को संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) द्वारा पेश किए गए आम बजट (Budget2021)को आत्म बिक्री बजट बताया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) का यह बजट सिर्फ निजीकरण पर केंद्रित है और केंद्र सरकार देश की सारी संपत्ति बेचने पर तुली हुई है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">यह आत्म-बिक्री बजट है। सिर्फ़ निजीकरण पर केंद्रित है। देश की सारी संपत्ति बेचने पर तुली है केंद्र सरकार। बैंक से लेकर बंदरगाह बिक रहा है, एयरपोर्ट-रेलवे बिक रहा है। रोज़गार के अवसर बढ़ाने को लेकर कुछ नहीं, बीमार/बंद इकाइयों के लिए कुछ नहीं है। <a href="https://t.co/tyHibDRAFb">pic.twitter.com/tyHibDRAFb</a></p>
<p>— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) <a href="https://twitter.com/HemantSorenJMM/status/1356218871594758147?ref_src=twsrc%5Etfw">February 1, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>हेमंत सोरेन ने कहा कि बैंक से लेकर बंदरगाह तक बिक रहा है। एयरपोर्ट, रेलवे बिक रहा है। रोजगार के अवसर बढाने को लेकर कुछ नहीं है। बीमार और बंद इकाइयों को लेकर बजट में कुछ नहीं है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">मनरेगा पर कुछ नहीं। गरीब और मध्यम परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ाने को लेकर कुछ नहीं।</p>
<p>उल्टा, पेट्रोल और डीजल पर एग्रीकल्चर सेस लगाया जा रहा है। इस बजट में वही राज्य केंद्रित हैं जहाँ चुनाव होने वाले हैं। झारखण्ड को सिर्फ़ निराशा हाथ लगी है।</p>
<p>— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) <a href="https://twitter.com/HemantSorenJMM/status/1356218874832760834?ref_src=twsrc%5Etfw">February 1, 2021</a></p></blockquote>
<p><br />
हेमंत सोरेन ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर सेस बढा दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोलियम पर चार रुपये तक सेस बढा दिया है। मनरेगा पर कुछ नहीं है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की क्रय शक्ति बढाने को लेकर कुछ नहीं किया गया है, उल्टा पेट्रोल-डीजल पर एग्रीकल्चर सेस लगाया जा रहा है। इस बजट में वही राज्य केंद्रित हैं जहां चुनाव होने वाले हैं। झारखंड को सिर्फ निराशा हाथ लगी है।</p>
<p>मालूम हो कि आज संसद में पेश आम बजट में निर्मला सीतारमण ने विनिवेश के जरिए 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का ऐलान किया है। वित्तमंत्री ने कहा है कि सरकारी बैंकों का भी विनिवेश किया जाएगा। एयरपोर्ट के अगले चरण के विनिवेश की प्रक्रिया आरंभ होगी।</p>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Feb 2021 18:42:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया बजट, स्वास्थ्य व इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2021-22 का बजट सोमवार को लोकसभा में पेश किया। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार सोमवार को पेपरलेस बजट पेश किया। वित्तमंत्री ने एक टैब के माध्यम से अपना बजट भाषण प्रस्तुत किया और डिजिटल फार्मेट में सांसद इसकी प्रतियां सबके लिए उपलब्ध होंगी। निर्मला सीतारमण ने इस बजट में स्वास्थ्य सेक्टर में बड़े खर्च का ऐलान, सरकारी उपक्रमों में विनिवेश बढाने व सरकारी व्यय बढाने का ऐलान किया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/Budget2021?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Budget2021</a> 📺LIVE NOW from <a href="https://twitter.com/hashtag/Parliament?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Parliament</a></p>
<p>Presentation of <a href="https://twitter.com/hashtag/UnionBudget?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#UnionBudget</a> 2021-22 by Finance Minister <a href="https://twitter.com/nsitharaman?ref_src=twsrc%5Etfw">@nsitharaman</a><a href="https://twitter.com/hashtag/AatmanirbharBharatKaBudget?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#AatmanirbharBharatKaBudget</a></p>
<p>YouTube: <a href="https://t.co/r06BA3Sz80">https://t.co/r06BA3Sz80</a><br />
Facebook: <a href="https://t.co/p9g0J6q6qv">https://t.co/p9g0J6q6qv</a><a href="https://t.co/afbpXH0YaI">https://t.co/afbpXH0YaI</a></p>
<p>— PIB India (@PIB_India) </p></blockquote>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/business/finance-minister-nirmala-sitharaman-presents-the-union-budget-for-2021-22-live-update/article-8165"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-02/nirmala-101.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2021-22 का बजट सोमवार को लोकसभा में पेश किया। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार सोमवार को पेपरलेस बजट पेश किया। वित्तमंत्री ने एक टैब के माध्यम से अपना बजट भाषण प्रस्तुत किया और डिजिटल फार्मेट में सांसद इसकी प्रतियां सबके लिए उपलब्ध होंगी। निर्मला सीतारमण ने इस बजट में स्वास्थ्य सेक्टर में बड़े खर्च का ऐलान, सरकारी उपक्रमों में विनिवेश बढाने व सरकारी व्यय बढाने का ऐलान किया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/Budget2021?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Budget2021</a> 📺LIVE NOW from <a href="https://twitter.com/hashtag/Parliament?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Parliament</a></p>
<p>Presentation of <a href="https://twitter.com/hashtag/UnionBudget?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#UnionBudget</a> 2021-22 by Finance Minister <a href="https://twitter.com/nsitharaman?ref_src=twsrc%5Etfw">@nsitharaman</a><a href="https://twitter.com/hashtag/AatmanirbharBharatKaBudget?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#AatmanirbharBharatKaBudget</a></p>
<p>YouTube: <a href="https://t.co/r06BA3Sz80">https://t.co/r06BA3Sz80</a><br />
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<p>— PIB India (@PIB_India) <a href="https://twitter.com/PIB_India/status/1356112812745977857?ref_src=twsrc%5Etfw">February 1, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>वित्तमंत्री ने इश्योरेंस सेक्टर में एफडीआइ की सीमा 49 प्रतिशत से बढाकर 74 प्रतिशत करने का ऐलान किया। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि 75 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज व पेंशन से होने वाली आय को लेकर आयकर रिटर्न नहीं फाइल करनी होगी। वित्तमंत्री ने कहा कि 2014 में टैक्स दातााओं की संख्या 3.31 करोड़ रुपये थी, जो अब बढकर 6.48 करोड़ हो गयी। 50 लाख से अधिक के आय को छिपाने पर गंभीर कर अपराध को फिर से खोला जा सकता है।</p>
<p>वित्तमंत्री ने साल 2021-22 में राजकोषीय घाटना जीडीपी के 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया। जबकि जारी वित्तीय वर्ष में इसके 9.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस साल सरकारी बीमा कंपनी एलआइसी का आइपीओ लांच किया जाएगा।</p>
<p>वित्तमंत्री के ऐलान के अनुसार, इस बार जनगणना भी डिजिटल तरीके से होगी। वित्तमंत्री के ऐलान के अनुसार, रेल बजट 1.1 लाख करोड़ रुपये का होगा। 45 हजार किमी पर इलेक्ट्रिक र्टेनों का परिचालन होगा।</p>
<h3>स्वास्थ्य के बजट में सवा दो गुणा से अधिक की वृद्धि</h3>
<p>वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य सेक्टर का बजट पिछले साल के 94 हजार करोड़ रुपये से बढाकर 2.23 लाख करोड़ रुपये करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि देश भर में 75 हजार स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाएंगे और इसके साथ ही 17 नए पब्लिक हेल्थ यूनिट शुरू किए जाएंगे। कोरोना वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपये के फंड का ऐलान किया गया है। वित्तमंत्री ने कहा कि दो स्वेदशी वैक्सीन आए हैं और दो से अधिक वैक्सीन और आने की उम्मीद है।</p>
<h3>आत्मनिर्भर भारत के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस</h3>
<p>वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आत्मनिर्भर भारत के तहत 13 सेक्टरों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए अगले पांच साल में 1.97 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे स्टील, सीमेंट व आधारभूत संरचना को फायदा होने की उम्मीद है।</p>
<div></div>
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                                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>व्यापार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Feb 2021 11:37:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान, दो साल तक कर्मचारियों की पीएफ सब्सिडी देगी सरकार</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली :</strong> वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने गुरुवार को एक बड़ा ऐलान किया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार दो साल तक 1000 तक की संख्या वाले कर्मचारियों वाली संस्थाओं को नयी भर्ती वाले कर्मचारियों के पीएफ का पूरा 24 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के रूप में देगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला एक अक्टूबर 2020 से लागू होगा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">📡लाइव📡: केंद्रीय मंत्री <a href="https://twitter.com/nsitharaman?ref_src=twsrc%5Etfw">@nsitharaman</a> कर रही हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस</p>
<p>📍राष्ट्रीय मीडिया केंद्र, नई दिल्ली</p>
<p>यूट्यूब: <a href="https://t.co/0BZiSc8kfQ">https://t.co/0BZiSc8kfQ</a><br />
फेसबुक: <a href="https://t.co/E2JDbTM8jX">https://t.co/E2JDbTM8jX</a><a href="https://t.co/0AfdBtuu46">https://t.co/0AfdBtuu46</a></p>
<p>— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) <a href="https://twitter.com/PIBHindi/status/1326789597666435072?ref_src=twsrc%5Etfw">November 12, 2020</a></p></blockquote>
<p><br />
यानी 1000 तक कर्मचारियों वाली कंपनियों के कर्मचारियों को मूल वेतन</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/business/finance-minister-nirmala-sitharaman-big-announcement-government-will-give-pf-subsidy-for-two-years/article-8102"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2020-11/nirmala-jii.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली :</strong> वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने गुरुवार को एक बड़ा ऐलान किया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार दो साल तक 1000 तक की संख्या वाले कर्मचारियों वाली संस्थाओं को नयी भर्ती वाले कर्मचारियों के पीएफ का पूरा 24 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के रूप में देगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला एक अक्टूबर 2020 से लागू होगा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">📡लाइव📡: केंद्रीय मंत्री <a href="https://twitter.com/nsitharaman?ref_src=twsrc%5Etfw">@nsitharaman</a> कर रही हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस</p>
<p>📍राष्ट्रीय मीडिया केंद्र, नई दिल्ली</p>
<p>यूट्यूब: <a href="https://t.co/0BZiSc8kfQ">https://t.co/0BZiSc8kfQ</a><br />
फेसबुक: <a href="https://t.co/E2JDbTM8jX">https://t.co/E2JDbTM8jX</a><a href="https://t.co/0AfdBtuu46">https://t.co/0AfdBtuu46</a></p>
<p>— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) <a href="https://twitter.com/PIBHindi/status/1326789597666435072?ref_src=twsrc%5Etfw">November 12, 2020</a></p></blockquote>
<p><br />
यानी 1000 तक कर्मचारियों वाली कंपनियों के कर्मचारियों को मूल वेतन के 12 कर्मचारी के पीएफ अंशदान और 12 प्रतिशत कंपनी के पीएफ अंशदान दोनों का वहन सरकार अगले दो साल तक करेगी. वहीं, जिन कंपनियों में 1000 से अधिक कर्मचारी होंगे वहां नयी भर्ती वाले कर्मचारियों का 12 प्रतिशत पीएफ अंशदान केंद्र सराकर करेगी.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Rs 900 crores provided for COVID Suraksha Mission for research and development of the Indian COVID vaccine to the Department of Biotechnology: Finance Minister Nirmala Sitharaman <a href="https://t.co/eMANIa3xym">pic.twitter.com/eMANIa3xym</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1326812622235131904?ref_src=twsrc%5Etfw">November 12, 2020</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोविड रिकवरी चरण के दौरान रोजगार के नए अवसरों के सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए एक नयी योजना आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना शुरू की गयी है.</p>
<p>वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने सरकार की ओर से और भी कई घोषणाएं की. वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान 2.0 की घोषणा 12 अक्टूबर को की गयी थी, जिसमें पूंजीगत व्यय के लिए 25 हजार करोड़ रुपये सड़क परिवहन मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को दिया गया था.</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Rs 10,200 crore additional budget outlay will be provided towards Capital and industrial expenditure: MoS Finance Anurag Thakur <a href="https://t.co/Wm20CPaLEV">pic.twitter.com/Wm20CPaLEV</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1326812049976913921?ref_src=twsrc%5Etfw">November 12, 2020</a></p></blockquote>
<p><br />
ठाकुर ने कहा कि आठ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश राशन कार्ड नेशनल पोर्टेबिलिटी के अधीन हैं. इसे 68.6 करोड़ लोगों को फायदा हुआ है. पीएमएसवीएनिधि के तहत 1373.33 करोड़ रुपये का कर्ज आवंटित किया गया है.</p>
<p>सरकार की ओर से बताया गया कि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के अंतर्गत 61 लाख लोगों को लाभ मिला है. इसमें 1 लाख 522 हजार करोड़ का वितरण किया गया है.</p>
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                <pubDate>Thu, 12 Nov 2020 15:44:50 +0530</pubDate>
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