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                <title>Ajay Kumar - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Ajay Kumar RSS Feed</description>
                
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                <title>श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में 5100 दीपों से जगमगाया परिसर</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>जमशेदपुर: </strong>श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में रविवार की संध्या एक साथ 5100 दीप प्रज्ज्वलित किये गये। छोटी दीपावली के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की प्रमुख हिस्सेदारी रही। दीप प्रज्ज्वलन का कार्यक्रम जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय के कर-कमलों से हुआ। इस अवसर पर मंदिर को आकर्षक रुप दिया गया गया था। नीली, पीली, हरी और लाल बिजली के झालरों से मंदिर की शोभा देखते ही बनती थी।<img src="https://samridhjharkhand.com/media/2025-10/resized-image-(48).jpeg" alt="श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में 5100 दीपों से जगमगाया परिसर" width="1200" height="720" /><br />इस अवसर पर वरीय समाजसेवी शिव शंकर सिंह, सुबोध श्रीवास्तव, साकेत गौतम, असीम पाठक, अमृता मिश्रा, विकास सिंह, अजय कुमार, राजीव चौधरी, वाईपी सिंह, बंटी सिंह,</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/jamshedpur/the-premises-of-shri-lakshmi-narayan-temple-illuminated-with-5100/article-16775"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-10/resized-image-(47).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>जमशेदपुर: </strong>श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में रविवार की संध्या एक साथ 5100 दीप प्रज्ज्वलित किये गये। छोटी दीपावली के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की प्रमुख हिस्सेदारी रही। दीप प्रज्ज्वलन का कार्यक्रम जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय के कर-कमलों से हुआ। इस अवसर पर मंदिर को आकर्षक रुप दिया गया गया था। नीली, पीली, हरी और लाल बिजली के झालरों से मंदिर की शोभा देखते ही बनती थी।<img src="https://samridhjharkhand.com/media/2025-10/resized-image-(48).jpeg" alt="श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में 5100 दीपों से जगमगाया परिसर" width="1200" height="720"></img><br />इस अवसर पर वरीय समाजसेवी शिव शंकर सिंह, सुबोध श्रीवास्तव, साकेत गौतम, असीम पाठक, अमृता मिश्रा, विकास सिंह, अजय कुमार, राजीव चौधरी, वाईपी सिंह, बंटी सिंह, पीयूष, हनी परिहार, रामस्वरूप जी, सुबोध कुमार एवं अन्य मौजूद रहे।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>जमशेदपुर</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Oct 2025 19:47:17 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                <title>Ranchi News: एसबीयू में फोटोग्राफी कार्यशाला का आयोजन</title>
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                        <![CDATA[सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने फोटोग्राफी कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें आई-नेक्स्ट के वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट पिंटू दुबे ने विद्यार्थियों को फोटोग्राफी की तकनीकी व कलात्मक बारीकियों से अवगत कराया। कार्यशाला में छात्रों ने सैद्धांतिक और प्रायोगिक सत्रों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन और विभागीय शिक्षकों ने विद्यार्थियों को ऐसे आयोजनों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ranchi-news-photography-workshop-organized-in-sbu/article-16742"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-10/resized-image---2025-10-17t165250.668.jpeg" alt=""></a><br /><div><strong>रांची: </strong>सरला बिरला विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आज फोटोग्राफी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में आई-नेक्स्ट समाचार पत्र, रांची के वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट पिंटू दुबे ने विद्यार्थियों को ज्ञानवर्धक जानकारी दी। कार्यशाला में विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान फोटोग्राफी की तकनीकी बारीकियों और कलात्मक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और विद्यार्थियों की जिज्ञासा का समाधान प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही परिसर में एक प्रायोगिक सत्र का भी आयोजन किया गया। सत्र में विद्यार्थियों ने व्यावहारिक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्राप्त किया। सरला बिरला विश्वविद्यालय का पत्रकारिता विभाग समय-समय पर इस तरह के सत्र आयोजित करता रहता है ताकी छात्रो को पत्रकारिता से जुड़े विषयों की व्यवहारिक जानकारी मिल सके। पत्रकारिता जगत के कई प्रमुख नाम विश्वविद्यालय के छात्रो का मार्गदर्शन कर चुके है।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर विभाग के डीन अजय कुमार, विभागाध्यक्ष सुधीर कुमार, डॉ. नंदिनी सिन्हा एवं अजय कुकरेती उपस्थित रहे। शिक्षकगणों ने विषय से संबंधित रचनात्मकता एवं व्यावहारिक ज्ञान प्राप्ति हेतु विद्यार्थियों को इस तरह की कार्यशालाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।</div>
<div> </div>
<div>सरला बिरला विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान, महानिदेशक प्रो गोपाल पाठक, कुलपति प्रो सी जगनाथन एवं राज्यसभा सांसद डॉ प्रदीप कुमार वर्मा ने इस कार्यशाला के आयोजन पर हर्ष व्यक्त किया है।</div>
<div> </div>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Oct 2025 16:53:39 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>हमारी लड़ाई दिकुओं से नहीं, शोषकों से है': शिबू सोरेन का 1987 का साक्षात्कार</title>
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                        <![CDATA[यह लेख शिबू सोरेन के साथ हुए एक साक्षात्कार पर आधारित है. इसमें शिबू सोरेन ने 'दिकू' शब्द के सही अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा था कि उनकी लड़ाई गैर-आदिवासियों से नहीं, बल्कि शोषण करने वालों से है. उन्होंने झारखंड आंदोलन, 'धान काटो आंदोलन' और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ अपने संघर्षों पर खुलकर बात की थी]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/our-fight-is-not-with-the-exploiters-but-shibu-sorens/article-15226"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-04t205854.519.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हरिवंश नारायण सिंह</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>रांची:</strong> 'दिशोम गुरु' शिबू सोरेन आज नहीं रहे. स्मृति उनसे पहली मुलाकात की. दिसंबर का महीना. वर्ष, 1987. कोलकाता में ‘रविवार’ (आनंद बाजार पत्रिका समूह) में काम करता था. कोलकाता से उनसे बातचीत करने ही झारखंड (तब, अविभाजित बिहार का हिस्सा) आया था. शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन की अगुवाई कर रहे थे. गांव-गांव में गुरुजी के नाम से लोकप्रिय. सिर्फ राजनीतिक नहीं, सामाजिक बदलाव की लड़ाई भी लड़ रहे थे. आदिवासियों ,झारखंडियों को शराब छोड़ने और शिक्षा से जुड़ने की प्रेरणा दे रहे थे. उनसे एक गांव में मुलाकात हुई. लंबी बातचीत हुई. तब शिबू सोरेन के आंदोलन का ही हवाला देकर 'दिकू' शब्द को लेकर भी भ्रम फैला था. उन्होंने बातचीत में बहुत ही स्पष्ट शब्दों में सब बताया था. आज, उनके न रहने पर, उनकी स्मृतियों को समर्पित करते हुए फिर से उस इंटरव्यू (‘रविवार’, 05 दिसंबर 1987) का एक अंश साझा कर रहा हूं. यह इंटरव्यू हाल ही में प्रकाशन संस्थान (नई दिल्ली) से प्रकाशित 'समय के सवाल' सीरीज के दूसरे खंड की किताब 'झारखंड: सम्पन्न धरती-उदास बसंत' में संकलित-प्रकाशित है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हमारी लड़ाई 'दिकुओं' से नहीं शोषकों से है: शिबू सोरेन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">शिबू सोरेन आदिवासियों के दूसरे 'मरांग गोमके' हैं. आज भी आदिवासियों के बीच वह मसीहा की तरह लोकप्रिय हैं. अपने लड़ाकू तेवर के कारण वह मशहूर रहे हैं. श्री सोरेन ने राजनीति पढ़-लिखकर नहीं सीखी, उनका जीवन ही कठिनाइयों के बीच आरम्भ हुआ. उनके अध्यापक पिता स्वतंत्रता की लड़ाई में काफी सक्रिय रहे थे. 1957 में महाजनों ने उनकी हत्या कर दी. तब वह छठी कक्षा में थे. सोरेन सात भाई-बहन थे. पिता के न रहने पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गयी. 1967-69 में बनियों के खिलाफ उनका धान काटो आन्दोलन गिरीडीह, हजारीबाग और धनबाद अंचल में काफी सफल रहा. उस वक्त उन्होंने जन-अदालतों का गठन किया और नारा दिया, 'जमीन का फैसला जमीन में होगा, कोर्ट-कचहरी में नहीं.' उन दिनों शिबू सोरेन के नेतृत्व में चलनेवाले आन्दोलन का यह आलम था कि रात के डेढ़-दो बजे भी नगाड़े की आवाज पर हजारों आदिवासी पलक झपकते एकजुट हो जाते थे. फिर ए.के. राय, विनोद बिहारी महतो और शिबू सोरेन के सामूहिक नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोरचा की जड़ें काफी फैलीं और मजबूत हुईं. अब एक बार फिर शिबू सोरेन पुराने तेवर के साथ झारखंड की लड़ाई में कूदने के लिए तैयार हैं और इसके लिए वह गाँव-गाँव घूम भी रहे हैं. एक आदिवासी गाँव में उनसे हुई बातचीत का ब्योरा.</p>
<h4><strong>सवाल : आपके ऊपर आरोप है कि झामुमो के अंदर आप कांग्रेस की राजनीति करते हैं?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>जवाब:</strong> यह आरोप उन लोगों ने लगाया है, जो मेरा चरित्र हनन करना चाहते हैं. वस्तुतः यह कुछ भ्रष्ट कांग्रेसियों, दूसरे दलों के ओछे नेताओं और नौकरशाहों की साजिश का परिणाम है. छोटानागपुर में जयपाल सिंह के बाद सबसे सशक्त आन्दोलन मेरे नेतृत्व में चला और चल रहा है. इस आन्दोलन से जिस स्वार्थी तबके को खतरा है, वह मुझे बदनाम करने पर तुला है और यह उसी द्वारा किया गया कुप्रचार है.</p>
<h4><strong>सवाल: झामुमो और आजसू के बीच क्या संबंध हैं?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>जवाब: </strong>आजसू का गठन हम लोगों ने ही किया था. हमारा उद्देश्य था कि विद्यार्थियों का राजनीतिक प्रशिक्षण हो, ताकि भविष्य में ये लोग सक्षम नेतृत्व दे सकें. महिला, मजदूर, बुद्धिजीवी आदि हर वर्ग में हमने अपना संगठन बनाया है.</p>
<h4><strong>सवाल: क्या आजसू आपकी कल्पनानुसार चल रहा है?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>जवाब:</strong> इसके अंदर बाद में कुछ अवांछित तत्त्व घुस आये, ऐसे लोगों का क्रियाकलाप संदिग्ध था. ये लोग हमारे संगठन, केंद्रीय समिति से बगैर परामर्श किये काम करने लगे थे.</p>
<h4><strong>सवाल: झारखंड की लड़ाई आप कैसे लड़ना चाहते हैं? 'दिकू' आप किसे मानते हैं?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>जवाब:</strong> झारखंड की लड़ाई संविधान के तहत, प्रजातांत्रिक तरीके से ही हम लड़ना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि हमारे लिए अलग राज्य बने, जहाँ हमारी बात पर गौर हो, समस्याएँ सुनी जायें. पिछले वर्ष के अनुभवों को देखते हुए हमारी आशा खत्म हो गयी है. अब बिना अलग राज्य का गठन हुए हमारा शोषण खत्म नहीं हो सकता. प्रजातांत्रिक संस्थाओं में जब लोगों की आस्था खत्म होती है, तो हिंसा पनपती है. झारखंड इलाके से केंद्र और राज्य सरकार को सर्वाधिक आय होती है. हमारी संपत्ति को लेकर उलटे हमारे ऊपर ही तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं. झारखंड की माँग के कारण हमारे ऊपर हमले हो रहे हैं.</p>
<p>हमारी माँग '50 के दशक में आरम्भ हुई. इसके बाद भाषा, संस्कृति और जातीयता के नाम पर अनेक नये राज्यों का गठन हुआ है. मसलन पंजाब, हरियाणा, गोवा, मिजोरम आदि. लेकिन हमारी माँग पूरी नहीं हुई. उलटे हमारे जंगल और भाई-बंधु शोषण के केंद्र बन गये. लकड़ी ढोने के लिए जंगलों तक सड़क बनी, लकड़ी ढोने और जंगल को तहस-नहस करने के बाद सड़क खत्म हो गयी. अब सरकार को ऐसी सड़कों से कोई लेना-देना नहीं है. जंगल का फॉरेस्ट गार्ड कहता है कि जंगल हमारा है. आदिवासी कहते हैं, इस पर हमारा हजारों वर्षों से आधिपत्य है. पुलिस, ठेकेदारों और जंगल अधिकारियों से मिली हुई है. इसलिए संघर्ष स्वाभाविक है.</p>
<p>'दिकू' हम उसे कहते हैं जिसके अंदर दिक्-दिक् (तंग करने) करने की प्रवृत्ति हो. दिक् करनेवाला हमारा आदमी भी हो सकता है. दिकू-गैर आदिवासी नहीं है. हजारों गैर आदिवासियों का झारखंड के प्रति समर्पण है. जब शोषकों के खिलाफ हमला होता है, तो कुछ लोग कुप्रचार करते हैं कि दिकुओं को भगाया जा रहा है, ताकि आन्दोलन के चरित्र उद्देश्य के बारे में लोगों का ध्यान मोड़ा जा सके.</p>
<h4><strong>सवाल : आजसू के छात्रों ने आदिवासी विधायकों-सांसदों से त्यागपत्र देने की माँग की है? आप लोग क्या कर रहे हैं? क्या आपकी लड़ाई हिंसक भी हो सकती है?</strong></h4>
<p><strong>जवाब:</strong> हमने पार्टी में पुनर्विचार किया था कि आखिर विधायक या सांसद बन जाने से क्या फायदे होते हैं? मेरे मन में यह बात आती थी कि जब कोई कारगर काम नहीं हो रहा है, तो हमें त्यागपत्र देना चाहिए. अफसर भ्रष्ट हैं. कोई बात सुनने को तैयार नहीं. लेकिन ऐसी बातों का निर्णय पार्टी की केंद्रीय समिति ही करेगी. आजसू के लोगों ने इस संबंध में अपने ढंग से अपना सिक्का जमाने के लिए यह 'काल' दिया है. कुछ ऐसे विधायक हैं, जो आजसू के द्वारा इस माँग को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन वे खुद त्यागपत्र नहीं दे रहे हैं. आजसू के पीछे सही लोग नहीं हैं.</p>
<p>सांस्कृतिक रूप से, पैदा होते ही हम तीर-धनुष उठा लेते हैं. तीर-धनुष के बल जंगलों की सफाई कर हमने जमीन हासिल की. जंगली जानवरों ने तब हम पर हमला किया. आज जंगल पर दूसरे लोग काबिज हो गये हैं. ठेकेदार और सरकारी अफसर हम पर जो अमानुषिक अत्याचार करते हैं, उसका विरोध हम तीर-धनुष से करते हैं. बम, पिस्तौल या सेना हमारे पास नहीं है. हम झारखंड में हिंसात्मक माहौल नहीं बनने देना चाहते, लेकिन इस बात को सरकार नहीं समझ पा रही है.<br />विभिन्न परियोजनाओं के ठेकेदार, स्वर्णरखा के ठेकेदार और टाटा के ठेकेदार ये सभी हमें लूट रहे हैं. विभिन्न परियोजनाओं में या पूँजीपति के यहाँ ईंट-पत्थर आदि ढोने का काम हम करते हैं, लेकिन पैसा ठेकेदार लूटते हैं. ये ठेकेदार गुंडे पालते हैं. हमारी महिलाओं के साथ छेड़खानी करते हैं. न्यूनतम मजदूरी नहीं देते. न्यूनतम मजदूरी माँगने के सवाल पर हमारे दो कार्यकर्ता राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम में 2 वर्षों से बंद हैं. रामाश्रय सिंह (बिहार सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री) पिछले 7 साल से सिंहभूम में 20 सूत्री कार्यक्रम के प्रभारी बने हुए थे. उन्होंने अपने अफसरों को महत्त्वपूर्ण जगहों पर तैनात करा रखा था. ठेकेदार उनके अपने थे. झारखंड में लोग ऐसी स्थिति से उबल रहे हैं, ऊपर से पुलिस भी हमें परेशान करती है. राँची, जमशेदपुर और हजारीबाग में पिछले 10-10 सालों से एक ही थाने में एक ही थानेदार जमे हुए हैं. वस्तुतः ऐसे थानेदार आतंक और शोषण के केंद्र हैं. जबरन धमाका कर पैसे वसूलते हैं. आदिवासियों को प्रताड़ित करते हैं और आश्चर्य तो यह है कि ये पुलिस सुपरिंटेंडेंट से भी ज्यादा ताकतवर-पहुँच वाले हैं. पटना में पदासीन इनके आका इन्हें खुलेआम मदद करते हैं. छोटानागपुर से पचास लाख लोग बाहर गये हैं, रोजी-रोटी की तलाश में. सोचिए, बाहर के लोग यहाँ आ कर शोषण करें और हम रोजी-रोटी की तलाश में दर-दर भटकें और आबरू बेचें. वस्तुतः थाना, कोर्ट और बाजार में हर तरफ हमारा शोषण हो रहा है.</p>
<p><strong>हरिवंश नारायण सिंह, एक भारतीय पत्रकार और राजनेता हैं. वर्तमान में वह राज्यसभा के उप सभापति हैं.</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(206,212,217);">यह पोस्ट हरिवंश नारायण सिंह के फेसबुक वॉल से साभार ली गई है।</span></p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>साक्षात्कार</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 20:59:36 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
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                <title>Opinion: अखिलेश को बड़ा झटका देने की तैयारी में ब्राह्मण समाज</title>
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                        <![CDATA[आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी का यह नया कार्यालय 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. अखिलेश ने इसे पीडीए भवन नाम देकर अपनी रणनीति को स्पष्ट कर दिया. पीडीए, यानी पिछड़ा, दलित, और अल्पसंख्यक सपा की राजनीतिक रणनीति का आधार रहा है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/politics/opinion-brahmin-society-in-preparation-to-give-a-big-blow/article-14684"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-06/resized-image-(30).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजमगढ़, उत्तर प्रदेश का एक ऐसा जिला जो समाजवादी पार्टी (सपा) (Samajwadi Party) का गढ़ माना जाता है, 3 जुलाई 2025 को एक बार फिर सुर्खियों में था. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B5">अखिलेश यादव</a> ने अपने नए आवास और पार्टी कार्यालय, जिसे उन्होंने पीडीए भवन नाम दिया, का उद्घाटन और गृह प्रवेश किया. यह भवन अनवरगंज में 72 बिस्वा जमीन पर बना है, जिसमें अखिलेश का निजी निवास, पार्टी कार्यालय, और समर्थकों के लिए एक बड़ा हॉल शामिल है. लेकिन इस भव्य आयोजन के बीच एक सवाल ने सबका ध्यान खींचा अखिलेश ने गृह प्रवेश की पूजा के लिए काशी के ब्राह्मण विद्वानों को आमंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समुदाय के किसी विद्वान को क्यों नहीं बुलाया? यह सवाल न केवल सियासी गलियारों में, बल्कि सोशल मीडिया और स्थानीय जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गया. बात ब्राह्मण समाज की नाराजगी की कि जाये तो ब्राह्मण सभा ने सपा कार्यालय और आवास के गृह प्रवेश के लिये गये ब्राह्मणों को अपने समाज से निकाल दिया है. ब्राह्मणों की यह नाराजगी सपा को 2027 के चुनाव में भारी पड़ सकती है, यूपी में करीब 10 प्रतिशत ब्राह्मण हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी का यह नया कार्यालय 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. अखिलेश ने इसे पीडीए भवन नाम देकर अपनी रणनीति को स्पष्ट कर दिया. पीडीए, यानी पिछड़ा, दलित, और अल्पसंख्यक सपा की राजनीतिक रणनीति का आधार रहा है, जिसने 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को 37 सीटें दिलाकर उत्तर प्रदेश में बीजेपी के विजय रथ को रोकने में मदद की. अखिलेश ने उद्घाटन समारोह में कहा, "पीडीए की एकता ही हमें 2027 में सत्ता दिलाएगी." इस भवन को न केवल एक कार्यालय, बल्कि एक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा है, जहां युवाओं को समाजवादी विचारधारा से जोड़ा जाएगा.</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इस आयोजन की चमक उस समय फीकी पड़ गई, जब यह खबर आई कि अखिलेश ने गृह प्रवेश की पूजा के लिए काशी के ब्राह्मण विद्वानों को बुलाने की इच्छा जताई थी, लेकिन वे नहीं आए. सूत्रों के अनुसार, काशी के पंडितों ने इटावा में हाल ही में हुए एक विवाद, जिसे 'इटावा कथावाचक कांड' कहा जा रहा है, के कारण नाराजगी जताते हुए पूजा कराने से मना कर दिया. इस कांड में अखिलेश के कुछ बयानों को ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ माना गया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर दान-दक्षिणा और पूजा-पाठ की परंपराओं पर सवाल उठाए थे.</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश ने अंततः स्थानीय पंडितों से पूजा करवाई, और कुछ स्रोतों के अनुसार, पुजारी चंदन कुशवाहा ने इस कार्य को संपन्न किया. लेकिन सवाल यह उठता है कि पीडीए भवन के उद्घाटन जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर, जब अखिलेश अपनी पीडीए रणनीति को और मजबूत करने की बात कर रहे थे, तब उन्होंने पीडीए समुदाय के किसी विद्वान को पूजा के लिए क्यों नहीं चुना? यह सवाल न केवल उनके विरोधियों, बल्कि उनके समर्थकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे अखिलेश की रणनीति में विरोधाभास बताया. एक यूजर ने लिखा, "भवन का नाम तो रख दिया, लेकिन पूजा ब्राह्मणों से ही करवानी है. क्या पीडीए में कोई विद्वान नहीं था?" एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा, "अखिलेश जी को कोई पीडीए का पंडित नहीं मिला क्या? कथनी और करनी में अंतर साफ दिखता है." इन टिप्पणियों ने सपा के पीडीए फार्मूले पर सवाल उठाए, जिसे अखिलेश ने हाल के वर्षों में अपनी पार्टी की छवि को यादव-मुस्लिम से हटाकर व्यापक बनाने के लिए अपनाया था.</p>
<p style="text-align:justify;">आजमगढ़ में पूजा के लिए ब्राह्मण विद्वानों को बुलाने की कोशिश को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. अखिलेश शायद यह संदेश देना चाहते थे कि उनकी पार्टी सभी समुदायों को साथ लेकर चल रही है. लेकिन काशी के पंडितों की अनुपस्थिति और स्थानीय पंडितों द्वारा पूजा करवाने ने इस संदेश को कमजोर कर दिया. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश का यह कदम उनकी पीडीए रणनीति को मजबूत करने का प्रयास था, लेकिन यह उल्टा पड़ गया.</p>
<p style="text-align:justify;">इस आयोजन को और चर्चा में लाने वाला एक अन्य पहलू था ब्राह्मण महासभा और विश्व हिंदू महासंघ के सदस्यों का विरोध. कुछ प्रदर्शनकारियों ने अखिलेश के खिलाफ काले झंडे लहराए और उन पर ब्राह्मण समुदाय की छवि खराब करने का आरोप लगाया. इसके अलावा, एक सुरक्षा चूक ने भी सुर्खियां बटोरीं, जब एक युवक बैरिकेडिंग तोड़कर मंच के करीब पहुंच गया. पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में लिया, लेकिन इस घटना ने अखिलेश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए.</p>
<p style="text-align:justify;">इन विवादों के बावजूद, पीडीए भवन का उद्घाटन समाजवादी पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. यह भवन न केवल अखिलेश का दूसरा घर है, बल्कि पूर्वांचल में सपा की सियासी रणनीति का केंद्र भी बनेगा. अखिलेश ने अपने भाषण में बीजेपी पर जमकर हमला बोला और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का श्रेय अपनी सरकार को दिया. उन्होंने कहा, लखनऊ से आजमगढ़ पहुंचने में उतना ही समय लगता है, जितना सैफई. यह हमारे द्वारा बनाए गए एक्सप्रेसवे की बदौलत है.</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, आजमगढ़ में पीडीए भवन का उद्घाटन और गृह प्रवेश एक सियासी मास्टरस्ट्रोक हो सकता था, लेकिन ब्राह्मण विद्वानों की अनुपस्थिति और पीडीए समुदाय के विद्वानों को न बुलाने का फैसला सवालों के घेरे में आ गया. जहां वे एक तरफ अपने मूल समर्थक वर्ग को मजबूत करना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ सवर्ण वोटरों को भी साधने की कोशिश कर रहे हैं. 2027 के चुनावों में यह रणनीति कितनी कारगर होगी, यह तो समय ही बताएगा.</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jul 2025 11:47:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[अजय कुमार, लखनऊ]]>
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                <title>देश से पहले, बिहार में घर बैठे मोबाइल से वोटिंग का ट्रायल</title>
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                        <![CDATA[ई-वोटिंग सिस्टम से वोटिंग में हर वोट को फेस वेरिफिकेशन और वोटर आईडी के जरिए क्रॉस-वेरिफाई किया गया, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित रही. बिहार के छह नगर निगमों पटना, रोहतास और पूर्वी चंपारण में इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू किया गया]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/bihar/trial-of-voting-from-mobile-sitting-at-home-in-bihar/article-14672"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-06/resized-image-(30).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चुनाव प्रक्रिया को सुलभ और मतदान व्यवस्था का सुगम बनाने के क्रम में 28 जून 2025 को बिहार ने इतिहास रच दिया. देश में पहली बार, बिहार के नगर निकाय चुनावों और उपचुनावों में मोबाइल आधारित ई-वोटिंग प्रणाली लागू की गई. यह पहल बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की थी, जिसने ई-एसईसीबीएचआर नामक एक एंड्रॉयड ऐप लॉन्च किया. इस ऐप ने मतदाताओं को घर बैठे अपने स्मार्टफोन से वोट डालने की सुविधा दी, खासकर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए. इसी के साथ पूर्वी चंपारण की विभा कुमारी ने देश की पहली ई-वोटर बनकर इतिहास में अपना नाम दर्ज किया. उन्होंने अपने मोबाइल फोन से वोट डाला और इस नई तकनीक की ताकत को दुनिया के सामने लाया. विभा ने बताया कि मैं बीमार थी और पोलिंग बूथ तक जाना मुश्किल था. इस ऐप ने मुझे मेरे घर से ही लोकतंत्र का हिस्सा बनने का मौका दिया .</p>
<p style="text-align:justify;">ई-वोटिंग सिस्टम से वोटिंग में हर वोट को फेस वेरिफिकेशन और वोटर आईडी के जरिए क्रॉस-वेरिफाई किया गया, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित रही. बिहार के छह नगर निगमों पटना, रोहतास और पूर्वी चंपारण में इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू किया गया. आंकड़ों के मुताबिक, 69.49 फीसदी से 70.20 फीसदी मतदाताओं ने इस नई प्रणाली का उपयोग किया, जो पारंपरिक ईवीएम से 16 प्रतिशत अधिक थी. यह तकनीक न केवल सुविधाजनक थी, बल्कि प्रवासी भारतीयों और दूरस्थ मतदाताओं के लिए भी वरदान साबित हुई.</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इस नई प्रणाली को लेकर कुछ सवाल भी उठे. कुछ लोगों ने ऐप की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, जैसे कि क्या इसे हैक किया जा सकता है या वोटर लिस्ट में हेरफेर संभव है. सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे प्री-प्रायोजित एजेंडा तक करार दिया. लेकिन निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि सख्त सत्यापन प्रक्रिया और 5जी कनेक्टिविटी ने इसे सुरक्षित बनाया. फिर भी, इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों का विश्लेषण भविष्य में विधानसभा चुनावों के लिए इसके उपयोग पर निर्णय लेगा.</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार की इस पहल ने पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी. सवाल उठ रहे हैं कि क्या मोबाइल वोटिंग भारत के लोकतंत्र को और सुलभ बनाएगी? बिहार के इस प्रयोग ने दिखाया कि तकनीक और लोकतंत्र का मेल संभव है. राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद ने कहा, यह एक शुरुआत है. हमारा लक्ष्य हर मतदाता तक पहुँचना है. इस सफलता ने बिहार को न केवल तकनीकी नवाचार का अग्रदूत बनाया, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम की.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार</strong><br /><strong>मो-9335566111</strong></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>बिहार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Jun 2025 14:42:24 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>झारखंड के DGP बने अनुराग गुप्ता, तीन और आईपीएस अधिकारियों का तबादला</title>
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                        <![CDATA[झारखंड सरकार ने अनुराग गुप्ता को एक बार फिर से झारखंड डीजीपी की कमान सौंपी है. इसको लेकर गृह,कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने गुरुवार की रात अधिसूचना जारी कर दी है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/anurag-gupta-becomes-dgp-of-jharkhand-three-more-ips-officers/article-12956"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/ips-posting(4)-28-nov-2024-19-35-09.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची: </strong>झारखंड सरकार ने अनुराग गुप्ता को एक बार फिर से झारखंड डीजीपी की कमान सौंपी है. इसको लेकर गृह,कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने गुरुवार की रात अधिसूचना जारी कर दी है. बता दें कि अनुराग गुप्ता वर्त्तमान में एसीबी के डीजी के पद पर पदस्थापित हैं. </p>
<p style="text-align:justify;">झारखंड डीजीपी के पद पर पदस्थापित अजय कुमार को झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के एमडी के पद पर पदस्थापित किया गया है. वहीं अजीत पीटर डुंगडुंग को देवघर का एसपी बनाया गया है. अंबर लकड़ा को जैप तीन कमांडेंट के पद पर पदस्थापित किया गया है.</p>
<img src="https://samridhjharkhand.com/media/2024-11/ips-posting(4)-28-nov-2024-19-35-09.png" alt="झारखंड के DGP बने अनुराग गुप्ता, तीन और आईपीएस अधिकारियों का तबादला" width="583" height="804"></img>
IPS Posting(4) 28-Nov-2024 19-35-09
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Nov 2024 21:18:05 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Subodh Kumar]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ramgarh News: सिमडेगा से पंजाब जा रहा डोडा से लदा ट्रेलर जब्त, चालक गिरफ्तार   </title>
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                        <![CDATA[रामगढ़ पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि रामगढ़-रांची हाइवे एक ट्रेलर डोडा लोड कर जा रहा है. सूचना मिलने के बाद एसपी ने पुलिस टीम का गठन किया. रामगढ़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डोडा लोड एक ट्रेलर को जब्त किया है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ramgarh/ramgarh-news-doda-laden-trailer-going-from-simdega-to-punjab/article-12259"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/डोडा-1--(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रामगढ़:</strong> विधानसभा चुनाव से पहले रामगढ़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डोडा लोड एक ट्रेलर को जब्त किया है. एसपी अजय कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि रामगढ़-रांची हाइवे एक ट्रेलर डोडा लोड कर जा रहा है. सूचना मिलने के बाद एसपी ने पुलिस टीम का गठन किया. गठित टीम के द्वारा ट्रेलर को रोकने का प्रयास किया गया तो ट्रेलर चालक पुलिस को देख कर वाहन को तेजी से रामगढ़ की ओर भगाने लगा, भागने के क्रम में चुटूपालू घाटी गण्डके मोड़ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया. जांच करने पर पाया गया कि लोड लोहा के ऊपर में कुछ भरी हुई बोरी रखी हुई है. बोरी को खोल कर जांच किया गया तो बोरी में सुखा हुआ डोडा पाया गया. चालक से नाम पता पूछने पर वह अपना नाम बालकरण सिंह, जिला-भटींडा पंजाब बताया.</p>
<p>तलाशी के दौरान वाहन पर 28 प्लास्टिक की बोरियो डोडा भरा हुआ था. पूछताछ के दौरान बताया कि वह अपने वाहन पर सिमडेगा से बोरियों में डोडा लोडकर पंजाब के विभिन्न जगहों पर बिक्री करते है.</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रामगढ़</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Oct 2024 16:41:07 +0530</pubDate>
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                <title>झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार का इस्तीफा</title>
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                        <![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong>रांची: लोक सभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस में इस्तीफो का दौर जारी है। इसी कड़ी में सोमवार को झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार ने पार्टी नेतृत्व के पास अपना इस्तीफा भेज दिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने इस बाबत पुष्टि करते हुये कहा कि राज्य में खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने अपना इस्तीफा दिया है।</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;">श्री दूबे ने यह भी कहा कि ऐसे झारखंड में कांग्रेस ने बहुत खराब प्रदर्शन नहीं किया है। हमने सिंहभूम सीट आसानी से जीती है, जबकि लोहरदगा व खूंटी की सीटें बहुत कम अंतर (क्रमशः 10,000</h5>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/jharkhand-congress-leader-ajay-kumar-resigns/article-1807"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2019-05/0521_ajoy.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong>रांची: लोक सभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस में इस्तीफो का दौर जारी है। इसी कड़ी में सोमवार को झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार ने पार्टी नेतृत्व के पास अपना इस्तीफा भेज दिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने इस बाबत पुष्टि करते हुये कहा कि राज्य में खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने अपना इस्तीफा दिया है।</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;">श्री दूबे ने यह भी कहा कि ऐसे झारखंड में कांग्रेस ने बहुत खराब प्रदर्शन नहीं किया है। हमने सिंहभूम सीट आसानी से जीती है, जबकि लोहरदगा व खूंटी की सीटें बहुत कम अंतर (क्रमशः 10,000 व 1,400 वोट) से हारी हैं। गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर व पार्टी की ओडिशा इकाई के प्रमुख निरंजन पटनायक ने भी इस्तीफा दे दिया था। कर्नाटक कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष एचके पाटिल ने भी इस्तीफा दिया है। यहां वीरप्पा मोइली और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेता हार गए हैं। उत्तर प्रदेश के अमेठी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की हार के बाद जिला इकाई के अध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने इस्तीफा दिया है। खुद राहुल गांधी ने भी कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ने की पेशकश की है। हालांकि इसे ठुकरा दिया गया है। बताते चलें, कि कांग्रेस के प्रदेश में खराब प्रदर्शन के बाद से ही अध्यक्ष को लेकर विरोध शुरु हो गया था। प्रदेश कांग्रेस के वरीय नेता व राज्य सरकार के पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता साथ-साथ कई नेताओं ने डाॅ अजय को निशाने पर लिया था।</h5>
<p>[URIS id=8357]</p>
<h5 style="text-align:justify;">पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने भी प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को निशाने पर लिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस को प्रदेश में बेच दिया गया है। ऐसे में बेहतर परिणाम की कल्पना नहीं की जा सकती। संगठन पूरी तरह फर्जी था और बालू की भीत खड़ी की गई। जिन स्थानों पर प्रत्याशी खड़े किए गए, वहां बूथों पर पार्टी के एजेंट तक नहीं थे। प्रदेश नेतृत्व अगर आलाकमान और राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का हितैषी रहता तो ऐसा नहीं करता। पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर सारे काम किए गए। टिकट बंटने के छह महीने पहले ही आलाकमान को यह कहकर भ्रम में डाल दिया कि गोड्डा से फुरकान अंसारी को टिकट नहीं देना है।</h5>
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                                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2019 20:00:24 +0530</pubDate>
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