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                <title>shibu soren news - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>Ramgarh news: स्मृति शेष-दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का लगा तांता</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>रामगढ़:</strong> स्मृति शेष-राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन के "श्राद्ध कर्म" के आठवें दिन भी आज सुबह से ही रामगढ़, नेमरा स्थित मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पैतृक आवास में "गुरुजी" को श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का तांता लगा रहा। हजारों की संख्या में नेमरा पहुंचे आम और खास सभी वर्ग के लोगों ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से मुलाकात कर उनके प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की। </p>
<p>स्मृति शेष-दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे लोगों ने "गुरुजी" को याद करते हुए कहा कि धन्य है नेमरा की भूमि जहां "गुरुजी" जैसे विभूति का जन्म हुआ। लोगों ने</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ramgarh/ramgarh-news-smriti-bashan-dishom-guru-shibu-soren-paid-tribute-to/article-15437"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-12t194156.282.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रामगढ़:</strong> स्मृति शेष-राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन के "श्राद्ध कर्म" के आठवें दिन भी आज सुबह से ही रामगढ़, नेमरा स्थित मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पैतृक आवास में "गुरुजी" को श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का तांता लगा रहा। हजारों की संख्या में नेमरा पहुंचे आम और खास सभी वर्ग के लोगों ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से मुलाकात कर उनके प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की। </p>
<p>स्मृति शेष-दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे लोगों ने "गुरुजी" को याद करते हुए कहा कि धन्य है नेमरा की भूमि जहां "गुरुजी" जैसे विभूति का जन्म हुआ। लोगों ने कहा कि नेमरा में "गुरुजी" को श्रद्धांजलि  देने जनसैलाब उमड़ पड़ा है यह अपने प्रिय नेता के प्रति लोगों का प्यार और स्नेह है। अपने जननेता को खोने का गम लोगों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है।</p>
<h5><strong>"गुरुजी" ने झारखंड वासियों के अस्मिता की रक्षा की लड़ाई लड़ी</strong></h5>
<p>लोगों ने कहा कि स्मृति शेष-दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंडी चेतना के प्रहरी रहे। उन्होंने जल, जंगल, जमीन ही नहीं बल्कि संपूर्ण झारखंड वासियों के अस्मिता की रक्षा की लड़ाई लड़ी। "गुरुजी" ने आदिवासी, दलित, शोषित, वंचित समुदायों को उनके हक-अधिकार के लिए जागरूक किया। "गुरुजी" ने अपना पूरा जीवन जनहित के कार्यों के लिए समर्पित किया। "गुरुजी" का परलोक गमन अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। अलग झारखंड राज्य के निर्माता को शत-शत नमन!</p>
<p>श्रद्धांजलि देने वालों में मंत्री, सांसद, विधायक सहित अन्य गणमान्य एवं  राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों की संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित थे।</p>]]>
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                                                            <category>रामगढ़</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 19:43:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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            <item>
                <title>शिबू सोरेन निधन: एक शिक्षक के बेटे से 'दिशोम गुरु' और झारखंड के पितामह बनने का सफर समाप्त</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ ही नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं लड़े, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की नियति को आकार दिया। 'गुरुजी' और 'दिशोम गुरु' (देश के गुरु) के नाम से विख्यात शिबू सोरेन एक ऐसा ही नाम हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधारक, एक जन-आंदोलन के प्रणेता और झारखंड राज्य के निर्माता थे। उनका जीवन आदिवासियों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए अनवरत संघर्ष की एक गाथा है, जिसने उन्हें झारखंड के "पितामह" के रूप में स्थापित किया।</p>
<hr />
<h3><strong>प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की चिंगारी</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का जन्म</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/shibu-soren-passed-away-from-a-teachers-son-to-become/article-15210"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(90)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ ही नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं लड़े, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की नियति को आकार दिया। 'गुरुजी' और 'दिशोम गुरु' (देश के गुरु) के नाम से विख्यात शिबू सोरेन एक ऐसा ही नाम हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधारक, एक जन-आंदोलन के प्रणेता और झारखंड राज्य के निर्माता थे। उनका जीवन आदिवासियों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए अनवरत संघर्ष की एक गाथा है, जिसने उन्हें झारखंड के "पितामह" के रूप में स्थापित किया।</p>
<hr />
<h3><strong>प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की चिंगारी</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को तत्कालीन बिहार के हजारीबाग (अब रामगढ़) जिले के नेमरा गाँव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता, सोबरन सोरेन, एक सम्मानित शिक्षक थे, लेकिन उनकी हत्या साहूकारों और महाजनों ने कर दी क्योंकि वे आदिवासियों को उनकी शोषणकारी प्रथाओं के खिलाफ संगठित कर रहे थे। पिता की नृशंस हत्या ने युवा शिबू के मन पर गहरा आघात किया और यहीं से उनके भीतर अन्याय के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला धधक उठी। इस घटना ने उन्हें औपचारिक शिक्षा छोड़ने और सामाजिक न्याय के पथ पर चलने के लिए विवश कर दिया।</p>
<hr />
<h3><strong>सामाजिक सुधारक के रूप में उदय</strong></h3>
<p>अपने राजनीतिक जीवन से पहले, शिबू सोरेन ने 1970 के दशक की शुरुआत में एक सामाजिक सुधारक के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने आदिवासियों के बीच व्याप्त सामाजिक कुरीतियों, विशेष रूप से शराबखोरी और महाजनी प्रथा के खिलाफ एक सशक्त अभियान चलाया।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>महाजनी प्रथा के विरुद्ध आंदोलन:</strong> उस समय महाजन (साहूकार) आदिवासियों की जमीनों को कर्ज के बदले हड़प लेते थे। शिबू सोरेन ने 'धनकटनी आंदोलन' चलाया, जिसके तहत आदिवासी एकजुट होकर अपनी उन फसलों को काटते थे जिन पर महाजनों ने कब्जा कर लिया था। इस आंदोलन ने आदिवासियों को उनकी जमीनें वापस दिलाईं और उन्हें आर्थिक शोषण से मुक्त कराया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>नशामुक्ति अभियान:</strong> उन्होंने आदिवासी समाज में शराबखोरी की लत को एक बड़ी सामाजिक बुराई के रूप में पहचाना और इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>आदिवासी अस्मिता का संरक्षण:</strong> उन्होंने आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संरक्षित करने और बढ़ावा देने पर जोर दिया, जिससे आदिवासी समाज में एक नई चेतना और आत्म-सम्मान का संचार हुआ।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>झारखंड आंदोलन के महानायक</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का सबसे महत्वपूर्ण योगदान अलग झारखंड राज्य के आंदोलन का नेतृत्व करना था। वे इस विचार के प्रबल समर्थक थे कि 'जल, जंगल और जमीन' पर स्थानीय आदिवासियों का अधिकार होना चाहिए और इस क्षेत्र के खनिज संसाधनों का लाभ यहाँ के मूल निवासियों को मिलना चाहिए।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना:</strong> इस सपने को साकार करने के लिए, उन्होंने 4 फरवरी 1972 को बिनोद बिहारी महतो और ए.के. रॉय जैसे नेताओं के साथ मिलकर <strong>झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)</strong> की स्थापना की। यह केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन था जिसका उद्देश्य दक्षिणी बिहार के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग राज्य का निर्माण करना था।</p>
</li>
<li>
<p><strong>दशकों का संघर्ष:</strong> झामुमो के बैनर तले, सोरेन ने दशकों तक सड़क से लेकर संसद तक एक लंबा और अथक संघर्ष किया। उन्होंने रैलियाँ कीं, प्रदर्शन किए, और आदिवासी अधिकारों के लिए लगातार आवाज बुलंद की।</p>
</li>
<li>
<p><strong>राज्य का निर्माण:</strong> उनके दशकों के संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार ने उनकी मांग को स्वीकार किया और <strong>15 नवंबर 2000</strong> को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर बिहार पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से <strong>झारखंड</strong> एक नए और स्वतंत्र राज्य के रूप में भारत के मानचित्र पर उभरा।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>राजनीतिक सफर और प्रमुख पद</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने झारखंड की राजनीति पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>संसद सदस्य:</strong> वे कई बार बिहार और बाद में झारखंड की दुमका लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। संसद में उन्होंने मजबूती से झारखंड के हितों की पैरवी की।</p>
</li>
<li>
<p><strong>केंद्रीय मंत्री:</strong> वे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में कोयला मंत्री भी रहे।</p>
</li>
<li>
<p><strong>झारखंड के मुख्यमंत्री:</strong> शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुए:</p>
<ul>
<li>
<p><strong>पहली बार:</strong> 2 मार्च 2005 - 12 मार्च 2005</p>
</li>
<li>
<p><strong>दूसरी बार:</strong> 27 अगस्त 2008 - 19 जनवरी 2009</p>
</li>
<li>
<p><strong>तीसरी बार:</strong> 30 दिसंबर 2009 - 1 जून 2010</p>
</li>
</ul>
</li>
</ul>
<p>वे झारखंड से राज्यसभा के सांसद थे और पार्टी के अध्यक्ष के रूप में संगठन का मार्गदर्शन कर रहे थे।</p>
<hr />
<p><strong><span class="citation-19 citation-end-19">झारखंड की राजनीति के पितामह और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार, 4 अगस्त, 2025 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-18 citation-end-18">वे 81 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे।<sup class="superscript"></sup></span> उनके निधन से झारखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर है।</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 14:47:15 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ranchi news: रघुवर दास ने शिबू सोरेन से मुलाकात कर दी जन्मदिन की बधाई</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>रांची: </strong>पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शनिवार को झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन से मुलाकात कर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि दिशोम गुरु और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन से आज मिलकर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। साथ ही चाची रूपी सोरेन से आशीर्वाद लिया। बाबा बैद्यनाथ से दोनों की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की कामना की। दोनों को जोड़ी शिव-पार्वती की तरह अखंड बनी रहे।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी शिबू सोरेन को जन्मदिन की बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट पर</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ranchi-news-raghuvar-das-met-shibu-soren-and-congratulated-him/article-13807"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-01/gfg2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शनिवार को झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन से मुलाकात कर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि दिशोम गुरु और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन से आज मिलकर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। साथ ही चाची रूपी सोरेन से आशीर्वाद लिया। बाबा बैद्यनाथ से दोनों की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की कामना की। दोनों को जोड़ी शिव-पार्वती की तरह अखंड बनी रहे।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी शिबू सोरेन को जन्मदिन की बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को जन्मदिन की शुभकामनाएं। बाबा बैद्यनाथ से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं सुदीर्घ जीवन की मंगलकामना करता हूं। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर शिबू सोरेन के साथ एक तस्वीर साझा करते हुआ कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन को जन्मदिन की बधाई एवं शुभकामनाएं। मरांग बुरू से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।</p>]]>
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                                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jan 2025 14:55:00 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
                    </dc:creator>
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