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                <title>लोकतंत्र - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>Opinion : भारतीय लोकतंत्र में मुस्लिम नेतृत्व: नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में योगदान की गहन समीक्षा</title>
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                        <![CDATA[यह लेख भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेताओं की विविध भूमिका और प्रभाव को उजागर करता है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समकालीन राजनीति तक, ये नेता नीति, संगठन और सामाजिक न्याय में महत्वपूर्ण योगदान देते आए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-an-in-depth-review-of-the-contribution-of-muslim-leadership/article-17905"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/3ccb2867-6d79-40a1-9ac1-40ce0a9a0be1_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>भारतीय लोकतंत्र की मूल शक्ति उसकी विविधता, विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, विचारधाराओं और समूहों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की संरचना में निहित है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए नेता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आकार देते हैं।</p>
<p>इस व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में मुस्लिम समुदाय का योगदान केवल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि नीति-निर्माण, संगठनात्मक राजनीति, विदेश नीति, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय संतुलन जैसे क्षेत्रों में भी उसकी निरंतर और प्रभावशाली भूमिका रही है।</p>
<p>स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समकालीन राजनीति तक, मुस्लिम नेताओं ने अलग-अलग वैचारिक धाराओं और राजनीतिक दलों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। बेशक इन नेताओं की राजनीतिक यात्राएँ एक-दूसरे से भिन्न रही हैं, जहां कुछ ने प्रशासनिक और संवैधानिक भूमिकाओं में योगदान दिया, वहीं कुछ ने संगठनात्मक रणनीति के माध्यम से शक्ति अर्जित की, जबकि कुछ ने स्पष्ट और मुखर राजनीतिक विमर्श के जरिए अपना जनाधार बनाया।</p>
<p>यह विविधता भारतीय राजनीति की जटिलता और समावेशिता दोनों को रेखांकित करती है। इस लेख के माध्यम से मैं ऐसे ही कुछ मुस्लिम नेताओं के राजनीतिक योगदान और प्रभाव का जिक्र करने जा रहा हूँ, जिन्होंने अलग-अलग कालखंडों, दलों और भूमिकाओं में राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया।</p>
<p>सलमान खुर्शीद उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पहचान अकादमिक पृष्ठभूमि और संसदीय शालीनता से जुड़ी रही है। कानून, विदेश और अल्पसंख्यक मामलों जैसे मंत्रालयों में उनकी भूमिका नीतिगत निरंतरता और संस्थागत संतुलन का उदाहरण रही। विदेश मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भारत की वैश्विक छवि के प्रबंधन के संदर्भ में उल्लेखनीय रहा।</p>
<p>वे उस राजनीतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ वैचारिक स्पष्टता और संवाद की संस्कृति को प्राथमिकता दी जाती है। सैयद शाहनवाज़ हुसैन भारतीय जनता पार्टी में उन शुरुआती मुस्लिम नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>अपेक्षाकृत कम उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करने वाले शाहनवाज़ हुसैन ने केंद्र सरकार में नागरिक उड्डयन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे मंत्रालयों में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका राजनीतिक सफर संगठनात्मक निष्ठा, पार्टी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और संवाद आधारित राजनीति का उदाहरण रहा है।</p>
<p>बिहार की राजनीति में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही, जहाँ उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय और व्यापक सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। वे उस दौर के प्रतिनिधि रहे हैं जब भाजपा मुस्लिम नेतृत्व को अपनी मुख्यधारा की राजनीति में स्थान देने की कोशिश कर रही थी।</p>
<p> मुख्तार अब्बास नक़वी भारतीय जनता पार्टी में मुस्लिम नेतृत्व का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। संसदीय कार्य, अल्पसंख्यक मामलों और कौशल विकास जैसे मंत्रालयों में उनके कार्यकाल के दौरान कई नीतिगत फैसले लिए गए, जिन पर व्यापक बहस भी हुई। वे उस राजनीतिक धारा का प्रतिनिधित्व करते हैं जो वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक अनुशासन को प्राथमिकता देती है।</p>
<p>असदुद्दीन ओवैसी समकालीन राजनीति में सबसे मुखर मुस्लिम नेताओं में गिने जाते हैं। संसद में उनके हस्तक्षेप संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं। उनकी राजनीतिक शैली स्पष्ट, तर्कप्रधान और कई बार टकरावपूर्ण रही है। ओवैसी ने क्षेत्रीय आधार से राष्ट्रीय विमर्श तक अपनी उपस्थिति को विस्तार दिया है, जो बदलती चुनावी राजनीति की एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति को दर्शाता है।</p>
<p>तारिक अनवर कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने संगठनात्मक राजनीति और संसदीय कार्य दोनों में लंबा अनुभव अर्जित किया है। उनका राजनीतिक योगदान मुख्यतः पार्टी संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर संपर्क बनाए रखने से जुड़ा रहा है। वे एक सफल सांसद होने के साथ-साथ निरंतरता और संगठनात्मक स्थायित्व के प्रतिनिधि माने जाते हैं।</p>
<p>फ़ारूक़ अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाले नेता रहे हैं। उनका राजनीतिक जीवन क्षेत्रीय आकांक्षाओं, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने का प्रयास रहा है। कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उनकी भूमिका भारतीय राजनीति के जटिल आयामों को समझने में मदद करती है।</p>
<p>मोहसिना किदवई का योगदान मुख्यतः संसदीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है। अल्पसंख्यक अधिकारों और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर उनकी सक्रियता उन्हें कांग्रेस के भीतर एक सम्मानित स्थान दिलाती है। वे उस पीढ़ी की नेता हैं जिन्होंने अपेक्षाकृत शांत लेकिन निरंतर राजनीतिक भूमिका निभाई है।</p>
<p> अहमद पटेल भारतीय राजनीति के उन रणनीतिकारों में थे जिनकी भूमिका सार्वजनिक मंच से अधिक संगठन के भीतर प्रभावशाली रही। चुनावी रणनीति, गठबंधन प्रबंधन और संकट काल में निर्णय लेने की उनकी क्षमता ने कांग्रेस को कई बार राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद की।</p>
<p>उनका योगदान इस बात का उदाहरण है कि सत्ता और प्रभाव हमेशा सार्वजनिक पदों से ही नहीं आते। ग़ुलाम नबी आज़ाद का राजनीतिक अनुभव प्रशासनिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर रहा है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने उन्हें एक अनुभवी प्रशासक की पहचान दी।</p>
<p>वे संवाद और सहमति आधारित राजनीति के समर्थक माने जाते हैं, जिन्हे पक्ष-विपक्ष, दोनों से ही बराबर सम्मान मिलता है। नजमा हेपतुल्ला भाजपा की उन महिला नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने संसदीय संस्थाओं और मंत्रालयों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। अल्पसंख्यक मामलों और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर उनका कार्य भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व के विस्तार को दर्शाता है।</p>
<p>उन्होंने मणिपुर राज्य के राज्यपाल की भूमिका भी निभाई है। इन नेताओं का राजनीतिक सफर यह स्पष्ट करता है कि भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व किसी एक विचारधारा या रणनीति तक सीमित नहीं है। यह नेतृत्व कहीं संस्थागत और शांत, कहीं मुखर और वैचारिक, तो कहीं रणनीतिक और संगठनात्मक रूप में विविध रहा है।</p>
<p>इनकी भूमिका यह समझने में सहायक है कि लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व केवल पहचान का प्रश्न नहीं, बल्कि नीति, संवाद और राष्ट्रीय हित के साथ संतुलन साधने की प्रक्रिया है। भारतीय राजनीति की इस बहुमूल्य संरचना को मजबूत बनाए रखने में ऐसे नेताओं की उपस्थिति और योगदान आगे भी महत्वपूर्ण बना रहेगा क्योंकि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती विविध आवाज़ों के सहअस्तित्व से ही सुनिश्चित होती है।</p>
<p><strong>डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 13:00:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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                <title>निकाय चुनाव में दलीय दखल पर सवाल, आयोग से संज्ञान लेने की मांग</title>
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                        <![CDATA[निकाय चुनाव में दलीय हस्तक्षेप को लेकर आपत्ति जताते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से कार्रवाई और चुनाव खर्च की निगरानी की मांग की गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/question-on-party-interference-in-civic-elections-demand-to-take/article-17856"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/1b967aeb-dd44-4fc8-a5f3-dfbf55b51ea8_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची :</strong> पूरे राज्य में नगर निगम चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार गैर राजनीतिक दलीय अर्थात उम्मीदवार स्वतंत्र रूप से अपना नामांकन कर सकते हैं लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश का उल्लंघन कर दलीय आधार पर उम्मीदवार की समर्थन की घोषणा की जा रही है जो की संवैधानिक व्यवस्था के ठीक विपरीत है।</p>
<p>चुनाव दलीय आधार पर ही अगर चुनाव करना होता तो चुनाव आयोग इस तरह का निर्देश देता  लेकिन राजनीतिक दल इस चुनाव को हाईजैक कर दलीय  आधार पड़ करने पर तुले है इस पर राज्य निर्वाचन आयोग को संज्ञान लेना चाहिए।</p>
<p>कई दल तो अनुशासन का  चाबुक चला करके उम्मीदवारों को बंधुआ मजदूर बना रहे जो कि सरासर   मतदाता को भ्रमित कर रहे हैं। अखिल भारतीय का  महासभा रांची जिला अध्यक्ष प्रवक्ता झारखंड प्रदेश शैलेश कुमार सिन्हा ने कहा कि त्वरित गति से राज्य निर्वाचन आयोग को उपरोक्त बातों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है जिससे कि लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे साथ-साथ उन्होंने बताया कि नामांकन के वक्त पार्षद से लेकर के मेयर चुनाव लड़ने वालों का खर्च का भी विवरण मांगा जाए और राज्य निर्वाचन आयोग जिला निर्वाचन आयोग को उनके खर्च का सही-सही मूल्यांकन करने के लिए वीडियो ग्राफी भी करना चाहिए जिससे कि स्वस्थ और मर्यादा पूर्वक चुनाव संपन्न हो सके।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 16:14:58 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anshika Ambasta]]>
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                <title>संविधान के पालन से ही मजबूत लोकतंत्र का निर्माण संभव: उपायुक्त</title>
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                        <![CDATA[साहिबगंज में सिद्धो-कान्हु स्टेडियम परिसर में 77वां गणतंत्र दिवस समारोह उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया गया। उपायुक्त हेमन्त सती ने ध्वजारोहण कर अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/sahibganj/building-a-strong-democracy-is-possible-only-by-following-the/article-17674"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-01/99e4911e-ae42-4dc3-ada2-1f1c04a0d524_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>साहिबगंज : </strong>सोमवार को सिद्धो-कान्हु स्टेडियम परिसर में गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया। उपायुक्त हेमन्त सती ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की और शहीद सिद्धो-कान्हु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर स्टेडियम परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। ध्वजारोहण के पश्चात उपायुक्त ने उपस्थित अधिकारी, कर्मचारी और जिलेवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।          </p>
<p>मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय संविधान की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उपायुक्त ने कहा कि भारतीय संविधान केवल नियमों का संकलन नहीं, बल्कि देश को एकजुट रखने वाली आत्मा और लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। संविधान में निहित मूल्यों, अधिकारों और कर्तव्यों के कारण ही भारत एक सशक्त, समावेशी और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान के पालन से ही मजबूत लोकतंत्र का निर्माण संभव है।</p>
<p>आगे उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक, विशेषकर शासकीय सेवकों की यह जिम्मेदारी है कि वे संविधान की मूल भावना को समझें और अपने दैनिक कार्यों में उसका ईमानदारी से पालन करें। उपायुक्त ने अधिकारियों और कर्मचारियों से पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यही संविधान की सच्ची भावना है।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान हेमन्त सती ने जिले में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी, कर्मचारी और शहर के लोगों को शॉल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर आरक्षी अधीक्षक अमित कुमार सिंह के साथ जिले के सभी विभागों के वरीय अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के संकल्प के साथ किया गया।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                <pubDate>Mon, 26 Jan 2026 14:44:23 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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                <title>साहिबगंज अवैध खनन जांच: मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत</title>
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                        <![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने साहिबगंज अवैध पत्थर खनन मामले में सीबीआई जांच जारी रखने का आदेश दिया, बाबूलाल मरांडी ने फैसले का स्वागत किया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/sahibganj-illegal-mining-investigation-marandi-welcomed-the-decision-of-the/article-17406"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-12/abbd04516e094d0879346a9e8ab32ef2_2125659610_samridh_1200x720-(2).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong> झारखंड में भाजपा अध्यक्ष एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने साहिबगंज अवैध पत्थर उत्खनन मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा सीबीआई जांच जारी रखने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इसे राज्य में “भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक कदम” बताया।</p>
<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया में मरांडी ने कहा कि साहिबगंज में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध पत्थर खनन की सीबीआई जांच का राज्य सरकार द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद उच्चतम न्यायालय ने जांच जारी रखने का स्पष्ट आदेश दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत ने राज्य सरकार द्वारा अपराधियों को संरक्षण देने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई।</p>
<p>मरांडी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने झारखंड उच्च न्यायालय के सीबीआई जांच के आदेश को सही ठहराया और राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पंकज मिश्रा, विष्णु यादव, राजेश यादव, बच्चू यादव, संजय यादव और सुभाष मंडल जैसे “चहेते अपराधियों” को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता पर दबाव डालकर शिकायत वापस लेने की कोशिश की गई और आम लोगों को धमकाया गया, लेकिन “न्यायालय में यह धूर्तता नहीं चल सकी। मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हेमंत सरकार के लिए बड़ा झटका बताते हुए कहा कि यह निर्णय “भ्रष्टाचारी सरकार के ताबूत में आखिरी कील” साबित होगा और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास और मजबूत होगा।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>साहिबगंज</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 15:27:11 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anshika Ambasta]]>
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            <item>
                <title>भारत को बांटने की साजिश पर यूरोपीय नेता का जहरीला बयान, पीएम मोदी को रूस समर्थक तानाशाह बताया </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>नेशनल डेस्क: </strong>ऑस्ट्रिया के नेता गुंथर फैलिंगर ने खालिस्तान समर्थकों के साथ मिलकर भारत विरोधी बयान दिया है। फैलिंगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक्सएस खालिस्तान हैंडल्स के साथ एक चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत को आजादी से पहले कई हिस्सों में तोड़ देना चाहिए। इस चर्चा में उन्होंने खालिस्तानी आतंकवादियों को भारत के काटकर नया देश बनाने का तरीका भी बताया।</p>
<h5><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>भारत की स्थिति और ताकत</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">वर्तमान में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और एक महाशक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है। भारत अपने फैसलों के लिए किसी देश का</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/european-leaders-poisonous-statement-on-the-conspiracy-to-divide-india/article-15946"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-09/screenshot-2025-09-04-172129.png" alt=""></a><br /><p><strong>नेशनल डेस्क: </strong>ऑस्ट्रिया के नेता गुंथर फैलिंगर ने खालिस्तान समर्थकों के साथ मिलकर भारत विरोधी बयान दिया है। फैलिंगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक्सएस खालिस्तान हैंडल्स के साथ एक चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत को आजादी से पहले कई हिस्सों में तोड़ देना चाहिए। इस चर्चा में उन्होंने खालिस्तानी आतंकवादियों को भारत के काटकर नया देश बनाने का तरीका भी बताया।</p>
<h5><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>भारत की स्थिति और ताकत</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">वर्तमान में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और एक महाशक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है। भारत अपने फैसलों के लिए किसी देश का दबाव नहीं मानता, चाहे वह तेल खरीदना हो या व्यापारिक हितों की सुरक्षा। यह आत्मनिर्भर नीति कुछ यूरोपीय नेताओं को पसंद नहीं आ रही।</p>
<h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0 md:text-lg [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>फैलिंगर का बयान</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">गुंथर फैलिंगर ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने 'सिख नैरेटिव' के साथ दो घंटे तक चर्चा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से नरेंद्र मोदी को रूस समर्थक तानाशाह बताया और लोगों को पूर्व-भारत यानी स्वतंत्रता से पहले भारत के टुकड़े-टुकड़े करने का तरीका सुझाया। उन्होंने लिखा, "मैंने आज के ब्रिक्स और भारत की भयावहता और कथित नरसंहारी प्रकृति के बारे में खुद बहुत कुछ सीखा।"</p>
<h5 class="mb-2 mt-4 font-display font-semimedium text-base first:mt-0 md:text-lg [hr+&amp;]:mt-4"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>मीडिया और सामाजिक प्रतिक्रिया</strong></span></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">फैलिंगर के इस बयान ने भारतीय मीडिया में हलचल मचा दी है। कई लोग इसे भारत की अखंडता और संप्रभुता पर हमला मान रहे हैं। ऐसे बयान भारतीय विदेश नीति और इंटरनेशनल संबंधों पर भी असर डाल सकते हैं।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">ऑस्ट्रिया के राजनीतिज्ञ द्वारा भारत के विभाजन की बातें और पीएम मोदी पर तानाशाही के आरोप ने भारत में विवाद पैदा कर दिया है। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Sep 2025 17:23:21 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव का राहुल गांधी पर हमला, कहा 'वे भारतीय राजनीति के मिस्टर लायर'</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>रांची: </strong>झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति में खुद को "मिस्टर लायर" के रूप में खुद को स्थापित कर रहे हैं। झूठ बोलना और बेबुनियाद आरोप लगाना उनकी आदत बन चुकी है। पहले आरोप लगाते हैं और जब आरोप गलत सिद्ध होता है तो माफी मांग कर चुपके से निकल जाते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कभी "चौकीदार चोर है" जैसा आपत्तिजनक और झूठा नारा देकर देश के प्रधानमंत्री की छवि को धूमिल करने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट से फटकार मिलने के बाद उनको माफी मांगनी पड़ी थी।</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/politics/bjp-spokesperson-pratul-shahdev-attacked-rahul-gandhi-he-is-mr/article-15379"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-08t192826.362.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति में खुद को "मिस्टर लायर" के रूप में खुद को स्थापित कर रहे हैं। झूठ बोलना और बेबुनियाद आरोप लगाना उनकी आदत बन चुकी है। पहले आरोप लगाते हैं और जब आरोप गलत सिद्ध होता है तो माफी मांग कर चुपके से निकल जाते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कभी "चौकीदार चोर है" जैसा आपत्तिजनक और झूठा नारा देकर देश के प्रधानमंत्री की छवि को धूमिल करने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट से फटकार मिलने के बाद उनको माफी मांगनी पड़ी थी। फिर उन्होंने बिना किसी प्रमाण के यह तक कह दिया कि "आरएसएस ने गांधी जी की हत्या की", जो अदालत में झूठा सिद्ध हुआ और उन्हें फिर माफी मांगनी पड़ी।</p>
<p>प्रतुल ने कहा कि चीन की घुसपैठ को लेकर भी उन्होंने बार-बार झूठ फैलाया, जबकि हमारी सेनाएं सीमा पर पूरी मजबूती से तैनात हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपनी टिप्पणी में कहा कि एक सच्चे देशभक्त को इस तरह की भाषा नहीं बोलनी चाहिए। राहुल गांधी देश की सेना का मनोबल गिराने की कोशिश लगातार करते रहे हैं। दिवंगत नेता अरुण जेटली के बारे में उन्होंने झूठी बात कह दी कि वह उनको कृषि कानून लेकर धमका रहे थे। जबकि कृषि कानून आने के पहले ही अरुण जेटली जी का देहांत हो चुका था।</p>
<p>प्रतुल शाहदेव ने यह भी कहा कि अब नवीनतम उदाहरण में राहुल गांधी ने यह कहकर कि "चुनाव आयोग वोट चुरा रहा है", देश के लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था पर प्रश्नचिह्न लगाया है। यह बेहद शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना है। प्रतुल ने कहा राहुल गांधी सक्षम जगह पर सबूत पेश करके अपनी बातों को नहीं रखेंगे।</p>
<p>सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस करके माहौल को बिगड़ने की कोशिश करते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के लिए फ्रॉड जैसे शब्द का प्रयोग किया जो प्रतिपक्ष के नेता को कतई शोभा नहीं देता।राहुल गांधी ने तो चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों तक को धमका दिया कि जब उनकी सरकार आएगी तो सबको देखा जाएगा। प्रतिपक्ष के नेता का यह बहुत ही गैर जिम्मेदाराना बयान है</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 19:30:03 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>स्पीकर रवींद्रनाथ महतो का संबोधन: लोकतंत्र सिर्फ प्रणाली नहीं, जनआस्था का प्रतीक</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[स्पीकर ने कहा कि इस सत्र में प्रस्तुत किया जाने वाला प्रथम अनुपूरक बजट राज्य की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सामाजिक कल्याण, संरचनागत विकास और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को नई गति देगा.]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/speaker-rabindranath-mahatos-address-democracy-is-not-just-a-system/article-15137"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(76).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची: </strong>झारखंड विधानसभा मानसून सत्र के पहले दिन झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने प्रारंभिक शोक प्रकाश और प्रारंभिक वक्तव्य के साथ शुरू हुआ. उन्होंने कहा कि हम सभी का कर्तव्य है कि हम मर्यादित आचरण और जिम्मेदारी के साथ इस सदन की गरिमा को बनाए रखें. उन्होंने कहा कि हमारा दायित्व केवल कानून बनाना नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों का सम्मान करते हुए रचनात्मक बहस का वातावरण तैयार करना भी है. स्पीकर ने महादेवी वर्माकी पंक्तियां अंधकार में जो दीप जलाए वही सच्चा मानव कहलाए... को याद करते हुए कहा कि हमे लोकतंत्र के उस दीपक को जलाए रखना है, जो जनता के विश्वास से प्रज्जवलित होता है. दुनिया भर की घटनाएं हमें यह सिखाती है कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणली नहीं, बल्कि जनआस्था का प्रतीक है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>प्रथम अनुपूरक बजट और महत्वपूर्ण विधेयक</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">स्पीकर ने कहा कि इस सत्र में प्रस्तुत किया जाने वाला प्रथम अनुपूरक बजट राज्य की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सामाजिक कल्याण, संरचनागत विकास और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को नई गति देगा. उन्होंने विश्वास जताया कि इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर गंभीर और सार्थक बहस होगी. उन्होंने लोकतंत्र के महत्व पर जोर देते हुए कहा, "लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं, बल्कि अल्पमत की भी आवाज सुनने की एक पद्धति है."</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गुरुजी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की गई</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">स्पीकर ने कहा कि सभी को जानकारी है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का स्वास्थ्य इन दिनों अच्छा नहीं है. इस राज्य में उनका योगदान के परिपेक्ष्य में उनकी भूमिका किसी से छिपा हुआ नहीं है. हम उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>दिवंगत विभूतियों को दी गई श्रद्धांजलि</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सत्र की शुरुआत विगत सत्र से अब तक दिवंगत हुईं प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई. इनमें पूर्व सांसद चंद्रशेखर दूबे, पूर्व विधायक युगल किशोर पांडेय, और झारखंड आंदोलनकारी कपूर कुमार टुडू जैसे कई नाम शामिल हैं. इसके अलावा, शोक प्रकाश में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पोप फ्रांसिस, अभिनेता मनोज कुमार, वैज्ञानिक डॉ. जयंत नार्लीकर, और पूर्व इसरो प्रमुख के. कस्तूरीरंगन सहित कई हस्तियों को भी याद किया गया. सदन ने दो मिनट का मौन रखकर इन सभी को श्रद्धांजलि दी. <br /> <br /><br /></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 09:42:12 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
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                            </item>
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                <title>राज्य विकास से कोसो दूर हैः विजय कुमार सोनी</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>अमरेन्द्र सुमन</strong></p>
<p>खनिज सम्पदा के मामले में पूरे भारतवर्ष में सबसे समृद्ध राज्य झारखण्ड विकास व रोजगार के मामले में दिन-व-दिन फिसड्डी साबित होता जा रहा है, जबकि इस राज्य के निर्माण के 19 वर्ष पूरे होने वाले हैं। 15 नवम्बर 2000 को अलग हुए इस राज्य में 14 वर्षों तक सत्ता पर भाजपा व गठबंधन दलों का ही कब्जा बना रहा। मालूम हो, एक ही दिन एक साथ तीन अलग-अलग राज्यों झारखण्ड, छत्तीसगढ़, व उत्तराखण्ड का अभ्युदय हुआ था। इन तीनों ही राज्यों की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, व्यापारिक व कृषि के क्षेत्र में हुए आमूलचूल परिवर्तन का तुलनात्मक</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/state-is-away-from-development-vijay-kumar-soni/article-4035"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2019-11/img-20191102-wa0108.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमरेन्द्र सुमन</strong></p>
<p>खनिज सम्पदा के मामले में पूरे भारतवर्ष में सबसे समृद्ध राज्य झारखण्ड विकास व रोजगार के मामले में दिन-व-दिन फिसड्डी साबित होता जा रहा है, जबकि इस राज्य के निर्माण के 19 वर्ष पूरे होने वाले हैं। 15 नवम्बर 2000 को अलग हुए इस राज्य में 14 वर्षों तक सत्ता पर भाजपा व गठबंधन दलों का ही कब्जा बना रहा। मालूम हो, एक ही दिन एक साथ तीन अलग-अलग राज्यों झारखण्ड, छत्तीसगढ़, व उत्तराखण्ड का अभ्युदय हुआ था। इन तीनों ही राज्यों की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, व्यापारिक व कृषि के क्षेत्र में हुए आमूलचूल परिवर्तन का तुलनात्मक अध्ययन करने पर यह सहर्ष ही ज्ञात होता है कि छत्तीसगढ़ व उत्तराखंड जहाँ एक ओर तेजी से विकास के सोपान को तय कर रहा है वहीं दूसरी ओर शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, रोजगार व कृषि के क्षेत्र में झारखण्ड की स्थिति बद् से बद्तर होती जा रही है।</p>
<p> </p>
<p>झारखण्ड के नागरिक रोजी-रोटी की तलाश में प्रतिवर्ष दूसरे-तीसरे राज्यों की ओर पलायन पर अब भी मजबूर देखे जा रहे हैं। शासन के नाम पर इस प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। स्वतंत्रता के साथ जीवन जीने का अधिकार लोगों से छिना जा रहा है। रोजी-रोजगार के नाम पर आम नागरिकों का विश्वास लूटा जा रहा है। लोकतंत्र सेनानी संघ, संताल परगना प्रमण्डल के प्रमण्डलीय संयोजक विजय कुमार सोनी व जिलाध्यक्ष रामचन्द्र दूबे ने संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित कर उपरोक्त बातें कही।</p>
<h4>प्रदेश की विधायिका व कार्यपालिका आम जनता को लूटने में लगी</h4>
<p> </p>
<p>लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रमण्डलीय संयोजक विजय कुमार सोनी ने कहा कि झारखण्ड विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद झारखण्ड के मतदाता एक नयी सरकार के लिये अपने अपने क्षेत्रों से जन प्रतिनिधियों को चुनेंगे। पिछले 5 वर्षों के कार्यकाल में इस राज्य के मतदाताओं ने वर्तमान सरकार के रवैये को खूब देखा और परखा है। जनता को गूमराह कर वोट लेने वालों की वास्तविकताओं से मतदाता भली-भांति परिचित हो चुके हैं। स्थितियाँ पानी की तरह बिल्कुल साफ हो चुकी है। लोकतंत्र के इस महासमर में इस राज्य की जनता पिछले 5 वर्षों के कार्यकाल में सत्ता पर बैठे लोगों के झूठे वायदों का हिसाब लेगी और पूछेगी कि दम तोड़ रही व्यवस्था में सरकार ने आम नागरिकों जीविकोपार्जन के लिये कौन-कौन से और कितने वायदों को धरातल पर उतारा। लोकतंत्र सेनानी संघ, संताल परगना प्रमण्डल के प्रमण्डलीय संयोजक विजय कुमार सोनी ने कहा कि तत्कालीन व्यवस्था से नाराज होकर युवाओं का नेतृत्व करने वाले जेपी ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था।</p>
<p> </p>
<p>उनके आह्वान पर सत्ता में बैठे तत्कालीन सरकार सत्ता से बेदखल हो गयी थी। वर्तमान समय उसकी पुनरावृत्ति का है। श्री सोनी ने कहा कि एक साजिश के तहत इस प्रदेश की विधायिका व कार्यपालिका आम जनता को लूटने में लगी है। भ्रष्टाचार चरम पर है।</p>
<p> </p>
<p>पूर्ण बहुमत के साथ केन्द्र व राज्य में सत्ता पर काबिज वर्तमान सरकारों ने देश व राज्य को पूर्णरुप से प्राईवेटाइजेशन पर लाकर खड़ा कर दिया है। प्राईवेट स्कूलों से लेकर प्राईवेट चिकित्सा के नाम पर आम आदमी का शोषण हो रहा है। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, कृषि व उ़द्योग-धंधे किसी भी राज्य की आर्थिक व्यवस्था का मेरुदंड होता है। लेकिन केन्द्र व राज्य की वर्तमान सरकार ने आम नागरिकों की भावना से खिलवाड़ करते हुए उन्हें लूट जाने पर विवश कर दिया है। इस देश में विपक्षियों की जुबान भी बंद हो चुकी है। विरोध का स्वर पूर्णरुपेण खत्म हो चुका है। सत्तापक्ष की मनमानी के विरुद्ध विरोधी पार्टियां मुखर नहीं रहीं। जिस देश अथवा राज्य में विरोधी पार्टी नाम की चीज न हो, उस देश अथवा राज्य में शासन पूरी तरह निरंकुश हो जाता है।</p>
<h4>मताधिकार का प्रयोग करना होगा</h4>
<p>आने वाले विधानसभा चुनाव में पूरी गंभीरता के साथ मतदाताओं/ आम नागरिकों को अपने-अपने मताधिकार का प्रयोग करना होगा ताकि दूरदृष्टि वाली सरकार बन सके तथा राज्य को विकास की ओर ले जा सके।</p>
<p> </p>
<p>जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का खात्मा, आतंकवाद, सर्जिकल व एयर स्ट्राईक से देश की जनता का भला होनेवाला नहीं है। रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा व उद्योग-धंधों की स्थापना तथा रोजगार का सृजन ही देश व राज्य की जनता को विकास के रास्ते पर आगे ले जा सकता है।</p>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2019 22:36:08 +0530</pubDate>
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                <title>ईवीएम पर सवाल लोकतंत्र का अपमान: सीएम</title>
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                        <![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong>रांची: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि हार के भय से कांग्रेस व उसके सहयोगी दल ईवीएम का रोना रो रहे हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि कल देश की जनता नकारात्मक राजनीति करने वालों को आईना दिखाएगी। दास ने कहा कि ईवीएम पर सवाल उठाना लोकतंत्र का अपमान है।</strong></h5>
<p>https://samridhjharkhand.com/today-the-night-of-uncomfortable-doom-tomorrows-decision-clock-administration-ready</p>
<h5 style="text-align:justify;">सीएम ने कहा कि अपनी हार सामने देख विपक्षी दल के नेता बौखलाए हुये हैं। पहले कहते थे, ईवीएम हैक हो गई व अब कह रहे हैं, कि ईवीएम बदल दी गई है। पूरा देश देख रहा है कि कैसे कांग्र्रेस और उनके सहयोगियों ने लोकतंत्र का मजाक</h5>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/politics/question-on-evm-insult-of-democracy-cm/article-1740"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2019-05/raghubar-das-2.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong>रांची: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि हार के भय से कांग्रेस व उसके सहयोगी दल ईवीएम का रोना रो रहे हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि कल देश की जनता नकारात्मक राजनीति करने वालों को आईना दिखाएगी। दास ने कहा कि ईवीएम पर सवाल उठाना लोकतंत्र का अपमान है।</strong></h5>
<p>https://samridhjharkhand.com/today-the-night-of-uncomfortable-doom-tomorrows-decision-clock-administration-ready</p>
<h5 style="text-align:justify;">सीएम ने कहा कि अपनी हार सामने देख विपक्षी दल के नेता बौखलाए हुये हैं। पहले कहते थे, ईवीएम हैक हो गई व अब कह रहे हैं, कि ईवीएम बदल दी गई है। पूरा देश देख रहा है कि कैसे कांग्र्रेस और उनके सहयोगियों ने लोकतंत्र का मजाक बना रखा है। कहा कि पहले चरण के मतदान के बाद ही यह साफ हो गया था कि देश की जनता नरेंद्र मोदी को फिर से देश के प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहती है। इस बात का भान होते ही झूठे वादों, ढकोसलों और मौकापरस्त राजनीति की हार होते देख विपक्ष ने ईवीएम पर हार का ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया था। इसलिए कांग्रेस ने स्वांग रचा है व अब ईवीएम के साथ- साथ चुनाव आयोग पर ही सवाल उठा रही है।</h5>
<p>[URIS id=8357]</p>
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                <pubDate>Wed, 22 May 2019 19:59:25 +0530</pubDate>
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