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                <title>कोयला लूट पर मौन BJP को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का हक नहीं : सतीश पौल मुंजनी</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस नेता सतीश पौल मुंजनी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कोयला कारोबार और संसाधनों की लूट पर मौन रहने वाली भाजपा को राज्य सरकार पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/bjps-silence-on-coal-loot-has-no-right-to-teach/article-17887"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/download_samridh_1200x720-(7)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची : </strong>भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर लगाए गए आरोप राजनीतिक बौखलाहट और निराधार बयानबाज़ी के अलावा कुछ नहीं हैं। भाजपा के नेताओं को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए।</p>
<p>झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया चेयरमैन  सतीश पौल मुंजनी ने कहा कि भाजपा को व्यापारियों की चिंता अचानक कैसे होने लगी, जबकि उनके ही शासनकाल में राज्य के संसाधनों की खुली लूट हुई और अवैध कोयला कारोबार को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा। आज भी भाजपा के सांसदों और नेताओं के नाम कोयला कारोबार में उठते रहे हैं इस पर भाजपा नेतृत्व को पहले जवाब देना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा निवेश लाने के प्रयासों पर सवाल उठाना विकास विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। भाजपा को यह समझ लेना चाहिए कि झारखंड डर और धमकी से नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की नीतियों से आगे बढ़ेगा।</p>
<p>भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का यह कहना कि व्यापारी भय के साये में जी रहे हैं पूरी तरह मनगढ़ंत है। राज्य सरकार कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन भाजपा का इतिहास बताता है कि जब-जब उन्हें अवसर मिला, उन्होंने राज्य को दलालों और बिचौलियों के हवाले किया।</p>
<p>अगर भाजपा इतनी ही चिंतित है, तो अपने उन सांसदों और नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं करती जिन पर कोयला कारोबार से जुड़े आरोप लगते रहे हैं? जनता सब देख रही है — दोहरे मापदंड अब नहीं चलेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भाजपा को झूठी बयानबाजी छोड़कर सकारात्मक राजनीति करनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी और राज्य सरकार झारखंड के विकास, निवेश और जनता के विश्वास के लिए प्रतिबद्ध है और भाजपा के दुष्प्रचार का हर स्तर पर जवाब दिया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 17:46:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>बिट्टू विवाद पर भाजपा का हमला, राहुल गांधी के बयान पर सियासी घमासान</title>
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                        <![CDATA[राहुल गांधी द्वारा रवनीत सिंह बिट्टू को ‘देशद्रोही’ कहे जाने पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे गंभीर टिप्पणी बताते हुए राजनीतिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की बात कही।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/delhi/bjps-attack-on-bittu-controversy-political-turmoil-over-rahul-gandhis/article-17827"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/1a94c3f4ff14e9ceb1ffe430752a10ee_1018783888_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को “देशद्रोही” कहे जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए उन्हें सिख विरोधी बताया।</p>
<p>भाजपा मुख्यालय में बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि “देशद्रोही” जैसे शब्दों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका मतलब देश से गद्दारी करने वाले व्यक्ति से होता है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिख समुदाय से भी जुड़ा है और राहुल गांधी का ऐसा बयान बेहद गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सिर्फ इसलिए नाराज़ हैं क्योंकि रवनीत बिट्टू ने उनकी पार्टी छोड़ दी। राहुल गांधी ने बिट्टू से यह भी कहा था कि वे वापस कांग्रेस में आ जाएंगे।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा, “सिर्फ इसलिए कि पगड़ी पहनने वाला कोई व्यक्ति आपकी पार्टी छोड़ दे, उसे देशद्रोही कहना बिल्कुल गलत और अस्वीकार्य है।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी समुदाय के व्यक्ति को इस तरह का लेबल देना न तो सही है और न ही स्वीकार्य। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक संवाद की भाषा शालीन और मर्यादित होनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति हो सकती है, लेकिन भाषा की गरिमा बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है।</p>
<p>उधर, संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने राहुल गांधी के ‘गद्दार’ कहे जाने का जवाब देते हुए कहा, “कांग्रेस और गांधी परिवार ने पंजाब में आग लगाई थी। हमारे सबसे बड़े गुरुद्वारे स्वर्ण मंदिर पर गोलियां चलाई गईं। हज़ारों सिखों और पंजाबियों को निशाना बनाया गया और उनकी हत्या की गई। अगर राजीव गांधी को ‘शहीद’ कहा जाता है, तो हमें शहीद-ए-आज़म सरदार बेअंत सिंह को भी शहीद कहना चाहिए। मैं भी उसी परिवार से आता हूँ, यह मेरा दर्द है।”</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, “एक शहीद का पोता तब तक ठीक था, जब तक मैं उनके साथ था। अब जब मैं भाजपा में हूँ तो वह मेरे लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह अपने आप को क्या समझते हैं? उन्होंने मेरी ओर ऐसे हाथ बढ़ाया, जैसे वह कोई शहंशाह हों। वह खुद को इस देश और दुनिया का मालिक समझते हैं।”</p>
<p>बिट्टू ने कहा कि वे गांधी परिवार से नहीं हैं, लेकिन उनके सिर पर पगड़ी है। इसलिए जब राहुल गांधी ने उनसे हाथ मिलाने की कोशिश की तो उन्होंने कहा, “आप लोग तो देश के गद्दार हैं, देश के दुश्मन हैं।”</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 16:13:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title> ईडी-सीबीआई के दुरुपयोग के आरोप में कांग्रेस ने गिरिडीह में भाजपा कार्यालय का घेराव किया </title>
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                        <![CDATA[केंद्र सरकार पर ईडी-सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने गिरिडीह भाजपा कार्यालय का घेराव किया। सतीश केडिया ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/giridih/congress-surrounds-bjp-office-in-giridih-alleging-misuse-of-ed-cbi/article-17565"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-12/76.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गिरिडीह : </strong>रिपोर्टर श्याम कुमार केंद्र सरकार पर ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने गिरिडीह जिला मुख्यालय स्थित भाजपा कार्यालय का घेराव किया। इसमें जिलेभर से सैकड़ों पुरुष व महिला कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतीश केडिया ने किया। घेराव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि भाजपा राजनीतिक द्वेष से प्रेरित होकर केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने और दबाने के लिए कर रही है। जिला अध्यक्ष सतीश केडिया ने कहा कि भाजपा सरकार लोकतंत्र की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को झूठे मामलों में फंसाकर परेशान किया जा रहा है, जो पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है। केडिया ने कहा कि भाजपा सरकार विपक्ष की लोकप्रियता से घबराई हुई है, इसलिए नेताओं को झूठे मामलों में फंसा रही है। कांग्रेस पार्टी इस तानाशाही रवैये के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी। यदि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग बंद नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में शामिल महिला कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की। कार्यक्रम के दौरान उचित सुरक्षा प्रबंध किए गए, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>गिरिडीह</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 16:21:48 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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            <item>
                <title> कांग्रेस ने भाजपा-जदयू कार्यकर्ताओं पर आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का लगाया आरोप, उपायुक्त से कार्रवाई की मांग</title>
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                        <![CDATA[पूर्वी सिंहभूम: (जमशेदपुर) के मानगो प्रखंड कांग्रेस कमिटी ने जिला उपायुक्त-सह-निर्वाची पदाधिकारी को एक पत्र लिखकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं पर आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।अध्यक्ष ईश्वर कुमार सिंह का पहना है कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार आदर्श आचार संहिता के दौरान सरकारी वस्तुओं का वितरण या आम नागरिकों को किसी भी प्रकार का लाभ पहुंचाना पूर्णतः निषिद्ध है। लेकिन उक्त पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसा किया गया है। लिहाजा, मामले की तत्काल जांच कर भाजपा और जदयू कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/chaibasa/congress-accuses-bjp-jdu-workers-of-violating-model-code-of-conduct/article-16909"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-11/resized-image---2025-11-06t152544.358.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पूर्वी सिंहभूम: </strong>(जमशेदपुर) के मानगो प्रखंड कांग्रेस कमिटी ने जिला उपायुक्त-सह-निर्वाची पदाधिकारी को एक पत्र लिखकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं पर आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रखंड अध्यक्ष ईश्वर कुमार सिंह की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर जिले में आदर्श आचार संहिता लागू है, बावजूद इसके जदयू और भाजपा के कार्यकर्ता मानगो नगर निगम के पदाधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी सामग्री (बाल्टी) का वितरण कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के पत्र में कहा गया है कि जदयू और भाजपा नेता पप्पू सिंह, विजय तिवारी, अजीत सिंह उर्फ जीतू प्रमार और बाला प्रसाद के द्वारा आम नागरिकों को सरकारी वस्तुओं का वितरण किया गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन कार्यक्रमों की तस्वीरें और वीडियो जदयू नेता अजीत कुमार सिंह के फेसबुक अकाउंट पर साझा किए गए हैं। इनमें सरकारी सामग्रियों का वितरण खुलेआम प्रचारित और प्रसारित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्यक्ष ईश्वर कुमार सिंह का पहना है कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार आदर्श आचार संहिता के दौरान सरकारी वस्तुओं का वितरण या आम नागरिकों को किसी भी प्रकार का लाभ पहुंचाना पूर्णतः निषिद्ध है। लेकिन उक्त पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसा किया गया है। लिहाजा, मामले की तत्काल जांच कर भाजपा और जदयू कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य कांग्रेस नेता ओमप्रकाश सिंह गुड्डू ने आरोप लगाया कि यह कार्य आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है और इसमें नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>चाईबासा</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Nov 2025 15:26:52 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                <title>बाबूलाल मरांडी का आरोप झूठ, विरोधाभास और भाजपा की पटकथा: सतीश पौल मुंजनी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[झारखंड कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोपों को झूठा और निराधार बताया। कांग्रेस का कहना है कि मरांडी राजनीतिक हताशा में भाजपा के इशारे पर अफवाहें फैलाकर सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार पारदर्शिता और विकास की राह पर अडिग है।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/babulal-marandis-allegation-false-contradiction-and-bjps-screenplay-satish-paul/article-16190"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-09/resized-image---2025-09-12t183733.817.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची:</strong> झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा सोशल मीडिया पर लगाये गये आरोप पर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने पलटवार करते हुए कहा कि बाबूलाल जी का आरोप झूठ, निराधार और विरोधाभास से फरे हुए हैं यह बयान उनकी राजनीतिक हताशा और भाजपा के इशारे पर चल रही साजिश का हिस्सा है। झारखंड की जनता बार-बार यह देखा है जब भी विपक्षी नेता बाबूलाल मरांडी राजनीतिक रूप से हाशिए पर जाते हैं तो वे निराधार आरोपों और अफवाहों का सहारा लेकर सुर्खियों में आने की कोशिश करते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया में डाली गई उसकी पोस्ट इसी प्रार्वती का हिस्सा है। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश कांग्रेस कमिटी के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने कहा कि बाबूलाल मरांडी द्वारा यह कहना है कि अवैध डीजीपी के संरक्षण में आधी रात को एसीबी ने उत्पाद विभाग से दस्तावेज उठायें। पूरी तरह से झूठ भ्रामक और हताशा का प्रतीक है अगर उनके पास कोई सबूत है तो वे कोर्ट में रखें न कि सोशल मीडिया पर झूठे आरोप उगले। मरांडी जी का आरोप सिर्फ सरकार पर ही नहीं सीएजी और कैग पर सवाल उठाते हैं। यह केवल संस्थाओं का अपमान है बल्कि जांच एजेंसिंयों को बदनाम करने का साजिश है। सच यह है कि बाबूलाल मरांडी अपनी राजनीतिक जमीन खो चुकी है। भाजपा के भीतर उनकी स्थिति कमजोर है और जनता में उनका कोई जनाधार शेष नहीं बचा इसी हताशा से रोज रोज नये नये आरोप गढ़कर खुद को प्रासंगिक बनाने का प्रयास करते हैं। <br /> <br />सतीश पौल मुंजनी   ने कहा कि एक तरफ बाबूलाल जी खुद को भ्रष्टाचार विरोधी बताते हैं और दूसरी तरफ भाजपा में शामिल होकर उन्हीं के भ्रष्टाचार पर चुप्पी साध लेते हैं। मरांडी जी को भाजपा के राफेल सौदे, इलेक्ट्रॉल बॉण्ड घोटाले, पीएल केयर फंड की अपारदर्शिता भाजपा शासित राज्यों में शराब खनन घोटाले पर और जब खुद मुख्यमंत्री थे उस समय झारखंड भ्रष्टाचार घोटाले से अछूता नहीं था उस समय उन्होंने कितने दोषियों पर कारवाई की। झारखंड की जनता अब उनकी राजनीति को अच्छी तरह से पहचान चुकी है, सच यह है कि झारखंड की सरकार पारदर्शिता और विकास की राह पर अडिग है और कोई भी भ्रष्टाचारी कानून से बच नहीं पायेगा। <br /> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Sep 2025 18:38:19 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली की दौड़: कौन होगा मोदी का राजनीतिक वारिस, नए समीकरणों की विस्तृत पड़ताल</title>
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                        <![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के तीसरे कार्यकाल को अब एक साल से अधिक हो चुका है। जून 2024 में जब गठबंधन सरकार ने शपथ ली थी, तब यह प्रश्न "मोदी के बाद कौन?" भारतीय राजनीति के केंद्र में था। आज, 31 जुलाई 2025 को, यह सवाल और भी गहरा और आयामी हो गया है। पिछले एक साल के दौरान "गठबंधन धर्म" की राजनीति ने न केवल सरकार के कामकाज को प्रभावित किया है, बल्कि उत्तराधिकार के समीकरणों को भी नए सिरे से परिभाषित किया है।</p>
<p>2024 के चुनावों में भाजपा का अपने दम</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/politics/who-will-be-the-race-of-delhi-modis-political-hei/article-15099"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-07/tyhfgd.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के तीसरे कार्यकाल को अब एक साल से अधिक हो चुका है। जून 2024 में जब गठबंधन सरकार ने शपथ ली थी, तब यह प्रश्न "मोदी के बाद कौन?" भारतीय राजनीति के केंद्र में था। आज, 31 जुलाई 2025 को, यह सवाल और भी गहरा और आयामी हो गया है। पिछले एक साल के दौरान "गठबंधन धर्म" की राजनीति ने न केवल सरकार के कामकाज को प्रभावित किया है, बल्कि उत्तराधिकार के समीकरणों को भी नए सिरे से परिभाषित किया है।</p>
<p>2024 के चुनावों में भाजपा का अपने दम पर बहुमत से चूकना एक ऐतिहासिक मोड़ था। इस एक साल में, हमने देखा है कि कैसे नीतिगत फैसलों में सहयोगियों (विशेषकर TDP और JDU) की सहमति एक अनिवार्य शर्त बन गई है। इसने नेतृत्व के लिए आवश्यक गुणों की परिभाषा बदल दी है। अब केवल वैचारिक दृढ़ता या संगठनात्मक कौशल ही काफी नहीं है; सहयोगियों को साधने की कला, राजनीतिक लचीलापन और सर्वसम्मति बनाने की क्षमता पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। यह विश्लेषण इस एक साल के अनुभव के आधार पर उत्तराधिकार की दौड़ के प्रमुख चेहरों और बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य की गहन पड़ताल करता है।</p>
<h4><strong>भाजपा का आंतरिक वृत्त - एक साल बाद दावेदारों की स्थिति</strong></h4>
<p><strong>अमित शाह: गठबंधन की सीमाओं में रणनीतिकार</strong></p>
<p>पिछले एक साल में गृह मंत्री अमित शाह ने गठबंधन सरकार की मजबूरियों के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश की है। जहाँ उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक मामलों पर अपना दृढ़ नियंत्रण बनाए रखा है, वहीं कई मौकों पर उन्हें सहयोगियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अपने कठोर रुख में नरमी लानी पड़ी है। इस एक साल ने उनकी छवि को एक कुशल प्रशासक के रूप में और मजबूत किया है, लेकिन साथ ही यह भी उजागर किया है कि उनकी निर्णायक शैली गठबंधन के लिए एक चुनौती बन सकती है। उनकी ताकत आज भी संगठन पर उनकी पकड़ और मोदी के प्रति उनकी निष्ठा है, लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी अब इस बात पर अधिक निर्भर करेगी कि वे विभिन्न विचारधारा वाले सहयोगियों को एक साथ लेकर चल पाते हैं या नहीं।</p>
<p><strong>योगी आदित्यनाथ: हिंदुत्व के प्रतीक और राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने पिछले एक साल में अपने शासन के "योगी मॉडल" को और मजबूती दी है। हालांकि, राष्ट्रीय पटल पर उनकी भूमिका पहले से अधिक सधी हुई दिखी है। वे भाजपा के स्टार प्रचारक बने हुए हैं, लेकिन दिल्ली के साथ उनके संबंध संतुलन साधने वाले रहे हैं। 2024 के बाद की गठबंधन राजनीति ने उनके जैसे स्पष्ट वैचारिक चेहरे के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व की राह को और जटिल बना दिया है। उनकी अपार लोकप्रियता उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी है, लेकिन पिछले एक साल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली का रास्ता केवल लोकप्रियता से नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वीकार्यता से होकर गुजरता है, जिसमें वे अभी भी शाह, गडकरी और राजनाथ से पीछे दिखते हैं।</p>
<p><strong>नितिन गडकरी: गठबंधन युग के सबसे प्रासंगिक नेता?</strong></p>
<p>पिछले एक साल में नितिन गडकरी की अहमियत और बढ़ी है। "विकास-पुरुष" की उनकी छवि गठबंधन सरकार के लिए एक संपत्ति साबित हुई है। उनके मंत्रालय का प्रदर्शन लगातार उत्कृष्ट रहा है और राजनीतिक दलों के बीच उनकी स्वीकार्यता उन्हें NDA का सबसे भरोसेमंद चेहरा बनाती है। गठबंधन के कई सहयोगी निजी तौर पर उनके नेतृत्व को अधिक सहज मानते हैं। इस एक साल में, जब भी सरकार और सहयोगियों के बीच किसी मुद्दे पर गतिरोध की स्थिति बनी, गडकरी एक संभावित संकटमोचक के रूप में उभरे। उनकी दावेदारी अब पहले से कहीं ज़्यादा मजबूत दिखती है, क्योंकि वे विकास और सर्वसम्मति की राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इस गठबंधन युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</p>
<p><strong>राजनाथ सिंह: स्थिरता के प्रतीक और गठबंधन के संकटमोचक</strong></p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भूमिका इस एक साल में सरकार के एक वरिष्ठ अभिभावक के तौर पर और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उनका अनुभव और शांत स्वभाव गठबंधन के भीतर मतभेदों को सुलझाने में कई बार काम आया है। उन्हें एक ऐसे "सुरक्षित बंदरगाह" के रूप में देखा जाता है, जो किसी भी राजनीतिक संकट में NDA की नाव को पार लगा सकते हैं। लोकसभा में सदन के उपनेता के रूप में, उन्होंने पिछले एक साल में सरकार और विपक्ष के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में भी काम किया है। उनकी दावेदारी एक "संक्रमणकालीन" या "सर्वसम्मत" उम्मीदवार के रूप में और भी पुख्ता हुई है, खासकर यदि पार्टी को स्थिरता को प्राथमिकता देनी हो।</p>
<p>यह तालिका दर्शाती है कि गठबंधन युग की नई वास्तविकताओं के आधार पर विभिन्न मापदंडों पर कौन सा नेता कहाँ खड़ा है।</p>
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<div class="table-content not-end-of-paragraph">
<table style="width:100%;height:272px;">
<thead>
<tr style="height:46px;">
<td style="width:14.002%;height:46px;">विशेषता (Attribute)</td>
<td style="width:21.3422%;height:46px;">अमित शाह</td>
<td style="width:19.3351%;height:46px;">योगी आदित्यनाथ</td>
<td style="width:24.6421%;height:46px;">नितिन गडकरी</td>
<td style="width:20.5741%;height:46px;">राजनाथ सिंह</td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr style="height:67px;">
<td style="width:14.002%;height:67px;"><strong>संगठनात्मक शक्ति</strong></td>
<td style="width:21.3422%;height:67px;">⭐⭐⭐⭐⭐ (अत्यधिक मजबूत)</td>
<td style="width:19.3351%;height:67px;">⭐⭐⭐⭐ (स्वतंत्र शक्ति केंद्र)</td>
<td style="width:24.6421%;height:67px;">⭐⭐⭐⭐ (पार्टी और RSS में गहरी पकड़)</td>
<td style="width:20.5741%;height:67px;">⭐⭐⭐⭐ (वरिष्ठ और सम्मानित)</td>
</tr>
<tr style="height:46px;">
<td style="width:14.002%;height:46px;"><strong>वैचारिक कठोरता</strong></td>
<td style="width:21.3422%;height:46px;">⭐⭐⭐⭐⭐ (अडिग)</td>
<td style="width:19.3351%;height:46px;">⭐⭐⭐⭐⭐ (अडिग)</td>
<td style="width:24.6421%;height:46px;">⭐⭐⭐ (व्यावहारिक)</td>
<td style="width:20.5741%;height:46px;">⭐⭐⭐ (उदारवादी)</td>
</tr>
<tr style="height:67px;">
<td style="width:14.002%;height:67px;"><strong>गठबंधन प्रबंधन कौशल</strong></td>
<td style="width:21.3422%;height:67px;">⭐⭐⭐ (सुधार की आवश्यकता)</td>
<td style="width:19.3351%;height:67px;">⭐⭐ (सबसे बड़ी चुनौती)</td>
<td style="width:24.6421%;height:67px;">⭐⭐⭐⭐⭐ (उत्कृष्ट और सर्वमान्य)</td>
<td style="width:20.5741%;height:67px;">⭐⭐⭐⭐ (अनुभवी मध्यस्थ)</td>
</tr>
<tr style="height:46px;">
<td style="width:14.002%;height:46px;"><strong>व्यापक जन अपील</strong></td>
<td style="width:21.3422%;height:46px;">⭐⭐⭐ (सीमित)</td>
<td style="width:19.3351%;height:46px;">⭐⭐⭐⭐ (कट्टर आधार में)</td>
<td style="width:24.6421%;height:46px;">⭐⭐⭐⭐ (विकास के नाम पर)</td>
<td style="width:20.5741%;height:46px;">⭐⭐⭐ (सीमित)</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
</div>
</div>
<h4><strong>अन्य चेहरे और उनकी बदलती भूमिका</strong></h4>
<p><strong>शिवराज सिंह चौहान: </strong></p>
<p>केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में अपने एक साल के कार्यकाल में, शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और ग्रामीण भारत पर ध्यान केंद्रित करके अपनी "मामा" की कल्याणकारी छवि को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है। उनकी नीतियां और ज़मीनी जुड़ाव उन्हें भाजपा के ओबीसी और कल्याण-केंद्रित चेहरे के रूप में और मजबूत करता है।</p>
<p><strong>एस. जयशंकर: </strong></p>
<p>वैश्विक मंच पर भारत की मुखर आवाज़ बने हुए हैं। पिछले एक साल में बदले भू-राजनीतिक समीकरणों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है, जो उन्हें एक टेक्नोक्रेट-राजनेता के रूप में शीर्ष पद के लिए एक अप्रत्याशित लेकिन तार्किक विकल्प बनाए रखती है।</p>
<h4><strong>विपक्ष की चुनौती - एक साल का रिपोर्ट कार्ड</strong></h4>
<p>पिछले एक साल में राहुल गांधी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में सरकार को कई मुद्दों पर घेरा है। उन्होंने 'इंडिया' गठबंधन को एकजुट रखने का प्रयास किया है, लेकिन विभिन्न राज्यों में सहयोगियों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे क्षेत्रीय क्षत्रप अपने-अपने राज्यों में मजबूत बने हुए हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का एक सर्वसम्मत चेहरा अभी भी एक दूर की कौड़ी लगता है। एक साल के बाद, विपक्ष एकजुट दिखने के बावजूद नेतृत्व के सवाल पर बंटा हुआ है, जो 2024 के बाद भी उनकी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।</p>
<p><strong>प्रमुख विपक्षी नेताओं की प्रोफाइल:</strong></p>
<table class="MsoNormalTable" border="0" cellpadding="0">
<thead>
<tr>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषता</span></p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राहुल गांधी</span></p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अखिलेश यादव</span></p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ममता बनर्जी</span></p>
</td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक आधार और पार्टी</span></strong></p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">अखिल भारतीय कांग्रेस; केरल और रायबरेली से सांसद; गांधी-नेहरू परिवार की विरासत </p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">समाजवादी पार्टी; उत्तर प्रदेश में मजबूत आधार; कन्नौज से सांसद </p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">तृणमूल कांग्रेस; पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री; जमीनी स्तर की नेता </p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राष्ट्रीय अपील और छवि</span></strong></p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">''भारत जोड़ो यात्रा' के बाद छवि में सुधार; विपक्ष का राष्ट्रीय चेहरा, लेकिन अभी भी बहस का विषय</p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">उत्तर प्रदेश में सफलता के बाद राष्ट्रीय कद बढ़ा; युवा और आधुनिक नेता के रूप में उभर रहे हैं</p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">मजबूत, जुझारू और निर्णायक नेता; "दीदी" की छवि; राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं स्पष्ट हैं</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गठबंधन प्रबंधन कौशल</span></strong></p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">क्षेत्रीय दलों के साथ संबंध बनाने का प्रयास, लेकिन स्वीकार्यता अभी भी एक चुनौती है</p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">गठबंधन में सफल (कांग्रेस के साथ यूपी में); लचीलापन दिखाया है</p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">गठबंधन बनाने में अनुभव, लेकिन अक्सर अपनी शर्तों पर काम करने के लिए जानी जाती हैं</p>
</td>
</tr>
<tr>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रमुख नीतिगत मुद्दे/कथा</span></strong></p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">सामाजिक न्याय, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता, "लोकतंत्र बचाओ" का नारा</p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal">'PDA' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) का सामाजिक न्याय का एजेंडा; जातिगत जनगणना पर जोर </p>
</td>
<td style="border:solid 1pt;padding:6pt 9pt 6pt 9pt;">
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संघवाद</span><span style="font-size:11pt;line-height:107%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्षेत्रीय स्वायत्तता</span><span style="font-size:11pt;line-height:107%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महिला सशक्तीकरण</span><span style="font-size:11pt;line-height:107%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बंगाली पहचान की रक्षा</span><span lang="hi" style="font-size:11pt;line-height:107%;font-family:Calibri, 'sans-serif';" xml:lang="hi"> </span></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h4><strong>क्या हो सकती है आने वाले समय की संभावनाएं?</strong></h4>
<p>NDA-3 सरकार का एक साल यह स्पष्ट करता है कि भविष्य का नेतृत्व केवल वैचारिक या संगठनात्मक ताकत से तय नहीं होगा। इस एक साल ने नितिन गडकरी जैसे सर्वमान्य और विकास-केंद्रित चेहरे की दावेदारी को बेहद मजबूत किया है, क्योंकि वे गठबंधन की राजनीति के लिए सबसे उपयुक्त दिखते हैं। वहीं, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ को अपनी शैली को गठबंधन के अनुकूल ढालने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। राजनाथ सिंह एक सदाबहार और स्थिर विकल्प बने हुए हैं।</p>
<p>अंततः, उत्तराधिकारी का चयन प्रधानमंत्री मोदी के निर्णय और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, लेकिन पिछले एक साल ने यह दिखा दिया है कि "दिल्ली की दौड़" अब सीधी नहीं, बल्कि कई मोड़ों और बाधाओं से भरी एक मैराथन है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Jul 2025 18:27:49 +0530</pubDate>
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                <title>Opinion: बीजेपी के खिलाफ 27 में फिर बदलेगा सियासी समीकरण</title>
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                        <![CDATA[विधानसभा चुनाव के समय तक समाजवादी पार्टी कांग्रेसी पंजे से अपना हाथ छुड़ाकर ममता बनर्जी के कहने पर एक बार फिर से मायावती के सात बुआ भतीजे वाला रिश्ता निभाते नजर आए]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/opinion-political-equation-will-change-again-in-27-against-bjp/article-13226"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-12/whatsapp-image-2024-12-11-at-12.30.35.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ एक बार फिर से सियासी समीकरण काफी तेजी के साथ बदल रहा हैं. प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और योगी सरकार की विरोध की हांडी नहीं पक पाने के कारण प्रदेश में एक बार फिर से नए सियासी समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं. नये समीकरण में तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी का अहम रोल हो सकता है. इस वजह से समाजवादी पार्टी इंडिया गठबंधन की कमान ममता बनर्जी को दिये जाने की मांग का भी समर्थन कर रहे हैं. हो सकता है 2027 के विधानसभा चुनाव के समय तक समाजवादी पार्टी कांग्रेसी पंजे से अपना हाथ छुड़ाकर ममता बनर्जी के कहने पर एक बार फिर से मायावती के सात बुआ भतीजे वाला रिश्ता निभाते नजर आए. ऐसा होता है तो यूपी में कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है. यह संभावना है इसलिए बढ़ रही है क्योंकि पिछले कुछ दिनों या महीनों से कांग्रेस समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश कर रही है. सपा-कांग्रेस के बीच दूरियां लगातार बढ़ने के साथ एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक मंचों से बयानबाजी भी हो रही है. महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव में कांग्रेस की नाकामी भी इसमें एक अहम कड़ी समझा जा रहा है. यही दूरियां ही हैं कि संसद के अंदर भी सपा-कांग्रेस विभिन्न मुद्दों पर मजबूती से एक साथ नहीं दिख रहे हैं. सपा नेताओं का कहना है कि संभल मामले में उसके सांसद पर मुकदमे दर्ज किए जाने का कांग्रेस ने उस तरह विरोध नहीं किया जैसी उससे अपेक्षा थी. बताते हैं कि लोकसभा में फैजाबाद (अयोध्या) के सपा सांसद अवधेश प्रसाद की सीट पीछे होने पर भी दोनों दलों के रिश्तों में दरार आई है. सपा का मानना है कि सीटिंग प्लान पर बात के समय कांग्रेस ने उसे भरोसे में नहीं लिया. वहीं, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सदन में अडानी मामले में उसे सपा का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है. हाल यह है कि जेल में बंद सपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री आजम खान ने भी इंडिया ब्लॉक को जेल से एक संदेश भेजा है. इसमें उन्होंने कहा है कि इंडिया ब्लॉक को मुसलमानों पर हो रहे हमलों पर अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए. साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी को भी लिखा कि संभल की घटना के जैसे ही रामपुर में हुए अत्याचार का मुद्दा भी संसद में उतनी ही मजबूती से उठाना चाहिए.</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस और सपा के बीच दूरियां तब और बढ़ गईं जब सपा कि तरफ से कहा जाने लगा कि इंडिया गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस की जगह तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी को दिए जाने पर सपा को एतराज नहीं है. बता दें लोकसभा चुनाव के बाद कई चुनावों में कांग्रेस की लगातार हार के बाद इंडिया गठबंधन में अंतर्विरोध बढ़ रहे हैं. उधर दूसरी तरफ चर्चा यह भी है कि यूपी की राजनीति एक बार फिर पलट सकती है. सपा और कांग्रेस के बीच आई दूरियों के बीच मायावती का रुख नई राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है. बहराल, सपा नेताओं का कहना है कि संभल मामले में उसके सांसद पर मुकदमे दर्ज किए जाने का कांग्रेस ने उस तरह विरोध नहीं किया जैसी उससे अपेक्षा थी. बताते हैं कि लोकसभा में फैजाबाद (अयोध्या) के सपा सांसद अवधेश प्रसाद की सीट पीछे होने पर भी दोनों दलों के रिश्तों में असहजता पैदा हुई है. सपा का मानना है कि सीटिंग प्लान पर बात के समय कांग्रेस ने उसे भरोसे में नहीं लिया. वहीं, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सदन में अडानी मामले में उसे सपा का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है. रिश्तों में खटास का ही नतीजा है कि सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कहा कि ममता बनर्जी वरिष्ठ नेता हैं. पार्टी हाईकमान भी यही चाहता है कि इंडिया गठबंधन का नेतृत्व ममता बनर्जी करें. सपा के प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल भी कह चुके हैं कि वे राहुल गांधी को इंडिया गठबंधन का नेता नहीं मानते हैं. इंडिया गठबंधन की समन्वय समिति में शामिल सपा के एक नेता बताते हैं कि कांग्रेस गठबंधन को लेकर गंभीर नहीं है. उसके नेता चुनाव के वक्त ही सक्रिय होते हैं जिससे जनाधार नहीं बढ़ता. ऐसे में बेहतर होगा कि गठबंधन का नेतृत्व ममता बनर्जी करें. भाजपा को मात देने के लिए रणनीति के साथ जनता के बीच लगातार जुटे रहने की जरूरत है.                                <br />बात बीएसपी की की जाए तो हरियाणा व महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव और यूपी के उपचुनाव में कांग्रेस व सपा के बीच बढ़ी दूरियों का सियासी लाभ बसपा को मिलने की उम्मीद है. पार्टी तेजी से बदले राजनीतिक घटना पर नजर बनाए हुए है. यदि कांग्रेस और सपा के बीच बात नहीं बनी तो इसकी वजह से बनने वाले तीसरे मोर्चा का बसपा अंग बन सकती है. जानकारों की मानें तो वर्तमान में पार्टी को अपना वजूद बचाने और देश की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता को बरकरार रखने के लिए इसकी जरूरत भी है. बसपा के इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 2007 के यूपी विधानसभा चुनाव में उसे बहुमत मिला था. इससे पहले बसपा दूसरे दलों की मदद से सरकार बनाती रही, जिसका लाभ उसे लोकसभा चुनावों में भी मिलता गया. वर्ष 2012 में बसपा ने फिर अकेले दम पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया, जो गलत साबित हुआ. यही हाल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी हुआ. 2019 में बसपा ने सपा के साथ गठजोड़ कर लोकसभा चुनाव लड़ा और 10 सांसदों वाली पार्टी बनी. हालांकि इसके बाद वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने से उसे भारी नुकसान का सामना करना पड़ गया. अब पार्टी की उम्मीदें तीसरा मोर्चा बनने पर टिकी हैं. वैसे तो मायावती सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है लेकिन  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दोनों दलों को एक मंच पर ला सकती हैं. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस को दरकिनार कर अगर तीसरा मोर्चा बना तो ममता बनर्जी उसकी निर्विवाद नेता बन सकती हैं. पहले उन्हें मायावती से चुनौती मिलने के जो समीकरण बने थे, वो बीते चुनावों में बसपा के लगातार घटते जनाधार की वजह से ध्वस्त हो चुके हैं. अब बसपा को अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाने के लिए दूसरे दलों का सहारा लेना पड़ सकता है. इसके साथ ही बसपा सुप्रीमो ने पुराने बसपाइयों को भी वापस आने का बुलावा दिया है.</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Dec 2024 14:03:20 +0530</pubDate>
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