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                <title>Jawaharlal Nehru - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>Opinion: समान नागरिक संहिता के लिए बीजेपी का नया प्लान, संसद से नहीं विधानसभा से होगा लागू</title>
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                        <![CDATA[समान नागरिक संहिता का मतलब है कि देश में सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून हो. इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, संपत्ति के बंटवारे और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर हर नागरिक के लिए समान कानून लागू करना है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/opinion-bjps-new-plan-for-uniform-civil-code-will-be/article-13457"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-12/1625909610-8595-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बीजेपी ने हमेशा से देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने की वकालत की है, और यह मुद्दा जनसंघ के समय से ही पार्टी के एजेंडे का हिस्सा रहा है. जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है, तब से इस मुद्दे पर पार्टी ने लगातार जोर दिया है. बीजेपी ने राम मंदिर, अनुच्छेद 370 को हटाने और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों को अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया था. राम मंदिर का सपना तो साकार हो चुका है, अनुच्छेद 370 को खत्म किया जा चुका है, अब सिर्फ समान नागरिक संहिता को लागू करने का काम बाकी है, जिसे बीजेपी और मोदी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के जरिए अयोध्या में राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ हुआ, और मोदी सरकार ने संसद के जरिए अनुच्छेद 370 को खत्म किया. साथ ही, संसद के जरिए "एक देश, एक चुनाव" की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं. अब, समान नागरिक संहिता को लागू करने की प्रक्रिया को लेकर बीजेपी ने एक नई रणनीति बनाई है. बीजेपी इस मुद्दे को संसद के बजाय राज्य विधानसभा के माध्यम से आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है. इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अपने बयान के माध्यम से संकेत दिए थे.</p>
<p style="text-align:justify;">अमित शाह ने राज्यसभा में संविधान पर चर्चा करते हुए समान नागरिक संहिता के महत्व को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 44 के तहत हमारा संविधान समान नागरिक संहिता की बात करता है, लेकिन यह अभी तक देश में लागू नहीं हो पाया है. इसके लिए उन्होंने कांग्रेस को दोषी ठहराते हुए कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम पर्सनल लॉ लागू किया था, और कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति शुरू कर दी थी. अमित शाह ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई बार समान नागरिक संहिता लागू करने की बात की है, लेकिन कांग्रेस ने हर बार इसे टाल दिया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तराखंड में बीजेपी सरकार ने यूसीसी को लागू किया है और इसी मॉडल के तहत बीजेपी शासित अन्य राज्यों में भी यूसीसी को लागू किया जाएगा.</p>
<p style="text-align:justify;">समान नागरिक संहिता का मतलब है कि देश में सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून हो. इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, संपत्ति के बंटवारे और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर हर नागरिक के लिए समान कानून लागू करना है. वर्तमान में, मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मुस्लिम समुदाय के लोग अपने पारिवारिक मामलों का हल करते हैं, लेकिन समान नागरिक संहिता के लागू होने से सभी समुदायों के लिए एक समान कानून होगा. बीजेपी ने इस मुद्दे को जनसंघ के समय से उठाया था, और पार्टी का मानना है कि यह देश की धर्मनिरपेक्षता और समानता को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है.</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर कई बार अपनी राय दी है. उन्होंने संविधान पर चर्चा के दौरान सेकुलर सिविल कोड के संवैधानिक महत्व की बात की और संकेत दिए कि सरकार समान नागरिक संहिता लाने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने 15 अगस्त को लाल किले के प्रचीर से भी यह कहा था कि जिन कानूनों से देश को धर्म के आधार पर बांटा जाता है, उन्हें समाप्त किया जाना चाहिए. उनके अनुसार, देश को एक सेकुलर सिविल कोड की आवश्यकता है, और गलत कानूनों का आधुनिक समाज में कोई स्थान नहीं है.</p>
<p style="text-align:justify;">इस संदर्भ में अमित शाह ने उत्तराखंड की तर्ज पर अन्य बीजेपी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात की. उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी शासित राज्यों में यूसीसी को लागू करने के लिए विधानसभा के रास्ते पर आगे बढ़ा जाएगा. इस रणनीति के तहत, बीजेपी पहले उत्तराखंड में यूसीसी को लागू कर चुकी है, और अब दूसरे बीजेपी शासित राज्यों में इसे लागू करने की योजना बनाई जा रही है. उत्तराखंड में बीजेपी ने विधानसभा चुनावों के दौरान यूसीसी को लागू करने का वादा किया था, और सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने इस पर अमल किया. उत्तराखंड में पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी, जिसने यूसीसी के लिए सिफारिशें दीं, और उसके आधार पर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की गई.</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड के बाद अब असम की बीजेपी सरकार भी समान नागरिक संहिता को लागू करने की तैयारी कर रही है. असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में इस बात का ऐलान किया था. राजस्थान और गुजरात जैसी राज्य सरकारें भी यूसीसी को लागू करने के पक्ष में हैं, और उनकी योजनाओं के तहत इस दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं. इन राज्यों में बीजेपी अपने शासित क्षेत्रों में यूसीसी को लागू करने में सफल हो सकती है, और इस तरह से पार्टी देश के बड़े हिस्से में समान नागरिक संहिता को लागू करने का मॉडल पेश कर सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">बीजेपी के लिए यह रणनीति महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिए वह न केवल अपने शासित राज्यों में यूसीसी लागू कर सकती है, बल्कि वह अन्य विपक्षी दलों पर भी सियासी दबाव बना सकती है. यूपी, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, असम, गोवा, गुजरात, ओडिशा, त्रिपुरा, मणिपुर, महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं. इनमें से गोवा में पहले से ही यूसीसी लागू है, और उत्तराखंड में भी इसे लागू किया जा चुका है. यदि बीजेपी इन राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने में सफल हो जाती है, तो यह पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इस प्रक्रिया में कुछ चुनौतियां भी हैं. एनडीए के कई सहयोगी दल, जैसे जेडीयू और टीडीपी, इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ नहीं हैं. इसके अलावा, बीजेपी को संसद में यूसीसी के बिल को पास करने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान में मुश्किल प्रतीत हो रही है. मुस्लिम वोटों की सियासी मजबूरी के कारण जेडीयू और टीडीपी इस मुद्दे पर बीजेपी का समर्थन नहीं कर सकते. इसलिए, बीजेपी ने संसद के बजाय विधानसभा का रूट अपनाने का निर्णय लिया है, ताकि राज्यों में इसे लागू करने का रास्ता तैयार किया जा सके.</p>
<p style="text-align:justify;">इस रणनीति के जरिए बीजेपी शासित राज्यों में यूसीसी को लागू करने का प्रयास करेगी, और इसके बाद अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने के लिए दबाव डाला जाएगा. यह बीजेपी के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि हो सकती है, क्योंकि इससे पार्टी अपनी धर्मनिरपेक्षता और समानता के एजेंडे को साकार कर सकेगी. इसके साथ ही, बीजेपी अपने सहयोगी दलों को भी इस मुद्दे पर विश्वास में लेकर सियासी फायदे की दिशा में बढ़ सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">बीजेपी की सरकारों को यह मौका मिलेगा कि वे अपने शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करके उदाहरण प्रस्तुत कर सकें. अगर ये राज्यों में सफलतापूर्वक लागू हो जाती है, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी बदलाव का संकेत होगा, और फिर बीजेपी अन्य राज्यों को भी इसे लागू करने के लिए प्रेरित कर सकती है. इस प्रकार, समान नागरिक संहिता का मुद्दा बीजेपी के लिए न केवल एक महत्वपूर्ण राजनीतिक एजेंडा है, बल्कि यह देश की धर्मनिरपेक्षता और समानता की दिशा में एक अहम कदम भी हो सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">अगर बीजेपी शासित राज्यों में यह प्रक्रिया सफल हो जाती है, तो यूसीसी को लागू करने के लिए विपक्षी दलों पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर उन दलों पर जो मुस्लिम वोट बैंक को लेकर चिंतित रहते हैं. बीजेपी अपने शासित राज्यों को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर सकती है, जिससे यह साबित हो सके कि समान नागरिक संहिता सभी समुदायों के हित में है और समाज में समानता लाने में मददगार है. इससे पार्टी अपने सहयोगी दलों और विपक्षी दलों को भी इस मुद्दे पर मजबूर कर सकती है, और फिर इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का रास्ता खोल सकती है. इस प्रकार, बीजेपी अपने शासित राज्यों के जरिए देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में प्रभावी कदम उठा सकती है, जो अंततः देश को एक समान और धर्मनिरपेक्ष समाज की ओर ले जाने में मदद करेगा.</p>
<img src="https://samridhjharkhand.com/media/2024-12/whatsapp-image-2024-12-15-at-12.54.23_071fbbf6-(1).jpg" alt="Opinion: समान नागरिक संहिता के लिए बीजेपी का नया प्लान, संसद से नहीं विधानसभा से होगा लागू" width="203" height="122"></img>
अजय कुमार

<p style="text-align:justify;"><strong>अजय कुमार</strong><br /><strong>उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार</strong><br /><strong>मो-9335566111</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 15:42:49 +0530</pubDate>
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                <title>Koderma News: मॉडर्न पब्लिक स्कूल में बाल दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन  </title>
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                        <![CDATA[झुमरी तिलैया स्तिथ मॉडर्न पब्लिक स्कूल में बाल दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुवात भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की छाया चित्र पर विद्यालय के प्राचार्य शैलेन्द्र कुमार एवं निदेशिका संगीता शर्मा के द्वारा पुष्प अर्पित कर की गयी.  ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/koderma/koderma-news-program-organized-on-the-occasion-of-childrens-day/article-12685"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/whatsapp-image-2024-11-14-at-16.48.39_91628ac4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोडरमा: </strong>झुमरी तिलैया स्थित मॉडर्न पब्लिक स्कूल में बाल दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुवात भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की छाया चित्र पर विद्यालय के प्राचार्य शैलेन्द्र कुमार एवं निदेशिका संगीता शर्मा के द्वारा पुष्प अर्पित कर की गयी. इस अवसर पर छात्रों के लिए विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसे विद्यालय के शिक्षकों द्वारा कराया गया. </p>
<p style="text-align:justify;">प्रार्थना सभा का कमांड राहुल सम्राट ने, प्रार्थना गीत एवं स्कूल गीत अर्चना धर, प्रतिज्ञा प्राचार्य शैलेन्द्र कुमार, सुविचार सत्यभामा ठाकुर, न्यूज़ संदीप कुमार ने, स्कूल न्यूज़ अनुराधा सिंह ने कविता पाठ लक्ष्मी कुमारी एवं कृष्णा भट्टाचार्य ने, क्विज राहुल मिश्रा ने एवं मंच संचालन सुप्रीत कौर ने किया. </p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर प्राचार्य शैलेन्द्र कुमार ने अपने संबोधन में युवा दिमागों के पोषण और छात्रों के बीच रचनात्मकता, करुणा और लचीलेपन को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने बच्चों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया और उज्जवल भविष्य को आकार देने में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला. निदेशिका संगीता शर्मा ने दिन के कार्यक्रमों में छात्रों के उत्साह और सक्रिय भागीदारी को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने समग्र विकास के लिए सहायक वातावरण बनाने में मॉडर्न पब्लिक स्कूल की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने दयालुता, ईमानदारी और कड़ी मेहनत के महत्व के बारे में प्रेरणादायक शब्द भी छात्रों के साथ साझा किया. </p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में कक्षा पीजी से अष्ठम तक के छात्रों के लिए शिक्षकों द्वारा गेम्स एक्टिविटी का आयोजन किया गया एवं प्रेरणादायक मूवी दिखाया गया. कक्षा नवमी से बारहवीं तक के छात्रों की संयुक्त क्रिकेट टीम का मुकाबला प्राचार्य एकादश की टीम से हुआ, जिसमें टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करते हुए प्राचार्य एकदाश की टीम ने 12 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 96 रन स्कोर किया. जिमसें प्राचार्य शैलेन्द्र कुमार ने 49 रन, सलीम ने 18 रन का योगदान रहा.  </p>
<p style="text-align:justify;">छात्र एकादश की तरफ से सुधांशु ने 2 एवं सौरव ने 1 विकेट लिया. जवाबी पारी खेलने उतरी छात्र एकादस की टीम 8.4 ओवरों में 60 रन पर सिमट गयी, जिसमे हार्दिक ने 15 रन, तनिष्क एवं सौरव ने 13-13 रनों का योगदान दिया. वहीं प्राचार्य एकादश की तरफ से गेंदबाजी करते हुए प्राचार्य शैलेन्द्र कुमार ने 6 विकेट, सूरज कुमार एवं दीपेश सिंह ने 2-2 विकेट लिया. प्राचार्य एकादश की टीम ने 36 रनों से मैच जीत लिया. कार्यक्रम के सफल आयोजन में पुरे विद्यालय परिवार की भूमिका सराहनीय रही.</p>]]>
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                                                            <category>कोडरमा</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
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                <pubDate>Thu, 14 Nov 2024 20:00:38 +0530</pubDate>
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