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                <title>Kartik month - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>दीपों का त्योहार दीवाली 20 को मनाया जाएगा : आचार्य प्रणव मिश्रा</title>
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                        <![CDATA[<p>हिंदू पंचांग में साल का सबसे बड़ा पांच दिवसिय महापर्व दीपोत्सव उमंग और उल्लास के साथ मनाने के लिए शहरवासी तैयारियों में जुटे हैं। उत्तम स्वास्थ्य, बुराइयों का अंत, धन का आगमन, सद्भाव और परिवार की रक्षा का संदेश देने वाले इस दीपोत्सव का शुभारंभ कार्तिक कृष्ण पक्ष तेरस 18 अक्टूबर धनतेसर से होगा और कार्तिक शुक्ल दूज 23 को भाइदूज तक कई शुभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा। दीपावली सोमवार 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। प्रदोष एवं रात्रि में अमावस्या तिथि मिलने के कारण दीपावली का पर्व 20 अक्तूबर सोमवार को मनाया जाएगा। दीपावली अमावस्या तिथि की रात्रि में</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/the-festival-of-lights-will-be-celebrated-on-diwali-20/article-16677"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-10/resized-image---2025-10-14t235726.369.jpeg" alt=""></a><br /><p>हिंदू पंचांग में साल का सबसे बड़ा पांच दिवसिय महापर्व दीपोत्सव उमंग और उल्लास के साथ मनाने के लिए शहरवासी तैयारियों में जुटे हैं। उत्तम स्वास्थ्य, बुराइयों का अंत, धन का आगमन, सद्भाव और परिवार की रक्षा का संदेश देने वाले इस दीपोत्सव का शुभारंभ कार्तिक कृष्ण पक्ष तेरस 18 अक्टूबर धनतेसर से होगा और कार्तिक शुक्ल दूज 23 को भाइदूज तक कई शुभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा। दीपावली सोमवार 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। प्रदोष एवं रात्रि में अमावस्या तिथि मिलने के कारण दीपावली का पर्व 20 अक्तूबर सोमवार को मनाया जाएगा। दीपावली अमावस्या तिथि की रात्रि में मनाई जाती है। कार्तिक अमावस्या की तिथि 20 अक्तूबर को दिन में 02 : 44 बजे में प्रवेश करेगी जो 21 अक्टूबर को संध्या 04:26 बजे तक रहेगा। इसलिए रात्रि व्यापनी अमावस्या 20 को है। वही, स्नान दान की भौमवती अमावस्या 21 अक्तूबर को होगी।  इसलिए दीपावली का पवित्र पर्व 20 अक्तूबर सोमवार को ही मनाया जाएगा।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);">दीपोत्सव के 6 त्योहार</span></h4>
<p>18 अक्टूबर : धनतेरस<br />19 अक्टूबर : छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी)<br />20 अक्टूबर : दिवाली (लक्ष्मी पूजा) व महाकाली पूजा<br />21 अक्टूबर : भौमवती अमावस्या के साथ स्नान दान की अमावस्या<br />22 अक्टूबर : गोवर्धन पूजा<br />23 अक्टूबर : भाई दूज</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>पहला दिन- उत्तम स्वास्थ्य के लिए धनतेरस</strong></span></h4>
<p>आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि का जन्मोत्सव धनतेरस 18 अक्टूबर को मनेगा। उत्तम स्वास्थ्य के लिए सुबह, दोपहर और शाम को विशेष पूजन होगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसर स्वास्थ्य के निमित्त संध्या के समय चौमुखा दीपक जलाने का महत्व है। ज्योतिष शास्त्र  के मुताबिक इस दिन दीपक जलाकर नैवेद्य चढ़ाने से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। इस दिन बर्तन, आभूषण खरीदना शुभ रहता है।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>धनतेरस में खरीदारी का चौघड़िया मुहूर्त: </strong></span></h4>
<p>शुभ : सुबह 07:14 मिनट से 08: 41 तक<br />चर : सुबह 11:34 से 12:59 तक<br />लाभ : दोपहर 12 :59 से 02 : 26 तक<br />अमृत : 02 : 26 से 03 : 53 तक<br />लाभ : संध्या 05 :19 से  06: 53 तक <br />शुभ : रात्रि 08 : 26 से 10:00 तक</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>दूसरा दिन- बुराई के अंत के लिए रूपचौदस</strong></span></h4>
<p>कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी 19 अक्टूबर को रुपचौदस और छोटी दिवाली मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वधकर उसके भय से मुक्ति दिलाई थी। इसलिए इस दिन तिल तेल लगा उबटन करके स्नान करने का विधान है। इससे नारकीय जीवन से छुटकारा मिलता है। सुबह, दोपहर और शाम को पुजन भी किया जाएगा। शाम को 7 या 11 दीपक जलाए जाएंगे। </p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>खरीदारी का चौघड़िया मुहूर्त: </strong></span></h4>
<p>चर : सुबह 07 : 15 से 08: 41 तक<br />लाभ : 08 : 41 से 10: 07 मिनट तक<br />अमृत : 10 : 07 से 11: 33 तक<br />शुभ : 12 : 59 से 02 : 26 तक<br />शुभ : संध्या 05 : 18 से 06 : 52 तक<br />अमृत : 06 : 52 से 08 : 26 तक<br />चर : 08 : 26 से 09: 59 तक </p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>तीसरा दिन-धन प्राप्ति के लिए लक्ष्मी पूजन</strong></span></h4>
<p>महापर्व दीपावली 20 अक्टूबर को मनेग। धन प्राप्ति के लिए माता महालक्ष्मी का पूजन होगा। साथ ही गणेशजी, कुबेर और महाकाली का भी पूजन करने का भी विधान है। प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य प्रणव मिश्रा के अनुसार महालक्ष्मी पूजन प्रदोषकाल, स्थिर लग्न और रात में करना चाहिए। हालंकि, कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या की रात काल रात्रि मानी जाती है। शास्त्रों में संपूर्ण रात पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। इस साल अमावस्या रात्रि 12:42 बजे तक रहेगी।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>घरों में महालक्ष्मी पूजन के मुहूर्त</strong></span></h4>
<p>अमृत: सुबह 05:  49 से 07 :15 तक<br />शुभ :  सुबह 08 :41 से 10: 07 तक<br />चार : दोपहर 12 : 59 से 02 :25 तक<br />लाभ : 02 : 25 से 03 : 51 तक<br />अमृत : 03 : 51 से 05 : 17 तक<br />चार : संध्या 05 : 17 से 06:  51 तक<br />लाभ : 09 : 59 से 11:  33 तक<br />शुभ : रात्रि  01: 07 से 02: 41 तक</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>महालक्ष्मी पूजन में व्यपारियों के लिए लग्न</strong></span></h4>
<p>वृश्चिक : सुबह 08: 06से  10: 23 तक<br />कुंभ :  दोपहर  02:  13 से 03 : 44 तक<br />वृष : संध्या 06 : 51 से 08 : 48 तक<br />सिंह : रात्रि 01 : 19 से 03 : 33 तक<br />प्रदोष काल 05 :17 से 07: 56 तक</p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">21 अक्टूबर : भौमवती के साथ स्नान दान की अमावस्या</span></strong></h4>
<p>जिस दिन संध्या काल में अमावस्या होती है और उसी दिन रात्रि में अमावस्या रहे तो उसी दिन दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 20 अक्तूबर को अमावस्या दोपहर 02:44 बजे प्रवेश करेगी और 21 अक्तूबर को संध्या 04:26 बजे तक रहेगी। इसलिए इस बार 2 दिन अमावस्या का मान रहेगा। भौमवती अमावस्या (मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या) पर पवित्र नदी में स्नान और दान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>सौहार्द्र बढ़ाएंगे पांचवें अन्नकूट </strong></span></h4>
<p>दीपोत्सव के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 22 अक्टूबर को आपसी सद्भाव के लिए एक-दूसरे रिश्तेदारों के घर दीपावली की वधाई देने जाएंगे। श्रीराम के युद्ध जीतकर अयोध्या लैौटने की खुशी में इस दिन देवालयों में नए अन्न, सब्जियों का उन्नकूट बनाकर भगवान को भोग लगाया जाएगा। इसके बाद भक्त प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही श्रद्धालु घरों, मोहल्लों में सुबह और शाम को गोवर्धन पूजा भी करेंगे।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>6वें दिनः भाइयों की लंबी उम्र के लिए बहनें करेंगी पूजन</strong></span></h4>
<p>छठे दिवसीय दौपोत्सव का आखिरी दिन कार्तिक शुक्ल दूज 23 अक्टूबर को भाईदूज मनाई जाएगी। बहनें भाइयों के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए माता दूज का पूजा करेंगी। उन्हें खाना खिलाकर तिलक निकालेंगी।</p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">दीपावली के दिन  किए जाने वाले कुछ उपाय....</span></strong></h4>
<p>- दीपावली के दिन श्री सूक्त का पाठ करें और खीर की आहुति दे जिससे सुख,शांति ,सौभाग्य की प्राप्ति होती है।<br />- माता लक्ष्मी का पूजन करके ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मीयै नमः  इस मंत्र से 11 माला करके इन वस्तुओं को अभिमन्त्रित कर ले ( 11 कौड़ियों व 7 गोमती चक्र 5 लाल कमल , 9 कमलगट्टे , 7 हल्दी ) लाल कपड़े में पोटली बना कर तिजोरी में रख दे धन संग्रह में सहायक होती हैं।<br />- दीपावली के दिन एक सुपारी, एक तांबे का सिक्का, 7 गोमती चक्र, पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं और दूसरे दिन पीपल के पेड़ के नीचे से सभी वस्तु और पीपल का पत्ता लाकर गोमती चक्र, सिक्का, सुपाड़ी ये सभी लाल कपड़े में बांध कर तिजोरी में रख दे और पीपल का पत्ता गद्दी के नीचे रख ले।<br />- महालक्ष्मी जी स्तोत्र का पाठ 11 बार करें और साथ में भगवतगीता के 11 अध्याय का एकबार पाठ करने से लक्ष्मी जी कृपा प्राप्त होती है।</p>
<p><strong>प्रसिद्ध ज्योतिष</strong><br /><strong>आचार्य प्रणव मिश्रा</strong><br /><strong>आचार्यकुलम, अरगोड़ा, राँची</strong><br /><strong>8210075897</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 23:58:33 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>तुलसी विवाह 2024: जानें कब है सही तारीख और मुहूर्त </title>
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                        <![CDATA[इस दिन तुलसी माता का श्रृंगार कर उनका विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम जी के साथ कराया जाता है. मान्यता है कि तुलसी विवाह कराने से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/tulsi-vivah-2024--know-the-exact-date-and-muhurta/article-12582"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/whatsapp-image-2024-11-10-at-4.51.22-pm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>धर्म: </strong>तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इसकी पूजा अर्चना करने से घर में बरकत बनी रहती है. मान्यता है कि तुलसी के पौधे के पास सुबह-शाम दीपक जलाने से परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है. साथ ही धन लाभ के योग भी बनते हैं. हिंदू धर्म में कार्तिक माह को तुलसी माता की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि यह माह उनके विवाह का होता है.</p>
<p>पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाता है. इस दिन तुलसी माता का श्रृंगार कर उनका विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम जी के साथ कराया जाता है. मान्यता है कि तुलसी विवाह कराने से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं.</p>
<h3><strong>शुभ मुहूर्त </strong></h3>
<p>इस साल 12 नवंबर 2024 को तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त शाम 5:29 बजे से है, क्योंकि इस समय सूर्यास्त होगा. उसके बाद से तुलसी विवाह की तैयारी शुरू होगी. अंधेरा होने पर देवी तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम से किया जाएगा. तुलसी विवाह का शुभ समय शाम 5 बजकर 29 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक है.</p>
<h3><strong>जानें तुलसी को लगाने की सही दिशा </strong></h3>
<p>वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में तुलसी का पौधा उत्तर पूर्व या फिर उत्तर दिशा में लगाना शुभ होता है. माना जाता है कि इस दिशा में तुलसी का पौधा लगाने से परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव की समस्या दूर होती है. साथ ही घर में सदैव मां लक्ष्मी का वास होता है. तुलसी का पौधा घर में लगाने से नकारात्मक शक्ति दूर होती है. वास्तु शास्त्र की मानें तो तुलसी का पौधा घर में दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए. इस दिशा में तुलसी का पौधा लगाने से वास्तु दोष का सामना करना पड़ता है और आर्थिक समस्या आती है.<br /> </p>]]>
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                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>ट्रेंडिंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Nov 2024 16:54:20 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Subodh Kumar]]>
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                <title>करवा चौथ आज,जानें पूजा विधि एवं व्रत कथा </title>
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                        <![CDATA[आज करवाचौथ का व्रत किया जाएगा.रात्रि 07:40 के बाद चंद्रमा के दर्शन हो जाने पर चंद्रदेव को अर्घ्य देकर करवा चतुर्थी से संबंधित पूजन कर इसे विधवत सम्पन्न किया जाएगा. ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/know-karva-chauth-puja-method-and-fasting-story-today/article-12088"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/करवाचौथ.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>करवा चौथ का ये व्रत सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं. शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करना चाहिए. इस वर्ष करवा चौथ 2024 पर बन रहा महासंयोग बहुत लंबे समय के बाद करवाचौथ पर 5 राजयोग का निर्माण होने जा रहा है. जिसमें शश, गजकेसरी, महालक्ष्मी, बुधादित्य और समसप्तक राजयोग बनने जा रहे हैं जो शुभफलदायी है. पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है. इस साल करवा चौथ पर विशिष्ट संयोग बन रहे हैं, जो इस व्रत का महत्व और बढ़ा रहे हैं. </p>
<h3><strong>करवा चौथ व्रत कथा : -</strong></h3>
<p>पौराणिक कथा अनुसार, करवा नाम की पतिव्रता स्त्री थी. उसका पति एक दिन नदी में स्नान करने गया तो मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया उसने अपनी पत्नी करवा को सहायता के लिए बुलाया करवा के सतीत्व में काफी बल था.<br />नदी के तट पर अपने पति के पास पहुंचकर अपने तपोबल से उस मगरमच्छ को बांध दिया. फिर करवा मगरमच्छ को लेकर यमराज के पास पहुंची.</p>
<p>करवा ने यमराज से कहा कि इस मगर को आप मृत्युदंड दें और उसको नरक में ले जाए . यमराज ने करवा से कहा कि अभी इस मगर की आयु शेष हैं इसलिए वह समय से पहले मगर को मृत्यु नहीं दे सकते. इस पर करवा ने कहा कि अगर आप मगर को मारकर मेरे पति को चिरायु का वरदान नहीं देंगे तो मैं अपने तपोबल के माध्यम से आपको ही नष्ट कर दूंगी. करवा माता की बात सुनकर यमराज के पास खड़े चित्रगुप्त सोच में पड़ गए क्योंकि करवा के सतीत्व के कारण न तो वह उसको शाप दे सकते थे और ना ही उसके वचन को अनदेखा कर सकते थे. तब उन्होंने मगर को यमलोक भेज दिया और उसके पति को चिरायु का आशीर्वाद दे दिया. साथ ही चित्रगुप्त ने करवा को आशीर्वाद दिया कि तुम्हारा जीवन सुख-समृद्धि से भरपूर होगा.</p>
<p>चित्रगुप्त ने कहा कि जिस तरह तुमने अपने तपोबल से अपने पति के प्राणों की रक्षा की है, उससे मैं बहुत प्रसन्न हूं. मैं वरदान देता हूं कि आज की तिथि के दिन जो भी महिला पूर्ण विश्वास के साथ तुम्हारा व्रत और पूजन करेगी, उसके सौभाग्य की रक्षा मैं करूंगा.उस दिन कार्तिक मास की चतुर्थी होने के कारण करवा और चौथ मिलने से इस व्रत का  नाम करवा चौथ पड़ा. इस तरह मां करवा पहली महिला हैं, जिन्होंने सुहाग की रक्षा के लिए न केवल व्रत किया बल्कि करवा चौथ की शुरुआत भी की इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने भी इस व्रत को किया था, जिसका उल्लेख वारह पुराण में मिलता है.</p>
<h3><strong>व्रत विधि </strong></h3>
<p>प्रातः स्नान करके अपने सुहाग लंबी की आयु, आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर निराहार रहें.   निम्न मंत्र से  शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा का पूजन करें. चौथ के व्रत को करने के बाद शाम को पूजा करते समय माता करवा चौथ कथा पढ़ना चाहिए. साथ ही माता करवा से विनती करनी चाहिए कि हे मां, जिस प्रकार आपने अपने सुहाग और सौभाग्य की रक्षा की उसी तरह हमारे सुहाग की रक्षा करें. साथ ही यमराज और चित्रगुप्त से विनति करें कि वह अपना व्रत निभाते हुए हमारे व्रत को स्वीकार करें और हमारे सौभाग्य की रक्षा करें. महिलाएं करवा चौथ के दिन कठिन उपवास रखती है और चांद के निकलने तक पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं. दिन भर व्रत रहने के बाद रात में चौथ का चांद देखने के बाद छलनी में पति का चेहरा देखकर ही महिलाएं व्रत का पारण करती हैं.</p>
<h3><strong>मंत्र:</strong></h3>
<p>ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का</p>
<p><strong>प्रसिद्ध ज्योतिष</strong><br /><strong>आचार्य प्रणव मिश्रा</strong><br /><strong>आचार्यकुलम, अरगोड़ा, राँची</strong><br /><strong>8210075897</strong></p>]]>
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                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Oct 2024 05:00:46 +0530</pubDate>
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