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                <title>नवरात्र का आठवां दिन: जानें मां महागौरी का स्वरूप एवं पूजा विधि व मंत्र </title>
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                        <![CDATA[नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी के स्वरूप का पूजा किया जाता है. मां के गौर अर्थात सफेद स्वरूप होने के कारण मां को महागौरी कहा जाता है. भगवन शिव की पत्नी होने के कारण मां को शिवा भी कहा जाता है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/know-the-form-and-worship-method-and-mantra-of-maa/article-11862"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/whatsapp-image-2024-10-09-at-16.32.40_040925de.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है. मां महागौरी को मां दुर्गा की आठवीं शक्ति माना जाता है. महागौरी की आराधना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और मां समस्त दुखों का नाश कर देती है. मां महागौरी धन-वैभव की देवी है. मां महागौरी को गायन-संगीत पसंद है. इनका स्वरूप शांत और दृष्टिगत है. मां महागौरी को शिवा भी कहा जाता है. आठवें दिन महागौरी की पूजा देवी के मूल भाव को दर्शाता है. देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां के नौ रूप और 10 महाविद्याएं सभी आदिशक्ति के अंश और स्वरूप हैं लेकिन भगवान शिव के साथ उनकी अर्धांगिनी के रूप में महागौरी सदैव विराजमान रहती हैं. इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है. </p>
<h3><strong>मां का स्वरूप</strong></h3>
<p>मां महागौरी का स्वरूप पूर्ण रूप से गौर अर्थात सफेद हैं और इनके वस्त्र व आभूषण भी सफेद रंग के हैं. मां का वाहन बैल है. मां का दाहिना हाथ अभयमुद्रा में है और नीचे वाला हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशुल है. महागौरी के बाएं हाथ के ऊपर वाले हाथ में शिव का प्रतीक डमरू है. डमरू धारण करने के कारण इन्हें शिवा भी कहा जाता है. मां के नीचे वाला हाथ अपने भक्तों को अभय देता हुआ वरमुद्रा में है.माता का यह रूप शांत मुद्रा में ही दृष्टिगत है.इनकी पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है.</p>
<h3><strong>पूजा विधि</strong></h3>
<p>इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ कपड़े पहनें. भक्तों को पूजा करते समय गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना चाहिए. इसके बाद पूजा स्थल को साफ़ करें. मां महागौरी की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से साफ़ करें. मां को सफ़ेद रंग के वस्त्र पहनाएं. मां को सफ़ेद फूल अर्पित करें. मां को रोली-कुमकुम लगाएं. मां को मिठाई, पंच मेवा, और फल अर्पित करें. मां को काले चने का भोग लगाएं. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. मां की आरती करें. इस दिन कन्या पूजन भी करना शुभ माना जाता है. </p>
<h3><strong>मां का भोग</strong></h3>
<p>देवीभागवत पुराण के अनुसार, नवरात्र की अष्टमी तिथि को मां को नारियल का भोग लगाने की पंरपरा है. भोग लगाने के बाद नारियल को या तो ब्राह्मण को दे दें या भक्तों में प्रशाद रूप में वितरण कर दें. जो भक्त आज के दिन कन्या पूजन करते हैं, वह हलवा-पूड़ी, सब्जी और काले चने का प्रसाद विशेष रूप से बनाया जाता है. </p>
<h3><strong>मंत्र </strong></h3>
<p>श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।<br />महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥<br />या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।<br />नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥</p>
<h3><strong>अर्थ</strong></h3>
<p>हे माँ, सर्वत्र विराजमान और माँ गौरी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है.<br />हे माँ, मुझे सुख-समृद्धि प्रदान करो.</p>]]>
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                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 05:00:29 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Subodh Kumar]]>
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