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                <title>Krishna - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>जमीन से पाताल की गहराई: पौराणिक और वैज्ञानिक नज़रिए से</title>
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                        <![CDATA[ताल की अवधारणा को पौराणिक कहानियों और विज्ञान दोनों अलग-अलग तरह से परिभाषित करते हैं. कहानियों में यह पृथ्वी के नीचे की एक रहस्यमयी और अनंत दुनिया है, जबकि विज्ञान इसे पृथ्वी के केंद्र तक की मापी गई गहराई (6,371 किमी) मानता है. हालाँकि, इंसान अभी तक केवल 12.3 किमी की गहराई तक ही पहुँच पाया है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/depth-of-the-netherworld-from-the-earth--from-mythological-and-scientific--point-of-view/article-15212"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image---2025-08-04t150918.483.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जमीन से पाताल की गहराई का सवाल सुनकर दिमाग में कई तरह की बातें आती हैं. हमारे पुराने धार्मिक ग्रंथों में पाताल को पृथ्वी के नीचे का एक रहस्यमय दुनिया बताया गया है. लेकिन अगर साइंस की नजर से देखें, तो ये पृथ्वी की गहराई की बात करता है. आइए, इसे आसान और बोलचाल की भाषा में समझते हैं. हमारी हिंदू कहानियों में पाताल को सात निचले लोकों में से एक माना जाता है. इनका नाम है अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल. ये कोई आम जगह नहीं, बल्कि एक ऐसी दुनिया है जहां नाग, दानव और असुर रहते हैं. पुराणों में लिखा है कि भगवान विष्णु ने अपने वराह अवतार में पाताल से पृथ्वी को उठाया था.</p>
<p style="text-align:justify;">पाताल की गहराई को इन कहानियों में अथाह यानी बिना किसी माप के बताया गया है. इसका मतलब ये कि ये इतना गहरा है कि कोई इसका अंत नहीं जानता. ये गहराई सिर्फ दूरी की बात नहीं, बल्कि हमारे मन के डर, रहस्य और अनजान दुनिया की कल्पना को दिखाती है. जैसे, महाभारत में अर्जुन और श्रीकृष्ण की पाताल यात्रा की कहानी है, जो शायद एक प्रतीक है जैसे आत्मा की गहराई में उतरना. कुछ पुराणों में पाताल की गहराई को हजारों योजन (एक योजन यानी 12-15 किलोमीटर) बताया गया है, लेकिन ये भी सिर्फ एक तरीका है अनंत को समझाने का.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> साइंस की नजर से</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अगर पाताल को पृथ्वी के नीचे की गहराई मानें, तो हमें पृथ्वी की बनावट को समझना होगा. पृथ्वी की सतह से इसके केंद्र तक की दूरी करीब 6,371 किलोमीटर है. पृथ्वी को चार हिस्सों में बांटा गया है-</p>
<p style="text-align:justify;">1. <strong>’’क्रस्ट (ऊपरी परत)’’:</strong> ये पृथ्वी की सबसे पतली परत है, जहां हम रहते हैं. समुद्र के नीचे ये 5-10 किलोमीटर और जमीन पर 30-70 किलोमीटर मोटी है.<br />2. <strong>’’मेंटल’’:</strong> ये क्रस्ट के नीचे है और 2,900 किलोमीटर तक जाता है. ये गर्म चट्टानों से बना है, जो इतनी गर्मी और दबाव में हैं कि धीरे-धीरे हिलती-डुलती रहती हैं.<br />3. <strong>’’बाहरी कोर’’: </strong>ये तरल है, लोहे और निकल से बना, और 2,200 किलोमीटर मोटा है.<br />4. <strong>’’आंतरिक कोर’’:</strong> ये पृथ्वी का सबसे गहरा हिस्सा है, ठोस है, और 1,220 किलोमीटर बड़ा है. इसका तापमान सूरज की सतह जितना, यानी 5,500 डिग्री सेल्सियस!</p>
<p style="text-align:justify;">साइंस में इंसान ने ज्यादा गहराई तक नहीं पहुंचा. सबसे गहरी खुदाई रूस में हुई, जिसे ’’कोला सुपरडीप बोरहोल’’ कहते हैं. वो सिर्फ 12.3 किलोमीटर तक गई, जहां तापमान 180 डिग्री सेल्सियस हो गया. इससे ज्यादा गहराई में जाना अभी मुमकिन नहीं, क्योंकि वहां गर्मी और दबाव बर्दाश्त से बाहर है.</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर पौराणिक और साइंटिफिक नजरिए में फर्क है. कहानियों में पाताल एक रहस्यमय, अनंत दुनिया है, जो हमारे मन की गहराई और अनजान चीजों को दिखाता है. साइंस में ये पृथ्वी की परतों की गहराई है, जिसे हम माप सकते हैं. मिसाल के तौर पर, पुराणों में पाताल की गहराई को हजारों किलोमीटर बताते हैं, लेकिन साइंस कहता है कि पृथ्वी का केंद्र 6,371 किलोमीटर पर है. दोनों में एक बात कॉमन है-हमारी जिज्ञासा. कहानियां हमें आध्यात्मिक रास्ता दिखाती हैं, और साइंस हमें हकीकत समझाता है.</p>
<p style="text-align:justify;">तो अंत में यही कहा जा सकता है, अगर पुराणों की मानें, तो ये अनंत है.एक ऐसी जगह जो हमारे मन की कल्पना से भी परे है. साइंस की मानें, तो पृथ्वी के केंद्र तक 6,371 किलोमीटर, लेकिन हम सिर्फ 12.3 किलोमीटर तक पहुंचे हैं. दोनों नजरिए हमें एक ही बात सिखाते हैं.हम इंसान हमेशा अनजान को जानने की कोशिश करते हैं, चाहे वो कहानियों से हो या साइंस से. पाताल की गहराई सिर्फ एक सवाल नहीं, बल्कि हमारी उत्सुकता की कहानी है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजय सक्सेना,लखनऊ</strong><br /><strong>  वरिष्ठ पत्रकार</strong></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 15:10:34 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
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                <title>Hazaribagh News: इस्कॉन द्वारा मनाया गया गौर पूर्णिमा महोत्सव, भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता हुई शामिल</title>
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                        <![CDATA[इस्कॉन हजारीबाग द्वारा पीटीसी चौक स्थित बंशीधर कलोनी में श्री गौर पुर्णिमा महा महोत्सव का आयोजन किया गया।  मौके पर भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ एक आध्यात्मिक संगठन है जो भगवान कृष्ण की भक्ति और गौड़ीय वैष्णववाद के सिद्धांतों को बढ़ावा देता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/hazaribagh-news-gaur-purnima-festival-celebrated-by-iskcon-bjp-leader/article-14341"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-03/h6-(1)3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हजारीबाग</strong>: इस्कॉन हजारीबाग द्वारा पीटीसी चौक स्थित बंशीधर कलोनी में श्री गौर पुर्णिमा महा महोत्सव का आयोजन किया गया। भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता बतौर अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुई। गौर पुर्णिमा महा महोत्सव में गौर कथा में आध्यात्म से जुड़ी बातें साझा किया गया। उसके बाद महाभिषेक, नगर संकीर्तन, सामुहिक नाम जप, पुष्प होली एवं महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान इस्कॉन हजारीबाग परिवार द्वारा भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता को स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। स्वागत एवं अभिनंदन से काफी अभिभूत हुई। साथ ही भगवान के समक्ष माथा टेककर सभी की सुख, समृद्धि एवं सफलता की मंगल कामना की। महाभिषेक में सम्मिलित होकर शंख एवं मिट्टी के बर्तन से जलाभिषेक की। मौके पर भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ एक आध्यात्मिक संगठन है जो भगवान कृष्ण की भक्ति और गौड़ीय वैष्णववाद के सिद्धांतों को बढ़ावा देता है। आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-साक्षरता को बढ़ावा देता है। उन्होंने बतौर अतिथि कार्यक्रम में आमंत्रित करने के लिए इस्कॉन हजारीबाग का आभार एवं धन्यवाद व्यक्त की।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 23:38:46 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Samridh Desk]]>
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                <title>नवरात्रि का छठा दिन: जानें मां कात्यायनी का स्वरूप, पूजन विधि एवं मंत्र </title>
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                        <![CDATA[महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं. महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा को कात्यायनी कहा.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/sixth-day-of-navratri-know-the-form-of-maa-katyayani/article-11817"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/whatsapp-image-2024-10-07-at-17.33.35_9af1d548.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> आज 8 अक्टूबर को नवरात्रि का छठा दिन है. नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है. महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं. महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा को कात्यायनी कहा. ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं. गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थी. विवाह संबंधी मामलों के लिए इनकी पूजा अचूक होती है, योग्य और मनचाहा पति इनकी कृपा से प्राप्त होता है. ज्योतिष में बहस्पति का सम्बन्ध इनसे माना जाता है.</p>
<h3><strong>मां कात्यायनी का स्वरूप </strong></h3>
<p>मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य एवं चमकीला है. इनकी चार भुजाओं में अस्त्र, शस्त्र और कमल है. इनका वाहन सिंह है. उनके माथे पर अर्धचंद्र होता है. वे रत्नों से अलंकृत होती हैं. उनका आभामंडल इंद्रधनुषी छटा देता है. </p>
<h3><strong>मां कात्यायनी पूजा विधि</strong></h3>
<p>मां कात्यायनी का पूजन पीले रंग से करना है. सर्वप्रथम मां कात्यायनी की पूजा से पहले कलश देवता अर्थात भगवान गणेश का विधिवत तरीके से पूजन करें. भगवान गणेश को फूल, अक्षत, रोली, चंदन अर्पित कर उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत व मधु से स्नान कराएं. देवी को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद को पहले भगवान गणेश को भी भोग लगाएं. प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट करें. फिर कलश देवता का पूजन करने के बाद नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता की पूजा भी करें. इन सबकी पूजा करने के बाद ही मां कात्यायनी का पूजन शुरू करें. इसके लिए सबसे पहले अपने हाथ में एक फूल लेकर मां कात्यायनी का ध्यान करें. इसके बाद मां कात्यायनी का पंचोपचार पूजन कर, उन्हें लाल फूल, अक्षत, कुमकुम और सिंदूर अर्पित करें. इसके बाद उनके समक्ष घी अथवा कपूर जलाकर आरती करें. अंत में मां के मन्त्रों का उच्चारण करें.</p>
<h3><strong>मां कात्यायनी का भोग</strong></h3>
<p>मां कात्यायनी को शहद अतिप्रिय है. ऐसे में पूजा के समय मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से भक्त का व्यक्तित्व निखरता है.</p>
<h3><strong>मंत्र</strong></h3>
<p>ॐ देवी कात्यायन्यै नमः ॥</p>
<p>मां कात्यायनी का प्रार्थना मंत्र:<br />चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना. <br />कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी ॥</p>
<p>मां कात्यायनी स्तुति मंत्र:<br />या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता.<br />नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>ट्रेंडिंग</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 05:00:14 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Subodh Kumar]]>
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