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                <title>Tapasya - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>नवरात्रि का छठा दिन: जानें मां कात्यायनी का स्वरूप, पूजन विधि एवं मंत्र </title>
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                        <![CDATA[महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं. महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा को कात्यायनी कहा.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/sixth-day-of-navratri-know-the-form-of-maa-katyayani/article-11817"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/whatsapp-image-2024-10-07-at-17.33.35_9af1d548.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> आज 8 अक्टूबर को नवरात्रि का छठा दिन है. नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है. महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं. महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा को कात्यायनी कहा. ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं. गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थी. विवाह संबंधी मामलों के लिए इनकी पूजा अचूक होती है, योग्य और मनचाहा पति इनकी कृपा से प्राप्त होता है. ज्योतिष में बहस्पति का सम्बन्ध इनसे माना जाता है.</p>
<h3><strong>मां कात्यायनी का स्वरूप </strong></h3>
<p>मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य एवं चमकीला है. इनकी चार भुजाओं में अस्त्र, शस्त्र और कमल है. इनका वाहन सिंह है. उनके माथे पर अर्धचंद्र होता है. वे रत्नों से अलंकृत होती हैं. उनका आभामंडल इंद्रधनुषी छटा देता है. </p>
<h3><strong>मां कात्यायनी पूजा विधि</strong></h3>
<p>मां कात्यायनी का पूजन पीले रंग से करना है. सर्वप्रथम मां कात्यायनी की पूजा से पहले कलश देवता अर्थात भगवान गणेश का विधिवत तरीके से पूजन करें. भगवान गणेश को फूल, अक्षत, रोली, चंदन अर्पित कर उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत व मधु से स्नान कराएं. देवी को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद को पहले भगवान गणेश को भी भोग लगाएं. प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट करें. फिर कलश देवता का पूजन करने के बाद नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता की पूजा भी करें. इन सबकी पूजा करने के बाद ही मां कात्यायनी का पूजन शुरू करें. इसके लिए सबसे पहले अपने हाथ में एक फूल लेकर मां कात्यायनी का ध्यान करें. इसके बाद मां कात्यायनी का पंचोपचार पूजन कर, उन्हें लाल फूल, अक्षत, कुमकुम और सिंदूर अर्पित करें. इसके बाद उनके समक्ष घी अथवा कपूर जलाकर आरती करें. अंत में मां के मन्त्रों का उच्चारण करें.</p>
<h3><strong>मां कात्यायनी का भोग</strong></h3>
<p>मां कात्यायनी को शहद अतिप्रिय है. ऐसे में पूजा के समय मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से भक्त का व्यक्तित्व निखरता है.</p>
<h3><strong>मंत्र</strong></h3>
<p>ॐ देवी कात्यायन्यै नमः ॥</p>
<p>मां कात्यायनी का प्रार्थना मंत्र:<br />चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना. <br />कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी ॥</p>
<p>मां कात्यायनी स्तुति मंत्र:<br />या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता.<br />नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥</p>]]>
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                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>ट्रेंडिंग</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 05:00:14 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Subodh Kumar]]>
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                <title>कल होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जाने पूजा विधि व मंत्र एवं पीले रंग का महत्व   </title>
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                        <![CDATA[इस समय शारदीय नवरात्र चल रही है. 4 अक्टूबर को मां के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जाएगी. पुरानों के अनुसार नवरात्र के दूसरे दिन साधक का मन स्वधिष्ठान चक्र में स्थित होता है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/mother-brahmacharini-will-be-worshiped-tomorrow-know-the-worship-method/article-11744"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/whatsapp-image-2024-10-03-at-16.56.39_83857a56.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप को समर्पित होता है. मां का ये स्वरूप अत्यंत तेजवान और भव्य है. नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है. मां ब्रह्मचारीणी को देवी पार्वती के अविवाहित रूप में पूजा जाता है. मां सफेद वस्त्र धारण करती है.उनके दाहिने हाथ में एक रुद्राक्ष की माल होती है और बाएं हाथ में कमंडल (पानी का एक बर्तन) होता है.</p>
<p>रुद्राक्ष को उनके वनवासी जीवन में भगवान शिव को पति के रूप में पाने की तपस्या से जोड़कर देखा जाता है.नवरात्र के दूसरे दिन साधक का मन स्वधिष्ठान चक्र में स्थित होता है. मां ब्रह्मचारिणी भगवान शिव को पति के रूप मे पाने के लिए 1000 साल कठोर तप  की थी. इस कारण मां को ब्रह्मचारिणी एवं तपस्चारिणी कहा गया. मां ब्रह्मचारिणी दुष्टों को सन्मार्ग दिखने वाली हैं. मां ब्रह्मचारिणी का पूजा करने से आलस्य,अहंकार,लोभ,असत्य,स्वार्थ व ईर्ष्या जैसी दुष्टप्रवृतियां दूर हो जाती हैं. इस दिन मां की पूजा करने से बुद्धि,विवेक,धैर्य, एकाग्रता,और स्थिरता आती है. </p>
<h3><strong>पीले रंग का महत्व</strong></h3>
<p>मां ब्रह्मचारिणी पीला रंग बहुत प्रिय है इसलिए माता की पूजा में पीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए. साथ ही पीले रंग के वस्त्र और फूल अवश्य अर्पित करने चाहिए. पीला रंग मां के पालन-पोषण करने वाले स्वभाव को दर्शाता है. साथ ही यह रंग सीखने और ज्ञान का संकेत है और उत्साह, खुशी और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है.</p>
<h3><strong>पूजा विधि </strong></h3>
<p>इस दिन सुबह उठकर स्नान आदि कर ले, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर पवित्र कर लें. मां का गंगाजल, पंचामृत, हल्दी,  कुमकुम से स्नान करने के बाद माँ का सिंगार करना चाहिए. अब मां दुर्गा को अर्घ्य दें. मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें. प्रसाद के रूप में फल और नैयवेद चढ़ाएं. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में पीले रंग के फूल का ही प्रयोग करें. माता को दूध से बनी चीजें या चीनी का ही भोग लगाएं. इसके बाद पान-सुपारी भेंट करने के बाद प्रदक्षिणा करें. फिर कलश देवता और नवग्रह की पूजा करें. घी और कपूर से बने दीपक से माता की आरती उतारें और दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा का पाठ करें. </p>
<h3><strong>पूजा मंत्र </strong></h3>
<p>या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता.<br />नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः..</p>
<p>दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू.<br />देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा.</p>]]>
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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2024 20:45:59 +0530</pubDate>
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