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                <title>Lord Shiva - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>महाशिवरात्रि पर बरही में भव्य झांकी एवं शोभायात्रा का आयोजन</title>
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                        <![CDATA[बरही में महाशिवरात्रि के अवसर पर ब्रह्मा कुमारियों ने भव्य झांकी और शोभायात्रा निकाली। भगवान शिव, देवी पार्वती और गणेश जी की झांकी और आध्यात्मिक संदेशों से सजित रथ लोगों का आकर्षण बने।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/grand-tableau-and-procession-organized-in-barhi-on-mahashivratri/article-18090"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/e2deef85-a60f-4571-ba08-7d002bddf354_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>हजारीबाग :</strong> गुरुवार को स्थानीय सेवाकेंद्र प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, बरही तिलैया रोड, केसरी धर्मशाला के समीप महाशिवरात्रि के अवसर पर ब्रह्मा कुमारीज़ संस्था द्वारा भव्य झांकी एवं शोभायात्रा का आयोजन किया गया।</p>
<p>शोभायात्रा मुख्य मार्ग – तिलैया रोड, धनबाद रोड, हजारीबाग रोड और गया रोड – से होकर निकली। इस दौरान भगवान शिव, देवी पार्वती और गणेश जी की मनमोहक झांकी और आध्यात्मिक संदेशों से सुसज्जित रथ आकर्षण का केंद्र रहे।</p>
<p>इस अवसर पर केंद्र संचालिका ब्रह्मा कुमारी वीणा बहन ने बताया कि महाशिवरात्रि का पर्व इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन निराकार परमात्मा शिव का अवतरण हुआ था, जो आत्माओं को ज्ञान, शांति और पवित्रता का मार्ग दिखाते हैं। इस अवसर पर राजयोग ध्यान का अभ्यास भी कराया गया।</p>
<p>उपस्थित लोग – राजदेव यादव, किरण देवी, स्नेह देवी, ज्योति देवी, गीता देवी, दीपा माता, शिला माता और अन्य – सभी को आंतरिक शांति, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश दिया गया। महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्म-जागृति का पर्व है। ब्रह्मा कुमारी ने बताया, “जब आत्मा स्वयं को पहचान लेती है, तभी सच्ची शिवरात्रि मनती है—क्योंकि अज्ञान का अंधकार मिटते ही ज्ञान का शिव प्रकट हो जाता है।”</p>
<p>अंत में सभी श्रद्धालुओं ने विश्व शांति एवं मानव कल्याण की कामना की और समाज में नैतिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हजारीबाग</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 18:23:53 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>Dhanbad News: सैकड़ो साल पुरानी मंदिर में लगी भीषण आग</title>
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                        <![CDATA[झरिया चार नंबर टैक्सी स्टैंड के पास स्थित सैकड़ों साल पुरानी मां मंगल चंडी मंदिर शनिवार की सुबह आग की चपेट में आ गया। इसके बाद मौके पर जुटे स्थानीय लोगों के प्रयास से आग पर काबू पाया गया। वहीं, बगल के दुर्गा भवन रूम में रखे डेकोरेटर के तिरपाल, बांस और कपड़े जैसे सामान भी जलकर खाक हो गए। नुकसान का सटीक आकलन फिलहाल नहीं हो सका है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dhanbad/dhanbad-news-massive-fire-broke-out-in-hundreds-of-years/article-16592"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-10/resized-image---2025-10-11t121429.265.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>धनबाद: </strong>झरिया चार नंबर टैक्सी स्टैंड के पास स्थित सैकड़ों साल पुरानी मां मंगल चंडी मंदिर शनिवार की सुबह आग की चपेट में आ गया। सुबह मंदिर में लगी भीषण आग की वजह से वहां अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद मौके पर जुटे स्थानीय लोगों के प्रयास से आग पर काबू पाया गया।</p><p>मंदिर के पुजारी ने बताया कि मंदिर के बगल में पूजा समिति का एक कार्यालय है, जहां बड़ी मात्रा में कपड़े रखे थे। बताया जा रहा है कि वहीं से लगी आग वेंटिलेटर के माध्यम से मंदिर तक पहुंच गई। स्थानीय लोगों ने धुआं उठता देख तो शोर मचाया और तुरंत पुलिस तथा अग्निशमन विभाग को सूचना दी। झरिया पुलिस मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड को जानकारी दी। हालांकि, फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों और मंदिर समिति के सदस्यों ने मिलकर आग पर काबू पा लिया था।</p><p>आग से मंदिर परिसर में स्थित बजरंगबली और भगवान शिव के मंदिरों को काफी नुकसान पहुंचा है। टाइल्स, बिजली की वायरिंग, पंखे, बल्ब और मूर्तियां भी आग की चपेट में आ गईं हैं। पुजारी ने बताया कि इस हादसे में लगभग दो से तीन लाख रुपये का नुकसान हुआ है।</p><p>वहीं, बगल के दुर्गा भवन रूम में रखे डेकोरेटर के तिरपाल, बांस और कपड़े जैसे सामान भी जलकर खाक हो गए। नुकसान का सटीक आकलन फिलहाल नहीं हो सका है। आग लगने का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।<br /></p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>धनबाद</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 12:15:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
                    </dc:creator>
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                <title>नवरात्र का आठवां दिन: जानें मां महागौरी का स्वरूप एवं पूजा विधि व मंत्र </title>
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                        <![CDATA[नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी के स्वरूप का पूजा किया जाता है. मां के गौर अर्थात सफेद स्वरूप होने के कारण मां को महागौरी कहा जाता है. भगवन शिव की पत्नी होने के कारण मां को शिवा भी कहा जाता है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/know-the-form-and-worship-method-and-mantra-of-maa/article-11862"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/whatsapp-image-2024-10-09-at-16.32.40_040925de.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है. मां महागौरी को मां दुर्गा की आठवीं शक्ति माना जाता है. महागौरी की आराधना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और मां समस्त दुखों का नाश कर देती है. मां महागौरी धन-वैभव की देवी है. मां महागौरी को गायन-संगीत पसंद है. इनका स्वरूप शांत और दृष्टिगत है. मां महागौरी को शिवा भी कहा जाता है. आठवें दिन महागौरी की पूजा देवी के मूल भाव को दर्शाता है. देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां के नौ रूप और 10 महाविद्याएं सभी आदिशक्ति के अंश और स्वरूप हैं लेकिन भगवान शिव के साथ उनकी अर्धांगिनी के रूप में महागौरी सदैव विराजमान रहती हैं. इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है. </p>
<h3><strong>मां का स्वरूप</strong></h3>
<p>मां महागौरी का स्वरूप पूर्ण रूप से गौर अर्थात सफेद हैं और इनके वस्त्र व आभूषण भी सफेद रंग के हैं. मां का वाहन बैल है. मां का दाहिना हाथ अभयमुद्रा में है और नीचे वाला हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशुल है. महागौरी के बाएं हाथ के ऊपर वाले हाथ में शिव का प्रतीक डमरू है. डमरू धारण करने के कारण इन्हें शिवा भी कहा जाता है. मां के नीचे वाला हाथ अपने भक्तों को अभय देता हुआ वरमुद्रा में है.माता का यह रूप शांत मुद्रा में ही दृष्टिगत है.इनकी पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है.</p>
<h3><strong>पूजा विधि</strong></h3>
<p>इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ कपड़े पहनें. भक्तों को पूजा करते समय गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना चाहिए. इसके बाद पूजा स्थल को साफ़ करें. मां महागौरी की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से साफ़ करें. मां को सफ़ेद रंग के वस्त्र पहनाएं. मां को सफ़ेद फूल अर्पित करें. मां को रोली-कुमकुम लगाएं. मां को मिठाई, पंच मेवा, और फल अर्पित करें. मां को काले चने का भोग लगाएं. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. मां की आरती करें. इस दिन कन्या पूजन भी करना शुभ माना जाता है. </p>
<h3><strong>मां का भोग</strong></h3>
<p>देवीभागवत पुराण के अनुसार, नवरात्र की अष्टमी तिथि को मां को नारियल का भोग लगाने की पंरपरा है. भोग लगाने के बाद नारियल को या तो ब्राह्मण को दे दें या भक्तों में प्रशाद रूप में वितरण कर दें. जो भक्त आज के दिन कन्या पूजन करते हैं, वह हलवा-पूड़ी, सब्जी और काले चने का प्रसाद विशेष रूप से बनाया जाता है. </p>
<h3><strong>मंत्र </strong></h3>
<p>श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।<br />महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥<br />या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।<br />नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥</p>
<h3><strong>अर्थ</strong></h3>
<p>हे माँ, सर्वत्र विराजमान और माँ गौरी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है.<br />हे माँ, मुझे सुख-समृद्धि प्रदान करो.</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 05:00:29 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Subodh Kumar]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कल होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जाने पूजा विधि व मंत्र एवं पीले रंग का महत्व   </title>
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                        <![CDATA[इस समय शारदीय नवरात्र चल रही है. 4 अक्टूबर को मां के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जाएगी. पुरानों के अनुसार नवरात्र के दूसरे दिन साधक का मन स्वधिष्ठान चक्र में स्थित होता है.]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/mother-brahmacharini-will-be-worshiped-tomorrow-know-the-worship-method/article-11744"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/whatsapp-image-2024-10-03-at-16.56.39_83857a56.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप को समर्पित होता है. मां का ये स्वरूप अत्यंत तेजवान और भव्य है. नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है. मां ब्रह्मचारीणी को देवी पार्वती के अविवाहित रूप में पूजा जाता है. मां सफेद वस्त्र धारण करती है.उनके दाहिने हाथ में एक रुद्राक्ष की माल होती है और बाएं हाथ में कमंडल (पानी का एक बर्तन) होता है.</p>
<p>रुद्राक्ष को उनके वनवासी जीवन में भगवान शिव को पति के रूप में पाने की तपस्या से जोड़कर देखा जाता है.नवरात्र के दूसरे दिन साधक का मन स्वधिष्ठान चक्र में स्थित होता है. मां ब्रह्मचारिणी भगवान शिव को पति के रूप मे पाने के लिए 1000 साल कठोर तप  की थी. इस कारण मां को ब्रह्मचारिणी एवं तपस्चारिणी कहा गया. मां ब्रह्मचारिणी दुष्टों को सन्मार्ग दिखने वाली हैं. मां ब्रह्मचारिणी का पूजा करने से आलस्य,अहंकार,लोभ,असत्य,स्वार्थ व ईर्ष्या जैसी दुष्टप्रवृतियां दूर हो जाती हैं. इस दिन मां की पूजा करने से बुद्धि,विवेक,धैर्य, एकाग्रता,और स्थिरता आती है. </p>
<h3><strong>पीले रंग का महत्व</strong></h3>
<p>मां ब्रह्मचारिणी पीला रंग बहुत प्रिय है इसलिए माता की पूजा में पीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए. साथ ही पीले रंग के वस्त्र और फूल अवश्य अर्पित करने चाहिए. पीला रंग मां के पालन-पोषण करने वाले स्वभाव को दर्शाता है. साथ ही यह रंग सीखने और ज्ञान का संकेत है और उत्साह, खुशी और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है.</p>
<h3><strong>पूजा विधि </strong></h3>
<p>इस दिन सुबह उठकर स्नान आदि कर ले, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर पवित्र कर लें. मां का गंगाजल, पंचामृत, हल्दी,  कुमकुम से स्नान करने के बाद माँ का सिंगार करना चाहिए. अब मां दुर्गा को अर्घ्य दें. मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें. प्रसाद के रूप में फल और नैयवेद चढ़ाएं. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में पीले रंग के फूल का ही प्रयोग करें. माता को दूध से बनी चीजें या चीनी का ही भोग लगाएं. इसके बाद पान-सुपारी भेंट करने के बाद प्रदक्षिणा करें. फिर कलश देवता और नवग्रह की पूजा करें. घी और कपूर से बने दीपक से माता की आरती उतारें और दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा का पाठ करें. </p>
<h3><strong>पूजा मंत्र </strong></h3>
<p>या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता.<br />नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः..</p>
<p>दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू.<br />देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा.</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>ट्रेंडिंग</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2024 20:45:59 +0530</pubDate>
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